सममित बहुभुजों की खोजबीन
बहुभुजों को ऐसी सरल बन्द आकृतियों के रूप में परिभाषित किया जाता है जो सीधे रेखाखण्डों से बनी होती हैं (जो 180 डिग्री पर नहीं मिलते)। हम सामान्य रूप से बहुभुज को उसकी भुजाओं की संख्या के आधार पर नाम देते हैं। तीन भुजाओं वाले बहुभुज को 3-भुज या त्रिभुज कहा जाता है और चार भुजाओं वाले बहुभुज को 4-भुज या चतुर्भुज कहा जाता है। सामान्यतः कोई बहुभुज जिसमें n किनारे और n शीर्ष होते हैं उसे n-भुज कहा जाता है। रेखाखण्ड या बहुभुज की भुजाओं को किनारे कहा जाता है और किनारे जिन बिन्दुओं पर मिलते हैं उन्हें शीर्ष कहा जाता है।
आगे हम इस बात पर चर्चा करेंगे कि मुड़े हुए काग़ज़ को अलग-अलग ढंग से काटने पर किस प्रकार हमें बहुभुज आकृतियाँ मिल सकती हैं। विद्यार्थी विभिन्न क्रमों में काग़ज़ को काटकर और सामने आने वाली आकृतियों का अवलोकन करके सममिति और बहुभुजों के रिश्ते की गहरी समझ हासिल कर सकते हैं।

पहले यह समझ लें कि इस लेख के उद्देश्य के लिए एक ‘काट’, ‘काट के क्रम’ और ‘कटआउट’ क्या हैं। एक ‘काट’ का मतलब, किसी सीधी रेखा के अनुदिश काग़ज़ को काटने के लिए लगाई गई लकीर है (जैसा कि चित्र-2 में दिखाया गया है)। ‘दो काट के एक क्रम’ में दूसरी काट पहली काट के अन्तिम बिन्दु से शुरू होकर ऐसी सीधी रेखा में चलती है जो कि पहली काट से नहीं मिलती। यानी दोनों काटों के बीच उनके साझा बिन्दु पर कोई कोण (180 डिग्री के अलावा) होता है। चित्र-3 तीन काटों का एक क्रम दिखाता है। ‘कटआउट’ से हमारा तात्पर्य मुड़े हुए काग़ज़ के उस टुकड़े से है जो काटों के उस अनुक्रम के पूरा होने पर सामने आता है जो मोड़ रेखा के अनुदिश किसी बिन्दु से शुरू होता है और मोड़ रेखा के अनुदिश ही किसी बिन्दु पर समाप्त होता है। हम इसे एक बहु-काट कहते हैं। चित्र-3 के दाईं तरफ़ की तस्वीर 3 काटों के क्रम (जैसा कि साथ वाले चित्र में दिखाया गया है) का उपयोग करते हुए हासिल कटआउट को दर्शाती है।
कुछ सामान्य अवलोकन
- कटआउट के रूप में एक बहुभुज प्राप्त करने के लिए हमें मोड़ रेखा पर किसी बिन्दु से शुरुआत करनी पड़ेगी, सरल रेखा के अनुदिश काट लगानी पड़ेगी (क्योंकि कटआउट सिर्फ़ रेखाखण्डों से मिलकर बना होना चाहिए) और मोड़ रेखा पर ही किसी अन्य बिन्दु पर अन्त करना होगा। यह बाध्यता इस बात को सुनिश्चित करती है कि कटआउट एक सरल, बन्द बहुभुजीय आकृति होगी।
- जैसा कि चित्र-2 में दिखाया गया है, एक अकेली काट किसी बहुभुज का निर्माण नहीं कर सकती क्योंकि इसके लिए ऐसे और शीर्षों व किनारों की ज़रूरत होती है जो मोड़ रेखा के अनुदिश ख़ुद को प्रतिबिम्बित करें। इसकी बजाय अनेक काटों (जैसा कि ऊपर वर्णन किया गया है) की ज़रूरत होती है।


