nRich वैबसाइट की समीक्षा
समीक्षक : स्नेहा टाइटस
मार्च, 2024 में अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी पब्लिकेशन्स ने एट राइट एंगल्स को उसके मूल मक़सद और मंशा पर वापस लाने का फ़ैसला लिया — यानी, भारत की सरकारी शिक्षा प्रणाली के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं के शिक्षकों/ शिक्षक-प्रशिक्षकों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षण का संसाधन बनाना। इसलिए, यह समीक्षा प्राथमिक विद्यालय के संसाधनों पर केन्द्रित होगी। दूसरी बात यह कि पिछली समीक्षा के बाद से nRich वैबसाइट को नए सिरे से डिज़ाइन किया गया है। आइए देखें कि क्या बदला है और क्या वैसा ही है।
होम पेज https://nrich.maths.org/ सादा, खुला-खुला और व्यवस्थित है, जहाँ आप 3-18 वर्ष की उम्र के विद्यार्थियों के लिए nRich के गणित के निःशुल्क संसाधनों को खोज सकते हैं। यहाँ पर, हू इज द ‘यू’? टीचर्स, स्टूडेंट, एंड पेरेन्टस पेज पर ऊपर दिए गए टैब इसी बात को दिखाते हैं, साथ ही प्राब्लम साल्विंग स्कूल्स, इवेंटस और अबाउट एनरिच अतिरिक्त टैब हैं। यह दिलचस्प है कि इस आख़िरी टैब में वैबसाइट के काम में शामिल लोगों की व्यक्तिगत जानकारी नहीं दी गई है। इस बात पर ज़ोर देने की बजाय कि वे कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के गणित संकाय के लोग हैं, यह टैब इस बारे में बात करता है कि वे क्या मानते हैं, उनकी सोच क्या है और वे यह क्यों कर रहे हैं; और वैबसाइट का यह आरेख (चित्र–1 देखें) सब साफ़-साफ़ समझाता है।

जैसे-जैसे मैंने टीचर्स के तहत आने वाले पेजों को देखा-समझा, मुझे इन शब्दों के बारे में ज़्यादा जानकारी मिली। मेरा पहला पड़ाव अर्ली इयरस सेक्शन था और यहाँ मुझे एक्टीविटीज़, आर्टीकल, चिल्ड्रन थिंकिंग और प्रोफ़ेशनल डेवलपमेंट के लिए टैब मिले। ज़ाहिर है, मैं सीधे आख़िरी टैब पर गई और उनके न्यूज़लैटर के लिए ‘साइन–अप’ किया (पेज के निचले बाएँ कोने में स्थित टैब देखें)। वैबसाइट का वादा है कि इस न्यूज़लैटर से मुझे आगे होने वाले निःशुल्क वैबिनारों के बारे में जानकारी मिलती रहेगी।
इसके बाद, मैं एक्टीविटीज़ में गई और उनके अर्ली-स्टेज फ़ाउण्डेशन एक्टीविटीज़ (EYFS) प्रारूप की व्याख्या से एक बार फिर प्रभावित हुई। यहाँ दी गई गतिविधियाँ इस पर आधारित हैं कि बच्चे (3-5 वर्ष) अकसर क्या करते हैं और वयस्क किस तरह से उन गतिविधियों को आगे बढ़ा सकते हैं। आइए, द मड किचिन — https://bit.ly/4cmUV0E — से एक उदाहरण देखें।
| काम : खेलने के लिए ऐसी जगह तय करें जहाँ बच्चों का छोटा समूह आज़ादी से मिट्टी की रसोई (The Mud Kitchen) को खेल-खेल में समझ सके। | |
|---|---|
| शुरुआती प्रेरणा (Stimulus) | बच्चों को अकसर मिट्टी खोदने, ख़ासकर गीली मिट्टी को खोदने में, बर्तनों को मिट्टी से भरने और ख़ाली करने में, कल्पनाओं से भरे खेल खेलने और आज़ादी से बातें करने में मज़ा आता है। |
