सम और विषम संख्याओं का योग
तीन समूहों क, ख और ग के प्रत्येक चित्र में दो अलग रंगों से दर्शाई गई दो संख्याएँ जोड़ी गई हैं। इन संख्याओं और उनके योग के बारे में आप क्या पैटर्न देखते हैं?
संसाधन खण्ड में शिक्षकों के लिए बहुत सारी उपयोगी सामग्री है, जैसे कि सरल और आसानी से की जा सकने वाली गतिविधियाँ, विचार, पोस्टर और वर्कशीट।
तीन समूहों क, ख और ग के प्रत्येक चित्र में दो अलग रंगों से दर्शाई गई दो संख्याएँ जोड़ी गई हैं। इन संख्याओं और उनके योग के बारे में आप क्या पैटर्न देखते हैं?
बच्चों में संख्याओं की समझ स्वाभाविक रूप से तब शुरू होती है जब वे अपने आस-पास की दुनिया को टटोलते हैं — यहाँ तक कि शैशवावस्था में भी। वस्तुओं के साथ बार-बार होने वाली अन्तःक्रियाओं और अपने परिवेश में इस्तेमाल होने वाली भाषा के माध्यम से वे धीरे-धीरे संख्या सम्बन्धी प्रारम्भिक अवधारणाओं का निर्माण करते हैं।
मोनिका कक्षा-5 के विद्यार्थियों को ‘घनाभ का नेट’ पढ़ा रही थीं। पढ़ाने के बाद जब इन सत्रों के बारे में प्रतिक्रियाएँ ली गईं और इन पर चर्चा की गई तब गणित के एक शिक्षक ने इन सत्रों के दौरान उत्पन्न हुई दो ग़लत धारणाओं की ओर ध्यान दिलाया।
भिन्न पर दिए गए लेख से जुड़ी एक वर्कशीट यहाँ दी जा रही है। इस वर्कशीट का उपयोग शिक्षक अपने विद्यार्थियों की भिन्न की समझ को जाँचने के लिए कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल कक्षा-4 से 7 तक के विद्यार्थियों की समझ का आकलन करने के लिए आवश्यकतानुसार किया जा सकता है।
पूर्ण संख्याओं और भिन्नात्मक संख्याओं के योग के गुणधर्मों के चित्रात्मक औचित्य को देखने के बाद, यह पोस्टर इन्हीं संख्या समुच्चय के लिए गुणन के गुणधर्मों पर विचार करता है।
इनमें से: 5 + 6 5 + 7 5 + 8 +9 किसी के लिए भी समान चित्र बनाएँ और योग ज्ञात करें।
व्यवहारिक रूप से देखें तो हर मानवीय गतिविधि में सोचने-विचारने के कौशलों का इस्तेमाल निहित होता है। तो फिर सोचने-विचारने के कौशल क्या हैं? ये वे महत्त्वपूर्ण मानसिक प्रक्रियाएँ हैं जो हम करते हैं चीजों का वर्गीकरण करना, गुणधर्मों का अवलोकन करना, जानकारी का संकेतीकरण करना, तुलना करना, निर्णय लेना, निष्कर्ष निकालना और समस्याएँ हल करना। सोचने-विचारने के कौशलों को सोचने-विचारने के कैनवास के बुनियादी अंग के रूप में देखा जा सकता है। सोचने-विचारने के इन कौशलों को मोटेतौर पर दो वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है निम्न कोटि सोच-विचार कौशल और उच्च कोटि सोच-विचार कौशल ।
एक वर्ग बनाएँ। अब किसी एक कोने को हटाकर एक त्रिभुज बनाएँ। आपको किस प्रकार का त्रिभुज मिला? दोनों प्रकार के त्रिभुजों पर विचार करें, यानी भुजा या कोण के आधार पर वर्गीकृत किए गए त्रिभुज।
ज्यामिति शिक्षण यदि सही तरीके से किया जाए तो कई मायनों में इसमें देखने व अवलोकन करने की कला सीखने की बहुत ज्यादा सम्भावना होती है। यदि आप केवल एक सादे चौकोर कागज को अलग-अलग तरीकों से मोड़कर खेल करते हैं या बिन्दुओं वाले एक कागज पर दिए बिन्दुओं को जोड़ना शुरू करते हैं तो भी आप ऐसा करने से उभरती विभिन्न आकृतियों को देखना शुरू करते हैं। व्यक्तिगत तौर पर मैंने हमेशा यह देखा है कि ऐसा करना काफी मजेदार और समृद्ध अनुभव होता है क्योंकि हर वह विद्यार्थी जिससे मैं मिली हूँ वह आकृतियों को अपने एक अलग ही तरीके से देखता और नोटिस करता है।
औपचारिक स्कूल में दाखिला लेने के पहले, परिवेश और पास-पड़ोस से पारस्परिक क्रियाओं के दौरान बच्चे का विभिन्न आकारों व आकृतियों (2-D और 3-D) से सामना होता है। उसे इस बात की समझ होती है कि हर चीज का एक आकार होता है। हर आकार की कुछ आसानी से पहचानी जाने वाली विशेषताएँ होती हैं जिन्हें देखा जा सकता है, पहचाना जा सकता है, नाम दिया जा सकता है, उनका वर्णन किया जा सकता है और उन्हें वर्गीकृत भी किया जा सकता है। इन आकारों के विभिन्न उदाहरणों से बच्चे का परिचय पहले से ही होता है।
जीवन में भी सहज रूप से इसका इस्तेमाल होता है। मुर्गे को पता होता है कि उसे बाँग कब देनी है। फूलों को पता होता है कि उन्हें कब अपनी पंखुड़ियाँ खोलनी हैं। पेड़ों को पता होता है कब अपने पत्ते झड़ाने हैं। स्कूल जाना शुरू करने से ठीक पहले एक महत्त्वपूर्ण घटक के रूप में समय की अवधारणा से बच्चों का सामना होता है।
कई कारणों से मापन का पाठ्यचर्या में एक विशिष्ट स्थान होता है। मानव जीवन की रोजमर्रा की महत्त्वपूर्ण गतिविधि होने के कारण घर व अन्य जगहों पर अलग-अलग परिस्थितियों में बच्चों का मापन से स्वाभाविक तौर पर सामना होता है।
हम ऐसे लेखों का स्वागत करते हैं जो गणित के सीखने के अनुभव को बढ़ाते हैं, विशेषकर 6-14 वर्ष की आयु वर्ग के विद्यार्थियों के लिए।
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