समय की सुई को घुमाना : आधे-चौथाई घण्टे के साथ कक्षा की यात्रा
बेंगलूरु में एक कार्यशाला के दौरान मुझे एक सरल, लेकिन बेहद सूझबूझ भरी शिक्षण अधिगम सामग्री (TLM) देखने को मिली — एक घड़ी। मैं एकदम उस पर मोहित हो गई। यह विचार इतना बुद्धिमत्तापूर्ण और सीधा-सरल था कि मेरे मन में आया, “हमें यह क्यों नहीं सूझा?” मैंने तभी तय कर लिया कि मुझे यह विचार अपनी कक्षा में भी लेकर जाना है ताकि तीसरी से पाँचवीं कक्षा के मेरे विद्यार्थी समय को केवल पढ़ना नहीं, बल्कि वास्तव में देखना भी सीखें।
भले ही डिजिटल डिस्प्ले से विद्यार्थी समय पढ़ लेते हों, लेकिन फिर भी एनालॉग घड़ी को पढ़ना (देखना) आना बेहद महत्त्वपूर्ण है। मैंने ऐसे कई उदाहरण देखे हैं जहाँ विद्यार्थी डिजिटल डिस्प्ले वाले फ़ोन पर समय पढ़ लेते हैं, लेकिन विद्यालय की एनालॉग घड़ी देखकर पूरी तरह चकरा जाते हैं। मुझे एहसास हुआ कि इससे उनकी समय की समझ, योजना बनाने की क्षमता और दिनचर्या पर असर पड़ा है। एनालॉग घड़ियाँ बहुत महत्त्वपूर्ण होती हैं क्योंकि वे विद्यार्थियों को भिन्न, बीता हुआ समय, कोण और संख्या पैटर्न को व्यावहारिक और दृश्यात्मक रूप से समझने में मदद करती हैं। चूँकि विद्यालय, परीक्षा कक्ष और सार्वजनिक स्थानों पर अभी भी एनालॉग घड़ियों का उपयोग किया जाता है, अत: उन्हें पढ़ने में दक्ष होना रोज़मर्रा के जीवन के लिए ज़रूरी कौशल है। इसीलिए मेरा ज़ोर एनालॉग घड़ी पढ़ने के कौशल को पुख़्ता करने पर था।
मूल टीएलएम घड़ियों (चित्र-1 में दर्शाई गईं) से प्रेरित होकर, मैंने कुछ बदलाव के साथ अपना ख़ुद का एक संस्करण तैयार किया।

- मैंने इन्हें चमकीले रंगों से रंगा ताकि ये दिखने में आकर्षक लगें। मैंने चौथाई (पौने व सवा) घण्टे की घड़ियों के लिए हरा रंग और आधे (साढ़े) घण्टे की घड़ियों के लिए लाल रंग चुना। साथ ही मैंने घड़ी में हरेक मिनट को साफ़-साफ़ चिह्नित किया ताकि उन विद्यार्थियों को मदद मिल सके जिन्हें यह याद रखने में कठिनाई होती है कि प्रत्येक संख्या कितने मिनटों को दर्शाती है।
- मैंने तीन अलग-अलग घड़ियाँ बनाईं : एक घड़ी आधा घण्टा बीत जाने (जैसे साढ़े ग्यारह) को दिखाने वाली (चित्र-2), एक चौथाई घण्टा बीत जाने (जैसे सवा छह) को दिखाने वाली (चित्र-3) और एक पौना घण्टा बीत जाने (जैसे पौने चार) को दिखाने वाली (चित्र-4)। इन घड़ियों में मिनट की सुई स्थिर थी, लेकिन घण्टे की सुई पूरी तरह घूम सकती थी। ‘साढ़े’, ‘सवा’ और ‘पौने’ की अवधारणाएँ काग़ज़ पर अमूर्त लगती हैं, लेकिन इस साधन ने उन्हें मूर्त रूप दे दिया।
- लम्बे समय तक बार-बार उपयोग किए जा सकने के उद्देश्य से मैंने इन घड़ियों को लेमिनेट कर दिया।






कक्षा की शुरुआत यह जानने से हुई कि विद्यार्थी पहले से क्या जानते हैं। विद्यार्थी घड़ी में घण्टे और मिनट की सुई को पहचानते थे, और आसान समय, जैसे 5:20 और 5:30 को पढ़ भी सकते थे। उन्होंने इसे मौखिक और लिखित, दोनों तरह का अभ्यास करके सीखा था। ऐसे ही एक अभ्यास के दौरान एक विद्यार्थी ने हिन्दी में समय बताया : “1:30 को डेढ़ और 5:15 को सवा पाँच।” और कहा, “मेरी माँ घर में ऐसे ही समय बताती हैं।” मैंने विद्यार्थियों की पहले की जानकारी को नई सीख से जोड़ते हुए समझाया कि अँग्रेज़ी में इन्हें क्रमशः ‘हॉफ़ पास्ट’ और ‘क्वार्टर पास्ट’ कहते हैं। चूँकि विद्यार्थी भिन्नों से परिचित थे, इसलिए यह समझाना आसान था कि 15 मिनट एक घण्टे का एक-चौथाई होता है और 30 मिनट आधा घण्टा होता है।
