प्रिय पाठको,
बसन्त की आहट मिल रही है! मार्च का महीना है और सर्दियों की ठण्ड अब ताज़ा हवाओं, खिलती कलियों और शैक्षणिक वर्ष की समाप्ति के साथ गर्मियों की छुट्टियों की सम्भावना को रास्ता दे रही है। लेकिन रुकिए — फुर्सत के उन अन्तहीन दिनों से पहले, एक आख़िरी बाधा है, वह डरावनी वार्षिक परीक्षा, वह योगात्मक आकलन जो साल भर के सीखने का अन्तिम निष्कर्ष है। शिक्षकों द्वारा रचनात्मक आकलन की नई तकनीकों के उपयोग और उनकी आवश्यकता को तेज़ी से अपनाए जाने के साथ, गणित की सामान्य पेंसिल और काग़ज़ वाली परीक्षाएँ अब अधिक मनोरंजक लेकिन उतनी ही सटीक गतिविधियों में बदल गई हैं। ये शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावकों को यह बताने का काम करती हैं कि बच्चे ने क्या सीखा है, और वे कौन-से क्षेत्र हैं जिनमें उन सभी की ओर से अधिक चिन्तन और प्रयास की आवश्यकता है। हालाँकि, वह अन्तिम परीक्षा कुछ अलग ही बात लगती है। क्या ऐसा होना ज़रूरी है? इस अंक में आँचल चोमल, शिल्पी बनर्जी, अनुषा टी. और रेशमा कृष्णन प्रिपरेटरी स्टेज पर योगात्मक आकलन की आवश्यकता और इसे प्रामाणिक एवं आयु-अनुरूप तरीके से संचालित करने के तरीक़ों का परीक्षण कर रही हैं। सम्भव है कि अगले शैक्षणिक वर्ष की योजना में इन लेखों के विचारों को शामिल किया जा सके।
कंचना सूर्यकुमार ‘भिन्नों को चित्रों से समझने की पेचीदा सच्चाई‘ पर अपना अनुभव साझा कर रही हैं। इस लेख के साथ क्षमा चक्रवर्ती द्वारा तैयार की गई एक वर्कशीट भी है। यह आपको ऐसे और प्रश्न तैयार करने में मदद करेगी जो भिन्न पढ़ाते समय ‘पूर्ण‘ को परिभाषित करने के महत्त्व को मज़बूत करते हैं। आगे क्या है? हमारी पूर्व छात्रा गरिमा भट्ट (कक्षा में : समय) और अस्मा मेमन (गणित का मज़ा : घन का जाल) ने अपने लेखों से हमें अभिभूत किया है। हमारे पास घनाभ और उनके नेट्स पर स्वाती सरकार की एक वर्कशीट भी है, जो एक छात्र-शिक्षक द्वारा अपने शिक्षण अभ्यास के दौरान अनुभव की गई कठिनाई के जवाब में तैयार की गई है। ‘गणित का मज़ा’ खण्ड में एक प्यारा-सा पोस्टर है जो निश्चित रूप से विचारों को उत्तेजित करेगा — इसे बुलेटिन बोर्ड पर लगाएँ और विद्यार्थियों द्वारा अपने अवलोकन कौशल का उपयोग करने, अनुमान लगाने, अपने विचारों को साझा करने और अपने तर्कों को रखने की प्रतीक्षा करें — संक्षेप में, उन्हें नन्हें गणितज्ञों की तरह व्यवहार करने दें। इसके साथ वाले पृष्ठ पर शिक्षकों के लिए नोट्स दिए गए हैं।
वेबसाइट की समीक्षा आपको समृद्ध संसाधनों की दिशा में संकेत करेगी। पद्मप्रिया शिराली ‘फ़ाउण्डेशनल और प्रिपरेटरी‘ स्टेज पर गिनती से परिचय कराने के सुझावों के साथ ‘पुलआउट‘ प्रस्तुत कर रही हैं।
मार्च, 2026 का अंक हमारे लिए विशेष है — पहली बार, लेख सर्वप्रथम डिजिटल संस्करण पर आए, उसके बाद प्रिंट अंक में। समय के साथ चलते हुए, लेकिन प्राथमिक स्तर से ही गणित के अच्छे शिक्षाशास्त्र पर अपनी नज़र मज़बूती से टिकाए हुए। हमें बताएँ कि आप क्या सोचते हैं।
स्नेहा टाइटस
मुख्य सम्पादक, एट राइट एंगल्स
AtRightAngles.editor@apu.edu.in
हम ऐसे लेखों का स्वागत करते हैं जो गणित के सीखने के अनुभव को बढ़ाते हैं, विशेषकर 6-14 वर्ष की आयु वर्ग के विद्यार्थियों के लिए।
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