- अगर कोई बिन्दु मोड़ रेखा पर किसी ऐसी काट पर है जो मोड़ के साथ समकोणों (90 डिग्री) पर नहीं है तो यह बिन्दु बहुभुजीय कटआउट का एक शीर्ष है (चित्र-3 देखें)।
- अगर कोई बिन्दु मोड़ रेखा पर ऐसी काट पर है जो मोड़ के साथ समकोण पर है तो यह बिन्दु बहुभुजीय कटआउट का शीर्ष नहीं होता (चित्र-4 देखें)। इसके अलावा, ऐसा बिन्दु बहुभुजीय कटआउट के एक किनारे का मध्य बिन्दु होगा।

- किसी बिन्दु (यह बिन्दु मोड़ रेखा पर नहीं हो सकता) पर किन्हीं भी दो काटों के मिलने से बहुभुजीय कटआउट के दो शीर्ष बन जाते हैं (चित्र-5 देखें)।
खोज-1 : सममित त्रिभुज (3-भुज) बनाना
आइए शुरुआत इस बात की पड़ताल से करें कि एक त्रिभुज कैसे बनाएँ जो मोड़ रेखा के अनुदिश सममित हो।
सवाल : किसी मुड़े हुए काग़ज़ से एक सममित त्रिकोणीय कटआउट प्राप्त करने के लिए इस काग़ज़ को काटने के सम्भावित तरीक़े क्या हो सकते हैं?
आइए हम एक काग़ज़ को मोड़कर आधा कर दें, जैसा कि ऊपर के चित्रों में दिखाया गया है। ध्यान दें कि हम तीन (या अधिक) काट का उपयोग नहीं कर सकते क्योंकि इससे दो काटों के मिलने से दो (या अधिक) अलग-अलग बिन्दु निर्मित होते हैं और नतीजतन अवलोकन-5 के हिसाब से इस कटआउट में चार शीर्ष होंगे। इसलिए, एक त्रिभुज हासिल करने के लिए हमें बस दो काटों की ज़रूरत है।
अगर दोनों में से कोई भी काट मोड़ रेखा के साथ समकोण पर नहीं है तो अवलोकन-3 के मुताबिक़ मोड़ रेखा पर स्थित दो बिन्दुओं के नतीजे में बहुभुजीय कटआउट के दो शीर्ष बन जाते हैं। अवलोकन-5 के अनुसार इन दो काटों के मिलने का बिन्दु बहुभुजीय कटआउट के दो और शीर्षों को जन्म देता है। इस तरह, ऐसी स्थिति में बहुभुज की चार भुजाएँ होती हैं और त्रिभुज का निर्माण नहीं हो सकता।
इसलिए त्रिभुज हासिल करने के लिए रणनीतिक रूप से दो काट लगाने का अकेला तरीक़ा है कि इन दो काटों में से मात्र एक को मोड़ रेखा के साथ ठीक समकोण पर रखना। नीचे दिए गए चित्र त्रिभुज निर्माण तक ले जाने वाले इस तरह की रणनीतिक काटों को दिखाते हैं। ज़ाहिर है कि मोड़ रेखा प्राप्त हुए त्रिभुज के लिए सममिति की रेखा है।

इसके अलावा, ध्यान दें कि इस सममिति की रेखा के अनुदिश इन त्रिकोणीय कटआउट को मोड़ने से इसकी दोनों तरफ़ के किनारे सम्पाती हो जाते हैं यानी ये दो किनारे एक ही लम्बाई के होते हैं। इसलिए, हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि अगर किसी त्रिभुज में एक सममिति की रेखा है तो रेखा की दोनों तरफ़ के दो किनारे बराबर लम्बाई के होते हैं। ऐसा त्रिभुज समद्विबाहु त्रिभुज कहलाता है। इसके बाद हम देखते हैं कि दोनों तरफ़ के दो शीर्ष सम्पाती होते हैं जो दर्शाता है कि उनसे मिलने वाले किनारे को मोड़ रेखा समद्विभाजित करती है।