| प्रतिक्रिया (Reaction) | बड़े लोग रसोई से कई तरह की चीज़ें दे सकते हैं — पतीली, कड़ाही, पानी की सप्लाई, रसोई के छोटे-बड़े बर्तन आदि। |
| संकेत-व्याख्या (Cues-Describing) | यहाँ क्या-क्या है? |
| तार्किक रूप से समझना (Reasoning) | आपको क्यों लगता है कि यह बर्तन इस काम के लिए सही है? क्या आपको वहाँ कोई ऐसी चीज़ दिख रही है जिसका इस्तेमाल किया जा सकता है? वह किस तरह से उपयोगी होगी? |
| खुलना (Opening Out) | आप इस चीज़ के साथ क्या करना चाहेंगे? क्या यह चीज़ उतनी बड़ी है, जितनी इस काम के लिए ज़रूरी है? |
| दर्ज करना (Recording) | अगर हम इसकी फ़ोटो ले लें, तो क्या इसे याद रखने में मदद मिलेगी? |
| गणितीय सफ़र (अवधारणाएँ और शब्दावली) [The Mathematical Journey (Concepts and Vocabulary)] |
गणना समान व अलग माप |
| विकास और विविधता (Development and Variation) | रेत के गड्ढे, पानी के खेल |
| संसाधन(Resources) | बाहर खुले में ऐसी जगह जहाँ मिट्टी हो, रसोई के सामान (बर्तन, कड़ाही, चम्मच, पलटे आदि), बड़ा ड्रम (जिसे मेज़ की तरह इस्तेमाल किया जा सके), खिलौने वाला कुकर, छोटा ब्लैकबोर्ड, पानी, प्लास्टिक के टब आदि। |
मुझे सुखद आश्चर्य हुआ जब मैं यह समझ पाई कि चित्र-1 में जो तीन पहलू बताए गए हैं — अवधारणात्मक समझ एवं सहजता (Conceptual Understanding and Fluency), गणितीय तार्किकता (Mathematical Reasoning) और गणितीय मानसिक प्रवृत्तियाँ (Mathematical Mindsets) — वे रोज़मर्रा की इस सरल गतिविधि में किस तरह गुँथे हुए हैं! इन भारी–भरकम शब्दों को छोटे बच्चों के लिहाज़ से ढाला जा सकता है। 😊
प्रारम्भिक शिक्षा के बुनियादी चरण (EYFS — ईवायएफ़एस) का प्रारूप इन पहलुओं को उभारने में मदद करता है; इसके लिए यह उन बातों से शुरुआती प्रेरणा लेता है जो बच्चे अकसर करते हैं और बड़ों की प्रतिक्रिया के लिए सुझाव देता है। व्याख्या करने, तार्किक रूप से समझने, खुलने, दर्ज करने की गतिविधियों से मिलने वाले संकेतों के ज़रिए गणितीय सोच का विकास किया जाता है। गणितीय सफ़र के विवरण को पढ़ें, जिसे उनके ही शब्दों में बख़ूबी समझाया गया है।
डेवलपमेंट एंड वैरियेशन टैब में ऐसी ही अन्य गतिविधियों, गीतों और कविताओं के सुझाव हैं। रिसोर्सेस भाग में बताया गया है कि गतिविधि के लिए वास्तव में किन चीज़ों की ज़रूरत होगी। गतिविधियों को संख्या, माप, आकार और स्थान व पैटर्न जैसे अध्ययन के क्षेत्रों के मुताबिक़ जमाया गया है। यहाँ ध्यान देने की एक बात यह है कि शायद ये गीत और कविताएँ भारतीय सन्दर्भ में सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक न हों।
