एल्गोरिदम से परिचय
एल्गोरिदम क्या है?
क्या आपने कभी सोचा है कि आपका पसन्दीदा वीडियो गेम कैसे काम करता है? ये उपकरण या एप एक ख़ास प्रोग्रामिंग भाषा में दिए गए कोड, जिसे कम्प्यूटर समझता है, को समझकर काम करते हैं। यह कोड कम्प्यूटर को निर्देश देता है, जिससे आप एप का इस्तेमाल कर पाते हैं या गेम खेल पाते हैं। किसी ख़ास काम को करने के लिए निर्देशों के इस समूह को ही एल्गोरिदम कहा जाता है। हालाँकि, एल्गोरिदम कहलाने के लिए निर्देशों के समूह की एक स्पष्ट शुरुआत और एक अन्त होना चाहिए, अन्यथा आपका एल्गोरिदम ऐसा होगा, जिसका कोई अन्त ही नहीं होगा!
एल्गोरिदम केवल कम्प्यूटरों के लिए ही नहीं होते, हम इन्सान उनका इस्तेमाल अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगियों में हमेशा ही करते हैं! आइए इसे एक सरल उदाहरण की मदद से समझते हैं कि हम इनका इस्तेमाल कैसे करते हैं : मान लीजिए कि आप एक स्वादिष्ट नाश्ता बनाना चाहते हैं — गुड़ और घी वाली एक रोटी।
इसे बनाने के लिए आप इन चरणों का पालन करेंगे :
- एक रोटी लें।
- इस पर एक चम्मच घी लगाएँ।
- थोड़ा गुड़ कद्दूकस कर लें।
- रोटी पर कद्दूकस किया हुआ गुड़ बुरकें।
- रोटी की पुंगी बना लें।
अब आपका स्वादिष्ट नाश्ता तैयार है। इसका आनन्द लीजिए!

एल्गोरिदम ज़रूरी क्यों हैं?
एल्गोरिदम सभी जगह हैं! ये समस्याओं को कुशलतापूर्वक हल करने में कम्प्यूटरों, रोबोटों और यहाँ तक कि लोगों की भी मदद करते हैं। एल्गोरिदम सटीक निर्देशों का एक समूह होता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि कोई काम हर बार एक ही ढंग से और सही तरीक़े से किया जाए। क्योंकि किसी मशीन को भी इनका पालन करना होता है, इसलिए इन्हें बहुत स्पष्ट होना चाहिए, यानी इनके एक से अधिक अर्थ नहीं होने चाहिए!
एल्गोरिदम बार-बार किए जाने वाले कार्यों को स्वचालित करने और उन कार्यों के हर बार एक जैसे परिणाम सुनिश्चित करने में विशेष उपयोगी होते हैं। एल्गोरिदम किसी रेसिपी की तरह होता है : अगर निर्देश स्पष्ट और सटीक हैं तो चाहे कोई भी उसे बनाए, हर बार व्यंजन का स्वाद एक-सा होना चाहिए। निर्देशों का एक स्पष्ट रूप से परिभाषित क्रम दिए जाने पर मशीनें दोहराए जाने वाले कामों को कर सकती हैं — उस स्थिति में कार्य को दोहराने पर परिणाम हर बार एक-सा होगा। कार्यों को स्वचालित करने के लिए एल्गोरिदम का इस्तेमाल करने से थकान या बोरियत की वजह से कोई मानवीय गलतियाँ नहीं होतीं। इसकी वजह यह होती है कि मशीनें निर्देशों का पालन हर बार एक ही तरह से करती हैं।
इसका यह मतलब है कि गुड़ वाली रोटी बनाने के निर्देशों का मौजूदा एल्गोरिदम असल में एल्गोरिदम नहीं है, क्योंकि अलग-अलग लोग इन निर्देशों के अपने हिसाब से अलग मतलब निकाल सकते हैं। उदाहरण के लिए, पहला निर्देश, ‘एक रोटी लीजिए,’ पर्याप्त जानकारी नहीं देता। इस निर्देश को बेहतर करने का एक तरीक़ा यह होगा कि रोटी के आकार, मोटाई और इसमें लगने वाली सामग्री के बारे में विस्तार से बताया जाए। हम इसे फिर से इस तरह लिख सकते हैं : “लगभग 5 सेंटीमीटर त्रिज्या और 2 मिलीमीटर मोटाई वाली आटे की एक पकी हुई रोटी लें।” दूसरे निर्देश को भी स्पष्टता प्रदान करने के लिए उसमें यह जोड़ा जा सकता है: “एक बड़ा चम्मच शुद्ध घी लें और इसे रोटी के एक तरफ़ समान रूप से फैलाएँ।” बाकी बचे हुए चरणों में आप थोड़ा बहुत बदलाव करके उन्हें सटीक और स्पष्ट बनाने की कोशिश कीजिए।
