गणित!प्यार से सीखें,सीखने से प्यार करें!

गणित! प्यार से सीखे

गणित से प्रेम
गणित को आमतौर पर दिमाग़ के साथ जोड़ा जाता है और इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि गणित में दक्षता गर्व की बात है, वरीयता की बात है, और उन लोगों को ख़ारिज कर देने की बात है जो इसमें उत्कृष्ट नहीं हैं। लेकिन गणित से लगाव कैसे हो, इसके बारे में कभी सोचा है? इसे देखने के अपेक्षाकृत सौम्य, भयमुक्त स्थान बना सकते हैं जो विद्यार्थियों को गणित से प्रेम करना सिखा सकें ?

सम्पादक की ओर से...

गणितीय खोज का एक दशक पूरा होने का उत्सव

प्रिय पाठको,

इस अंक के पन्नों पर, हम न सिर्फ़ गणित सीखने-सिखाने के समृद्ध अनुभवों का बल्कि एक असाधारण उपलब्धि का उत्सव भी मना रहे हैं — अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय में मैथ स्पेस की दसवीं सालगिरह। पिछले एक दशक में, यह स्थान गणित शिक्षा में खोजबीन, सीखने और प्रेरणा का एक जीवन्त केन्द्र बन गया है।

गणितीय प्रेरणा का एक दशक

अपने विशेष सेक्शन में, दो आकर्षक रचनाओं के माध्यम से हम इस उपलब्धि को चिह्नित कर रहे हैं। नन्दिता हमारे लिए एक ऐसा विचारोत्तेजक इंटरव्यू लाई हैं जो मैथ स्पेस की यात्रा और बीते सालों में इसके प्रभाव पर विचार करता है। इसका साथ देने के लिए है एक फ़ोटो फ़ीचर जो मैथ स्पेस में रखी अनोखी गणितीय सामग्री (mat(h)erials) को दर्शाता है, और पाठकों को उन संसाधनों की एक दृश्यमयी यात्रा पर ले जाता है जिन्होंने असंख्य शिक्षार्थियों को प्रेरित किया है। साथ मिलकर, ये लेख जिज्ञासा की उस भावना और गहरी समझ को प्रस्तुत करते हैं जो मैथ स्पेस को परिभाषित करती है।

कक्षा से खेल के मैदान तक : एक्शन में गणित

हमारे कक्षा में सेक्शन में कई तरह के लेख हैं, और हर एक में प्रारम्भिक गणितीय शिक्षा के महत्त्वपूर्ण पहलुओं को उठाया गया है। नारायण जोड़-घटाने से जुड़े इबारती सवालों को सिखाने की चुनौती लेते हैं, और शिक्षकों के लिए व्यवहारिक कार्यनीतियाँ प्रस्तुत करते हैं। अस्‍मा और जीवेश बाल-शिक्षार्थियों को पैटर्न से परिचित कराने के अपने कक्षा अनुभव साझा कर रहे हैं। क्षमा मॉण्‍टेसरी-आधारित गणितीय वस्तुओं पर प्रकाश डालती हैं और मार्गदर्शन देती हैं कि इन्हें किस तरह नियमित कक्षाओं में इस्तेमाल के अनुकूल बनाया जा सकता है। अनुष्का छोटे बच्चों को एल्गोरिदम की अवधारणा से परिचित कराने के लिए नई सूझ-बूझ, नए नज़रिए पेश करती हैं ताकि इन जटिल विचारों को कम उम्र में ही बच्चों के लिए सुगम बनाया जा सके।

