ऐरो कार्ड के साथ मेरे शैक्षणिक अनुभव

अनुवाद : अतुल वाधवानी | पुनरीक्षण : सुशील जोशी | कॉपी एडिटर : अतुल अग्रवाल

लेखक कक्षा-3 के विद्यार्थियों के साथ ऐरो कार्ड (तीर के आकार के कार्ड) इस्तेमाल करने के अपने अनुभव साझा करते हैं। यहाँ वे व्याख्या करते हैं कि कैसे इस टीएलएम ने विद्यार्थियों की स्थानीय मान की समझ में क्रमिक रूप से इज़ाफ़ा किया। दिए गए उदाहरणों से इस सामग्री का प्रभाव ज़ाहिर है।

गणितीय अवधारणाओं, जैसे संख्याएँ और उनकी संक्रियाएँ, या पैटर्न और आकृतियों, की समझ बनाना मुश्किल हो सकता है क्योंकि उनमें ऐसा कुछ नहीं होता जिसे आप देख या छू पाएँ। जैसा कि ज़्याँ पियाजे का शोध सुझाता है, बच्चे ज्ञान के तीन स्तरों के ज़रिए अवधारणाएँ सीखते हैं – ठोस, चित्रात्मक तथा अमूर्त (वॉड्सवर्थ, 1976)। इसलिए ज़रूरी है कि उनके सीखने की शुरुआत करके देखने वाली गतिविधियों से हो। यह शुरुआत वास्तविक वस्तुओं से होनी चाहिए जिनके साथ वे अन्तर्क्रिया कर सकें, उसके बाद चित्रात्मक निरूपण से होते हुए अन्त में काग़ज़ पर इन अवधारणाओं के अमूर्त निरूपणों पर पहुँचा जाना चाहिए। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा : फ़ाउण्डेशनल स्टेज (एनसीईआरटी, 2022, पृ 122) में भी शिक्षा में ईएलपीएस (ELPS) तरीक़े का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है। ईएलपीएस में ई का आशय एक्सपीरियंस (अनुभव), एल का आशय स्पोकन लैंग्वेज (बोली जाने वाली भाषा), पी का आशय पिक्चर्स (चित्र) और एस का आशय रिटन सिम्बल्स (लिखित प्रतीक) से है।

ठोस सामग्रियों की जाँच-पड़ताल के माध्यम से बच्चों का परिचय कार्यविधियों या कौशलों से करवाया जा सकता है। बतौर उदाहरण, भाग के मामले में इसके लिए छह बच्चों के बीच 12 छड़ियों का बँटवारा किया जा सकता है। ऐसे में जब विद्यार्थी वस्तुओं को सम्‍हालते हैं, वे समझ निर्मित करने और गणितीय प्रक्रियाओं व विधियों को आत्मसात् करने की ओर ज़रूरी शुरुआती क़दम उठाते हैं। भौतिक वस्तुओं के साथ काम करने से विद्यार्थियों को पहले अवधारणाओं की खोजबीन करने का मौक़ा मिल जाता है जो समझने का ठोस स्तर है। समय के साथ, कार्यनीतियों और एल्गोरिदम का विकास बाद में किया जा सकता है।

हम, धमतरी के अज़ीम प्रेमजी स्कूल के शिक्षक, विभिन्न शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) निर्मित करने की प्रक्रिया में जुटे थे, ख़ासतौर पर गणित के लिए। इस गतिविधि के हिस्से के रूप में, हमने ऐरो कार्ड बनाए। टीएलएम के तौर पर ऐरो कार्ड, दृश्यात्मक व अन्तर्क्रियात्मक तरीक़े से स्थानीय मान की अवधारणाएँ सिखाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐरो कार्ड बच्चों को विभाजन (पार्टिशनिंग) और पुनःसंयुक्तिकरण (रिकंबाइनिंग) समझने में भी मदद करते हैं। विभाजन में संख्याओं को छोटे-छोटे व सम्‍हाले जा सकने वाले टुकड़ों में तोड़ा जाता है, और पुनःसंयुक्तिकरण में संख्याओं को अलग-अलग स्थानीय मानों के हिसाब से फिर से इकट्ठा किया जाता है।

स्थानीय मान सिखाने में आईं चुनौतियाँ

वस्तुओं की गिनती से आगे बढ़कर स्थानीय मान को समझना बच्चों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि इसमें देखी और छुई जा सकने वाली चीज़ों (मूर्त) से हटकर अमूर्त की ओर बढ़ा जाता है जिसका अस्तित्व उनके मन में होता है।

