प्रिपरेटरी स्टेज गणित में योगात्मक आकलन को देखने का एक नज़रिया
ऊपर उल्लेख किए गए लेख में कहा गया है कि रचनात्मक और योगात्मक आकलन (formative and summative assessments) का उपयोग इस तरह से किया जाना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को कक्षा-विशेष में सीखी गई बातों का कोई नतीजा हासिल करने और उनकी उम्र/कक्षा के अनुरूप ज़रूरी कौशल विकसित करने में मदद मिल सके। आकलन में ऐसे टास्क न हों जो विद्यार्थियों में बेवजह का तनाव या घबराहट पैदा करें, बल्कि वे कक्षा के सामान्य माहौल में आसानी से किए जा सकें। साथ ही, ये टास्क विद्यार्थियों और शिक्षक, दोनों को उनकी सीखी हुई बातों को एक-दूसरे के साथ एकीकृत करने का अवसर भी दें। इसके अलावा, इनमें इतने स्पष्ट संकेत भी होने चाहिए जो बता सकें कि निर्धारित दक्षताओं के आधार पर विद्यार्थी सीखने के अगले चरण में जाने के लिए तैयार हैं या नहीं।
योगात्मक आकलन के लिए ऐसी रणनीतियाँ अपनाई जानी चाहिए जो विद्यार्थियों की उम्र के अनुरूप हों, और शोध व नीतिगत प्रमाणों से मेल खाती हों। प्रिपरेटरी स्टेज में केवल लिखित परीक्षाएँ ही पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि उनसे सभी दक्षताओं की परख नहीं हो पाती है। इसके अलावा, योगात्मक आकलन का रिपोर्ट कार्ड भी केवल अंकों और ग्रेड तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसमें विद्यार्थी की दक्षताओं का ऐसा गुणात्मक विवरण होना चाहिए जिसे समझना और समझाना आसान हो।
यह लेख उन कुछ चुनिन्दा रणनीतियों के बारे में बताता है जिनका इस्तेमाल लिखित परीक्षाओं के साथ इस तरह से किया जा सकता है कि विद्यार्थियों द्वारा हासिल की गई दक्षताओं का योगात्मक आकलन किया जा सके। आकलन के लिए यहाँ कुछ स्कोरिंग टूल्स भी दिए गए हैं। हालाँकि ये टूल्स ही एकमात्र या अन्तिम सत्य नहीं हैं। शिक्षक उसी टास्क के लिए अलग-अलग टूल्स के संयोजन का प्रयोग भी कर सकते हैं [1]।
प्रिपरेटरी स्टेज में गतिविधियों से भरी-पूरी गणित की पाठ्यपुस्तकों को लेकर एक शिक्षक की आम चिन्ता यही होती है कि इन गतिविधियों को किस तरह ऐसे योगात्मक आकलन में बदला जाए जो अर्थपूर्ण भी हो और व्यावहारिक भी। आगे दी गई रणनीतियाँ दर्शाती हैं कि कैसे योगात्मक आकलन के रचनात्मक उपयोग पर ज़ोर देते हुए विद्यार्थियों द्वारा अर्जित की गई दक्षताओं को न केवल मापा जा सकता है, बल्कि उनकी रिपोर्टिंग भी की जा सकती है। प्रत्येक रणनीति को कुछ उदाहरणों से समझाया गया है, इस उम्मीद के साथ कि शिक्षक इसी तर्ज़ पर प्रिपरेटरी स्टेज की दूसरी निर्धारित दक्षताओं को जाँचने के लिए अपनी तरफ़ से भी नए तरीक़े तैयार कर सकेंगे।
रणनीति 1 : खोज
यहाँ वर्णित टास्क शालेय शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 [4, पृ. 274] में दी गई उस दक्षता को परखने में मदद करता है जिसके अनुसार विद्यार्थी यह समझ सकें कि “समान क्षेत्रफल वाली आकृतियों का परिमाप अलग-अलग हो सकता है, और इसी तरह समान परिमाप वाली आकृतियों का क्षेत्रफल भी भिन्न हो सकता है।”
नीचे दी गई खोज-आधारित गतिविधि पाँचवीं कक्षा में मापन (वर्गों और आयतों का क्षेत्रफल एवं परिमाप) के यूनिट के अन्त में जोड़ी में टास्क करवाने के लिए तैयार की गई है। इस टास्क को करने में लगभग 60 से 80 मिनट लग सकते हैं।