आगे की खोज : हम काग़ज़ को दो जगह से युक्तिपूर्वक काटकर तीनों समान भुजाओं वाला त्रिभुज (जिसे समबाहु त्रिभुज कहते हैं) कैसे प्राप्त कर सकते हैं?
खोज-2 : सममित चतुर्भुज (4-भुज) बनाना
इसके बाद हम अपना ध्यान 4 भुजाओं वाला एक ऐसा बहुभुज, यानी चतुर्भुज, बनाने की तरफ़ लगाते हैं जो मोड़ के अनुदिश सममित हो।
सवाल : किसी मुड़े हुए काग़ज़ से एक सममित चतुर्भुज का कटआउट प्राप्त करने के लिए इस काग़ज़ को काटने के सम्भावित तरीक़े क्या हो सकते हैं?
पहले, आइए हम एक काग़ज़ को मोड़कर आधा कर दें। ध्यान दें कि हम चार (या अधिक) काटों का इस्तेमाल नहीं कर सकते क्योंकि इनके नतीजे में तीन (या अधिक) ऐसे बिन्दु सामने आते हैं जहाँ दो काटें मिलती हैं और इसलिए अवलोकन-5 के मुताबिक़ इस कटआउट में छह (या अधिक) शीर्ष होंगे। इसलिए चतुर्भुज हासिल करने के लिए हमें दो या तीन काटों की ज़रूरत है।
स्थिति-1 — दो काटों के साथ : पहले, आइए एक चतुर्भुज का कटआउट हासिल करने के लिए सिर्फ़ दो काटों का इस्तेमाल करते हैं। अवलोकन-3 के वर्णन के मुताबिक़ जब हम ऐसी दो काट लगाते हैं जिनमें से कोई भी मोड़ रेखा के साथ समकोण पर नहीं होती तो हमें चतुर्भुज हासिल होता है।

चतुर्भुज \(ABCD\) (चित्र-7 देखें), में ध्यान दें कि मोड़ रेखा सममिति की रेखा है। स्पष्ट है कि \(B\) और \(D\) चतुर्भुज के ऐसे शीर्ष हैं जो मोड़ रेखा के चारों ओर एक-दूसरे के सममित हैं, जबकि \(A\) और \(C\) ऐसे शीर्ष हैं जो सममिति की रेखा पर स्थित हैं। आइए हम एक रेखाखण्ड के माध्यम से \(B\) और \(D\) को जोड़ें और उसे सममिति की रेखा को \(O\) पर काटने दें जैसा कि चित्र-8 में दिखाया गया है।

ध्यान दें कि जब हम \(ABCD\) को सममिति की रेखा के अनुदिश मोड़ते हैं तो \(OB\) व \(OD\) सम्पाती होती हैं। इसके अलावा, कोण \(AOB\) व \(AOD\) और \(COB\) व \(COD\) एक-दूसरे के साथ क्रमशः सम्पाती होते हैं।
इसलिए, \(OB\) व \(OD\) एक ही लम्बाई की हैं। इसके अलावा, \(AOB\), \(AOD\), \(COB \)और \(COD\) में से हर एक कोण समकोण है।
इसलिए, हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि ठीक दो काटों का इस्तेमाल करके हासिल किए गए ऐसे सममित चतुर्भुज में दो शीर्ष सममिति की रेखा पर स्थित होते हैं और उन्हें जोड़ने वाला विकर्ण दूसरे विकर्ण का लम्ब समद्विभाजक होता है। इस गुण वाले दो प्रकार के चतुर्भुज होते हैं : पतंग और भाला। (ध्यान रहे कि कोई ख़ास स्थिति हो सकती है जब समचतुर्भुज प्राप्त हो।)

