डाइन्स ब्लॉक्स और स्टेटिक बीड्स : एक तुलनात्मक विश्लेषण
बच्चों को संख्याओं से परिचित कराते समय निम्नलिखित के बीच तीन-तरफ़ा सम्बन्ध स्थापित करना बहुत ज़रूरी होता है :
- दर्शाई गई मात्रा
- संख्या का नाम और
- संख्या सूचक चिह्न या प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व (चित्र-1)
बेस-10 ब्लॉक स्थानीय मान के पीछे के विचार को समझने या इस बात को समझने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि हम संख्याओं को 10-10 के समूह में बाँधकर कैसे लिखते हैं। जहाँ सबसे उपयोगी दो-आयामी बेस-10 ब्लॉक हैं जो कि फ़्लैट-लॉन्ग-यूनिट (एफ़एलयू) के नाम से भी लोकप्रिय हैं, वहीं अलग-अलग लोगों द्वारा त्रि-आयामी ब्लॉक के दो संस्करणों की कल्पना भी की गई है। ‘एट राइट एंगल्स’ के क्रमशः मार्च 2024 और जुलाई 2024 के अंकों में हम इस पर पहले ही चर्चा कर चुके हैं कि एफ़एलयू [1] क्या है और किस तरह यह बीजगणित टाइल्स [2] में सामान्यीकृत होता है। इस बार हम त्रि-आयामी संस्करणों पर क़रीब से नज़र डालेंगे।

डाइन्स ब्लॉक
हंगरी के गणितज्ञ ज़ोल्टन डाइन्स (1916-2014) ने त्रि-आयामी बेस-10 ब्लॉक को लोकप्रिय बनाया। इसकी इकाई आमतौर पर 1 सेमी × 1 सेमी × 1 सेमी का एक छोटा घन होता है। ‘दहाई’ 10 सेमी × 1 सेमी × 1 सेमी वाला एक लम्बा घनाभ होता है जिसे छड़ भी कहा जाता है। इसमें खाँचे होते हैं ताकि कोई भी आसानी से देख सके कि 10 इकाइयाँ एक क़तार में हैं। ‘सैकड़ा’ 10 सेमी × 10 सेमी × 1 सेमी का एक सपाट घनाभ होता है जिसे फलक भी कहा जाता है। खाँचों से पता चलता है कि इसमें 10 दहाइयाँ और 100 इकाइयाँ, दोनों हैं। ये तीन ब्लॉक मूलतः एफ़एलयू के जैसे हैं, लेकिन इकाई मोटाई वाली हैं (चित्र-2)।
‘हज़ार’ 10 सेमी × 10 सेमी × 10 सेमी का एक बड़ा घन होता है जिसकी सभी छह सतहों पर खाँचे होते हैं। अगर कोई 10 ‘सैकड़ा’ को एक के ऊपर एक रखे तो वह देख सकता है कि इन सबका संयुक्त आयतन हज़ार घन के बराबर है (चित्र-3)। चूँकि हरेक ब्लॉक (इकाई को छोड़कर) को 10 छोटे ब्लॉकों से बदला जा सकता है, यानी 1 हज़ार = 10 सैकड़ा, 1 सैकड़ा = 10 दहाई, 1 दहाई = 10 इकाइयाँ, सभी ब्लॉकों का रंग एक जैसा होना चाहिए, उनका आकार चाहे जो भी हो।


ऑनलाइन संस्करण
कई ऑनलाइन संस्करणों (जैसे मैथिगॉन पॉलीपैड में नम्बर क्यूब्स) में अलग-अलग आकार के ब्लॉक के लिए अलग-अलग रंग होते हैं। यह बहुत भ्रामक हो सकता है जब कोई बैंगनी रंग का हज़ार हरे रंग के 10 सैकड़ों में विभाजित हो जाता है या नारंगी रंग की 10 इकाइयाँ जुड़कर नीले रंग की दहाई बन जाती हैं (चित्र-4)।

शुक्र है कि इसमें उपयोगकर्ता रंग को बदल सकता है (चित्र-5)। लेकिन जब भी किसी ब्लॉक को आगे विभाजित किया जाता है या एक ही तरह के 10 ब्लॉकों को एक साथ जोड़ दिया जाता है तो परिणामी ब्लॉक अपने पहले से तयशुदा रंगों को अपना लेते हैं। इसलिए ये वर्कशीट आदि के लिए चित्र बनाने में बहुत उपयोगी हो सकते हैं। अगर बाल-शिक्षार्थी इन ऑनलाइन ब्लॉकों के साथ ख़ुद खेलते हैं तो रंग बदलने को लेकर उनके सवाल जायज़ होंगे।

