परीक्षा

march-2026-feat

क्या आपने कभी महसूस किया है कि अपनी परीक्षाओं को पूरा करना दहकते अंगारों पर सफलतापूर्वक चलने या आग की भट्टी से बच निकलने जैसा अनुभव है? क्या आपने अपने विद्यार्थियों को भी इसी तरह की अग्निपरीक्षा से गुज़ारा है? क्या आपने चाहा है कि चीज़ें बदल सकें? क्या वर्ष के अन्‍त में होने वाले योगात्मक आकलन को इस तरह तैयार किया जा सकता है कि वह निर्धारित दक्षताओं को प्राप्‍त करने में बच्‍चे की उपलब्धि का एक प्रामाणिक आकलन बन सके? क्यों नहीं? हमें बच्चे की सहनशक्ति का या तनाव में उसके प्रदर्शन का आकलन करने की आवश्यकता नहीं है, और प्राथमिक स्तर पर तो बिल्कुल भी नहीं। आकलन आवश्यक है लेकिन यह कोई अनिवार्य बुराई नहीं है — हम इसे एक ऐसी स्‍वाभाविक प्रक्रिया कैसे बना सकते हैं जो एक बच्चे की सर्वोत्तम क्षमताओं को निखारकर सामने लाए? विद्यार्थी अपनी चुनौतियों का सामना करते हुए जिन पहाड़ों पर चढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, हम उसे उनके लिए कैसे सुगम बना सकते हैं, उसमें कैसे मदद कर सकते हैं?

सम्पादक की ओर से...

प्रिय पाठको,

बसन्‍त की आहट मिल रही है! मार्च का महीना है और सर्दियों की ठण्‍ड अब ताज़ा हवाओं, खिलती कलियों और शैक्षणिक वर्ष की समाप्ति के साथ गर्मियों की छुट्टियों की सम्‍भावना को रास्ता दे रही है। लेकिन रुकिए — फुर्सत के उन अन्‍तहीन दिनों से पहले, एक आख़‍िरी बाधा है, वह डरावनी वार्षिक परीक्षा, वह योगात्मक आकलन जो साल भर के सीखने का अन्तिम निष्कर्ष है। शिक्षकों द्वारा रचनात्मक आकलन की नई तकनीकों के उपयोग और उनकी आवश्यकता को तेज़ी से अपनाए जाने के साथ, गणित की सामान्य पेंसिल और काग़ज़ वाली परीक्षाएँ अब अधिक मनोरंजक लेकिन उतनी ही सटीक गतिविधियों में बदल गई हैं। ये शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावकों को यह बताने का काम करती हैं कि बच्चे ने क्या सीखा है, और वे कौन-से क्षेत्र हैं जिनमें उन सभी की ओर से अधिक चिन्‍तन और प्रयास की आवश्यकता है। हालाँकि, वह अन्तिम परीक्षा कुछ अलग ही बात लगती है। क्या ऐसा होना ज़रूरी है? इस अंक में आँचल चोमल, शिल्पी बनर्जी, अनुषा टी. और रेशमा कृष्णन प्रिपरेटरी स्‍टेज पर योगात्मक आकलन की आवश्यकता और इसे प्रामाणिक एवं आयु-अनुरूप तरीके से संचालित करने के तरीक़ों का परीक्षण कर रही हैं। सम्‍भव है कि अगले शैक्षणिक वर्ष की योजना में इन लेखों के विचारों को शामिल किया जा सके।

कंचना सूर्यकुमार ‘भिन्नों को चित्रों से समझने की पेचीदा सच्‍चाई‘ पर अपना अनुभव साझा कर रही हैं। इस लेख के साथ क्षमा चक्रवर्ती द्वारा तैयार की गई एक वर्कशीट भी है। यह आपको ऐसे और प्रश्न तैयार करने में मदद करेगी जो भिन्न पढ़ाते समय ‘पूर्ण‘ को परिभाषित करने के महत्त्व को मज़बूत करते हैं। आगे क्या है? हमारी पूर्व छात्रा गरिमा भट्ट (कक्षा में : समय) और अस्मा मेमन (गणित का मज़ा : घन का जाल) ने अपने लेखों से हमें अभिभूत किया है। हमारे पास घनाभ और उनके नेट्स पर स्वाती सरकार की एक वर्कशीट भी है, जो एक छात्र-शिक्षक द्वारा अपने शिक्षण अभ्यास के दौरान अनुभव की गई कठिनाई के जवाब में तैयार की गई है। ‘गणित का मज़ा’ खण्‍ड में एक प्यारा-सा पोस्टर है जो निश्चित रूप से विचारों को उत्तेजित करेगा — इसे बुलेटिन बोर्ड पर लगाएँ और विद्यार्थियों द्वारा अपने अवलोकन कौशल का उपयोग करने, अनुमान लगाने, अपने विचारों को साझा करने और अपने तर्कों को रखने की प्रतीक्षा करें — संक्षेप में, उन्‍हें नन्हें गणितज्ञों की तरह व्यवहार करने दें। इसके साथ वाले पृष्ठ पर शिक्षकों के लिए नोट्स दिए गए हैं।

वेबसाइट की समीक्षा आपको समृद्ध संसाधनों की दिशा में संकेत करेगी। पद्मप्रिया शिराली ‘फ़ाउण्‍डेशनल और प्रिपरेटरी‘ स्‍टेज पर गिनती से परिचय कराने के सुझावों के साथ ‘पुलआउट‘ प्रस्तुत कर रही हैं।

मार्च, 2026 का अंक हमारे लिए विशेष है — पहली बार, लेख सर्वप्रथम डिजिटल संस्करण पर आए, उसके बाद प्रिंट अंक में। समय के साथ चलते हुए, लेकिन प्राथमिक स्तर से ही गणित के अच्छे शिक्षाशास्त्र पर अपनी नज़र मज़बूती से टिकाए हुए। हमें बताएँ कि आप क्या सोचते हैं।

स्नेहा टाइटस
मुख्य सम्‍पादक, एट राइट एंगल्स
AtRightAngles.editor@apu.edu.in