जैसे ही मैंने घड़ियों को कक्षा में दिखाया, विद्यार्थियों में कौतूहल भर गया। उन्होंने सबसे पहले जिस बात पर ग़ौर किया, वह था कि इनकी बड़ी सुई अपनी जगह पर चिपकी हुई है। “मैम, यह मिनट की सुई स्थिर क्यों है?” मैं कोई जवाब देती, उससे पहले ही एक विद्यार्थी ने कहा, “ताकि हम घण्टे की सुई पर ध्यान केन्द्रित कर सकें।” एक अन्य विद्यार्थी ने ग़ौर किया, “वाह, यह तो कमाल है! अब हम सभी साढ़े वाले घण्टे (half pasts) को साफ़-साफ़ देख सकते हैं।” अनायास ही, उपयोग की जाने वाली भाषा सार्थक और विचारों से भरी-पूरी हो गई।
जब विद्यार्थी इसे और जानने-समझने लगे, एक जिज्ञासु विद्यार्थी ने पूछा, “मैम, क्या घण्टे वाली सुई संख्या से थोड़ा आगे जाती है, या उसे ठीक उस पर ही रुकना होता है?” मैंने समझाया कि घण्टे वाली सुई हमेशा ठीक किसी संख्या पर नहीं रहती — वह कहाँ होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम कौन-सा समय दिखा रहे हैं। उदाहरण के लिए,
- डेढ़ बजे (1:30) घण्टे की सुई 1 और 2 के ठीक बीच में होती है।
- सवा दो बजे (2:15) घण्टे की सुई 2 से थोड़ा आगे होती है, यानी 2 के ज़्यादा पास और 3 से थोड़ी दूर होती है।
- पौने पाँच बजे (4:45) घण्टे की सुई 5 से थोड़ा पहले होती है, यानी 5 के ज़्यादा पास और 4 से थोड़ी दूर होती है।
फिर विद्यार्थियों ने घण्टे की सुई को ठीक उस जगह पर रखना शुरू किया जहाँ उसे होना चाहिए। सुई के संख्याओं से आगे-पीछे होने के इस अन्तर ने विद्यार्थियों को, समय धीरे-धीरे किस क्रम से बीतता है, इसकी कल्पना करने और हर बार घण्टे की सुई की स्थिति ठीक किस जगह होगी उसे समझने में भी सहायता की।
यह सभी गतिविधियाँ कक्षा-4 में हुईं। चूँकि कक्षा में 28 विद्यार्थी थे, इसलिए मैंने ऐसे समूह बनाए कि प्रत्येक समूह में चार विद्यार्थी हों। प्रत्येक समूह को तीन घड़ियों — साढ़े वाली, सवा वाली और पौने वाली — में से एक घड़ी दी गई। प्रत्येक समूह यह पता लगाने में जुट गया कि किसी भी घण्टे को दर्शाने के लिए घण्टे की सुई को ठीक कहाँ रखा जाए। मैंने सुनिश्चित किया कि प्रत्येक समूह को तीनों तरह की घड़ियों के साथ काम करने का अवसर मिले। उन्होंने साढ़े को दर्शाने के लिए ठीक दो संख्याओं के बीच में, सवा और पौने को दर्शाने के लिए सम्बन्धित संख्या के पास सुई को रखने के प्रयोग किए। विद्यार्थियों ने बार-बार घड़ी की सुई को घुमाया, अपने अवलोकनों की तुलना पहले से ज्ञात हिन्दी के शब्दों से की, और समय पढ़ने की अँग्रेज़ी शब्दावलियों के पीछे के तर्क को ख़ुद से तलाशा। विद्यार्थियों ने बड़ी उत्सुकता से समय का अनुमान लगाया, घण्टे की सुई को अलग-अलग स्थिति पर लेकर गए और अपने समूह में इस बारे में चर्चा की : “यदि घण्टे की सुई आगे बढ़ती है तो हम घण्टे से ठीक कितना आगे बढ़ चुके हैं, यह बताती है!” कुछ ने पूछा कि क्या वे मिनट की सुई को 8, 2 और 12 पर स्थिर रखकर क्रमशः 2:40, 6:10 या 11 बजे जैसे समय दिखाने वाली घड़ियाँ बनाने की कोशिश करें। वे नियम याद नहीं कर रहे थे — वे तर्क कर रहे थे, प्रयोग कर रहे थे और खोजकर सीख रहे थे।