पारम्परिक तौर पर, योगात्मक आकलन व्यक्तिगत क्षमताओं का किया जाता है, लेकिन इस तरह के खोजी टास्क छोटे समूहों में अधिक कारगर होते हैं। बेशक, अगर कोई विद्यार्थी अकेले काम करना चाहता है तो शिक्षक उसे यह अवसर दे सकते हैं। इस रणनीति के अन्त में दी गई ऑब्जर्वेशन रेटिंग स्केल (तालिका-2) शिक्षक को प्रत्येक विद्यार्थी का अलग-अलग आकलन करने में मदद करती है।
विद्यार्थियों के लिए निर्देश
आपके पास 24 वर्ग हैं। वर्ग की प्रत्येक भुजा को एक इकाई माना गया है। आपका टास्क इन सभी 24 वर्गों का उपयोग करके अधिक-से-अधिक और अलग-अलग तरह के आयत बनाना है।
अकेले या जोड़ी में, जैसे भी करना चाहें, दी गई ग्रिड शीट पर इन 24 वर्गों से बने आयत खींचें और प्रत्येक आयत की लम्बाई एवं चौड़ाई लिखें।

अब आपको नीचे दी गई तालिका-1 तैयार करनी है। उसमें आपस में चर्चा किए बग़ैर बनाए गए सभी आयतों की लम्बाई और चौड़ाई लिखनी है।
| आयत क्रमांक | लम्बाई | चौड़ाई | क्षेत्रफल | परिमाप |
|---|---|---|---|---|
| 1 | ||||
| 2 | ||||
| 3 |
तालिका-1
किसी से चर्चा किए बग़ैर तालिका और बनाए गए चित्रों की मदद से निम्नलिखित सवालों के जवाब दें :
- किस आयत का परिमाप सबसे कम है?
- किस आयत का परिमाप सबसे अधिक है?
- बनाए गए प्रत्येक आयत का क्षेत्रफल कितना है?
- जब आकृति लम्बी और पतली होती जाती है तो उसके परिमाप में क्या बदलाव नज़र आते हैं?
शिक्षकों के लिए नोट
- हालाँकि गतिविधि जोड़ियों में की जाएगी, लेकिन प्रत्येक विद्यार्थी का आकलन अलग-अलग किया जाना चाहिए।
- यह ज़रूरी नहीं है कि विद्यार्थी दिए गए वर्गों का उपयोग करें ही। जो विद्यार्थी बिना किसी ठोस सामग्री के काम करना चाहते हैं, उन्हें इसकी अनुमति दी जा सकती है।
- किसी भी तरह की मदद करने से पहले विद्यार्थी को सवाल के बारे में सोचने के लिए पर्याप्त समय दें, क्योंकि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य योगात्मक आकलन करना है।
- इस गतिविधि के दौरान विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार का फ़ीडबैक न दें। टास्क पूरा हो जाने के बाद शिक्षक चाहें तो पूरी कक्षा के साथ इस पर चर्चा कर सकते हैं।
शिक्षक के अवलोकन के लिए रेटिंग स्केल
| अवलोकन | हमेशा | कभी-कभार | कभी नहीं |
|---|---|---|---|
| विद्यार्थी आयत की लम्बाई और चौड़ाई को सही ढंग से दर्ज करता है। | |||
| विद्यार्थी प्रत्येक आयत के क्षेत्रफल और परिमाप की गणना करता है। | |||
| विद्यार्थी अवलोकन करता है कि लम्बाई और चौड़ाई बदलने पर भी आयत का क्षेत्रफल समान रहता है। | |||
| विद्यार्थी इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि आयत के लम्बा और पतला होने पर उसके परिमाप में बदलाव आता है। | |||
| विद्यार्थी दिए गए सन्दर्भ की व्याख्या करने के लिए क्षेत्रफल और परिमाप से सम्बन्धित गणितीय शब्दावली का उपयोग करता है। |