गणित का मज़ा : खेल-खेल में खोजें

गणित का मज़ा सेक्शन कक्षा के परे सीखना जारी रखता है। यह दिखाता है कि किस तरह गणित मज़ेदार भी और बौद्धिक रूप से प्रेरक भी, दोनों हो सकता है। यह सेक्शन एक नए ढंग से शुरू होता है — शिक्षकों के बीच एक ‘ऑनलाइन’ चर्चा कि विद्यार्थियों को भिन्न से परिचित कराने का सर्वश्रेष्ठ तरीक़ा क्या हो सकता है। अजय कुमार स्वयं करके सीखने वाली पेपर कटिंग गतिविधियों के माध्यम से रैखिक सममिति की पड़ताल करते हैं और इस अमूर्त अवधारणा को आकर्षक एवं स्पर्शनीय बनाते हैं। तेजस एक बेहद आकर्षक गणितीय सवाल का सामना करने और उसे सुलझाने का व्यक्तिगत क़िस्सा साझा कर रहे हैं। अन्त में वे हमारे पाठकों को माथापच्ची करने के लिए कुछ सवाल देते हैं।

शिक्षण के लिए सामग्री, समझने के लिए वस्तुएँ

समीक्षा सेक्शन में शिक्षण सामग्री पर ध्यान देना जारी है — गहरी समझ प्रदान करने वाले दो आलेखों के साथ। मोख़्तर अपने कक्षा के अनुभव से समझ हासिल करते हुए शिक्षण साधन के रूप में ऐरो कार्ड के इस्तेमाल की पड़ताल करते हैं, और गणितीय अवधारणाओं को समझने में विद्यार्थियों की मदद करने में इनकी प्रभाविता पर रोशनी डालते हैं। मैथ स्पेस द्वारा डाइन्स ब्लॉक और स्टैटिक बीड का एक तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। इसमें शिक्षकों को इस बारे में व्यवहारिक मार्गदर्शन दिया गया है कि शिक्षार्थियों के लिए अमूर्त विचारों को ज़्यादा मूर्त बनाने के लिए किस प्रकार इन साधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

पाठ्यपुस्तक के परे गणित

इस अंक के पुलआउट में पद्मप्रिया अपनी शृंखला को आगे बढ़ाते हुए पैसे की अवधारणा पर ऐसी गतिविधियाँ प्रस्तुत करती हैं जो कक्षा की सीखों का मेल वास्तविक जीवन के उपयोगों से कराती हैं। ये गतिविधियाँ गणितीय अवधारणाओं को रोज़मर्रा के आर्थिक अनुभवों से जोड़ने में बच्चों की मदद करने के लिए तैयार की गई हैं, जो सीखने को ज़्यादा अर्थपूर्ण और व्यवहारिक बनाती हैं।

ऑनलाइन सेक्शन से मिले नए नज़रिए

और अन्त में, हमारे ऑनलाइन सेक्शन में ऐसे दो योगदान हैं जो गणितीय समुदाय में छोटी उम्र की आवाज़ों की रचनात्मकता और नवाचार पर प्रकाश डालते हैं। दीक्षा, जो एक विद्यार्थी हैं, एक ऐसी दिलचस्प ज्यामितीय संरचना पेश कर रही हैं जो किसी वर्ग को नए और अनपेक्षित तरीक़ों से n भागों में विभक्त करने के लिए पाठकों को चुनौती देती है। गौरी, जो एक विद्यार्थी-शिक्षक हैं, वर्गमूलों के बारे में एक ऐसे सवाल को अपने विद्यार्थियों के सामने रखने का अपना अनुभव बाँटती हैं जिसने न सिर्फ़ उनके विद्यार्थियों को बाँधे रखा बल्कि उनके बीच जीवन्त चर्चाओं को भी जन्म दिया।

मैथ स्पेस में सार्थक काम करने का एक दशक पूरा होने का उत्सव मनाते हुए और भविष्य की ओर देखते हुए हमें वे अन्तहीन सम्भावनाएँ स्मरण हो आती हैं जो गणित को सीखना और सिखाना हमारे सामने रखती हैं। आइए, हम गणित की खोजबीन करना, सवाल करना और उसके साथ जुड़े रहना जारी रखें और ऐसे स्थान निर्मित करें जहाँ जिज्ञासा पनपती हो और समझ गहरी होती हो।

आशा है, आपको पढ़ने में मज़ा आएगा और आपकी गणितीय यात्रा हमेशा की तरह रोमांचक होगी!

हार्दिक शुभकामनाएँ,

मोहन आर.
सह-सम्‍पादक

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