पॉलीओमिनोज़ और घन के आकृति-जाल की पड़ताल : कक्षा-4 के विद्यार्थियों के साथ एक अनुभव

अनुवाद : रोशन ख़ान | पुनरीक्षण : प्रतिका गुप्ता | कॉपी-एडिटर : अतुल अग्रवाल

यह लेख मुम्‍बई की शिखा अकादमी के कक्षा-4 के विद्यार्थियों साथ आयोजित एक सत्र में प्राप्‍त उनकी प्रतिक्रियाओं और उनके तर्क को प्रस्तुत करता है। यह एक निम्न आय वर्ग का विद्यालय है जहाँ कैम्ब्रिज पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है। यह सत्र एक हैंडस-ऑन गणितीय गतिविधि पर आधारित था और इसमें 18 विद्यार्थियों ने भाग लिया । इसका शीर्षक था — ‘पॉलीओमिनोज़ एंड नेट्स ऑफ़ अ क्यूब’ (Polyominoes and nets of a cube)। यह गतिविधि अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी (2022) की पत्रिका एट राइट एंगल्स में प्रकाशित एक वर्कशीट से ली गई थी (https://bit.ly/4a5ztvB देखें)। पॉलीओमिनोज़ समतल ज्यामितीय आकृतियाँ होती हैं जो दो-या-दो से अधिक समान आकार के वर्गों को किनारों से जोड़कर बनाई जाती हैं। ये डोमिनोज़, ट्रोमिनोज़, टेट्रोमिनोज़ और पेंटोमिनोज़ जैसे विभिन्न रूपों में हो सकती हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि कितने वर्ग हैं, और उन्हें किस प्रकार से जोड़ा गया है।

खोज का विवरण

इस गतिविधि का लक्ष्य विद्यार्थियों को पॉलीओमिनोज़ से परिचित कराना, अलग-अलग पॉलीओमिनोज़ के बीच के सम्बन्धों की खोज करना, और उनकी सोचने की क्षमता को बढ़ाना था। इस प्रक्रिया में विद्यार्थियों ने आकृतियों को घन के चारों ओर लपेटकर अपनी स्थानिक समझ (spatial reasoning) को मज़बूत किया। साथ ही, यह पहचाना कि कौन-से हेक्सोमिनोज़ मिलकर एक घन का जाल तैयार कर सकते हैं। हालाँकि एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्‍तकों में कक्षा-7 में औपचारिक रूप से घन के जाल की अवधारणा से परिचय कराया जाता है, लेकिन इस गतिविधि ने कक्षा-4 के विद्यार्थियों को पहले ही इस अवधारणा से परिचित होने का अवसर दे दिया। यह एक खोज-आधारित सीखने का अनुभव था जिसमें पॉलीओमिनोज़ के माध्यम से हैंडस-ऑन जाँच-पड़ताल करते हुए विद्यार्थियों ने इस विषय को शुरुआती स्तर पर समझा।

यह गतिविधि एक-एक घण्टे के तीन सत्रों में आयोजित की गई थी। इससे विद्यार्थियों को खोज करने, चर्चा करने, और अपनी गणितीय सोच पर विचार करने के लिए पर्याप्त समय मिल सका।

सत्र-1 : पॉलीओमिनोज़ के बीच ‘पेरेंट-चाइल्ड’ (Parent-Child) सम्बन्धों का परिचय

पहला सत्र एक आसान टास्‍क के साथ शुरू किया गया। विद्यार्थियों से कहा गया कि वे दो वर्गों को एक-दूसरे के किनारों से जोड़ें, और यह पता लगाएँ कि ऐसा कितने तरीक़ों से किया जा सकता है। शुरुआत में विद्यार्थियों ने वर्गों को कई अलग-अलग तरह से जोड़ा : जैसे कि ऊपर की ओर, बाजू की ओर, तिरछे में और कुछ विद्यार्थियों ने कोने से कोना भी जोड़ दिया। इससे यह निर्देश फिर से दोहराना पड़ा कि वर्गों को एक-दूसरे के सिर्फ़ किनारों से ही जोड़ना है, कोनों से नहीं।

चित्र-1 : विद्यार्थियों ने वर्गों को इस चित्र की तरह कोने से कोना जोड़ा था।
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चित्र-2 : विद्यार्थियों ने इस तरह से वर्गों को अलग-अलग तरीक़ों से जोड़कर दिखाया।

