शानदार, किफ़ायती और कलात्मक : मैथ स्पेस के 10 साल
अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के मैथ स्पेस में पहली बार प्रवेश करते ही मुझे ऐसा लगा जैसे मैं खिलौनों की दुकान में कोई बच्चा हूँ। मेरे सामने हाथ से बने हुए उपकरणों से भरी हुई अलमारियाँ, टेबलें और दराज़ें थीं; लगभग हर उपलब्ध सतह पर रंग-बिरंगी स्टेशनरी बिखरी हुई थी; फ़र्श पर फेंके गए चाय के खाली डिब्बे और लैपटॉप की पैकेजिंग की थप्पियाँ लगी हुई थीं। मुझे लगा कि कमरा व्यवस्थित अव्यवस्था का एक बेहतरीन उदाहरण था, ऐसी अव्यवस्था जो आपकी उँगलियों को इतना बेचैन कर देती है कि वे और किसी जगह रुककर कुछ बनाने को उत्सुक हो जाती हैं। कहने की ज़रूरत नहीं है, मैं सरसरी तौर पर यह सब देखते वक़्त इस जगह की संरक्षक स्वाती सरकार द्वारा एक मीटिंग पूरी करने का इन्तज़ार करते हुए मन-ही-मन बहुत ख़ुश थी।
मूलत: एक गणितज्ञ स्वाती 2013 में विश्वविद्यालय के कंटीन्यूइंग स्कूल एंड विश्वविद्यालय रिसोर्स सेंटर से जुड़ने से पहले कुछ वर्षों तक एक शिक्षिका के रूप में काम करती थीं। गणित शिक्षा के प्रति जुनूनी, स्वाती और उनकी सहकर्मी स्नेहा टाइटस (अब एट राइट एंगल्स की मुख्य सम्पादक) जो इस ‘अपराध’ में साझेदार रहीं, ने मिलकर मैथ स्पेस की कल्पना की और उसे मूर्त रूप प्रदान किया।
शुरुआत में पीईएस विश्वविद्यालय कैम्पस (अपना स्थाई कैम्पस बनने से पहले अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय जहाँ काम कर रहा था) के एक छोटे-से कमरे तक सीमित मैथ स्पेस पहले उसी कैम्पस में एक बड़े साझा कमरे में स्थानान्तरित हुआ और फिर सरजापुरा कैम्पस के धूप वाले कमरे में जहाँ इस वक़्त मैं खड़ी हूँ। अगले साल के अन्त तक, मैथ स्पेस अन्ततः अपने भवन में स्थानान्तरित होने वाला है।
स्वाती ने मुझे बताया कि मैथ स्पेस की यात्रा एक कमरे में एक छोटी-सी अलमारी से शुरू हुई थी, जिसे आगामी स्नातक कार्यक्रमों के लिए विज्ञान प्रयोगशाला के रूप में तैयार किया गया था। “अलमारी दिल्ली स्थित एक गणित संसाधन समूह जोड़ो ज्ञान की कुछ सामग्री से भरी हुई थी। कमरे की चाबी सुरक्षा कर्मियों के पास हुआ करती थी, इसलिए जब भी हम सामग्री तक पहुँचना चाहते थे, तो हमें चाबी प्राप्त करने में 20 मिनट लगते थे और काम पूरा होने के बाद वापिस सौंपने में 20 मिनट और लग जाते थे। इस तरह काम चलना सम्भव नहीं था।”
इस बिन्दु पर, स्वाती और टीम को यह एहसास हुआ कि गणित शिक्षा में इन संसाधनों के उपयोग की बहुत सम्भावनाएँ हैं। लेकिन इस क्षमता के दोहन से पहले, उन्हें प्रभावी ढंग से यह दस्तावेज़ीकरण करना होगा कि शिक्षक इनका उपयोग किस प्रकार कर सकते हैं और कार्यशालाओं और प्रकाशनों के माध्यम से इसका प्रसार कैसे कर सकते हैं। वे यह सब कहाँ करेंगे?
