काप्रेकर के स्थिरांक की खोज में

अनुवाद : गूगल जेमिनी | पुनरीक्षण : देबब्रत साहा | सम्‍पादन : राजेश उत्‍साही

आज मुझे कक्षा में एक अतिरिक्त पीरियड मिल गया। यह दिन का आखिरी पीरियड भी था, इसलिए मैंने नियमित कक्षा चर्चा को आगे न बढ़ाने का फैसला किया। मैं ‘अपने हाथ गणित‘ पुस्तक में किसी ऐसी गतिविधि को खोज रहा था जिसे बच्‍चे एक-पीरियड में पूरी कर लें। इसी दौरान मेरी नज़र ‘काप्रेकर का स्थिरांक’ (Kaprekar’s constant) नाम के टॉपिक पर पड़ी। नाम से तो यह हाई स्कूल का कोई टॉपिक लग रहा था, लेकिन जब मैंने कुछ संख्याओं के साथ काप्रेकर स्थिरांक की प्रक्रिया को जाँचा, तो यह मज़ेदार लगा! यह हिस्सा वास्तव में इतना सरल था कि कक्षा-3 के विद्यार्थियों के लिए एक खोज-आधारित गतिविधि (exploration) तैयार की जा सकती थी, और जैसे मैं इसी की तलाश में था।

पूर्व-अपेक्षाएँ

  • बच्चों को 3-अंकीय संख्याओं को जोड़ना और घटाना आना चाहिए।
  • उन्हें किसी संख्या के अंकों को बढ़ते (आरोही) और घटते (अवरोही) क्रम में व्यवस्थित करना आना चाहिए।

कक्षा में चर्चा

मैंने कक्षा में प्रवेश किया। विद्यार्थी दिन भर की पढ़ाई के बाद थके हुए थे और इस अतिरिक्त पीरियड में खेलने के लिए समय या कम्‍प्यूटर क्लास चाहते थे। मैंने उनके हल्‍ले-गुल्‍ले और अनुरोधों को अनदेखा किया और ब्लैकबोर्ड पर ‘काप्रेकर का स्थिरांक’ लिखना शुरू कर दिया। बच्चे इसका उच्चारण करने लगे और पूछने लगे कि यह क्या है।

सुयश तिवारी

मैंने कहा, “आओ पहले सब दो मिनट शान्‍त बैठते हैं, और फिर मैं आपको इसके बारे में बताऊँगा।”
सभी बच्चे शान्‍त होकर बैठ गए। मैंने शुरुआत की : “जिस तरह विज्ञान में बेहतरीन काम करने वाले व्यक्ति को वैज्ञानिक (scientist) कहा जाता है, वैसे ही गणित में बेहतरीन काम करने वाले व्यक्ति को हम क्या कहेंगे?”

विद्यार्थियों ने अन्‍दाज़ा लगाना शुरू कर दिया — ‘मैथिस्ट’, ‘मैथिनटिस्ट’ और उच्‍चारण में मुश्किल लगने वाले अन्य शब्द।

विद्यार्थी

मैंने जवाब दिया, “हम उन्हें गणितज्ञ कहते हैं, और आज हम भारत के एक महान गणितज्ञ − काप्रेकर जी − और उनके जादुई स्थिरांक अंक (magical constant number) के बारे में बात करने जा रहे हैं।”

डी.आर. काप्रेकर महाराष्ट्र के देवलाली में एक सरकारी स्कूल में गणित के शिक्षक थे। उन्हें संख्याओं के साथ खेलना बहुत पसन्‍द था और उन्होंने संख्याओं में कई ऐसे सुन्‍दर पैटर्न खोजे जो पहले अज्ञात थे।
(स्रोत : एनसीईआरटी गणित प्रकाश, कक्षा-6)

