असान्त आवर्ती दशमलवों की खोज-बीन
भिन्नों को दशमलव संख्याओं में बदलने के टॉपिक से हम बच्चों को पहली बार कक्षा-5 या 6 में परिचित कराते हैं। उस समय बच्चे यह ध्यान देते हैं कि कुछ भिन्न समाप्त (terminate) हो जाते हैं और कुछ नहीं होते हैं, और वे सान्त दशमलव (terminating decimals) और आवर्ती दशमलव (recurring decimals) जैसे शब्दों से परिचित होते हैं। उन्हें बार (bar) या बिन्दु (.) संकेतन (notation) का उपयोग भी बताया जाता है। आमतौर पर अधिकांश पाठ्यपुस्तकें इसके आगे नहीं बढ़ती हैं। बाद में (कक्षा-8 या 9 में) उन्हें संख्याओं का परिमेयीकरण (rationalize) करना सिखाया जाता है। यहाँ मैं जिस गतिविधि का वर्णन कर रही हूँ, वह मैंने कक्षा-8 के बच्चों के साथ आज़माई है। यह आवर्ती दशमलवों के पैटर्न में एक दिलचस्प जाँच (investigation) साबित हुई, जो सामान्यीकरण (generalization) की ओर ले गई और शुरुआत में एक प्रयास-और-त्रुटि (trial and error) दृष्टिकोण के माध्यम से और उसके बाद परिमेयीकरण की प्रक्रिया तक पहुँचकर उल्टी प्रक्रिया को देखने में मददगार रही।
मैंने सबसे पहले बच्चों के सामने एक प्रश्न रखा, “क्या सभी भिन्नों से या तो सान्त दशमलव मिलेंगे या किसी निश्चित आवधिकता (periodicity) के असान्त आवर्ती दशमलव?” वे इसे लेकर बहुत आश्वस्त नहीं थे। कुछ ने आत्मविश्वास से ‘’हाँ’’ कहा। मैंने बदले में पूछा, “क्या आप यह साबित कर सकते हैं कि उन्हें क्यों या तो सान्त होना चाहिए या किसी आवधिकता के साथ बार-बार आना चाहिए?” उन्हें अभी तक औपचारिक प्रमाण (formal proof) नहीं सिखाया गया था। इसलिए, भले ही वे सहज रूप से इसका उत्तर जानते थे, फिर भी उनके लिए इसे स्पष्ट रूप से व्यक्त करना कठिन था। इसलिए मैंने उनसे आगे के प्रश्न पूछे, “जब आप किसी संख्या को 5 से विभाजित करते हैं, तो आपको क्या शेषफल मिल सकते हैं?” उन्होंने उत्तर दिया, “0, 1, 2, 3, 4।” मैंने अन्य भाजकों (divisors) के लिए भी यही प्रश्न पूछा, और कुछ ही समय में उन्होंने देख लिया कि यदि भाजक n है, तो केवल n सम्भावित शेषफल (शून्य सहित) होते हैं, और एक बार जब वही शेषफल दोबारा आता है, तो भागफल (quotient) का पैटर्न उसी बिन्दु से खुद को दोहराने लगता है।
फिर मैंने उन्हें 2 से 100 तक के हर (denominators) वाली सभी इकाई भिन्नों (unit fractions – यानी 1/n के रूप में भिन्न, जहाँ n एक धनात्मक पूर्णांक है) के दशमलव प्रसार (decimal expansions) खोजने का काम दिया। कक्षा में बीस विद्यार्थी थे, और प्रत्येक ने एक घण्टे के भीतर ऐसी पाँच भिन्नों के मान की गणना की। जिन भिन्नों के दशमलव सान्त हो गए थे, उनके मामले में उन्हें पूरा उत्तर लिखना था। जिन भिन्नों के दशमलव आवर्ती थे, उनके मामले में उन्हें उस बिन्दु पर रुकना था जहाँ अंक दूसरी बार दोहराए जाने शुरू हुए थे। हालाँकि, मैंने उन्हें उन भिन्नों को छोड़ने के लिए कहा जिनमें दशमलव के दसवें स्थान तक दोहराव नहीं हुआ था। (बाद में, मैंने कम्प्यूटर द्वारा तैयार परिणाम प्रदान किए।) जैसे-जैसे उन्होंने यह किया, कुछ बच्चों ने अपने उत्तरों में कुछ दिलचस्प पैटर्न देखने शुरू कर दिए।