जैसा कि आप देख सकते हैं, एल्गोरिदम के बग़ैर, हमारी दुनिया कहीं ज़्यादा आपा-धापी भरी और बहुत कम आनन्ददायक होगी। एल्गोरिदम के बारे में सीखकर आप समस्याओं को बेहतर तरीक़े से सुलझाने की समझ हासिल करने की शुरुआत कर सकते हैं, चाहे वे समस्याएँ गणित की हों, विज्ञान की हों या रोज़मर्रा की।
एल्गोरिदम को सीखने की शुरुआत
सवाल : क्या किसी एक समस्या को सुलझाने के कई एल्गोरिदम हो सकते हैं?
हाँ, किसी एक समस्या को सुलझाने के कई एल्गोरिदम हो सकते हैं! उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि आप अपने घर से स्कूल जाने की कोशिश कर रहे हैं। आप या तो स्कूल की बस ले सकते हैं, या अपनी साइकिल चलाकर स्कूल जा सकते हैं। दोनों ही तरीक़े आपको स्कूल पहुँचा देंगे, लेकिन हरेक के लिए चरणों के अलग समूह की, या दूसरे शब्दों में कहें तो एक अलग एल्गोरिदम की ज़रूरत पड़ेगी।
सवाल : क्या हम एल्गोरिदम के बग़ैर हम किसी समस्या को सुलझा सकते हैं?
हालाँकि, हमें यह लग सकता है कि हम किसी एल्गोरिदम के बग़ैर समस्याओं को सुलझा सकते हैं, ऐसा अकसर इसलिए होता है क्योंकि हम जिन चरणों का पालन कर रहे होते हैं उन्हें सचेतन रूप से दर्ज़ नहीं कर रहे होते हैं। एक स्पष्ट एल्गोरिदम के बिना, किसी समस्या को सुलझाते समय हम ख़ुद को चरणों को दोहराते हुए पा सकते हैं। केवल इतना ही नहीं, हो सकता है कि हम समस्या को सुलझाने के सबसे प्रभावी तरीक़े की पहचान न कर पाएँ या उसे याद न रख पाएँ और वैसी ही किसी समस्या को हल करते समय हमें उसे सुलझाने के चरणों को दोबारा सोचना पड़े। किसी समस्या को सुलझाते समय हमें उसे सुलझाने के चरणों के एक व्यवस्थित अनुक्रम का इस्तेमाल करना चाहिए। हम समस्या को पढ़ते हैं, जानकारी का विश्लेषण करते हैं, और समस्या को सुलझाने के लिए एक योजना बनाते हैं। इसके बाद, हम इस योजना को क्रियान्वित करते हैं और जवाब पता करते हैं। आइए एल्गोरिदम के बारे में और अधिक जानने के लिए कुछ मज़ेदार गतिविधियों पर ग़ौर करें। हम कहानियों, खेलों और गतिविधियों के माध्यम से एल्गोरिदम के बारे में जानेंगे, जो एल्गोरिदम के बारे में सीखने को अपना पसन्दीदा खेल खेलने जितना ही रोचक बना देते हैं।
गतिविधि 1 : कहानी पाठ – ‘प्यासा कौवा’
उद्देश्य : कहानी के पात्र समस्याओं को सुलझाने के लिए एल्गोरिदम का इस्तेमाल कैसे करते हैं इसे कहानियों का इस्तेमाल करके बताना।
कहानी : गर्मियों की एक गरम दोपहर थी और कौआ प्यासा था। उसे एक मिट्टी का घड़ा दिखता है, जिसमें थोड़ा-सा ही पानी था। वह उस घड़े के मुहाने पर बैठ जाता है। वह पानी पीने के लिए अपनी लम्बी चोंच घड़े के अन्दर डालता है, लेकिन उसकी यह कोशिश व्यर्थ जाती है क्योंकि पानी घड़े की तली में था, इसलिए उस तक पहुँचकर पानी पीना उसके लिए मुमकिन नहीं था!