इस गतिविधि को आगे बढ़ाते हुए एक सवाल पूछा गया, “क्या ये आकृतियाँ अलग-अलग हैं, या एक को घुमाकर दूसरी बनाई जा सकती है?” इस सवाल ने विद्यार्थियों को घूर्णन और अनूठेपन (uniqueness) पर सोचने के लिए प्रेरित किया। चर्चा के बाद विद्यार्थियों ने समझा कि भले ही आकृतियों की जमावट अलग-अलग दिख रही हो, लेकिन असल में वे एक ही आकृति हैं क्योंकि उन्हें घुमाकर एक जैसा बनाया जा सकता है। इसी तरह, जिन आकृतियों को प्रतिबिम्ब के माध्यम से एक-दूसरे में बदला जा सकता है, उन्हें एक ही माना जाता है। दूसरे शब्दों में, दर्पण प्रतिबिम्बों को अलग नहीं माना जाता है।

इस चरण में, मोनोमिनो, डोमिनो, ट्रोमिनो, टेट्रोमिनो, पेंटोमिनो आदि जैसी औपचारिक शब्दावली से परिचय कराया गया। यह भी बताया गया कि आकृति का नाम उसमें मौजूद इकाई वर्गों की संख्या पर निर्भर करता है। इसके बाद विद्यार्थियों से ट्रोमिनो बनाने के लिए कहा गया। हालाँकि, यह कार्य विद्यार्थियों को अकेले ही करना था, फिर भी विद्यार्थी स्वाभाविक रूप से आपसी चर्चाओं में शामिल हो गए। वे अपनी आकृतियों की तुलना कर रहे थे, घुमाव को पहचान रहे थे, और दोहराव को समझ रहे थे।

इन चर्चाओं के दौरान, विद्यार्थियों ने यह समझा कि केवल दो अलग-अलग ट्रोमिनोज़ होते हैं।

चित्र-3 : विद्यार्थियों ने ये दो ट्रोमिनो आकृतियाँ बनाईं।

इसके बाद, विद्यार्थियों से टेट्रोमिनो बनाने के लिए कहा गया। साथ मिलकर काम करते हुए उन्‍होंने घूमे हुए और दर्पण प्रतिबिम्‍ब भी बनाकर देखे। उन्‍होंने पाया कि कुल पाँच ख़ास तरह के टेट्रोमिनो होते हैं।

चित्र-4 : विद्यार्थियों ने दी गई टेट्रोमिनो आकृतियाँ बनाईं।

ट्रोमिनो बनाने की कोशिश में एक विद्यार्थी ने अलग तरीक़ा अपनाया। उसने डोमिनो में एक और वर्ग जोड़कर ट्रोमिनो बनाने का प्रयास किया।

चित्र-5 : डोमिनो का उपयोग करके ट्रोमिनो बनाने के लिए एक विद्यार्थी द्वारा दी गई प्रतिक्रिया का उदाहरण।

जब विद्यार्थियों ने नई आकृति प्राप्त करने के लिए एक और वर्ग जोड़ने का सुझाव दिया तब उन्‍हें छोटी आकृतियों से बड़े पॉलीओमिनोज़ बनाने का विचार समझाया गया। इस प्रक्रिया में, किसी मौजूदा पॉलीओमिनो में एक-या-एक से ज़्यादा वर्ग जोड़ने पर एक नया पॉलीओमिनो बनता है। इस सन्दर्भ में, ‘पेरेंट पॉलीओमिनो’ (parent polyomino) का मतलब पहले से बनी उस आकृति से है जिसमें एक-या-एक से ज़्यादा वर्ग जोड़कर एक नया पॉलीओमिनो बनाया जाता है। इस तरह बनने वाले बड़े पॉलीओमिनो को ‘चाइल्ड’ (child) कहा जाता है। इससे विद्यार्थियों को बहुत सारी अहम बातें समझ में आईं। ऐसी ही दो बातें ये थीं :

  • एक ही पेरेंट पॉलीओमिनो के कई अलग-अलग चाइल्ड पॉलीओमिनोज़ बन सकते हैं।
  • एक चाइल्ड पॉलीओमिनो के एक से अधिक पेरेंट हो सकते हैं।

चित्र-6 में दिखाए अनुसार विद्यार्थियों ने इन सम्बन्धों को बोर्ड पर तीर बनाकर दिखाया।