इसके बाद हमने चार्ट पर सभी भिन्नों को निम्नलिखित समूहों में वर्गीकृत करते हुए संकलित किया। जो भिन्न सान्त हो गईं, उन्हें एक साथ समूहित किया गया; फिर अवधि 1 वाली भिन्न (यानी, जहाँ दोहराए जाने वाले भाग या आवृत्ति खण्ड में केवल एक अंक है) को एक साथ समूहित किया गया; इसके बाद अवधि 2, अवधि 3, अवधि 4 आदि वाली भिन्न आईं। यहाँ संक्षेप में परिणाम दिए गए हैं। सान्त दशमलव वाली भिन्न। सान्त दशमलव वाली इकाई भिन्न थीं :
\(\frac{1}{2},\frac{1}{4},\frac{1}{5},\frac{1}{8},\frac{1}{10},\frac{1}{16},\frac{1}{20},\frac{1}{25},\frac{1}{32},\frac{1}{40},\frac{1}{50},\frac{1}{64},\frac{1}{80},\frac{1}{100}\)
हरों (denominators) पर ध्यान दें :
\(2, 4, 5, 8, 10, 16, 25, 32, 40, 50, 64, 80, 100\)
बच्चों ने ध्यान दिया कि इस सूची में 2 की सभी घातें (यानी, 2, 4, 8, 16, 32, 64) शामिल हैं और एक अन्य समूह 5, 10, 20, 25, 40, 50, 80 है जिसे 5, 5 × 2, 5 × 4, 5 × 8, 25 × 2, 5 × 16, 52 × 4 के रूप में फिर से लिखा जा सकता है। कुछ चर्चा के बाद उन्होंने इस परिणाम का सामान्यीकरण करते हुए कहा कि हर 2n, या 2 × 5n, या 5 × 2n के रूप में हैं, जहाँ n धनात्मक पूर्णांकों के समुच्चय N से सम्बन्धित है। ऊपर सूचीबद्ध प्रत्येक हर इनमें से किसी एक रूप में है।
आगे सामान्यीकरण करते हुए, हम कह सकते हैं कि जब भी हर का रूप 2a × 5b होता है, जहाँ a और b ग़ैर-ऋणात्मक पूर्णांक (non-negative integers) हैं, तो दशमलव प्रसार सान्त हो जाता है।
भिन्न जहाँ आवृत्ति भाग (repetend) में एक अंक है। यहाँ वे भिन्न दी गई हैं जिनके आवृत्ति खण्ड में केवल एक अंक है :
\(\frac{1}{3},\frac{1}{6},\frac{1}{9},\frac{1}{12},\frac{1}{15},\frac{1}{18},\frac{1}{24},\frac{1}{30},\frac{1}{36},\frac{1}{45},\frac{1}{48},\frac{1}{60},\frac{1}{72},\frac{1}{75},\frac{1}{90},\frac{1}{96}\)
बच्चों ने जल्दी ही ध्यान दिया कि हर क्रमिक (consecutive) नहीं हैं और संख्याओं के शुरुआती समूह के बाद अन्तराल (gaps) दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने हरों का गुणनखण्ड (factorize) इस रूप में किया : 3 × 1, 3 × 2, 3 × 3, 3 × 4, 3 × 5, 3 × 6, 3 × 8, 3 × 10, 3 × 12, 3 × 15, 3 × 16, 3 × 20, 3 × 24, 3 × 25, 3 × 30, 3 × 32.