अपने आस-पास देखता है, उसकी छोटी और चमकदार आँखें ज़मीन पर मौजूद हर चीज़ का निरीक्षण करती हैं। उसे पास ही कंकड़ों का एक ढेर नज़र आता है। वह घड़े के मुहाने से फुदककर नीचे आता है, अपनी चोंच से एक कंकड़ को उठाता है और फुदककर फिर से घड़े के मुँह पर बैठ जाता है। छपाक की आवाज़ के साथ वह एक कंकड़ को घड़े में डालता है और ऐसा तब तक करता रहता है जब तक कि पानी उसके पीने लायक स्तर तक नहीं पहुँच जाता। कौआ ख़ूब मन भरकर पानी पीता है और तरोताज़ा होकर उड़ जाता है।
आइए प्यासे कौए ने अपनी समस्या का जो समाधान निकाला उसे एक एल्गोरिदम में व्यवस्थित करें :
कौए का एल्गोरिदम
- एक कंकड़ खोजें।
- उसे घड़े में डालें।
- अपनी चोंच को घड़े के अन्दर डालकर पानी का स्तर नापें।
- अगर पानी का स्तर इतना न हो कि आपकी चोंच उस तक पहुँच पाए, तो 1 से लेकर 3 तक के चरणों को दोहराएँ।
- अगर पानी का स्तर इतना हो कि आपकी चोंच उस तक पहुँच जाए, तो इतना पानी पी लें कि आपकी प्यास पूरी तरह बुझ जाए!
चर्चा : चरणों की यह सूची कौए की प्यास बुझाने के लिए उसका एल्गोरिदम है। हरेक चरण का अच्छी तरह से पालन करके, कौआ पानी की कमी से ख़ुद को बचा सकता है!
सवाल :
क्या होगा अगर कौआ अपने एल्गोरिदम के किसी एक चरण को भूल जाता है, जैसे कि एक कंकड़ डालने के बाद पानी के स्तर को न जाँचना? सभी चरणों का सही क्रम में पालन करना ज़रूरी क्यों है?
क्या आप किसी भिन्न एल्गोरिदम के बारे में सोच सकते हैं, जिसका इस्तेमाल कौआ इस समस्या के समाधान के लिए कर सकता था? क्या होता अगर आस-पास कंकड़ होते ही न? उदाहरण के लिए, क्या वह अपनी चोंच मारकर पानी पीने के लिए घड़े में छेद करता?