पॉलीपैड संस्करण का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि प्रत्येक प्रकार के ब्लॉक का अभिविन्यास निश्चित है, यानी, दस हमेशा खड़े रहते हैं और लेटते नहीं हैं, सौ हमेशा दाईं ओर मुँह करके खड़े रहते हैं और कभी बाईं ओर मुँह नहीं करते! लेकिन यह आयाम (1-10) चुनकर एक नया ब्लॉक बनाने की भी अनुमति देता है। तो, 1-10-10 बाईं ओर मुँह करके एक प्लेट बनाता है; 10-10-1 एक लेटी हुई प्लेट है; 10-1-1 और 1-10-1 अलग-अलग दिशाओं में पड़ी हुई छड़ें हैं (चित्र-6)।

स्टेटिक बीड्स
इतालवी चिकित्सक और शिक्षिका मारिया मॉण्टेसरी (1870-1952) ने बच्चों को पढ़ाने के लिए कई तरह की सामग्री विकसित की थी, साथ ही एक शिक्षणशास्त्र और शिक्षा का दर्शन भी विकसित किया जिसे मॉण्टेसरी पद्धति के नाम से जाना जाता है। ऐसा ही एक सेट है स्टेटिक बीड्स या सुनहरे मोती (चित्र-7)। इसमें ‘इकाई’ एक एकल (सुनहरा) मनका होता है जिसे एक तार लुढ़कने से रोकता है जो दोनों तरफ़ दो हैंडल प्रदान करता है। ‘दहाई’ ऐसे 10 मनके होते हैं जिन्हें एक तार में पिरोया गया है (जिसे डोरी कहा जाता है)। ‘सैकड़ा’ ऐसे 10 तार से बना होता है जो एक सपाट संरचना (जिसे वर्ग कहा जाता है) बनाते हुए जुड़े होते हैं।
तो, वास्तव में सैकड़ा में \(10 \times10 = 100\) मोती होते हैं। इसी तरह ‘हज़ार’ ऐसे \(10\) वर्ग हैं जिन्हें मिलाकर एक घन बनता है। तो, असल में इसमें \(10 \times 100 = 1000\) मोती हैं। यह देखा जा सकता है कि ‘हज़ार’ साफ़तौर पर मोतियों की 10 परतें हैं, जहाँ हरेक परत एक ‘सैकड़ा’ है। इसके अलावा, एक शिक्षार्थी यह महसूस कर सकता है कि सैकड़ा या दहाई या एक इकाई की तुलना में हज़ार कितना भारी है। तो, स्टेटिक बीड्स का सेट न केवल दृश्य है बल्कि एक स्पर्शनीय सामग्री भी है। इनका इस्तेमाल दशकों तक शिक्षार्थियों द्वारा पूर्व-प्राथमिक स्तर (3-5 वर्ष) पर किया गया है।

अलबत्ता, इसे बनाना ज़्यादा महँगा और कठिन है। इसलिए, परिचय के बाद स्टेटिक बीड्स की जगह कभी-कभी लकड़ी के ब्लॉकों का इस्तेमाल किया जाता है। मोतियों को दर्शाने के लिए ब्लॉकों पर वृत्त बनाए जाते हैं (चित्र-8)।
अगर धातु के तारों की जगह प्लास्टिक के धागों का इस्तेमाल किया जाए तो स्टेटिक बीड्स को बनाना आसान हो सकता है (चित्र-9)। दहाई, सैकड़ा और हज़ार कम सख़्त होंगे, लेकिन उद्देश्य वही होगा। और एक हज़ार को इस तरह से बनाना सम्भव है कि 10 परतें बहुत स्पष्ट हों (चित्र-10) । यह आइडिया देने के लिए अनुपमा एस.एम., अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय को धन्यवाद।

सम्भावित विस्तार
तीन अपेक्षाकृत छोटे डाइन्स ब्लॉक में एफ़एलयू के सभी फ़ायदे हैं। लेकिन तीसरे आयाम के कारण इन्हें बनाना ज़्यादा कठिन है। हालाँकि, ‘हज़ार’, जिसमें असल में तीसरे आयाम का इस्तेमाल होता है, बाल-शिक्षार्थियों को 1000 का एहसास देने में मदद नहीं करता। कई बच्चे इसे 600 की तरह देखते हैं क्योंकि प्रत्येक फ़लक एक सैकड़ा होता है। वयस्क और अधिक उम्र के विद्यार्थी तो घन के आयतन को लम्बाई × चौड़ाई × ऊँचाई के रूप में देख सकते हैं, यानी 10 × 10 × 10 = 1000 लेकिन छोटे बच्चों के लिए इसे समझना बहुत मुश्किल लगता है। इसके अलावा, बाज़ार में उपलब्ध ब्लॉक आमतौर पर खोखले होते हैं। ऐसे ब्लॉक में वज़न के लिहाज़ से हज़ार वाला ब्लाक 10 सैकड़ा या 100 दहाई के बराबर नहीं होगा, क्योंकि 10 सैकड़ा और 100 दहाई में बड़े 10 × 10 × 10 के घन होंगे, जिनमें अधिक विभाजन होते हैं।

