भिन्नों को चित्रों से समझने की पेचीदा सच्चाई
जैसा दिखता है, वैसा हमेशा होता नहीं!
मैंने कई बार देखा है कि विद्यार्थी, बड़ी कक्षाओं यहाँ तक कि हाई स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी भी, भिन्न जोड़ते समय एक सामान्य ग़लती करते हैं, जैसा कि चित्र-1 में दिखाया गया है। मैं आमतौर पर इसकी वजह कलन विधि (Algorithm) को समझने में हुई ग़लती को मानती थी, जिसे मैं ‘विधि सम्बन्धी त्रुटि’ (Method error) कहती हूँ। एक दिन एक प्राथमिक कक्षा में अचानक जाने का अवसर मिलने से पहले तक मैं इसे अवधारणात्मक समझ से जुड़ी समस्या नहीं मानती थी।

एक अस्थाई शिक्षिका ने मुझे अपनी कक्षा के पास से गुज़रते हुए देखा और मदद के लिए अन्दर बुला लिया। उन्होंने बोर्ड पर एक आकृति (चित्र-2) बनाई हुई थी। शिक्षिका ने मुझे अपनी कक्षा में क्यों बुलाया होगा, यह जानने से पहले आप चित्र-2 में दिए गए सवाल के बारे में सोचिए। आपको क्या लगता है कि इस सवाल का जवाब क्या होना चाहिए? क्या आप अपने जवाब के पीछे का तर्क समझा सकते हैं?

कक्षा के विद्यार्थियों ने इस सवाल के दो अलग-अलग जवाब दिए थे। शिक्षिका ने मुझसे कहा कि, “क्या आप विद्यार्थियों को समझा सकती हैं कि क्यों छायांकित हिस्सा \(\tfrac{5}{4}\) को दर्शाता है, न कि \(\tfrac{5}{8}\) को?”
आप इस सवाल का जवाब कैसे देंगे?
असन्तोषजनक समाधान का बोझ
मैं यह मानती हूँ कि मैं इस बात से चौंक गई थी। मुझे यह तो समझ में आता था कि विद्यार्थी विधियों में ग़लती कर सकते हैं, लेकिन यह समझना मुश्किल था कि साधारण चित्रांकन भी ग़लतफ़हमी पैदा कर सकते हैं। मुझे लगता है कि मैंने जल्द ही स्थिति को सम्हाल लिया और कम-से-कम कुछ विद्यार्थियों को यह समझाने में सफल रही कि छायांकित हिस्सा \(\tfrac{5}{4}\) को ही क्यों दर्शाता है। सम्भवतः आप उस तर्क से परिचित होंगे, जो मैंने उनके सामने पेश किया। चित्र-3 में दर्शाए अनुसार, मैंने उन्हें समझाने के लिए केक का उदाहरण दिया। केक को 4 बराबर हिस्सों में बाँटा और ग़ैर-इकाई भिन्न (Non-unit fractions) की अवधारणा को समझाने की कोशिश की; मैंने उन्हें समझाया कि ये भिन्न असल में किसी ‘इकाई भिन्न’ (इस मामले में, एक-चौथाई) के ही कई टुकड़े या हिस्से होती हैं। एक-चौथाई के दो टुकड़ों को गणितीय रूप से \(\tfrac{2}{4}\) के तौर पर दर्शाया जाएगा और उन्हें दो-चौथाई पढ़ा जाएगा। इसी तरह आगे बढ़ते हुए जब हम पाँच-चौथाई तक पहुँचेंगे, तो इसका मतलब होगा एक पूरा केक और साथ में एक-चौथाई हिस्सा।