स्थानीय मान के ऐसे व्यवहारिक उदाहरण सीमित ही हैं जो विद्यार्थियों के रोज़मर्रा के अनुभवों से मेल खाते हों।

जटिल शब्दावली, मसलन ‘इकाई’, ‘दहाई’, ‘सैकड़ा’, व ‘हज़ार’ जैसे पदों को समझना और उन्हें सम्प्रेषित कर पाना बेहद मुश्किल है।

ऐरो कार्ड के साथ काम

शुरुआत में, मैं कक्षा में ऐरो कार्ड को प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करना नहीं जानता था। मैं और सीख सकूँ, इसके लिए मैंने एक मेंटर से सलाह ली। उन्होंने मुझे समझाया कि किस तरह ऐरो कार्ड स्थानीय मान को सहज रूप से समझने में बच्चों की मदद करते हैं। इस समझ के साथ, मैं अब उन्हें कक्षा में इस्तेमाल करने को लेकर आत्मविश्वास महसूस करने लगा। इससे पहले तो स्थानीय मान पढ़ाने के लिए मैं स्ट्रॉ के गट्ठरों का इस्तेमाल करता था। मगर जैसे-जैसे मेरे विद्यार्थी बड़ी संख्याओं की ओर बढ़े, मुझे ऐरो कार्ड विधि ज़्यादा मददगार लगी। कक्षा में ऐरो कार्ड इस्तेमाल करने का अपना अनुभव मैं नीचे साझा कर रहा हूँ।

कक्षा-3 में प्रवेश करते ही मैंने ऐरो कार्ड का बक्सा निकाला। बच्चे बक्से को बड़े कौतूहल से देख रहे थे, और जब अन्दर से रंगीन कार्ड निकले तो वे उन्हें देखकर ख़ुश हो गए। हर ऐरो कार्ड किसी संख्या के इकाई, दहाई या सैकड़े के अंक प्रदर्शित करता है। मिसाल के लिए, \(500, 100, 50, 20, 5, 2\)। इन्हें एक के ऊपर एक रखकर दो-अंकीय, तीन-अंकीय इत्यादि संख्याएँ बनाई जा सकती हैं। मैंने प्रत्येक बेंच को ऐरो कार्ड का एक-एक सेट दिया। बच्चों ने जल्दी से उन्हें खोला और अपनी बेंचों पर उन्हें जमाना शुरू कर दिया। वे आगे के निर्देशों का उत्सुकता से इन्तज़ार करने लगे। आगे क्या होगा, इसे लेकर वे जिज्ञासा से भरे थे।

सबसे पहले, मैंने \(0\) से \(9\) तक की अलग-अलग एक-अंकीय संख्याएँ पुकारीं और बच्चों से उनके अनुरूप ऐरो कार्ड उठाने को कहा। इसके बाद, मैंने दहाई और सैकड़े की अवधारणा समझाई, और फिर से अलग-अलग संख्याएँ पुकारीं ताकि उनके अनुरूप बच्चे सही ऐरो कार्ड उठाएँ। मिसाल के तौर पर, \(25\) बनाने के लिए ‘\(20\)’ और ‘\(5\)’ वाले ऐरो कार्ड उठाने होंगे और फिर उन्हें साथ रखना होगा ताकि उनकी तिरछी रेखाएँ एक सीध में (समान्तर) हों। यह विद्यार्थियों को सिखाता है कि दो-अंकीय संख्याएँ दहाइयों और इकाइयों से बनी होती हैं।

इसी सिलसिले में आगे, जब मैंने \(234\) की संख्या बोली तो कई बच्चों ने \(200\) की संख्या का कार्ड उठाया, मगर उसके बाद \(30\) की संख्या का कार्ड उठाने की जगह उन्होंने \(3\) की संख्या का कार्ड उठाया और इकाई के स्थान के लिए 4 की संख्या का कार्ड उठाया।

फिर मैंने जान-बूझकर ऐरो कार्ड से ग़लत संख्याएँ बनाईं और विद्यार्थियों से ग़लतियाँ पहचानने और उन्हें ठीक करने को कहा।