यह रणनीति योगात्मक आकलन के रचनात्मक उपयोग को सम्भव बनाती है। इसमें शिक्षक, विद्यार्थियों के जवाबों के आधार पर उनकी ग़लतफ़हमियों की पहचान करते हैं और उन्हें उचित फ़ीडबैक देते हैं। वहीं, विद्यार्थी क्षेत्रफल और परिमाप के बीच के सम्बन्ध को गहराई से समझते हैं जिससे यूनिट के अन्त में होने वाला यह टास्क सीखने के एक नए अवसर में बदल जाता है। इसी तरह का एक प्रयोग समान लम्बाई की तीलियों से भी किया जा सकता है जिसमें परिमाप को स्थिर रखकर अलग-अलग क्षेत्रफल वाले आयत बनाए जाते हैं।
यहाँ योगात्मक आकलन की समग्र और बहुआयामी प्रकृति भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है जिसमें शिक्षक अवलोकन, लिखित टास्क, मौखिक उत्तर और प्रदर्शन-आधारित गतिविधियों जैसे विभिन्न तरीक़ों का उपयोग करते हैं, ताकि विद्यार्थियों के सीखने के पूरे दायरे को समझा जा सके।
रणनीति 2 : प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट, आकलन का एक ऐसा रूप है जो गणित को वास्तविक जीवन के अनुप्रयोगों से जोड़ सकता है। यह एक ओर जहाँ रचनात्मक आकलन का अवसर देता है, वहीं अपनी प्रकृति में योगात्मक भी होता है [1]।

प्रोजेक्ट के दौरान विद्यार्थी समूहों में मिलकर काम करते हैं, जहाँ शिक्षक एक मार्गदर्शक और सहायक की भूमिका निभाते हैं। प्रोजेक्ट की योजना बनाने, उस पर चर्चा करने, और उसे पूरा करने के लिए विद्यालय के समय में से ही उनके लिए अलग से कुछ समय निर्धारित किया जाता है। इस दौरान शिक्षक आवश्यकतानुसार उनका मार्गदर्शन करते हैं। विद्यार्थियों को कम लागत या बिना लागत वाली ऐसी सामग्री का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जो आसानी से उपलब्ध हों। प्रोजेक्ट व्यावहारिक होने चाहिए जिन्हें स्वयं विद्यार्थी अपने हाथों से पूरा कर सकें, साथ ही इन्हें करना प्रत्येक विद्यार्थी के लिए सम्भव होना चाहिए। इन गतिविधियों से विद्यार्थी टीम वर्क और मिलकर समस्याओं का समाधान करना भी सीखते हैं।
प्रोजेक्ट का संक्षिप्त विवरण : यह प्रोजेक्ट पाँचवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है। इसमें विद्यार्थी पैटर्न डिज़ाइनर की भूमिका निभाते हुए टेसेलेशन (tessellations—पच्चीकारी) की रोचक दुनिया में प्रवेश करते हैं (‘टेसेलेशन’ में आकृतियों को एक साथ इस तरह बिछाया जाता है कि वे कोई पैटर्न बनाएँ, लेकिन उनके बीच न तो कोई ख़ाली जगह छूटे और न ही वे ओवरलैप करें)। विद्यार्थी इस पड़ताल से शुरुआत करते हैं कि कौन-कौन-से बहुभुज टेसेलेशन बना सकते हैं और फिर स्वयं ही सहज रूप से इसकी वजह भी तलाश लेते हैं। यह प्रोजेक्ट पैटर्न निर्माण के माध्यम से विद्यार्थियों की स्थानिक तर्कशक्ति को विकसित करता है। इस प्रक्रिया में वे अलग-अलग आकृतियों को मिलाकर इस्तेमाल करते हैं और थीम-आधारित टेसेलेशन आर्ट बनाकर अपनी रचनात्मकता को जीवन्त करते हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए शालेय शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 [4] के सन्दर्भ में सीखने के मानकों का एक फ़्लो चार्ट नीचे दिया गया है :

समूह टास्क
