पैटर्न के जादू का अनावरण
गणित को प्राय: पैटर्न की भाषा के रूप में परिभाषित किया जाता है। गणित शिक्षा के किसी भी स्तर पर पैटर्न का अवलोकन और उन्हें आगे बढ़ाना एक अहम कौशल है। इसलिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) एक प्रमुख अधिगम प्रतिफल के रूप में ज्यामितीय और संख्यात्मक, दोनों पैटर्न के अवलोकन और उन्हें विस्तार देने के महत्त्व पर ज़ोर देती है। (एनसीईआरटी, 2017)
इन अधिगम प्रतिफलों को हासिल करने के लिए, कक्षा 3 के लिए एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में एक अध्याय ‘पैटर्न के साथ खेलें’ (Play with patterns) दिया गया है। अध्याय की शुरुआत उन दोहराव वाले पैटर्न से होती है जो रंग के दोहराव, अनुक्रम के दोहराव, और किसी निश्चित कोण से किसी आकृति के घूमने के दोहराव पर आधारित हैं। इसके बाद कुछ बढ़ते हुए क्रम के पैटर्न से परिचय कराया गया है। और इसके बाद उन दोहराव वाले संख्या पैटर्न और बढ़ती संख्या के पैटर्न से परिचय कराया जाता है जो छोटी संख्या जोड़ने या 10 जोड़ने पर आधारित हैं।
यह आलेख, उत्तराखण्ड के एक क़स्बे के एक स्कूल में कक्षा 3 के तीस विद्यार्थियों को उक्त अध्याय पढ़ाने के अनुभव पर आधारित है। इन बच्चों में से ज़्यादातर बच्चे क़स्बे के मध्यम वर्ग या निम्न आय परिवारों के थे।
पहला सत्र
विद्यार्थियों को अपनी नोटबुक में वैसे पैटर्न के चित्र बनाने थे जो पाठ्यपुस्तक में दिए गए पैटर्न से मेल खाते हों या उनसे प्रेरित हों।

सत्र को दिलचस्प और व्यवहारिक बनाने के लिए, शिक्षक ने विद्यार्थियों को पाँच-पाँच के छह समूहों में बाँट दिया और उन्हें रंगोमेट्री सेट दे दिए। इन सेटों की सहायता से, विद्यार्थियों से अपने ख़ुद के पैटर्न बनाने को कहा गया।
रंगोमेट्री का इस्तेमाल करते हुए पैटर्न खोजना
रंगोमेट्री आकृतियों का इस्तेमाल करते हुए विद्यार्थियों ने तरह-तरह के पैटर्न बनाए। इनमें से कुछ विद्यार्थियों ने रंगोमेट्री के रंगों को पैटर्न में शामिल करने पर ध्यान केन्द्रित किया वहीं कुछ अन्य ने आकृतियों को शामिल करने पर। उन्हें रंगोमेट्री सेट का मिल-बाँटकर इस्तेमाल करते हुए और साथ में काम करते हुए पूरी तरह मशग़ूल देखना एक बेहद सुखद अनुभव था!


टीप : विद्यार्थी ने इस पैटर्न को बनाने में आकृतियों के रंग को नज़रन्दाज़ करने का निर्णय लिया था।
पाठ्यपुस्तक और नोटबुक में क्रेयॉन से बनाए गए पैटर्न, दोनों द्विविमीय (2डी) पैटर्न पर केन्द्रित हैं। इसलिए, शिक्षक की अपेक्षा थी कि रंगोमेट्री से भी बच्चे इसी तरह के 2डी पैटर्न बनाएँगे। हालाँकि, शिक्षक को तब आश्चर्य हुआ जब विद्यार्थियों ने त्रिविमीय (3डी) पैटर्न बनाने के लिए आकृतियों की थप्पियाँ जमाना शुरू कर दिया।
दूसरा सत्र
इस सत्र में, शिक्षक ने विद्यार्थियों को बढ़ते और घटते हुए पैटर्न से रूबरू कराने की योजना बनाई। रंगोमेट्री सेट की कमी के चलते, शिक्षक ने रंगोमेट्री के साथ आकार परिवार सेट मिलाकर देने का फ़ैसला किया। रंगोमेट्री के उलट, आकार परिवार सेट की आकृतियों के आकार (साइज़) अलग-अलग होते हैं, जिसने विद्यार्थियों को ख़ुद से बढ़ते और घटते हुए पैटर्न बनाने के लिए दिशा दी।
आकार परिवार का इस्तेमाल करते हुए पैटर्न का पता लगाना
यहाँ कुछ पैटर्न दिए गए हैं :