चित्र-2 से जो भ्रम हुआ, वह आम बात है ऐसा ज़्यादातर तब होता है जब भिन्नों को ‘छायांकित भागों की संख्या ÷ कुल भागों की संख्या’ के रूप में सिखाया जाता है। इसलिए, मैंने विद्यार्थियों का ध्यान इस बात पर खींचने की कोशिश की कि हर टुकड़े का आकार क्या है और ‘चौथाई’ या ‘एक-चौथाई’ का क्या मतलब होता है।
हालाँकि मुझे थोड़ा शक़ था कि मैंने बच्चों को उनके स्तर की तुलना में सही तरीक़े से समझाया या नहीं। तब मुझे ऐसा लगा कि विद्यार्थियों का भ्रम बिल्कुल जायज़ था। वास्तव में, भिन्नों को चित्रों के माध्यम से समझना उतना आसान नहीं है, जितना मैंने सोचा था।
आशा की एक किरण
एक या दो साल बाद ही समझाने का एक ऐसा तरीक़ा मिला जो मुझे सबसे सही लगा। व्यावसायिक विकास पाठ्यक्रम के एक व्याख्यान (जिसकी मैं सहभागी थी) में एक शिक्षक ने चित्र-2 वाला प्रश्न सामने रखा और पूछा कि छायांकित भाग इनमें से कितना है \(\tfrac{5}{4}\), \(\tfrac{5}{8}\) या \(\tfrac{5}{2}\)। एक विकल्प के रूप में \(\tfrac{5}{2}\) को देखकर मेरे भ्रम की कल्पना कीजिए!
मैं आपको ज़्यादा उलझन में नहीं डालूँगी और सीधे मुख्य बात बताती हूँ। इस सवाल को सही तरह से समझने का सबसे ज़रूरी तरीक़ा है यह पूछना :
‘एक पूर्ण (Whole) क्या है?‘
यदि यह एक पूर्ण है,

तो, वह भिन्न जो चित्र-2 में छायांकित भाग को दर्शाती है वह \(\tfrac{5}{8}\) है।
अब क्या आप देख सकते हैं कि \(\tfrac{5}{2}\) भी कैसे एक सम्भावित उत्तर हो सकता है?
यदि यह एक पूर्ण है,

तो, वह भिन्न जो चित्र-2 में छायांकित भाग को दर्शाती है, वह \(2\tfrac{1}{2}\) या \(\tfrac{5}{2}\) भी हो सकता है।
जब मैंने प्राथमिक कक्षा में विद्यार्थियों को समझाना शुरू किया था, तो मैंने अपने मन में एक पूर्ण तय कर लिया था। मेरे मन में यह बात बिल्कुल स्पष्ट थी कि इसके अलावा कोई और तार्किक तरीक़ा हो ही नहीं सकता। यह ज़रूरी है कि मैं साफ़तौर पर यह बताऊँ कि “पूर्ण क्या है?” यह पूछने और इस देखने में आसान लगने वाली समस्या के कई हल समझने का क्या महत्त्व है। इस तरह की समझ और तर्क-शक्ति एक शिक्षक को ग़लती और ग़लतफ़हमी के बीच अन्तर करने में मदद कर सकती है। साथ ही, वह विद्यार्थियों को सही तरीक़े से समझाकर उनकी मदद कर सकते हैं। मेरा मतलब यह नहीं है कि हर बार इतना विस्तार से समझाना ज़रूरी है। अधिकतर समय केवल विद्यार्थियों का ध्यान इस सवाल पर लाना कि “पूर्ण क्या है?” ही काफ़ी होता है।
आगे की राह
चित्र-1 में दिए गए संख्यात्मक उदाहरण और चित्र-2 में उसके दृश्य रूप के ज़रिए, मैंने भिन्नों को जोड़ने में होने वाली एक आम ग़लती की ओर ध्यान दिलाने की कोशिश की है। अपने एक निजी अनुभव के आधार पर मैं यह बताना चाहती हूँ कि इस ग़लतफ़हमी की एक वजह हमारी यह समझ हो सकती है कि ‘पूर्ण’ क्या है। मेरा कहना है कि अगर हम साफ़-साफ़ यह बताएँ या विद्यार्थियों से पूछें कि इस समस्या में ‘पूर्ण कैसा’ दिखता है, तो इससे उनकी समझ बेहतर हो सकती है और उनकी मान्यताएँ या धारणाएँ (Assumptions) भी बदल सकती हैं।
इसके साथ दी गई वर्कशीट इसी विचार को दर्शाती है तथा आपको अभ्यास करने और सोचने-विचारने के लिए कई उदाहरण देती है।