शिक्षक तीन या चार विद्यार्थियों के प्रत्येक समूह को आकृतियों से युक्त एक किट प्रदान करेंगे। इस किट में त्रिभुज, वर्ग, पंचभुज, षट्भुज और अष्टभुज के एक-एक कटआउट हैं जिनकी भुजाओं की लम्बाई समान है। किट में एक आयत भी है जिसकी चौड़ाई वर्ग की भुजा के बराबर है, जबकि लम्बाई उससे दोगुनी है। यह प्रोजेक्ट तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। प्रत्येक चरण में विद्यार्थी डॉट शीट, चार्ट पेपर या किसी अन्य रचनात्मक माध्यम का उपयोग करके टेसेलेशन बनाएँगे। यहाँ यह मानकर चला गया है कि विद्यार्थी इन आकृतियों से भली-भाँति परिचित हैं और पहले भी टेसेलेशन से जुड़ी गतिविधियाँ कर चुके हैं। विद्यार्थी अपनी आवश्यकतानुसार किट में दी गई आकृतियों की कई और प्रतिकृतियाँ बना सकते हैं, और रंगों या पैटर्न के उपयोग से अपनी रचनात्मकता दिखा सकते हैं। शिक्षक एक सप्ताह के तय कालखण्डों के दौरान यह आकलन टास्क पूरा कर सकते हैं।
चरण-1 : एकल आकृति टेसेलेशन (50-60 मिनट)
- किट में दी गई आकृतियों को इस आधार पर वर्गीकृत करें कि वे टेसेलेशन बनाती हैं या नहीं।
- ऐसी किन्हीं दो आकृतियों को चुनें जो ख़ुद ही टेसेलेशन बना सकती हैं। प्रत्येक आकृति का इस्तेमाल करके अलग-अलग एकल आकृति टेसेलेशन तैयार करें।
चरण-2 : मिश्रित आकृति टेसेलेशन (30-40 मिनट)
- उन सभी आकृतियों के जोड़ों की पहचान करें जो एक-दूसरे के साथ टेसेलेशन बना सकते हैं।
- पहचाने गए किसी एक जोड़े का उपयोग करके मिश्रित आकृति टेसेलेशन बनाएँ।
- बने हुए पैटर्न को अपने शब्दों में समझाएँ।
चरण 3 : रचनात्मक थीम-आधारित टेसेलेशन (80-90 मिनट)
- अपने आस-पास से कोई एक थीम चुनें (उदाहरण के लिए, प्रकृति, शहर का दृश्य या बुनाई/कढ़ाई)।
- अपनी थीम के आधार पर कम-से-कम दो आकृतियों का उपयोग करते हुए वॉलपेपर, कालीन, कपड़ों या किसी अन्य कला रूप के लिए डिज़ाइन बनाते हुए टेसेलेशन तैयार करें।
तीनों चरण पूरे होने के बाद प्रत्येक समूह अपने द्वारा बनाए गए टेसेलेशन का पूरी कक्षा के सामने प्रदर्शन करेगा। इस दौरान उसके क्या अनुभव रहे, यह भी बताएगा। प्रत्येक समूह को प्रस्तुति की तैयारी के लिए लगभग 20 मिनट और प्रस्तुति देने के लिए 8 से 10 मिनट दिए जा सकते हैं।
प्रस्तुति में चिन्तन-मन्थन का एक महत्त्वपूर्ण पहलू शामिल है। इसके लिए शिक्षक कक्षा में कुछ ऐसे मार्गदर्शक सवाल साझा कर सकते हैं जिनसे विद्यार्थियों को मदद मिल सके। कुछ सवाल इस तरह के हो सकते हैं :
- आपने यह कैसे तय किया कि डिज़ाइन बनाने के लिए किन आकृतियों का उपयोग करना है?
- इस गतिविधि के दौरान आपको कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा होगा। ऐसी किसी एक चुनौती के बारे में बताएँ और यह भी कि आपने उसका समाधान कैसे किया।
- टीम के साथ काम करते हुए आपने क्या सीखा?
प्रोजेक्ट के आकलन के लिए शिक्षक रूब्रिक्स का उपयोग कर सकते हैं। रूब्रिक्स का मुख्य उद्देश्य प्रदर्शन का आकलन करना होता है [2]। कुछ प्रदर्शन ऐसे होते हैं जिनमें शिक्षक, विद्यार्थियों को किसी प्रक्रिया के दौरान टास्क करते हुए देखते हैं, जबकि अन्य में वे उनके टास्क के परिणामस्वरूप बने उत्पाद का अवलोकन करते हैं। पैटर्न की सटीकता, कलात्मक प्रस्तुति, गणितीय तर्क, प्रस्तुतीकरण और आपसी सहयोग जैसे मानदण्डों के आधार पर थ्री-पॉइंट स्केल का उपयोग करके रूब्रिक्स विकसित किए जा सकते हैं। तालिका-3 में दिया गया सैम्पल शिक्षक को तीन चरणों के दौरान विद्यार्थियों का (छोटे-छोटे समूहों में) आकलन करने में मदद करेगा। यहाँ कुल अंक 10 रखे गए हैं। इस रूब्रिक के संकेतक प्रोजेक्ट से हासिल उन्हीं अधिगम के प्रतिफलों से लिए गए हैं जिनका विवरण ऊपर दिए गए फ़्लो चार्ट (चित्र-3) में है।