टीप : यहाँ इस बात की पूरी सम्भावना है कि विद्यार्थियों ने प्रत्येक अगली थप्पी में बढ़ाए जा रहे आयताकार टुकड़ों की संख्या पर ध्यान न दिया हो।
शुरुआत में, विद्यार्थी ने थप्पियों में आयत की संख्या 1-1 से बढ़ाई, अर्थात 1, 2, 3, 4, आयतों की थप्पियाँ थीं, लेकिन इसके बाद 5 आयत वाली कोई थप्पी नहीं थी। इसलिए ऐसा लगता है कि उनका ध्यान थप्पी की ऊँचाई बढ़ाने पर था न कि संख्याओं पर।


एक सरोकार और इसे सम्बोधित करने की रणनीतियाँ
तभी विद्यार्थियों ने इस बात पर ध्यान दिया कि इन शिक्षण-अधिगम सामग्रियों का इस्तेमाल चेहरे, मोर आदि जैसे चित्र बनाने में किया जा सकता है और कई विद्यार्थियों ने इन्हें बनाना भी शुरू कर दिया!
ऐसे मौक़ों पर, निर्देशों का पालन नहीं करने के लिए विद्यार्थियों को डाँटना ठीक नहीं है। पैटर्न के अर्थ और सामग्री के इस्तेमाल को लेकर उन्हें सुनाना-समझाना व्यर्थ हो सकता है। लेकिन, इसे पैटर्न क्या है, इसकी सहज समझ विकसित करने के एक मौक़े के रूप में देखा जा सकता है। पैटर्न की शुरुआती कुछ आकृतियाँ बनाना और विद्यार्थियों को इसी के अनुसार दूसरी आकृतियाँ बनाने के लिए कहने से मदद मिल सकती है। किसी आकृति को चुनना और पूछना कि इस आकृति को पैटर्न में आगे क्यों या क्यों नहीं रख सकते हैं, उत्सुकता पैदा करने में मदद कर सकता है। साथी विद्यार्थी के काम का उदाहरण देना भी सहज समझ का विकास करने में मददगार हो सकता है। हालाँकि, शिक्षक को यह ध्यान रखना चाहिए कि ऐसा करते समय किसी से उनकी तुलना न की जा रही हो। इस प्रकार, शिक्षण-अधिगम सामग्री के ग़लत इस्तेमाल की छिटपुट घटनाओं का इस्तेमाल सीखने के अवसरों के लिए किया जा सकता है।
पूरे सत्र के दौरान विद्यार्थियों को मशग़ूल रखने के लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि शिक्षकों द्वारा बच्चों से समृद्ध बातचीत की जाए, और उनसे बातचीत को आगे बढ़ाने वाले प्रासंगिक सवाल पूछे जाएँ। प्रत्येक बच्चे द्वारा बनाए गए पैटर्न के इर्द-गिर्द बातचीत की जा सकती है कि कैसे दो पैटर्न समान या अलग हैं। और इस प्रकार के सवाल पूछे जा सकते हैं:, “क्या पैटर्न की पहली तीन आकृतियों को समान रखते हुए एक अलग पैटर्न बनाया जा सकता है?”, “असल में यहाँ क्या बढ़ या घट रहा है? ”, “आप इस पैटर्न को एक बढ़ते पैटर्न में बदलने के लिए क्या करेंगे? ” आदि। इन सबसे विद्यार्थियों को पैटर्न के साथ बेहतर तरीक़े से जोड़ा जा सकता है।
सत्रों के दौरान शिक्षण-अधिगम सामग्री के इस्तेमाल से कई आश्चर्यजनक पल आए। नीचे दिए गए पैटर्न कार्य करते हुए सीखने का सबूत पेश करते हैं।