क्या करना है, कैसे करना है, हम क्यों ऐसा करते हैं, इससे क्या विकसित होता है और इसे आगे कैसे विकसित करना है… एक शिक्षक को मार्गदर्शन के लिए भला और क्या चाहिए? अगर हम भारत में सरकारी स्कूल की प्रणाली को देखें, तो यक़ीनन भाषा से जुड़ी कुछ समस्याएँ पेश आएँगी। इस वैबसाइट पर अँग्रेज़ी भाषा की जो विषय-वस्तु और संसाधन हैं, उनका अनुवाद उपलब्ध नहीं है; ये संसाधन यूनाइटेड किंगडम/ संयुक्त राज्य अमरीका की पाठ्यचर्याओं के लिए तैयार किए गए हैं। यहाँ मुहैया कराए गए संसाधनों का लाभ लेने के लिए भारत के स्कूली शिक्षकों को शायद ‘गूगल ट्रांसलेट’ का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। यहाँ मौजूद बहुत-सी विषय-वस्तु भारतीय पाठ्यचर्या से मेल खाती है और इन गतिविधियों को आज़माने में ख़ुद शिक्षकों को भी मज़ा आएगा।
इसी तरह, उन कक्षाओं के बच्चे इस वैबसाइट पर मौजूद अन्तर्क्रियात्मक संसाधनों का पूरा फ़ायदा नहीं उठा पाएँगे जहाँ बच्चों के लिए इंटरनेट और कम्प्यूटर की उपलब्धता सीमित है। अच्छी बात यह है कि ज़्यादातर गतिविधियों के बारे में ऐसे संसाधन उपलब्ध करवाए गए हैं, जिनकी पीडीएफ़ फ़ाइलें डाउनलोड की जा सकती हैं और प्रिंटआउट लेकर बच्चों को दिया जा सकता है।
टीचर्स टैब में दिए गए संसाधनों पर क्लिक करने पर आप ऐसे लेखों और गतिविधियों तक पहुँचते हैं, जिन्हें शुरुआती वर्ष, प्राथमिक, माध्यमिक और 16 वर्ष से अधिक आयु-वर्ग के मुताबिक़ जमाया गया है। हर गतिविधि को चुनौती के स्तर के मुताबिक़ भी जमाया गया है — यह ज़रूर है कि चुनौती के स्तर विद्यार्थियों की क्षमता के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन यह शिक्षक के लिए शुरुआती मार्गदर्शक है। कक्षा में पढ़ाने के तौर-तरीक़ों, मशहूर गणितज्ञों और गणित से जुड़े विषयों पर आधारित लेख शिक्षकों को उनकी कक्षा के विद्यार्थियों की स्थिति के मुताबिक़ अपनी पढ़ाने की शैली को ढालने में मददगार हैं।
इस समीक्षा के लिए रिसर्च करते समय, मुझे कॉलिन फ़ॉस्टर की मैथमेटिकल एट्यूड्स— https://bit.ly/4l34XWM — मिली, जिसमें उन्होंने उबाऊ और थकाने वाले अभ्यासों के लिए ‘सुहाने, ख़ूबियों भरे’ विकल्प सुझाए हैं। हालाँकि उन्होंने अपने सुझावों को किसी-न-किसी ख़ास प्रक्रिया के इर्द-गिर्द ही रचा है, लेकिन वे बस एक उत्तर की ओर ही नहीं ले जाते हैं। उनके सुझाए अभ्यास और दोहरावों से सीखना-सिखाना बहुत सहज और मज़ेदार तरीक़ों से पूरा हो जाता है — कोई शिक्षक (या माता-पिता या विद्यार्थी) और क्या चाहेगा?
मैं ख़ुद एलन विगली के लेख ‘गणित पढ़ाने के मॉडल’ — https://bit.ly/47gTJIA — से प्रभावित हुई हूँ। इस लेख में एलन ने शिक्षकों को ‘राह आसान करने वाले मॉडल’ के प्रति आगाह किया है और ‘चुनौती भरे मॉडल’ के लिए सुझाव दिए हैं। यहाँ वे मुद्दे भी हैं जो भारतीय शिक्षकों की आम समस्याएँ हैं — समय की कमी और बहुत सारी विषयवस्तु जिसे अलग-अलग क्षमताओं वाले विद्यार्थियों को पूरा पढ़ाना है। हालाँकि, ज़्यादातर भारतीय कक्षाओं में पढ़ाई-लिखाई शिक्षक की ओर से ही संचालित होती है; विद्यार्थी तो निर्देशों का पालन करने के ही आदी होते हैं। यहाँ दिए गए सुझाव शायद ऐसी कक्षाओं पर लागू न हो पाएँ। यह मुझे शिक्षक के दख़ल के व्यापक मुद्दे पर ले आता है। यहाँ दी गई गतिविधियाँ खोज-बीन, तर्क-वितर्क और समस्या-समाधान के मक़सद से बनाई गई हैं। मैं कह नहीं सकती कि भारतीय कक्षाओं में शिक्षक आसान बनाने, समझाने और हल ही बता देने से ख़ुद को रोक पाने के आदी हैं या नहीं। अगर उन्हें ज़रा इन्तज़ार करने के लिए तैयार किया जा सके, तो ये समस्याएँ और गतिविधियाँ विद्यार्थियों में ज़्यादा आज़ादी के साथ सीखने का जज़्बा जगा सकती हैं और शायद उन्हें गणित से डरने की बजाय उसका मज़ा लेने का ज़रिया बन सकती हैं।