| प्रोजेक्ट के चरण | स्कोर | संकेतक* |
|---|---|---|
| चरण-1 | 3 |
→ समूह टेसेलेशन बनाने वाली ऐसी तीन या अधिक आकृतियों की पहचान करता है जो ख़ुद ही टेसेलेशन बना सकती हैं।
→ ऐसी दो आकृतियों की पहचान करता है जो स्वयं टेसेलेशन नहीं बनातीं।
→ दो एकल-आकृति टेसेलेशन बनाता है।
→ प्रक्रिया के दौरान अच्छा समन्वयन दर्शाता है।
|
| 2 |
→ समूह टेसेलेशन बनाने वाली ऐसी दो आकृतियों की पहचान करता है जो ख़ुद ही टेसेलेशन बना सकती हैं।
→ समूह टेसेलेशन बनाने वाली ऐसी दो आकृतियों की पहचान करता है जो ख़ुद ही टेसेलेशन बना सकती हैं।
→ दो एकल-आकृति टेसेलेशन बनाता है।
→ प्रक्रिया के दौरान अच्छा समन्वयन दर्शाता है।
|
|
| 1 |
→ समूह टेसेलेशन बनाने वाली ऐसी एक आकृति की पहचान करता है जो ख़ुद ही टेसेलेशन बना सकती है।
→ ऐसी किसी आकृति की पहचान नहीं करता जो स्वयं से टेसेलेशन नहीं बनाती।
→ एकल आकृति का उपयोग करके टेसेलेशन बनाता है।
→ दूसरों के साथ समन्वय बनाने में कठिनाई का अनुभव करता है।
|
|
| 0 |
→ समूह टेसेलेशन बनाने वाली ऐसी किसी भी आकृति की पहचान नहीं करता है जो ख़ुद ही टेसेलेशन बना सकती है।
→ टेसेलेशन नहीं बनाता है।
→ दूसरों के साथ समन्वय बनाने में कठिनाई का अनुभव करता है।
|
|
| चरण-2 | 3 |
→ समूह दो से अधिक आकृति-युग्मों की पहचान करता है जो एक-दूसरे के साथ टेसेलेशन बनाते हैं।
→ किसी एक आकृति-युग्म का उपयोग करके एक मिश्रित टेसेलेशन बनाता है।
→ प्रस्तुति के दौरान पैटर्न को अपने शब्दों में समझाता है।
→ प्रक्रिया के दौरान अच्छा समन्वयन दर्शाता है।
|
| 2 |
→ समूह ऐसे दो आकृति-युग्मों की पहचान करता है जो एक-दूसरे के साथ टेसेलेशन बनाते हैं।
→ किसी एक आकृति-युग्म का उपयोग करके एक मिश्रित टेसेलेशन बनाता है।
→ प्रस्तुति के दौरान पैटर्न को समझाने में कठिनाई का अनुभव करता है।
→ प्रक्रिया के दौरान अच्छा समन्वयन दर्शाता है।
|
| प्रोजेक्ट के चरण | स्कोर | संकेतक* |
|---|---|---|
| चरण-3 | 1 |
→ समूह चुनी गई थीम को दर्शाते हुए कम-से-कम दो आकृतियों का उपयोग करके टेसेलेशन बनाता है।
→ टेसेलेशन में उपयोग की गई आकृतियों के सन्दर्भ में डिज़ाइन का विस्तृत मौखिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
→ डिज़ाइनिंग की प्रक्रिया और प्रस्तुति के दौरान समन्वयन का अच्छा प्रदर्शन करता है।
→ समूह के सभी सदस्य प्रक्रिया को लेकर चिन्तनशील होते हैं।
|
| 0 |
→ समूह कम-से-कम दो आकृतियों का उपयोग करके टेसेलेशन बनाता है, लेकिन यह चुनी गई थीम को प्रदर्शित नहीं करता है।
→ डिज़ाइन का कोई विश्लेषण प्रस्तुत नहीं करता है।
→ एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाने में कठिनाई का अनुभव करता है।
|
|
| 4 |
→ समूह चुनी गई थीम को दर्शाते हुए कम-से-कम दो आकृतियों का उपयोग करके टेसेलेशन बनाता है।
→ टेसेलेशन में उपयोग की गई आकृतियों के सन्दर्भ में डिज़ाइन का विस्तृत मौखिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
→ डिज़ाइनिंग की प्रक्रिया और प्रस्तुति के दौरान समन्वयन का अच्छा प्रदर्शन करता है।
→ समूह के सभी सदस्य प्रक्रिया को लेकर चिन्तनशील होते हैं।
|
|
| 3 |