Figure 6 Introduction of the terms
चित्र-6 : बोर्ड पर शब्दों का परिचय और विद्यार्थियों द्वारा तीरों का इस्तेमाल करके पेरेंट-चाइल्ड सम्बन्ध को दिखाना।

अब आइए, उन सम्बन्धों पर ग़ौर करें जिन्हें विद्यार्थियों ने देखा :

विद्यार्थियों ने देखा कि L-आकार का ट्रोमिनो चार अलग-अलग टेट्रोमिनोज़ के लिए पेरेंट बन सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि नया वर्ग किस जगह जोड़ा जाता है (चित्र-7)।

चित्र-7 : L-आकार के ट्रोमिनो का उपयोग करके चार अलग-अलग टेट्रोमिनोज़ बनाना।

इस गतिविधि से विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिली कि एक ही पॉलीओमिनो से कई अलग-अलग चाइल्ड पॉलीओमिनोज़ बन सकते हैं।

इसी प्रकार, जब I-आकार के ट्रोमिनो को पेरेंट के तौर पर माना, तो उन्होंने पाया कि चित्र-8 में दिखाए गए जैसे यह तीन अलग-अलग टेट्रोमिनोज़ बना सकता है।

figure 8 Construction of 3 different
चित्र-8 : I-आकार के ट्रोमिनो का उपयोग करके तीन अलग-अलग टेट्रोमिनोज़ बनाना।

चित्र-7 और 8 से विद्यार्थियों ने देखा कि दो टेट्रोमिनोज़ — L-आकार और T-आकार वाले — दोनों ही तरह के ट्रोमिनोज़ से बनाए जा सकते हैं। इससे उन्हें यह समझ आया कि एक ही चाइल्ड पॉलीओमिनो के एक से ज़्यादा पेरेंट पॉलीओमिनोज़ हो सकते हैं।

चर्चा का अन्त एक विद्यार्थी की इस समझदारी भरी टिप्पणी के साथ हुआ :

मोनोमिनो ही सभी पॉलीमिनोज़ का पेरेंट है।”.

पेंटोमिनोज़ की खोज : अलग-अलग तरीक़े

जब विद्यार्थियों से पेंटोमिनोज़ बनाने के लिए कहा गया तो उन्होंने अलग-अलग तरीक़े अपनाए। कुछ विद्यार्थियों ने पाँच वर्गों को बार-बार इधर-उधर करके विभिन्न संयोजन खोजे, जबकि दूसरों ने टेट्रोमिनोज़ को पेरेंट मानकर उन्हें आगे बढ़ाया और चाइल्ड पेंटोमिनोज़ बनाए। कई विद्यार्थियों ने पेंटोमिनोज़ बनाने के बाद पेरेंट-चाइल्ड सम्बन्धों को भी दर्शाया। उन्होंने तीरों और रफ़ काम की मदद से इन सम्बन्धों को स्पष्ट किया (चित्र-9 से 11)।

इन अलग-अलग तरीक़ों से यह स्पष्ट हो गया था कि विद्यार्थी अब विधिवत तरीक़े से सोचने लगे थे, उनकी स्थानिक समझ बेहतर हो रही थी, और वे यह भी समझने लगे थे कि घुमाने पर एक जैसी दिखने वाली आकृतियाँ अलग नहीं होती हैं।

figure 9 The student has drawn pentominoes
चित्र-9 : विद्यार्थी द्वारा पेरेंट-चाइल्ड सम्बन्ध का उपयोग किए बिना बनाए गए पेंटोमिनोज़।
चित्र-10 : इस चित्र में पेरेंट और चाइल्ड के नाम आपस में बदल दिए गए हैं (सम्भव है विद्यार्थी को लगा हो कि पेरेंट को चाइल्ड से हमेशा बड़ा होना चाहिए)।
चित्र-11 : इस चित्र में, पेंटोमिनो बनाने के लिए बिन्दीदार रेखाओं का उपयोग रफ़ काम के रूप में किया गया है।