मुझे टीचर्स पेज के हर हिस्से के नीचे दिए गए रिसोर्सेस बहुत पसन्द आए; यहाँ ऐसे संसाधन उपलब्ध हैं जिन्हें प्रिंट किया जा सकता है, जो अन्तर्क्रियात्मक हैं और लाइव हैं — इनमें से लाइव वाला समस्याओं का ऐसा समुच्चय है, जिनके उत्तर भेजने के लिए विद्यार्थियों को कहा जाता है। इसे विद्यार्थियों के लिए लिंक वाले स्क्रीनशॉट के आख़िरी कॉलम में देखा जा सकता है (यहाँ प्राथमिक, माध्यमिक और 16+ आयु वर्ग के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग लिंक दिए गए हैं)।

इस वैबसाइट में बहुत सारी रोचक गतिविधियाँ दी हुई हैं और मैंने लेख के आख़िर में कुछ लिंक दिए हैं। लेकिन मैं उन सात कारणों को बताते हुए इस समीक्षा को समाप्त करना चाहूँगी, जिनकी वजह से मैं इस वैबसाइट की पुरज़ोर सिफ़ारिश कर रही हूँ :
- यह वैबसाइट दिशा देती है : मैं कहाँ जाना चाहता हूँ? गणित पढ़ाने के लिए मेरा दूरगामी नज़रिया क्या है?
- यह आगे का नक़्शा दिखाती है : मैं वहाँ तक कैसे पहुँचूँ? इस राह में क्या-क्या रुकावटें और चुनौतियाँ आ सकती हैं? मैं इनसे बचने के रास्ते कैसे ढूँढ़ूँ? मैं दूसरों के अनुभव से कैसे सीखूँ? https://bit.ly/4r0R2lL — पर देखें। यहाँ, प्राथमिक स्तर पर पढ़ाए जाने वाले विषयों को वैबसाइट पर दी गई गतिविधियों और लेखों से जोड़ा गया है और ज़्यादा स्पष्टीकरण के बग़ैर यह मेरी बात को दर्शाता है।
- यह संसाधन मुहैया कराती है : मैंने पाया कि इन संसाधनों को भारतीय सन्दर्भ में ढालना पड़ सकता है, लेकिन ऐसा आसानी से किया जा सकता है और ज़्यादातर मामलों में ये कम ख़र्चीले भी हैं। साथ ही, इनमें शामिल अन्तर्क्रियात्मक गतिविधियाँ मज़ेदार हैं और मोबाइल फ़ोन से भी अमल में लाई जा सकती हैं। अँग्रेज़ी में निर्देश होना बड़ी अड़चन तो है, लेकिन वैब–ट्रांसलेटर का इस्तेमाल करके या किसी बड़े की मदद लेकर एक दफ़े जब ये समझ में आ जाते हैं, तो फिर विद्यार्थी घण्टों तक उन गतिविधियों से जुड़े रह सकते हैं और अपनी कुशलता के स्तरों को बढ़ाते हुए खेलते रह सकते हैं।
- यह मुश्किल शब्दजालों को आसानी से समझाती है : ‘गणितीय मानसिक प्रवृत्तियाँ’ (Mathematical Mindsets), ‘गणितीय तार्किकता’ (Mathematical Reasoning) और ‘अवधारणात्मक समझ’ (Conceptual Understanding) जैसी शब्दावलियाँ बहुत अच्छे लक्ष्य पेश करती हैं, लेकिन कोई शिक्षक अपनी रोज़ाना की पाठ-योजना में इन पहलुओं को कैसे शामिल कर सकती/ता है? अभिभावक घर पर ही इनको अमल में लाने वाले मज़ेदार और सार्थक खेल में कैसे शामिल हो सकते हैं?