→ समूह चुनी गई थीम को दर्शाते हुए कम-से-कम दो आकृतियों का उपयोग करके टेसेलेशन बनाता है।
→ मौखिक विश्लेषण विस्तृत नहीं होता है, लेकिन डिज़ाइन के कुछ पहलुओं को शामिल करता है।
→ डिज़ाइनिंग की प्रक्रिया और प्रस्तुति के दौरान समन्वयन का अच्छा प्रदर्शन करता है।
→ समूह के कुछ ही सदस्य प्रक्रिया को लेकर चिन्तनशील होते हैं।
|
|
| 2 |
→ समूह कम-से-कम दो आकृतियों का उपयोग करके टेसेलेशन बनाता है, लेकिन यह चुनी गई थीम को प्रदर्शित नहीं करता है।
→ डिज़ाइन का कोई विश्लेषण प्रस्तुत नहीं करता है।
→ टास्क करते समय कुछ सदस्य सक्रिय रहते हैं, जबकि अन्य निष्क्रिय।
→ समूह के कुछ सदस्य ही प्रक्रिया को लेकर चिन्तनशील होते हैं।
|
|
| 1 |
→ समूह कम-से-कम दो आकृतियों का उपयोग करके टेसेलेशन बनाता है, लेकिन यह चुनी गई थीम को प्रदर्शित नहीं करता है।
→ डिज़ाइन का कोई विश्लेषण प्रस्तुत नहीं करता है।
→ प्रक्रिया के दौरान हर टास्क में समन्वय की कमी दिखती है।
→ प्रस्तुति में चिन्तन शामिल नहीं होता।
|
|
| 0 |
→ इस समूह के पास प्रदर्शित करने के लिए कोई डिज़ाइन नहीं होती है।
|
तालिका-3
शिक्षकों के लिए नोट
- इस रूब्रिक का उपयोग शिक्षक द्वारा प्रोजेक्ट टास्क की प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों के आकलन के लिए किया जाना चाहिए। इसमें दिए गए संकेतक शिक्षक को प्रत्येक समूह के बारे में अपने अवलोकन दर्ज करने में मार्गदर्शन देंगे।
- टेसेलेशन के बारे में और अधिक विस्तार से जानने के लिए एनसीईआरटी कक्षा-5 के अध्याय-7 (आकृतियाँ और पैटर्न) को सन्दर्भित किया जा सकता है।
- शिक्षक, विद्यार्थियों के व्यक्तिगत आकलन को शामिल करने के लिए चेकलिस्ट या रेटिंग स्केल जैसी अन्य पद्धतियों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
योगात्मक आकलन के रूप में यह प्रोजेक्ट विद्यार्थियों को अपने सीखे हुए ज्ञान को समन्वित करने और सीखने के मानकों के आधार पर अपनी प्रगति को ट्रैक करने का अवसर प्रदान करता है। यह भी सुनिश्चित करने में मदद करता है कि विद्यार्थी अगले चरण में जाने के लिए तैयार हैं या नहीं।
रणनीति 3 : प्रदर्शन टास्क
कक्षा-4 की एनसीईआरटी की गणित की पाठ्यपुस्तक [5] के ‘सममिति के साथ आनन्द’, ‘हमारे आस-पास की आकृतियाँ’, ‘हमारे चारों ओर पैटर्न’ तथा ‘लुका-छिपी’ जैसे ज्यामितीय अध्यायों का आकलन प्रदर्शन गतिविधि के माध्यम से भी किया जा सकता है। इस प्रस्तावित आकलन में शिक्षक के लिए ज़रूरी है कि वह कक्षा, गणित की प्रयोगशाला या किसी भी उपलब्ध खुले स्थान पर विद्यार्थियों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताए, ताकि विद्यार्थियों को सामग्री फैलाकर उस पर काम करने के लिए पर्याप्त अवसर मिल सकें। प्रत्येक विद्यार्थी अपनी समझ का प्रदर्शन कर सके, इसके लिए कुछ सवाल दिए जाते हैं जिन पर उसे व्यक्तिगत तौर पर काम करना होता है। विद्यार्थियों की दक्षताओं जैसे द्वि-आयामी एवं त्रि-आयामी आकृतियों के गुणों/ विशेषताओं की पहचान, तुलना और विश्लेषण; उनके वर्णन के लिए उपयुक्त शब्दावली का विकास तथा इन आकृतियों में पैटर्न की खोज, पहचान और विस्तार के आकलन हेतु प्रदर्शन टास्क के कुछ उदाहरण [4, पृ. 274] नीचे दिए गए हैं।