सभी धीरे से बुदबुदाए, “जादुई स्थिरांक अंक क्या है?”
मैंने बात आगे बढ़ाई, “आओ हम भी वही काम करते हैं जो काप्रेकर जी ने किया था। अपनी कॉपियाँ निकालो, हम सब मिलकर उस जादुई स्थिरांक अंक को खोजेंगे।”
वे सभी उत्सुकता से तैयार हो गए और अपनी ‘तलवारें’ − यानी अपने पेन − हाथ में ले लिए।
“आप सभी 3-अंकीय संख्याओं से तो परिचित हैं ही। लेकिन आज हम किसी भी 4-अंकीय संख्या से शुरुआत करते हैं। हाँ तो मायरा, मुझे कोई ऐसी 4-अंकीय संख्या बताओ, जिसके चारों अंक एक जैसे न हों।”

“1762.”

मायरा

बढ़िया, यहाँ सभी अंक अलग-अलग हैं। अब मैं आपको बताता हूँ कि क्या करना है और आप सभी अपनी कॉपियों में अपने उत्तर लिखें।

4-अंकीय संख्या से शुरुआत करें। 1 7 6 2
अंकों को घटते (अवरोही) क्रम में व्यवस्थित करें।
यह पहली संख्या है :
7 6 2 1
अब इन्हीं अंकों को बढ़ते (आरोही) क्रम में व्यवस्थित करें। यह दूसरी संख्या है : 1 2 6 7
पहली और दूसरी संख्या के बीच का अन्‍तर ज्ञात करें : 6 3 5 4
अब नई संख्या के साथ यही प्रक्रिया दोहराएँ :
घटते क्रम में 6 5 4 3
बढ़ते क्रम में 3 4 5 6
अन्‍तर 3 0 8 7
घटते क्रम में 8 7 3 0
बढ़ते क्रम में 0 3 7 8
अन्‍तर 8 3 5 2
घटते क्रम में 8 5 3 2
बढ़ते क्रम में 2 3 5 8
अन्‍तर 6 1 7 4
तालिका-1 : काप्रेकर के स्थिरांक तक पहुँचने के लिए संक्रियाओं (operations) की पुनरावृत्ति का क्रम

“आओ, इन चरणों को एक बार फिर से दोहराने की कोशिश करते हैं — आप क्या देखते हैं?”

“हमें फिर से 6174 ही मिलेगा, सर!” बच्चों ने जवाब दिया।

“क्या अन्‍तर 4716 होने पर भी आपको फिर से 6174 मिलेगा?”

“हाँ, क्योंकि इसमें भी वही अंक हैं : 7, 6, 4, और 1; इसलिए हम उन्हीं संख्याओं के बीच का अन्‍तर निकाल रहे हैं।”

“ठीक है,
बहुत बढ़िया! अब, यही प्रक्रिया किसी दूसरी 4-अंकीय संख्या के साथ आज़माएँ। आओ देखें कि क्या हम वैसी ही स्थिति पर पहुँचते हैं। इस बार, आप में से हर कोई अपनी ख़ुद की कोई संख्या ले और इस प्रक्रिया को दोहराए।”

एक मिनट के भीतर ही, सभी छोटे गणितज्ञों की तरह काम करने लगे — घटते क्रम, बढ़ते क्रम और घटाव की इस पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए। दस से पन्‍द्रह मिनट के बाद, कई विद्यार्थी उत्साहित होकर आगे आए :

“हमें फिर से वही संख्या 6174 मिली!”

“हाँ, आप सभी को वही संख्या मिली होगी। हम इसे काप्रेकर का स्थिरांक 6174 कहते हैं। हम इसे स्थिरांक इसलिए कहते हैं क्योंकि यह बदलता नहीं है।”

तब तक पीरियड समाप्त हो चुका था।

मैंने उन्हें घर पर कोशिश करने के लिए दो संख्याएँ दीं। कुछ आगे बढ़ चुके विद्यार्थियों के लिए, मैंने एक चुनौती जोड़ी : “क्या 3-अंकीय या 5-अंकीय संख्याओं के लिए भी ऐसा ही कोई स्थिरांक है? अगर आपको ऐसा कोई अंक मिलता है, तो हम उसका नाम आपके नाम पर रखेंगे।”

अगले दिन

“मुझे 3 अंकों का स्थिरांक मिल गया — 495!”