जब कुछ विद्यार्थियों को लगा कि सभी सम्भावनाएँ खोज ली गई हैं (और कुछ विद्यार्थियों ने एक ही आकृति को बार-बार बनाया), तब मैंने उनसे सवाल किया कि वे कैसे पक्का कह सकते हैं कि अब कोई नए पेंटोमिनोज़ नहीं बचे हैं। इस सवाल ने विद्यार्थियों को अपने तर्क देने के लिए प्रेरित किया। विद्यार्थियों ने अनौपचारिक रूप से पाँच वर्गों की स्थितियों की जाँच करना और आकृतियों की तुलना करना शुरू कर दिया ताकि यह देखा जा सके कि क्या कोई नई आकृति सच में अलग थी, या केवल पहले से बनी आकृति का घुमाया हुआ या प्रतिबिम्बित रूप है। हालाँकि उस समय यह तर्क पूरी तरह से सही नहीं था, फिर भी इस चर्चा से उन्हें यह समझ आया कि समान आकृतियों को दोबारा गिनने से बचना चाहिए। इससे वे केवल अनुमान तक सीमित न रहकर अधिक सोच-समझकर काम करने लगे।

सत्र-2 : घन पर टेट्रोमिनोज़ लपेटना

दूसरे सत्र में विद्यार्थियों ने पॉलीमिनोज़ को घन के चारों ओर लपेटने की गतिविधि की। इस लेख में, ‘लपेटने’ का मतलब था, घन की ज़्यादा-से-ज़्यादा सतहों को ढँकना, भले ही कुछ सतहें बिना ढँके रह जाएँ; लेकिन एक ही सतह को दो बार नहीं ढँक सकते, यानी ओवरलैपिंग की अनुमति नहीं है। शुरुआत में, कई विद्यार्थियों ने ‘लपेटने’ का अर्थ घन की सभी छह सतहों को ठीक एक बार में पूरी तरह से ढँकना समझा। इससे उन्होंने गुणनखण्डों और गुणजों का उपयोग करके तर्क करना शुरू किया, और यह निष्कर्ष निकाला कि :

  • किसी ट्रोमिनो को दो बार उपयोग करके 6 सतहों को ढँका जा सकता है।
  • लेकिन किसी टेट्रोमिनो का उपयोग नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे कुछ सतहें बिना ढँकी रह जाएँगी।

हालाँकि यह समझ थोड़ी ग़लत थी, लेकिन विद्यार्थियों के लिए फ़ायदेमन्द साबित हुई। इससे यह पता चला कि विद्यार्थी अब केवल आकृति की दिशा पर नहीं, बल्कि संख्या से जुड़े गुणों पर भी सोचने लगे थे। इसके बाद, इस सन्दर्भ में ‘लपेटने’ शब्द का सही अर्थ स्पष्ट किया गया। इसका उद्देश्य यह था कि विद्यार्थी पेरेंट-चाइल्ड सम्बन्ध का उपयोग करके ऐसे हेक्सोमिनोज़ बना सकें जो घन के सम्भावित ‘आकृति-जाल’ हो सकते थे।

विद्यार्थियों से कहा गया कि वे ग्रिड पेपर पर टेट्रोमिनोज़ बनाएँ। उसके बाद शिक्षक ने उन आकृतियों को काटकर अलग किया, और उन्हें एक घन के चारों ओर लपेटने की कोशिश की। जब विद्यार्थियों के हाथ में कट-आउट आए, तो वे आकृतियों की दिशा और उनके घन पर फ़िट होने के बारे में अधिक प्रभावी ढंग से सोचने लगे। खोज-बीन के माध्यम से उन्होंने पाया कि पाँच में से चार टेट्रोमिनोज़ एक घन के चारों ओर लपेटे जा सकते थे, जबकि एक को नहीं लपेटा जा सकता (चित्र-12)।

चित्र-12 : विद्यार्थियों ने समझा कि नारंगी रंग का टेट्रोमिनो ही एकमात्र ऐसा टेट्रोमिनो है जिसे एक घन के चारों ओर लपेटा नहीं जा सकता।

हालाँकि कट-आउट बनाने से समझ तो अच्छी हुई, लेकिन इसमें ज़्यादा समय लग रहा था क्योंकि सभी विद्यार्थियों को कैंची नहीं दी जा सकती थी।