आवश्यक सामग्री (प्रति विद्यार्थी) :
टास्क-1: घन या बिल्डिंग ब्लॉक्स या माचिस की डिब्बियाँ (सभी समान आकार की) – 10
टास्क-2 : समान लम्बाई की स्ट्रॉ/तीलियाँ – 9
टास्क-3 : दो अलग-अलग रंगों के काग़ज़ के कटआउट – 30 (प्रत्येक रंग के)
- कल्पना करें कि आप किसी इमारत को अलग-अलग दिशाओं से देख रहे हैं। चित्र-4 में दिखाया गया है कि वह इमारत सामने, ऊपर और दाईं ओर से कैसी दिखती है। गुलाबी रंग का प्रत्येक वर्ग एक घन का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे ही दस घनों का उपयोग करके इमारत का एक मॉडल बनाएँ।



- इन दसों घनों का उपयोग करते हुए आप कितने तरीक़ों से इमारत बना सकते हैं? प्रदर्शित करें।
- मान लें कि आपको केवल यह पता है कि इमारत सामने और ऊपर से कैसी दिखती है, जबकि बाजू से कैसी दिखती है यह नहीं दिया गया है। क्या इस स्थिति में भी आपकी इमारत, आपके द्वारा (क) में प्रदर्शित इमारत के समान ही रहेगी? यदि नहीं, तो ऐसी दो या तीन अलग-अलग इमारत बनाकर दिखाएँ।
- आपको समान लम्बाई की स्ट्रॉ दी गई हैं। आपको तीन ऐसे त्रिभुज बनाने हैं जिनमें भुजाओं की लम्बाई समान हो। आपको (क) 7 स्ट्रॉ के उपयोग से तीन त्रिभुज बनाने हैं, (ख) 8 स्ट्रॉ के उपयोग से भी तीन त्रिभुज बनाने हैं, और (ग) 9 स्ट्रॉ का उपयोग करके भी तीन त्रिभुज बनाने हैं। (ध्यान रहे कि आप स्ट्रॉ को न तो मोड़ सकते हैं न ही काट सकते हैं। उन्हें एक-दूसरे के भीतर भी नहीं डाला जा सकता।)
- आपको एक वर्गाकार ग्रिड शीट दी गई है। आप ग्रिड के प्रत्येक वर्ग में दी गई दो अलग-अलग रंगों की टाइल्स को फ़िट कर सकते हैं। टाइल्स को अलग-अलग स्थितियों (खड़ी, आड़ी) में रखकर दीवार या फ़र्श के लिए विभिन्न डिज़ाइन बनाएँ। प्रत्येक डिज़ाइन में एक रिपीटिंग यूनिट हो सकती है। इन यूनिटों की पहचान कर ऐसे कम-से-कम दो डिज़ाइन तैयार करें।
शिक्षकों के लिए नोट
- यह टास्क दृश्य-कल्पना की क्षमता पर ज़ोर देता है जिसका आकलन केवल पेपर-पेंसिल वाली परीक्षा से सम्भव नहीं है। शिक्षक इसी प्रकार के अन्य टास्कों की रूपरेखा भी तैयार कर सकते हैं।
- इस आकलन के लिए विद्यालय द्वारा निर्धारित समय और उपलब्ध सामग्री के अनुसार शिक्षक एक-या-एक से अधिक टास्क चुन सकते हैं।
- टास्क-1 के लिए 20 से 30 मिनट और टास्क-2 एवं टास्क-3 (प्रत्येक) के लिए 10 से 15 मिनट दिए जा सकते हैं। वैसे शिक्षक अपनी कक्षा की समझ और स्तर के आधार पर प्रत्येक टास्क के लिए समय का निर्धारण अपने हिसाब से भी कर सकते हैं।
विद्यार्थियों को अपने टास्क की पूर्णता का आकलन करने में मदद के लिए एक चेकलिस्ट दी जा सकती है। इससे उन्हें यह पता रहेगा कि क्या वे सभी ज़रूरी शर्तें पूरी कर रहे हैं और साथ ही इस प्रक्रिया से उनमें काम करने की अच्छी आदतें भी विकसित होंगी [2]। यहाँ स्व-आकलन चेकलिस्ट का एक नमूना दिया गया है। यह विद्यार्थियों को उनकी अपनी उपलब्धियों का आकलन करने में मदद करेगा।
| किन बातों पर ध्यान देना है? | हाँ / नहीं |
|---|---|
| टास्क-1 | |
| • मैं सामने, ऊपर और बाजू से दिखने के अनुसार ब्लॉकों को व्यवस्थित कर पाता हूँ। | |
| • मैं दिए गए दृश्य के आधार पर इमारत की कल्पना कर पाता हूँ। | |
| • मैं यह समझ पाता हूँ कि यदि बाजू का दृश्य नहीं दिया जाए तब भी कई सम्भावित इमारत बनाई जा सकती हैं। | |