मैंने 345 के लिए 300, 40, और 5 के कार्ड की जगह 3, 40, और 5 के कार्ड जमा दिए। फिर उनसे कहा कि वे ऐरो कार्ड के कोने पकड़ें। जैसे ही उन्होंने ऐसा किया वैसे ही बीच वाला कार्ड, जो कि 3 की संख्या का कार्ड था, गिर गया। यह दहाई और इकाई की अवधारणाएँ समझाने का एक बढ़िया मौक़ा था। साथ ही, यह समझाने का भी मौक़ा मिला कि ऐरो कार्ड की मदद से कैसे सही तरह से 345 की संख्या बनाई जा सकती है। ऐरो कार्ड का इस्तेमाल करके बहु-अंकीय संख्या का प्रसार/विस्तार (जैसे, 234 = 200 + 30 + 4) अपने-आप और आसानी से हो जाता है।

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मैंने फिर एक बार ऐरो कार्ड की मदद से \(9383\) की संख्या बनाने को कहा। 9383 का प्रसार/विस्तार \(9000 + 300 + 80 + 3\) के रूप में होता है।

चित्र-2
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चित्र-3

मैंने इस गतिविधि को एक अन्तर्क्रियात्मक क्विज़ के खेल में तब्दील कर दिया। मैं बेतरतीबी से संख्याएँ पुकारता और ऐरो कार्ड की मदद से सबसे पहले सही संख्या बनाने वाले विद्यार्थी को एक अंक मिल जाता। इस खेल से यह गतिविधि और भी रोमांचक हो गई। इससे विद्यार्थियों को स्थानीय मान के बारे में जल्दी से और सटीकता से सोचने की प्रेरणा मिली।

जोड़ और घटाने में ऐरो कार्ड का इस्तेमाल

ऐरो कार्ड का इस्तेमाल जोड़ की प्रक्रिया को छोटे-छोटे व सम्‍हाले जा सकने वाले चरणों में तोड़ने के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, 23 और 15 को जोड़ने के लिए, 2 दहाई व 3 इकाई, और साथ में, 1 दहाई व 5 इकाई के कार्ड अलग से इस्तेमाल करें। और फिर, यह दर्शाने के लिए, कि हमें 8 इकाइयाँ और 3 दहाइयाँ कैसे मिलती हैं, उन्हें मिला दें। इससे हमें कुल 38 मिल जाएगा।

हम ऐरो कार्ड की मदद से घटाने की स्थिति की कल्पना भी कर सकते हैं। इसके लिए कार्डों को घटते क्रम में जमाया जा सकता है ताकि घटाने की प्रक्रिया निरूपित हो सके। उदाहरण बतौर, 15 में से 5 घटाने के लिए, आप 15 की संख्या दर्शा सकते हैं, और फिर दृश्यात्मक रूप से, 10 तक पहुँचने तक हर पड़ाव पर इसमें से 1 घटा सकते हैं।

कुल मिलाकर, ऐरो कार्ड ने स्थानीय मान का शिक्षण बेहतर करने में मेरी बहुत मदद की है। ये कार्ड सीखने को अधिक अन्तर्क्रियात्मक और मज़ेदार बना देते हैं। विद्यार्थी बख़ूबी इनमें रम गए थे। मैंने अपने विद्यार्थियों की संख्या सम्बन्धी अवधारणाओं की समझ में और उस समझ को क़ायम रखने में प्रत्यक्ष रूप से बेहतरी देखी है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये कार्ड स्थानीय मान को समझने के लिए करके देखने वाला व दृश्यात्मक तरीक़ा मुहैया करवाते हैं। स्थानीय मान व उससे जुड़ीं गणितीय अवधारणाएँ सिखाने के प्रभावशाली रास्ते तलाश रहे दूसरे शिक्षकों को मैं बढ़-चढ़कर ऐरो कार्ड इस्तेमाल करने की सिफ़ारिश करता हूँ। यह उनके अपने लिए भी सीखने का एक बढ़िया अनुभव रहेगा। आने वाले दिनों में, मैं गणित के लिए और अधिक टीएलएम निर्मित करने में तरक़्क़ी करूँगा।

आभार

  1. स्वाती सरकार, अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय,बेंगलूरु के स्कूल ऑफ़ कंटिन्यूइंग एजुकेशन व यूनिवर्सिटी रिसोर्स सेंटर में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर।
  2. अर्धेन्‍दु शेखर दाश, धमतरी (छत्तीसगढ़) के अज़ीम प्रेमजी स्कूल के प्रिंसिपल।

  1. National Council of Educational Research and Training (NCERT). (2022, October). National Curriculum Framework for Foundational Stage. NCERT. https://ncert.nic.in/pdf/NCF_for_Foundational_Stage_20_October_2022.pdf
  2. Wadsworth, B. J. (1971). Piaget’s theory of cognitive development: an introduction for students of psychology and education. McKay.

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