यहाँ एक विद्यार्थी ने यह पैटर्न बनाया जिसमें अगली चतुर्भुजीय आकृति को रखने के लिए प्रत्येक चतुर्भुजीय आकृति को घड़ी की सुई की विपरीत दिशा में घुमाया गया है।
साथ ही, विद्यार्थी ने एक साथ दो कसौटियों, रंग और उनके घूमने, का इस्तेमाल किया है। इसी तरह, नीचे दिए गए पैटर्न में एक साथ कई कसौटियों का इस्तेमाल किया गया है।
यह सब उससे परे था जिसकी अपेक्षा शिक्षक ने तीसरी कक्षा के विद्यार्थी द्वारा बनाए जाने वाले किसी पैटर्न से की होगी। असल में, विद्यार्थियों के स्वयं से सामग्री के समझने और उनके इस्तेमाल करने देने के शिक्षक के शैक्षिक निर्णय ने विद्यार्थियों को रचनात्मक बनने और सामग्रियों की क्षमता पहचानने के लिए प्रेरित किया। इससे उन्हें, जैसा कि मॉण्टेसरी का सीखने का सिद्धान्त कहता है, अपने माहौल को समझने का चुनाव करने की आज़ादी मिली। (फ़रयादी, 2007)

निष्कर्ष
अन्त में, इस कक्षा ने इस बात का एक उम्दा उदाहरण पेश किया कि कैसे गतिविधि योजना और शिक्षण-अधिगम सामग्री का उपयुक्त चयन सीखने का एक ऐसा माहौल बना सकता है जहाँ विद्यार्थी अपनी रचनात्मकता का इस्तेमाल करके और अपनी क्षमता का पता लगाकर सीखते हैं। साथ ही, यहाँ यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि प्रत्येक विद्यार्थी के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध हो। उदाहरणार्थ, इस कक्षा में हमने पाँच विद्यार्थियों के प्रत्येक समूह को कम-से-कम एक रंगोमेट्री सेट और एक आकार परिवार का सेट देने का प्रयास किया। इससे उन्हें रंगों, आकृतियों और आकारों का इस्तेमाल करने की पर्याप्त गुंजाइश मिली। हालाँकि, सामग्री की कमी की स्थिति में, विद्यार्थियों ने ज़रूरी रंग और आकृतियों को साझा करके एक-दूसरे की मदद की। इस प्रकार, इस गतिविधि ने समूहकार्य करने के साथ ही कक्षा का आपसी तालमेल सुधारने में भी मदद की। इन सत्रों ने रंग और आकृतियों के प्रति बच्चों की संवेदनशीलता को उभारा। किसी भी शिक्षण-अधिगम सामग्री में इसे शामिल करने से सीखने का अनुभव बेहतर हो सकता है।
आभार :
लेखकद्वय इस आलेख के सम्पादन में मदद के लिए क्षमा चक्रवर्ती को धन्यवाद देते हैं।
- National Council of Educational Research and Training. (2007). Play with patterns. In Maths Magic: Textbook for Class III (pp. 144-152). NCERT.
- National Council of Educational and Research Training. (NCERT). (2017). Learning Outcomes at the Elementary Stage. NCERT https://ncert.nic.in/pdf/publication/otherpublications/tilops101.pdf
- Jodo Gyan. Rangometry 2. Jodo Gyan. https://www.jodogyan.org/product/rangometry-2/
- Jodo Gyan. Aakar Parivar. Jodo Gyan. https://www.jodogyan.org/product/aakar-parivar/
- Faryadi Q. (2007). The Montessori paradigm of learning: So what? (ERIC Document No. ED496081). ERIC. https://files.eric. ed.gov/fulltext/ED496081.pdf