इन संख्याओं को अब एक ऐसे समुच्चय के रूप में क्रमबद्ध किया जा सकता है जिसमें 3 गुणा 2 की घातें (3 × 1, 3 × 2, 3 × 4, 3 × 8, 3 × 16, 3 × 32) हों, दूसरा समुच्चय जिसमें 2 और 5 के गुणजों का 3 गुना (3 × 5, 3 × 10, 3 × 15, 3 × 20, 3 × 25, 3 × 30) हाँ और तीसरा समुच्चय जिसमें 32 गुणा 2 की घातें (3 × 3, 3 × 6 या 3 × 3 × 2, 3 × 12 या 32 × 22, 3 × 24 जो कि 32 × 23 है) हों; अधिक सामान्य रूप से, वे भिन्न जिनमें हर का रूप 3 × 2n, 32 × 2n, 3 × 5n होता है।
सामान्यीकरण करते हुए, हम कह सकते हैं कि वे सभी भिन्न जिनमें हर का रूप 3 × 2a × 5b और 32 × 2a × 5b होता है, वे 1 की अवधि (period 1) वाली दशमलव संख्याएँ देती हैं। ऊपर सूचीबद्ध प्रत्येक हर इनमें से ही किसी एक रूप में है।
भिन्न जहाँ आवृत्ति भाग में दो अंक हैं। वे भिन्न जिनके परिणामस्वरूप दो दोहराए जाने वाले अंकों (अर्थात अवधि 2 – period 2) वाले दशमलव मिले, वे थीं :
\(\frac{1}{11},\frac{1}{22},\frac{1}{33},\frac{1}{44},\frac{1}{55},\frac{1}{66},\frac{1}{88},\frac{1}{99}\)
जब हमने पहली बार इस सूची को देखा, तो हमने निष्कर्ष निकाला कि हर सभी 11 के गुणज थे, लेकिन फिर हमने ध्यान दिया कि 77 इस सूची में नहीं है। शुरुआत में यह हमारे लिए आश्चर्यजनक था। हम ऐसा न होने का कारण बाद में ही समझ पाए जब हमने आवर्त 6 वाले भिन्नों का अध्ययन किया।
वे भिन्न जिनके आवर्ती भाग तीन अंकों के हैं। वे भिन्न जिनके परिणामस्वरूप तीन आवर्ती अंकों वाला दशमलव (यानी, आवर्त 3 – period 3) प्राप्त हुआ, वे थीं :
\(\frac{1}{27},\frac{1}{37},\frac{1}{54},\frac{1}{74}\)
हमने ध्यान दिया कि हर 27 और 37 के गुणज थे; हालाँकि, 81 ‘लापता’ था।
वे भिन्न जिनमें आवर्ती भाग चार अंकों के हैं। वे भिन्न जिनके परिणामस्वरूप चार आवर्ती अंकों वाला दशमलव (यानी, आवर्त 4 – period 4) प्राप्त हुआ, वे थीं . . . : कोई नहीं! एक सवाल जो स्वाभाविक रूप से हमारे दिमाग़ में आया, वह यह था : क्या यह केवल पहली 100 इकाई भिन्नों (unit fractions) के लिए सच है, या हमेशा ऐसा ही होगा? और क्या हम इसे किसी भी तरह से साबित कर सकते हैं?
वे भिन्न जिनमें आवर्ती भाग पाँच अंकों के हैं। वे भिन्न जिनके परिणामस्वरूप पाँच आवर्ती अंकों वाला दशमलव (यानी, आवर्त 5 – period 5) प्राप्त हुआ, वे थीं :
\(\frac{1}{41},\frac{1}{82}\)
यह तीसरी बार था जब हमने सूची में पहले हर के एक गुणज को आते हुए देखा, और इसने हमें इसका कारण खोजने के लिए प्रेरित किया।
वे भिन्न जिनमें आवर्ती भाग छह अंकों के हैं। वे भिन्न जिनके परिणामस्वरूप छह आवर्ती अंकों वाला दशमलव (यानी, आवर्त 6 – period 6) प्राप्त हुआ, उनकी संख्या काफ़ी अधिक थी :
\(\frac{1}{7},\frac{1}{13},\frac{1}{14},\frac{1}{21},\frac{1}{26},\frac{1}{28},\frac{1}{35},\frac{1}{39},\frac{1}{42},\frac{1}{52},\frac{1}{56},\frac{1}{63},\frac{1}{65},\frac{1}{70},\frac{1}{77},\frac{1}{78},\frac{1}{84},\frac{1}{91}\)
हरों में 7 और 13 के गुणज देखे जा सकते थे, लेकिन यह देखना दिलचस्प था कि 49 या 7×7 इस सूची में दिखाई नहीं देता है। हमने ख़ुद से पूछा कि ऐसा क्यों होना चाहिए।
वे भिन्न जिनमें आवर्ती भाग सात अंकों के हैं। ऐसी कोई भिन्न नहीं थी।
वे भिन्न जिनमें आवर्ती भाग आठ अंकों के हैं। केवल एक ही ऐसी भिन्न थी जिसके परिणामस्वरूप आठ आवर्ती अंकों वाला दशमलव (यानी, आवर्त 8 – period 8) प्राप्त हुआ : \(\frac{1}{73}\).
वे भिन्न जिनमें आवर्ती भाग नौ अंकों के हैं। केवल एक ही ऐसी भिन्न थी जिसके परिणामस्वरूप नौ आवर्ती अंकों वाला दशमलव (यानी, आवर्त 9 – period 9) प्राप्त हुआ : \(\frac{1}{81}\).