- यह वैबसाइट लगातार पेशेवर विकास में उपयोगी है और साथ-ही-साथ उन शिक्षकों के लिए मददगार है जो अपना पाठ पढ़ाने के लिए कोई फ़ौरी युक्ति ढूँढ़ रहे होते हैं। इसके अलावा, वैबसाइट में दिए गए लेख आसान भाषा में हैं और दुनिया भर के शिक्षकों के सामने आने वाली समस्याओं से जुड़े हुए हैं। साथ ही, ये लेख ऐसे शिक्षकों के फ़ीडबैक और रोचक समाधान भी पेश करते हैं जिन्होंने इन समाधानों को आज़माया है।
- यह विद्यार्थियों को समस्याओं पर काम करने, अपने नतीजों को दर्ज करने और दूसरों के साथ साझा करने का बढ़ावा देती है; साथ ही, यह अच्छी सोच और समस्याओं का समाधान करने की क्षमताओं को सराहती है।
- यह विषय-वस्तु का क्षैतिज (horizontal) और लम्बवत (vertical) दोनों तरह का ज्ञान उपलब्ध कराती है, जिससे शिक्षक किसी ख़ास आयु-वर्ग के लिए विषय के विस्तार में जा सकते हैं और साथ-ही-साथ उससे पहले के और बाद के आयु-वर्ग की पढ़ाई के साथ मेल बिठा सकते हैं। उदाहरण के लिए, https://bit.ly/4rGkChj शिक्षण की ऐसी राह दिखाता है, जो शिक्षकों को यह समझने में मददगार है कि पैटर्न को समझना गणित के शिक्षणशास्त्र का इतना महत्त्वपूर्ण आधार क्यों है और इसको कम उम्र से ही कैसे विकसित किया जा सकता है।
यहाँ कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं, जिन पर मैं आपका ध्यान चाहूँगी :
| लिंक | यह क्या है? | मुझे यह क्यों पसन्द है |
|---|---|---|
| https://bit.ly/4shndyb | यह लेख चीज़ों को व्यवस्थित करने जैसी आम गतिविधि को गणित से जोड़ता है। | यह ऊपर बताए गए EYFS फ़ॉर्मेट में है, इसलिए इसका शिक्षणशास्त्रीय पहलू ज़ाहिर है। साथ ही, यह उन अच्छी आदतों से जुड़ा है जिन्हें शिक्षक और माता-पिता विद्यार्थियों में पैदा करना चाहते हैं। |
| https://bit.ly/4l46WKJ | यहाँ ऐसे कथनों की सूची है, जिन्हें हमेशा/ कभी-कभी/ कभी भी सच नहीं (Always/Sometimes/Never True) के आधार पर वर्गीकृत किया जाना है। | इस तरह की गतिविधियों से प्राथमिक स्तर पर अनुमान लगाना और सामान्यीकरण करना मुमकिन हो पाता है। |
| https://bit.ly/3MPmCov | फ़र्श पर पोस्ट-इट्स (Post-its — चिपकने वाले काग़ज़ के टुकड़ों) के ज़रिए डेटा हैंडलिंग का अभ्यास। | यह किया जा सकता है, दिलचस्प है और इससे जो दृश्य बनते हैं, वे विद्यार्थियों को पिक्टोग्राम और बार चार्ट की ओर ले जाते हैं। भारत की कुछ कक्षाओं में इसे चिपकने वाली बिन्दियों के साथ भी आज़माया गया है। |
| https://bit.ly/4cSxegL | गति-आधारित (kinesthetic) गतिविधि के साथ संख्या-कौशल का विकास। | विद्यार्थी तौर-तरीक़ों को परखते हैं, उन पर ध्यान देते हैं और उनके बारे में सीखते हैं। |
| https://bit.ly/4u4DKat | दो अंकों वाली दो संख्याओं की तुलना करना। | यह उतना आसान नहीं है जितना आप सोचते हैं! इसमें स्कोरिंग बड़ी-से-बड़ी संख्याओं को प्राप्त करने पर निर्भर करती है। |
मुझे उम्मीद है कि आपको इन संसाधनों को देखने और इस्तेमाल करने में उतना ही मज़ा आएगा, जितना मुझे आया है!