“मुझे भी मिल गया!”

मुझे कक्षा-3 के विद्यार्थियों से इस स्तर की खोज की उम्मीद नहीं थी। तृप्ति, मायरा और जिज्ञासु ने 3-अंकीय संख्या खोज निकाली थी। उन्होंने स्वतंत्र रूप से कई संख्याओं पर इस प्रक्रिया को आज़माया और स्थिरांक ढूँढ़ लिया। यहाँ तक कि मुझे भी 3 अंकों के इस स्थिरांक के बारे में पता नहीं था। मैंने उनके काम की सराहना की।

“लेकिन मुझे 5-अंकीय संख्याओं का कोई स्थिरांक नहीं मिला। यह किसी एक संख्या पर जाकर नहीं रुकता, लेकिन मैंने यह ज़रूर देखा कि संख्याओं का एक ही सेट बार-बार रिपीट होता है।”

जिज्ञासु

मैंने समस्या को समझा और खुद भी करके देखा। हाँ, यह कोई एक संख्या नहीं थी, बल्कि कुछ चरणों के बाद संख्याओं का एक सेट चक्र (cycles) के रूप में दिखाई देने लगता है। हमने इस पर आगे और काम करने का फ़ैसला किया। हमें इंटरनेट पर पता चला कि 2-अंकीय और 5-अंकीय संख्याओं के लिए कोई एक निश्चित संख्या (स्थिरांक) नहीं होती, बल्कि कुछ निश्चित चक्र होते हैं। मैंने जिज्ञासु को 2-अंकीय संख्याओं पर काम करने के लिए कहा और मैंने खुद 5-अंकीय संख्याएँ ले लीं।

2-अंकीय संख्या के लिए जिज्ञासु के अवलोकन निम्नलिखित थे :

Kaprekar-fig-1
चित्र-1 : जिज्ञासु का अवलोकन

जब मैंने 5-अंकीय संख्याओं पर काम करना शुरू किया, तो मुझे जिज्ञासु के अवलोकन जैसा ही परिणाम मिला। दो से पाँच चरणों के बाद, संख्या एक चक्र (cycle) के भीतर आने लगती हैं। लेकिन यहाँ, एक से अधिक प्रकार के चक्र थे। मैंने लगभग 25 अलग-अलग 5-अंकीय संख्याओं पर इसे आज़माने के लिए एक प्रोग्राम (कम्‍प्यूटर कोड) का उपयोग किया और पाया कि मेरे द्वारा जाँची गई सभी संख्याएँ निम्नलिखित तीन चक्रों में से किसी एक पर जाकर समाप्त होती हैं।

चित्र-2 : 5-अंकीय काप्रेकर अनुक्रम के तीन चक्र

मुख्य निष्कर्ष

  • 4-अंकीय संख्याओं के लिए काप्रेकर के स्थिरांक 6174 की ही तरह, 3-अंकीय संख्याओं को भी जब इसी प्रक्रिया से गुज़ारा जाता है, तो वे एक स्थिरांक 495 पर पहुँचती हैं।
  • 2-अंकीय और 5-अंकीय संख्याओं के लिए यह प्रक्रिया किसी एक एकल स्थिरांक पर नहीं, बल्कि एक चक्र पर जाकर समाप्त होती है।
  • ये सभी संख्याएँ (चाहे वे स्थिरांक हों या चक्र में आने वाली संख्याएँ) 9 से विभाज्य होती हैं।
  • स्थिरांक और दोहराव वाले चक्र, दोनों पर ही अधिकतम 7 चरणों में पहुँचा जा सकता है।
  • शुरु करने के लिए ली जाने वाली संख्या में कम-से-कम दो अंक अलग-अलग होने चाहिए। (उदाहरण के लिए 3222 जैसी संख्या का पहला अन्‍तर 3-अंकीय संख्या 999 आता है, लेकिन इस संख्या को 0999 के रूप में लेने पर, हम चौथे चरण में काप्रेकर के स्थिरांक तक पहुँच सकते हैं।)
चित्र-3 : 2-अंकीय काप्रेकर अनुक्रम का चक्र