वैसे, त्रि-आयामी बेस-10 ब्लॉक यह समझने में उपयोगी हो सकते हैं कि प्रत्येक अंक के साथ मात्रा कैसे बढ़ती है, यानी, घातीय वृद्धि का एहसास : 1(घन) → 10 (छड़) → 100 (फ़लक) → 1000 (बड़ा घन) → 10,000 (बड़ी छड़) → 1,00,000 (बड़ा फ़लक) → 10,00,000 (और भी बड़ा घन)। ऐसे मॉडल लकड़ी या अन्य सामग्री से बनाए जा सकते हैं और यह समझने में मदद कर सकते हैं कि 10 लाख लिखने में दो बार अल्पविराम क्यों आता है। तो, त्रि-आयामी बेस-10 ब्लॉक या घनाभ मिडिल स्कूल स्तर (कक्षा 6-8) में काफ़ी सहायक होते हैं, लेकिन बुनियादी स्तर (पूर्व-प्राथमिक और कक्षा-1, 2) या यहाँ तक कि कक्षा-3 में भी नहीं। भले ही मॉडल न बनाए जा सकें, चित्र-11 जैसे दृश्य अधिकांश शिक्षार्थियों को यही समझ प्रदान कर सकते हैं।

इनका उपयोग दशमलव के लिए भी किया जा सकता है, जिसकी चर्चा ‘एट राइट एंगल्स’ के मार्च \(2024\) अंक में प्रकाशित दशमलव विभाजन [3] में की गई थी।
इसके विपरीत, स्टेटिक बीड्स को बड़ी संख्याओं के लिए (सैद्धान्तिक रूप से) इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन यह काफ़ी थकाऊ होगा। इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि चूँकि सीखने वाले तब तक काफ़ी बड़े हो चुके होते हैं, यह अपेक्षा की जाती है कि गणना पर निर्भर रहने की बजाय सार निकाला जाए और आयतन सूत्र और माप का उपयोग किया जाए। इसलिए, 5 या 6 अंक वाली या बड़ी संख्याओं के लिए इस तरह के मॉडल बनाने की ज़रूरत कम ही होती है। और चूँकि एक मोती को विभाजित करना व्यावहारिक रूप से असम्भव है, इसलिए इस मॉडल को दशमलव तक नहीं बढ़ाया जा सकता।
| डाइन्स ब्लॉक | स्टेटिक बीड्स | |
|---|---|---|
| श्रेय | ज़ोल्टान डायनेस (1916-2014) | मारिया मॉण्टेसरी (1870-1952) |
| कालानुक्रमिक क्रम में | बाद में आया | पहले आया |
| सैद्धान्तिक रूप से | आयतन पर आधारित | गणना पर आधारित |
| समझ सकते हैं | बड़ी उम्र के शिक्षार्थी, कक्षा 4-5, नौ वर्ष से अधिक | पूर्व-प्राथमिक स्तर के शिक्षार्थी, तीन वर्ष से अधिक |
| निर्माण | आसान | अधिक श्रम और गहन सामग्री |
| लागत | कम | ज़्यादा |
| विस्तार | बड़ी संख्याओं और दशमलव तक विस्तार किया जा सकता है | बड़ी संख्याओं तक विस्तार किया जा सकता है (सैद्धान्तिक रूप से), दशमलव तक नहीं बढ़ाया जा सकता |
संक्षेप में, डाइन्स ब्लॉक लम्बे समय में अधिक विस्तार योग्य और सार्थक है। लेकिन यह बाल-शिक्षार्थियों को पर्याप्त रूप से \(1000\) की समझ प्रदान नहीं करता। स्टेटिक बीड्स उनसे बेहतर ढंग से जुड़ते हैं। इसलिए, सीखने वाले की उम्र के आधार पर इन दोनों में से किसी एक को चुनना चाहिए।
- द्विविमीय आधार-10 ब्लाक https://publications.azimpremjiuniversity.edu.in/5568/1/13_FLU-review.pdf
- बीज गणितीय टाइल्स की समीक्षा https://publications.azimpremjiuniversity.edu.in/5703/1/16_Algebra%20Tiles.pdf
- दशमलव संख्याओं के भाग https://publications.azimpremjiuniversity.edu.in/5563/1/08_Division%20with%20Decimals.pdf
