तर्क, विवेचन और प्रमाण
प्रमाण, जिसका औपचारिक परिचय प्रायः माध्यमिक या उच्च विद्यालय स्तर पर कराया जाता है, उसकी नींव तर्क (logic) और कारण-विचार (reasoning) में निहित होती है। इसलिए विद्यालयी पाठ्यक्रम और समस्याओं के चयन में, प्राथमिक कक्षाओं से ही, इस पक्ष को सचेत रूप से शामिल किया जाना चाहिए। ऐसे प्रश्न और गतिविधियाँ विद्यार्थियों को केवल उत्तर खोजने के लिए नहीं, बल्कि अपने विचारों को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करने, तर्क देने और अपने निष्कर्षों को उचित ठहराने के लिए प्रेरित करती हैं। यही कौशल आगे चलकर प्रमाण को समझने और रचने की आधारशिला बनते हैं।