सत्र-3 : हेक्सोमिनोज़ और किसी घन का आकृति-जाल

तीसरे सत्र में समय बचाने के लिए विद्यार्थियों से कहा गया कि वे अपनी नोटबुक में हेक्सोमिनोज़ बनाएँ। इसके साथ ही उन्हें पहले से तैयार किए गए कट-आउट भी दिए गए। सभी हेक्सोमिनोज़ बनाना थोड़ा मुश्किल था, इसलिए विद्यार्थियों को जोड़ी में काम करने के लिए कहा गया ताकि वे आपस में चर्चा कर सकें। विद्यार्थी मिलकर यह सोचने लगे कि कौन-सी आकृतियाँ सिर्फ़ घुमाने पर एक जैसी दिखती हैं और कौन-सी बार-बार बन रही हैं।

विद्यार्थियों को यह कार्य करने के लिए लगभग 35 मिनट का समय दिया गया था, और दिलचस्प रूप से कुछ विद्यार्थियों ने सभी 35 अनोखे हेक्सोमिनोज़ (चित्र-13) तैयार कर लिए।

figure 13 a
figure 13 b
figure 13 d
चित्र-13 : दिए गए चार चित्र सभी सम्भावित हेक्सोमिनोज़ को दिखाते हैं।

हेक्सोमिनो के कट-आउट और घनों की मदद से विद्यार्थियों ने यह जाँचा कि कौन-सी आकृतियाँ घन को पूरी तरह से ढँक सकती हैं, और जो नहीं ढँक सकतीं उन्हें अलग रख दिया। 35 सम्भावित हेक्सोमिनोज़ में से उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि केवल 11 ही एक घन बना सकती हैं। इसी चरण पर, घन आकृति-जाल की औपचारिक अवधारणा से उनका परिचय कराया गया।

चित्र-14 : हेक्सोमिनोज़ जो घन आकृति-जाल बना सकते हैं।

इसके बाद विद्यार्थियों ने अपने बनाए हुए आकृति-जाल को मोड़ा, और द्वि-आयामी आकृतियों से त्रि-आयामी संरचनाओं में होने वाले परिवर्तन को ख़ुद अनुभव किया। समतल आकृतियों को घनों में बदलते देखना उनके लिए उत्साह और उपलब्धि से भरा एक पल था। अन्त में तैयार हुए घन केवल गणितीय वस्तु नहीं रहे, बल्कि उनके खोज और सीखने का एक ठोस प्रमाण बन गए — इस गतिविधि से मिला एक अर्थपूर्ण और यादगार अनुभव।

पूरे सत्र के दौरान, प्राय: देखा गया कि विद्यार्थी ऐसे सवाल पूछते थे, जैसे : “अगर हम वर्ग को किसी दूसरी जगह जोड़ें तो क्या होगा?” वे इस बात पर चर्चा करते थे कि क्या दो आकृतियाँ सचमुच अलग हैं, या केवल एक-दूसरे का घुमाव या प्रतिबिम्ब हैं।

लपेटने और टेट्रोमिनोज़ से जुड़ी गतिविधियों के दौरान, मैंने विद्यार्थियों को उनके द्वारा बनाई गई संरचनाओं की जाँच करने के लिए जोड़ने वाले छोटे-छोटे घन (ब्लॉक्स, गुटके) दिए। हालाँकि, इससे कभी-कभी भ्रम भी पैदा हुआ, क्योंकि इन घनों का आकार हमेशा काग़ज़ के कट-आउट के आयामों से मेल नहीं खाता था। इसलिए मैंने विद्यार्थियों को समझाया कि वे सटीक आकार पर कम ध्यान दें और इसके बजाय इस बात पर विचार करें कि यदि आकार को उचित रूप से बड़ा या छोटा किया जाए, तो क्या वह आकृति घन को लपेट सकती है या उसकी सतह को ढँक सकती है।

जब विद्यार्थी आकृति-जाल को लपेटने की कोशिश कर रहे थे, और कोई एक वर्ग बिना ढँका रह जाता था, तो वे कट-आउट को घुमाकर, बचे हुए हिस्से की स्थिति बदलकर, और फिर से मोड़ने का प्रयास करते थे। इस तरह के प्रयास और सुधार के तरीक़े उनके विकसित होते स्थानिक चिन्तन और दृढ़ता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

विचार और अधिगम के प्रतिफल

कुल मिलाकर, यह गतिविधि बहुत ही दिलचस्प और समझ बढ़ाने वाली थी :