इस अनुभव पर विचार करते हुए मुझे एहसास हुआ कि इस शिक्षण अधिगम सामग्री ने न केवल समय से सम्बन्धित शब्दावलियों को पुख़्ता किया, बल्कि अवधारणाओं को जीवन्त भी बनाए रखा, क्योंकि इस विषय से आगे बढ़ जाने के बाद भी मैं इसे समय–समय पर करवाती रही। कभी कोई छोटा-सा सवाल या कभी कोई एक मिनट का खेल विद्यार्थियों को साढ़े, सवा या पौने की याद दिलाता रहा। यह विद्यार्थियों को इसलिए भी याद रहा क्योंकि उन्होंने इस साधन को बार-बार और मज़े से इस्तेमाल किया था। यहाँ तक कि शर्मीले विद्यार्थियों ने भी इस हैंडस-ऑन और क्रियाशील गतिविधि से प्रेरित होकर गर्मजोशी से इसमें भाग लिया।
इस सरल, रंगीन समय दर्शाने वाली पुलआउट घड़ी ने अमूर्त अवधारणाओं को देखने और छूने योग्य मूर्त अनुभवों में बदल दिया। इसने विद्यार्थियों को अपने सीखने की ज़िम्मेदारी लेने, बिना किसी की सहायता के समझने, और घण्टे की भिन्न के सम्बन्ध में घण्टे की सुई के मद्धिम चाल से चलने को समझने में सक्षम बनाया। मेरे लिए इसने एक महत्त्वपूर्ण सबक को पुख़्ता किया : सोच-समझकर तैयार की गई शिक्षण अधिगम सामग्री कठिन अवधारणाओं को आनन्दमय खोजों में बदल सकती है, और कक्षा को ऐसी जगह बना सकती है जहाँ विद्यार्थी वास्तव में सीखने का अनुभव करें।
सम्पादकीय टीप
- शिक्षक (i) ‘साढ़े’, (ii) ‘सवा’, (iii) ‘पौने’ से सम्बन्धित भिन्न बना सकते हैं। हिन्दी और कुछ अन्य भारतीय भाषाओं में यह 3 शब्द निम्न को दर्शाते हैं :
- हाफ़ पास्ट या हाफ़ मोर देन — उदाहरण के लिए, साढ़े चार = 4½ या हाफ़ पास्ट 4 यानी 4:30।
- क्वार्टर पास्ट या क्वार्टर मोर देन — उदाहरण के लिए, सवा सात = 7¼ या क्वार्टर पास्ट 7 यानी 7:15।
- क्वार्टर टू या क्वार्टर लेस देन — उदाहरण के लिए, पौने आठ = 8 – ¼ = 7¾ या क्वार्टर टू 8 यानी 7:45।
- हम ‘हाफ़ पास्ट (साढ़े)’ कहते हैं, ‘क्वार्टर पास्ट (सवा)’ कहते हैं, लेकिन ‘क्वार्टर टू (पौने)’ क्यों कहते हैं? यह सवाल बिहार के पोखरामा के प्राथमिक विद्यालय के कुछ विद्यार्थियों ने पूछा। हाफ़ पास्ट (साढ़े) या क्वार्टर पास्ट (सवा) यह दर्शाता है कि जो पहले से ही है उसमें हम और जोड़ रहे हैं। जबकि ‘क्वार्टर टू (पौने)’ यह दर्शाता है कि हम किसी संख्या तक पहुँचने से चौथाई इकाई दूर हैं। उदाहरण के लिए, ‘क्वार्टर टू 8 (पौने आठ)’ का मतलब है एक घण्टे से चौथाई दूर, यानी 8 बजने में 15 मिनट कम, यानी 7:45। वाक्यांश ‘क्वार्टर टू 8’ वाक्यांश ‘थ्री क्वार्टर पास्ट 7’ यानी 7:45 के बराबर है। लेकिन यह एक लम्बा वाक्यांश है। इसलिए हम पहले वाले वाक्य का इस्तेमाल करने लगे। इसी तरह, ‘क्वार्टर पास्ट 6’, ‘थ्री क्वार्टर टू 7’ या 6:15 के समान होता है।
- पाठकों के लिए एक सवाल : क्या आपको ‘समय का शिक्षण’ पुलआउट (चित्र-5) में दिखाए गए ‘क्वार्टर टू’ वाली घड़ी और गरिमा के चित्र-4 में दिए गए संस्करण के बीच अन्तर नज़र आया? आपको कौन-सी टीएलएम घड़ी बेहतर लगी और क्यों? कृपया हमें AtRightAngles.editors@apu.edu.in पर बताएँ।