वे भिन्न जिनमें आवर्ती भाग दस अंकों के हैं। ऐसी कोई भिन्न नहीं थी।
दिए गए असान्त आवर्ती दशमलव (recurring decimal) के अनुरूप भिन्न खोजना
ऊपर दिए गए अभ्यास के बाद मैं चाहती थी कि वे इस प्रक्रिया को उल्टे क्रम में देखें। मैंने यह सवाल रखा, “कोई दशमलव संख्या दिए जाने पर हम उसे भिन्न में कैसे बदलेंगे?” सान्त दशमलव कोई कठिनाई पैदा नहीं करते क्योंकि उन्हें 10 की उपयुक्त घातों से विभाजित पूर्ण संख्याओं के रूप में लिखा जा सकता है और फिर उन्हें सरल किया जा सकता है (जैसे, 0.034 = 34 / 1000 = 17 / 500)। इसलिए सवाल सिमटकर इस पर आ गया : असान्त आवर्ती दशमलवों के साथ क्या किया जाए?
हमने इसके लिए प्रयास-और-त्रुटि (trial-and-error) का तरीक़ा अपनाया। हमने असान्त आवर्ती दशमलव .027027027…. लिया। कौन-सी भिन्न यह दशमलव देगी? बच्चों ने पहले 1 / 2 (= .5) और 1 / 4 (= .25) को देखा और महसूस किया कि हर को 4 से बड़ा होना चाहिए। फिर उन्होंने 1 / 10 (= .1) और 1 / 20 (= .05) के साथ कोशिश की और समझा कि हर को 20 से भी बड़ा होना चाहिए। अब उन्होंने 1 / 30 (= .0333…) और 1 / 40 (= .025) के साथ प्रयास किया और जाना कि यह भिन्न 1 / 30 और 1 / 40 के बीच स्थित है। फिर उन्होंने 1 / 35 (= .02814… ) की कोशिश की और इस दायरे को और छोटा करके 1 / 35 से 1 / 40 तक ले आए। जल्द ही उन्हें परिणाम मिल गया कि 1 / 37 = .027027. . ..
अब उन्हें ‘परिमेयीकरण’ (rationalization) की एक अधिक व्यवस्थित प्रक्रिया से परिचित कराना था। हमने एक दशमलव संख्या को 10 की घातों से गुणा करने पर प्राप्त होने वाले परिणाम को देखा। इसके बाद हमने विभिन्न आवर्ती दशमलवों को यह तय करने के लिए देखा कि उन्हें 10 की किस घात से गुणा किया जाना चाहिए ताकि आवर्ती भाग (recurring part) को पूर्ण संख्या के स्थान पर लाया जा सके। (उदाहरण के लिए, .027027… को 27.027027… में बदलने के लिए 1000 से गुणा करने की आवश्यकता है, जिसका आवर्ती भाग मूल संख्या के बिल्कुल समान है)। फिर मैंने उनसे पूछा कि इस नई संख्या और मूल संख्या का उपयोग करके कौन-सी संक्रिया की जा सकती है जिससे आवर्ती भाग समाप्त (eliminate) हो जाए। जल्द ही उन्होंने देख लिया कि नई संख्या में से मूल संख्या को घटाने पर उत्तर 27 मिलेगा। अब मैंने उन्हें मूल संख्या को x मानने और 1000x में से x को घटाकर 999x प्राप्त करने की प्रक्रिया से परिचित कराया, जो कि 27 के बराबर होना चाहिए। इससे हमने निष्कर्ष निकाला कि x = 27 / 999, जिसे सरल करने पर 1 / 37 प्राप्त होता है।
इस पूरे अभ्यास में हमें तीन पीरियड लगे (कुछ गणनाएँ गृहकार्य के रूप में दी गई थीं)। हमें कई दिलचस्प पैटर्न मिले; उदाहरण के लिए, 1 / 81 = 0.012345679 012345679… , और हम देखते हैं कि आवर्ती अंक (repetend) में से 8 गायब है। इसने कई सवाल भी खड़े किए, जिनमें से सभी का जवाब हम नहीं दे सके। उदाहरण के लिए, हमें 1 / 2 से 1 / 100 तक के इकाई भिन्नों (unit fractions) में ऐसी कोई भिन्न क्यों नहीं मिलीं जो आवर्त 4, 7 या 10 वाले दशमलव देती हों? यदि हम अपने दायरे को बढ़ाते हैं तो क्या यह बात सच बनी रहेगी? और क्या कोई ऐसा तरीक़ा है जिससे हम इसे निर्णायक रूप से साबित कर सकें?
शायद किसी दिन हमें इनमें से कुछ सवालों के जवाब मिल जाएँगे!