  • विद्यार्थियों ने घुमाव और अनूठेपन को अच्छे से समझा
  • पॉलीमिनोज़ को लपेटते समय उनकी सोच और कल्पनाशक्ति बेहतर हुई
  • उन्होंने द्वि-आयामी आकृतियों और त्रि-आयामी वस्तुओं के बीच का अर्थपूर्ण सम्बन्ध समझा
  • विद्यार्थियों ने साथ मिलकर काम करना, चर्चा करना और गणितीय विचार साझा करना सीखा

भविष्य में सुधार के सुझाव

कक्षा में किए गए अवलोकनों के आधार पर निम्नलिखित सुधार उपयोगी हो सकते हैं :

  • समय बचाने और विद्यार्थियों की रुचि बनाए रखने के लिए पॉलीओमिनो के कट-आउट पहले से तैयार रखें
  • पर्याप्त संख्या में घन के आकृति-जाल उपलब्ध कराएँ ताकि सभी विद्यार्थी सक्रिय रूप से भाग ले सकें
  • विद्यार्थियों से गहराई से सोचने के लिए प्रेरित करने वाले सवाल पूछें। जैसे :
  • आप कैसे कह सकते हैं कि एक आकृति दूसरी का घुमाव है?
  • हम कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि दो हेक्सोमिनोज़ वास्तव में अलग हैं?
  • क्या आपने कभी ऐसी स्थिति देखी है जहाँ चाइल्ड अपने पेरेंट से बड़ा हो?

इस तरह के सवाल विद्यार्थियों की वैचारिक समझ को मज़बूत करते हैं और उनकी गणितीय तर्कक्षमता को विकसित करने में सहायक होते हैं।

निष्कर्ष

पॉलीओमिनोज़ पर आधारित इन तीन सत्रों की गतिविधियों ने कक्षा-4 के विद्यार्थियों को औपचारिक पाठ्यक्रम से पहले ही घन के आकृति-जाल को समझने का एक सरल और प्रभावी तरीक़ा प्रदान किया। साधारण पॉलीओमिनो संरचनाओं से शुरुआत करते हुए, हेक्सोमिनोज़ को घनों के चारों ओर लपेटने तक की प्रक्रिया के माध्यम से, विद्यार्थियों ने सशक्त स्थानिक तर्कशक्ति, घुमाव और समानता की समझ, तथा गणितीय सम्भावनाओं को व्यवस्थित रूप से खोजने की क्षमता विकसित की। पेरेंट-चाइल्ड सम्बन्धों के उपयोग ने उनकी संरचनात्मक सोच और पैटर्न पहचानने की क्षमता को और भी अधिक गहरा किया।

सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से जब विद्यार्थियों ने यह खोजा कि 35 हेक्सोमिनोज़ में से केवल 11 ही घन के आकृति-जाल बनाते हैं तो एक अमूर्त विचार उनके लिए ठोस और स्पष्ट समझ में बदल गया। सफल आकृति-जालों को मोड़कर घन का रूप देना, इस सीखने की यात्रा का एक उत्साहपूर्ण और सन्तोषजनक समापन था। इस प्रक्रिया ने द्वि-आयामी आकृतियों और त्रि-आयामी वस्तुओं के बीच सम्बन्ध को और मज़बूत किया, साथ ही विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, जिज्ञासा और सार्थक गणितीय जुड़ाव को भी बढ़ावा दिया।

Reference and citations

  • Figure 3: Images of trominoes. Source: Wikipedia contributors, 2025, Tromino.
  • Figure 4: Images of tetrominoes. Source: Alchetron, 2024, Tetromino.
  • Figure 6: Students’ observation on parent-child relation. Source: Author’s classroom, 2026.
  • Figure 7: Construction of tetrominoes using L-shaped tromino. Source: Adapted from Wikipedia contributors, 2025, Tromino.
  • Figure 8: Construction of tetrominoes using an I-shaped tromino. Source: Adapted from Wikipedia contributors, 2025, Tromino.
  • Figure 9: Drawing of pentominoes without using parent- child relation. Source: Author’s classroom, 2026.
  • Figures 10-11. Drawing of pentominoes using parent-child relation. Source: Author’s classroom, 2026.
  • Figure 12: Images of tetrominoes. Source: Puzzle Genius, n.d., Tetromino.
  • Figure 13: Images of hexominoes. Source: Author’s classroom, 2026.
  • Figure 14: Images of hexominoes that are nets of cube. Source: Adapted from Wikipedia contributors, 2025, Hexomino.

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