गतिविधि 2 : नृत्य का एल्गोरिदम
उद्देश्य : नृत्य के चरणों और उनके क्रम के बारे में जानना।

खेल : हम एक सरल से नृत्य के चरणों को लिखेंगे और फिर एक साथ उनका पालन करेंगे। हम छोटे बच्चों की लोकप्रिय कविताओं/गीतों के चरणों का भी पालन कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, ‘लूबी लू’ गाने के बोल को नृत्य के निम्नलिखित एल्गोरिदम में व्यवस्थित कर सकते हैं :
नृत्य के चरण
- अपने दोनों हाथों को ज़मीन के समानान्तर फैलाकर खड़े हो जाएँ।
- अपना दायाँ हाथ ऊपर उठाएँ।
- इसे ऊपर-नीचे हिलाएँ।
- एक बार गोल घूम जाएँ।
- अपना बायाँ हाथ ऊपर उठाएँ।
- इसे ऊपर-नीचे हिलाएँ।
- एक बार फिर गोल घूम जाएँ।
निर्देश
- चरणों को किसी बोर्ड या काग़ज़ पर लिख लें।
- किसी गाने या धुन के अनुसार हरेक चरण का धीरे-धीरे अभ्यास करें।
- सभी चरणों को एक साथ मिलाएँ और नृत्य करें।
चर्चा : नृत्य के एल्गोरिदम का पालन करके, आप नृत्य में शामिल चरणों को याद रख सकते हैं और उन्हें सही क्रम में कर सकते हैं। अगर आप चरणों में घाल-मेल कर देंगे, तो नृत्य वैसा नहीं रह जाएगा, जैसा यह पहले था। इससे पता चलता है कि किसी एल्गोरिदम के चरणों का क्रम ज़रूरी क्यों होता है। थोड़े बहुत संगीत के साथ एल्गोरिदम पर नृत्य करना सुनिश्चित करें! आप अपनी पसन्द का कोई भी संगीत इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन अगर आप एक ऐसा संगीत चुनें, जिसके बोल में डांस के स्टेप्स या शरीर को हिलाना-डुलाना शामिल हो तो ज़्यादा बेहतर होगा।
गतिविधि 3 : बीज बोने का एल्गोरिदम
उद्देश्य : किसी बीज को बोने के लिए एक एल्गोरिदम का इस्तेमाल करें और पौधे के बढ़ने का अवलोकन करें।
‘बीज बोने का’ एल्गोरिदम









चर्चा : चरणों के क्रम और हरेक क्रम का महत्त्व।
- अगर चरण 3 छोड़ दिया जाए तो क्या होगा?
- अगर चरण 8 छोड़ दिया जाए तो क्या होगा?
- अगर चरण 6 को चरण 5 से पहले कर दिया जाए तो क्या होगा?
गतिविधि 4 : प्रतिदिन के एल्गोरिदम
उद्देश्य : दैनिक गतिविधियों में एल्गोरिदम की पहचान करें।
अभ्यास : आइए कुछ दैनिक गतिविधियों के बारे में सोचें और उन्हें एल्गोरिदम में विभाजित करें।
उदाहरण 1 : दाँतों में ब्रश करना
- अपना टूथब्रश लें।
- ब्रश पर टूथपेस्ट लगाएँ।
- टूथब्रश को नल के पानी में भिगोएँ।
- अपने दाँतों में दो मिनट तक ब्रश करें। (नोट : इस चरण के लिए भी आप एक एल्गोरिदम बना सकते हैं!)
- पानी से कुल्ला कर लें।
- अपने टूथब्रश को साफ़ कर लें और इसे इसकी जगह पर वापस रख दें।

उदाहरण 2 : अपने स्कूल का बस्ता पैक करना
- स्कूल की अपनी सभी किताबों को इकट्ठा करें।
- अपना टाइम टेबल जाँच लें।
- टाइम टेबल के मुताबिक किताबों को अपने बैग में रखें।
- पेंसिल रखने के अपने डिब्बे को बैग में रखें।
- यह देख लें कि आपकी पेंसिल की नोक बनी हो, और आपके पास एक रबड़ हो।
- यह देख लें कि आपका लंच बॉक्स और पानी की बोतल आपके पास हो।
- अपने बैग की चेन बन्द कर लें।
चर्चा : इन कार्यों को सरल चरणों में विभाजित करके, आप इन्हें ज़्यादा प्रभावी ढंग से पूरा कर सकते हैं और आपको जो कुछ भी करना है, उसे याद रख सकते हैं।

एल्गोरिदम के साथ गणित का एक खेल
पहला खेल : पैटर्न की पहचान के माध्यम से पहली n प्राकृतिक संख्याओं का योग
उद्देश्य : पहली 100 प्राकृतिक संख्याओं का योग निकालना
एल्गोरिदम
- आप समस्या को ब्लैकबोर्ड पर लिख लें : \(1 + 2 + 3 + … + 100\)
- विद्यार्थियों से पूछें कि क्या उनको इस अनुक्रम में कोई पैटर्न नज़र आ रहे हैं।
- समस्या के नीचे एक पंक्ति जोड़ें : \(100 + 99 + 98 + ….. + 1\)
- विद्यार्थियों से पूछें कि क्या उनको इस अनुक्रम में कोई पैटर्न नज़र आ रहे हैं।
- संख्याओं की जोड़ियों को बोर्ड पर लिखें : \((1 + 100), (2 + 99), (3 + 98), …, (50 + 51)\)
- इस पैटर्न की पहचान करें कि इन सभी जोड़ियों का योग एक ही संख्या यानी \(101\) है।
- चर्चा करें कि ऐसी कितनी जोड़ियाँ हैं।
- जोड़ियों की संख्या और \(101\) का गुणनफल ज्ञात करें।
- पता करें कि यह गुणनफल अनुक्रम के योग से कैसे सम्बन्धित है।
- इसी पैटर्न को लागू करके और एक सूत्र बनाकर पैटर्न को अन्य संख्याओं के लिए सामान्यीकृत करने की कोशिश करें!