चित्र-7 व चित्र-8 में बने चतुर्भुज को पतंग कहा जाता है जबकि चित्र-9 में बने चतुर्भुज को भाला। दोनों के बीच फ़र्क़ यह है कि पतंग के मामले में विकर्ण \(BD\) पूरी तरह से चतुर्भुज के भीतर स्थित है जबकि भाले के मामले में विकर्ण \(BD\) पूरी तरह से चतुर्भुज के बाहर स्थित है।
स्थिति-2 — तीन काटों के साथ : यदि तीनों में से कोई भी काट मोड़ रेखा के साथ समकोण पर स्थित नहीं है तो अवलोकन-3 के मुताबिक़ मोड़ रेखा पर स्थित दो बिन्दु बहुभुजीय कटआउट के दो शीर्षों को जन्म देते हैं। वे दो बिन्दु जहाँ इन काटों के दो युग्म मिलते हैं, अवलोकन-5 के मुताबिक़ बहुभुजीय कटआउट के चार और शीर्षों को जन्म देते हैं। इसलिए, ऐसी स्थिति में बहुभुज की छह भुजाएँ होती हैं और इसलिए वह चतुर्भुज नहीं हो सकता।
इसके अलावा, हम देखते हैं कि अगर तीन काटों में से बस एक काट मोड़ रेखा के साथ समकोण पर है तो अवलोकन-4 के मुताबिक़ ऐसी काट पर स्थित बिन्दु बहुभुजीय कटआउट का शीर्ष नहीं बनता। लेकिन, मोड़ रेखा पर स्थित अन्य बिन्दु जो अन्य दो काटों में से एक पर है, शीर्ष निर्मित करता है। इसके अलावा, वे दो बिन्दु जहाँ इन दो काटों के दो युग्म मिलते हैं, अवलोकन-5 के मुताबिक़, बहुभुजीय कटआउट के चार और शीर्षों को जन्म देते हैं। इसलिए ऐसी स्थिति में बहुभुज की पाँच भुजाएँ होंगी और इसलिए वह चतुर्भुज नहीं हो सकता।

इसलिए, चतुर्भुज हासिल करने के लिए तीन काटों का इस्तेमाल करने का एकमात्र तरीक़ा है दो ऐसी काट लगाना जो मोड़ रेखा के साथ समकोणों पर हों। ऐसे में, वे दो बिन्दु जहाँ इन दो काटों के दो युग्म मिलते हैं, अवलोकन-5 के मुताबिक़, बहुभुजीय कटआउट के चार शीर्षों को जन्म देते हैं और इसके अलावा और कोई शीर्ष नहीं होते। नीचे दिए गए चित्र (चित्र-10) ऐसी कुछ स्थितियाँ दिखाते हैं।
चतुर्भुज \(PQRS\) (चित्र-10) में, मोड़ रेखा सममिति की रेखा है। स्पष्ट है कि \(P\) और \(S\) व \(Q\) और \(R\) इस चतुर्भुज के शीर्षों के ऐसे युग्म हैं जो मोड़ रेखा के चारों ओर संगत रूप से सममित हैं। इसके अलावा, \(PS\) व \(QR\) एक-दूसरे के समान्तर हैं क्योंकि वे दोनों सममिति की रेखा के लम्बवत हैं। इसके अतिरिक्त, \(PQRS\) को सममिति की रेखा के अनुदिश मोड़ने पर हम देखते हैं कि \(PQ\) व \(RS\) सम्पाती हो जाती हैं यानी वे समान लम्बाई की हैं।
इसलिए हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि ठीक तीन काटों का इस्तेमाल करके हासिल किए गए सममित चतुर्भुज में सममिति की रेखा पर कोई शीर्ष स्थित नहीं होता और इसमें समान्तर सम्मुख भुजाओं का एक युग्म होता है जबकि सम्मुख भुजाओं के दूसरे युग्म में लम्बाई समान होती है। ऐसे गुण वाले चतुर्भुज को हम समद्विबाहु समलम्ब कहते हैं।
आगे की खोज : किन परिस्थितियों में हम गारंटी से यह कह सकते हैं कि ऊपर बताई गई प्रक्रियाओं से प्राप्त किए गए सममित चतुर्भुजों में सममिति की कम-से-कम एक रेखा और होती है?
हमारे अवलोकनों का सामान्यीकरण : किसी मुड़े हुए काग़ज़ से एक सममित n-भुजीय कटआउट प्राप्त करने के लिए इस काग़ज़ को काटने के कितने सम्भावित तरीक़े हो सकते हैं?
- National Council of Educational Research and Training (NCERT). (2024). Ganit Prakash, Class 6 (1st ed.). NCERT. https://ncert.nic.in/textbook.php?fegp1=0-10