| टास्क-2* | |
| • मैं 7 स्ट्रॉ का उपयोग करके तीन त्रिभुज बना सकता हूँ। | |
| • मैं 8 स्ट्रॉ का उपयोग करके तीन त्रिभुज बना सकता हूँ। | |
| • मैं 9 स्ट्रॉ का उपयोग करके तीन त्रिभुज बना सकता हूँ। | |
| टास्क-3 | |
| • मैं दो अलग-अलग टाइलों का उपयोग करके दो भिन्न प्रकार की डिज़ाइन बना पाया। | |
| • मैं अपने द्वारा बनाई गई प्रत्येक डिज़ाइन में रिपीटिंग यूनिट की पहचान कर पाया। |
*टास्क-2 के कुछ सम्भावित परिणाम नीचे दिए गए हैं :
| स्ट्रॉ की संख्या | तीन त्रिभुजों के साथ कुछ सम्भावित परिणाम |
|---|---|
| 7 |
![]() |
| 8 |
![]() नोट : इस स्थिति में और भी सम्भावित परिणाम हो सकते हैं। |
| 9 |
![]() नोट : इस स्थिति में और भी सम्भावित परिणाम हो सकते हैं। |
शिक्षक प्रदर्शन के आकलन के लिए भी एक रूब्रिक तैयार कर सकते हैं।
ऐसी उम्मीद की जाती है कि ऊपर वर्णित तीनों रणनीतियाँ शिक्षकों को पेन और पेपर वाली परीक्षाओं से ऊपर उठकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगी, विशेष रूप से योगात्मक आकलन के मामले में। हालाँकि शुरू में ये टास्क कठिन लग सकते हैं, लेकिन हर प्रयास के साथ शिक्षक को अपने विद्यार्थियों की क्षमता अनुसार उनमें सुधार करने के आइडिया मिलते जाएँगे। यह अपेक्षित है कि योगात्मक आकलन के लिए ऐसे टास्क देने से पहले विद्यार्थियों को अवधारणाओं को समझने के दौरान सामग्री के साथ काम करने के पर्याप्त अवसर दिए जाएँ। रूब्रिक और चेकलिस्ट जैसे साधनों, जिनसे किसी विद्यार्थी के प्रदर्शन का आकलन निर्धारित दक्षताओं के आधार पर किया जाता है, की मदद से शिक्षक, विद्यार्थी के प्रदर्शन का गुणात्मक विवरण भी दे सकते हैं। योगात्मक आकलन के उपयोगों पर विचार करके और निर्धारित दक्षताओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षक ऐसे आकलन टास्क डिज़ाइन कर सकते हैं जो विद्यार्थियों में डर एवं तनाव पैदा करने की बजाय उन्हें सहज महसूस कराएँ। विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक सकारात्मक अवसर दिया जाना चाहिए ताकि वे उच्च प्रभाव वाले आकलनों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें, सिर्फ़ अंकों के लिए ही नहीं, बल्कि उन चुनौतियों का सामना करने के लिए भी जिनमें उनकी संज्ञानात्मक क्षमताओं और भावनात्मक कौशलों का विकास होता है।
- Authentic assessments, Assessment resources, 2022, Azim Premji University
- Brookhart, Susan M. author. (2013). How to create and use rubrics for formative assessment and grading. Alexandria, Virginia USA: ASCD
- Ministry of Education, Government of India. (2020). National Education Policy 2020
- NCERT. (2023). National Curriculum Framework for School Education. New Delhi: NCERT
-
NCERT. (2025). Maths Mela, Textbook of Mathematics for Grade 5 https://ncert.nic.in/textbook.
php?ehmm1=0-15. and for Grade 4 https://ncert.nic.in/textbook. php?ehmm1=7. New Delhi: National Council of Educational Research and Training. - NCTM (2000). Principles and standards for school mathematics. Reston, VA: NCTM