शिक्षक के लिए निर्देश
चर्चा करें कि किस तरह से पैटर्न की पहचान करने से किसी एल्गोरिदम के चरण तैयार करने में मदद मिलती है। जब विद्यार्थी किसी पैटर्न की पहचान करते हैं, तो वे मूल रूप से समस्या को सरल और ऐसे हिस्सों में बाँट रहे होते हैं, जिन्हें दोहराया जा सके। उदाहरण के लिए, अनुक्रम \((5, 10, 15, 20…)\) में, यदि विद्यार्थी यह ध्यान दें कि हरेक संख्या पिछली संख्या से \(5\) अधिक है, तो यह पैटर्न इस अनुक्रम से सम्बन्धित समस्याएँ सुलझाने में उनकी मदद कर सकता है। इसी तरह से, किसी एल्गोरिदम का उद्देश्य किसी जटिल समस्या को निर्देशों या चरणों की एक शृंखला में विभाजित करना होता है, जिनका पालन करने पर उन्हें समस्या के एक प्रभावी समाधान तक पहुँचने में मदद मिलती है। एल्गोरिदम के सन्दर्भ में, पैटर्न की पहचान करना बहुत ज़रूरी होता है, क्योंकि इससे विद्यार्थियों को जटिल समस्याओं को ऐसे कार्यों में विभाजित करने में मदद मिलती है, जो सरल हों और जिन्हें करना आसान हो। डेटा को क्रम में व्यवस्थित करने और उनमें पैटर्न की पहचान करने से विद्यार्थियों को वर्गीकरण की अवधारणा को समझने में मदद मिलती है।
निष्कर्ष : एल्गोरिदम की ताक़त
एल्गोरिदम सुनने में कठिन ज़रूर लग सकते हैं, लेकिन वे समस्याओं को चरण-दर-चरण सुलझाने का एक तरीक़ा हैं। चाहे आप नाश्ता बना रहे हों, किसी समस्या को सुलझा रहे हों, या कोई खेल खेल रहे हों, एल्गोरिदम उन्हें ज़्यादा कुशलता के साथ और प्रभावी ढंग से करने में आपकी मदद करते हैं।
एल्गोरिदम के बारे में सीखकर, हम न केवल कम्यूटर का बेहतर ढंग से इस्तेमाल करना या गणित के सवालों को बेहतर ढंग से हल करना सीख रहे हैं, बल्कि हम समस्याओं के बेहतर समाधानकर्ता भी बन रहे हैं। इसलिए अगली बार जब भी किसी पेचीदा समस्या से आपका सामना हो, तो एल्गोरिदम की तरह सोचना याद रखें : उसे छोटे-छोटे चरणों में विभाजित करें, हरेक चरण का ध्यान से पालन करें, और इस तरह से आपको आपका समाधान मिल जाएगा!
एल्गोरिदम ख़ज़ाने तक पहुँचने के नक़्शे की तरह होते हैं, जो आपको सही जवाब तक पहुँचाते हैं। आप इनका जितना ज़्यादा अभ्यास करेंगे, समाधान तक पहुँचना आपके लिए उतना ही आसान होता जाएगा।