शिक्षकों के लिए मुख्य बातें

  • संख्याओं के प्रति प्रेम बढ़ाना : आमतौर पर, विद्यार्थी गणित के और अधिक सवाल नहीं माँगते हैं, लेकिन इस कक्षा में विद्यार्थी खुद कह रहे थे : “हमें एक और संख्या दीजिए, हम स्थिरांक ढूँढ़ेंगे।” इस तरह मैं बिना किसी बाहरी दबाव या ज़बरदस्ती के, उन्हें उधार लेने (regrouping) वाले 4-अंकीय संख्याओं के घटाव के नए कौशल का अभ्यास कराने में सफल रहा।
  • लगातार प्रयास करने और समस्या-समाधान के कौशल का विकास : विद्यार्थियों को बार-बार एक ही काम करना उबाऊ लगता है, लेकिन उन सभी ने लगातार प्रयास करके सवालों को हल किया और स्थिरांक खोज निकाला। कुछ विद्यार्थियों को स्थिरांक तक पहुँचने के लिए 7 चरणों तक जाना पड़ा, जो कक्षा-3 के विद्यार्थियों के लिए काफ़ी चुनौतीपूर्ण काम है।
  • गणितज्ञों का परिचय – सैद्धान्‍तिक नहीं बल्कि व्यावहारिक : ‘गणितज्ञ’ जैसे नए शब्द से शुरुआत करके, उन्हें काप्रेकर जी के जीवन के बारे में जानने का मौक़ा मिला − जो कि एक साधारण ग्रामीण शिक्षक थे और जिन्होंने गणित के प्रति अपने अनन्य प्रेम के कारण अपनी खोजों को जारी रखा। मैंने बच्‍चों को एक अन्‍य गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के बारे में भी सीधे-सीधे नहीं बताया, बल्कि श्रीनिवास रामानुजन के प्रसिद्ध जादुई वर्गों (Srinivasa Ramanujan’s famous magic squares – https://bit.ly/4dxCEhg) से शुरुआत करने का फ़ैसला किया।
  • करके सीखने से बढ़ा आत्मविश्वास : एक दिन बाद, जब मैंने पूछा, “कौन आगे आकर काप्रेकर स्थिरांक के बारे में बात कर सकता है?” तो कई हाथ खड़े हो गए, क्योंकि उन्होंने ख़ुद इसका अभ्यास किया था और उन्हें पूरा भरोसा था कि वे इस प्रक्रिया को समझा सकते हैं। साथ ही, मैंने इच्छुक विद्यार्थियों को अपनी ओर से अन्य स्थिरांक संख्याओं को खोजने का मौक़ा भी दिया।

सम्‍पादकीय टीप

जो काम खाली पीरियड के दौरान विद्यार्थियों को व्यस्त रखने के लिए एक गतिविधि के द्वारा साधारण सी खोज के रूप में शुरू हुआ था, वह आगे चलकर विद्यार्थियों और शिक्षक दोनों के लिए सीखने का एक शानदार अनुभव बन गया। यह शिक्षक अपने विद्यार्थियों के साथ खुद भी एक खोजकर्ता (explorer) बन गए और अलग-अलग क्षमताओं वाले विद्यार्थियों को अपनी सीमाओं से आगे बढ़ने और एक-दूसरे से सीखने की चुनौती देने में सफल रहे। वास्तव में, यह खाली समय का एक बेहद मूल्यवान उपयोग है!

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