स्वाती ने बताया, “उस समय, कैम्पस में एक पॉटरी स्टूडियो था। इसलिए मैंने सोचा कि हम गणित के लिए भी ऐसा ही स्थान क्यों नहीं बना सकते?” दोनों ने ऐसी सम्भावनाएँ तलाशना शुरू की, ताकि वे विज्ञान टीम के साथ कमरा साझा कर सकें। इसकी मंज़ूरी नहीं मिली, हालाँकि, उन्हें एक छोटा कमरा दिया गया जिसमें वे एक गणित प्रयोगशाला शुरू कर सकते थे। “यह सबसे छोटे कमरों में से एक था, यहाँ तक कि उस पॉटरी स्टूडियो से भी छोटा! और वह हमारी बहुत ही साधारण शुरुआत थी,” उन्होंने याद करते हुए बताया।
मैथ स्पेस को सफलता का पहला स्वाद चखने में ज़्यादा समय नहीं लगा। 2014 में, विश्वविद्यालय में सिर्फ़ दो प्रोग्राम संचालित थे — एमए एजुकेशन और एमए डेवलपमेंट। अपने पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में, एजुकेशन के विद्यार्थियों को आस-पास के सरकारी और कम शुल्क वाले निजी स्कूलों में साप्ताहिक रूप से शामिल होना होता था। इसके अलावा, फ़ाउण्डेशन द्वारा प्रवासी मज़दूरों के बच्चों के लिए कुछ केन्द्र भी संचालित किए जाते थे। स्वाती ने बताया, “हमारे पास ये ऐसे स्कूल थे जिनके साथ हमारा पहले से ही सम्बन्ध है। इसलिए हमने सोचा : क्यों न उनके साथ कुछ कार्यशालाएँ की जाएँ।” और इसलिए दोनों ने अपने संसाधन एक बड़े कमरे में ले जाना शुरू कर दिया, जहाँ उन्होंने इन स्कूलों के शिक्षकों के लिए दिन भर की कार्यशालाएँ आयोजित कीं।
यह हर महीने आयोजित की जाती थीं और हालाँकि उन्होंने प्रतिभागियों की संख्या 30 तक सीमित रखने की बार-बार कोशिश की, फिर भी कार्यशाला में प्रतिभागियों की संख्या 40 से ज़्यादा हो जाना आम बात थी। अगले वर्ष अन्य विषयों ने भी अपनी इसी तरह की कार्यशालाएँ आयोजित करना शुरू किया और ये प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय स्तरों पर आयोजित की गईं। नगरपालिका स्कूलों के लिए कार्यशालाओं के कन्नड़ संस्करण भी आयोजित किए गए। स्वाती ने बताया, “कार्यशालाएँ बहुत सफल रहीं, हमारी कल्पना से भी कहीं अधिक।”
कुछ सालों में, सभी ने यह स्वीकार कर लिया था कि उन्हें और अधिक जगह की ज़रूरत है। जैसा कि हुआ, उन्हें वही बड़ा कमरा दे दिया गया, जो शुरू में उन्हें देने से मना कर दिया गया था। यह कमरा गणित और विज्ञान की एक संयुक्त प्रयोगशाला के रूप में काम करने लगा, जिसमें शिक्षक कार्यशालाओं में भाग लेते थे और विद्यार्थी विज्ञान के प्रयोग करते थे। स्वाती ने बताया, “हर कोई इस बात से ख़ुश था क्योंकि आख़िरकार जगह का पूरी तरह इस्तेमाल हो रहा था।”
मैथ स्पेस का प्रबन्धन करने के अलावा, स्नेहा और स्वाती एमए एजुकेशन के विद्यार्थियों को गणित में पाठ्यक्रम सामग्री विकास नामक एक वैकल्पिक विषय भी पढ़ा रही थीं। पाठ्यक्रम के दौरान, वे अपने विद्यार्थियों को खेल, वर्कशीट और अन्य सामग्री बनाने के लिए प्रोत्साहित करती थीं। “हमने उन्हें याद दिलाया कि इससे न केवल उन्हें ग्रेड और अनुभव मिलेगा, बल्कि वे जो कुछ भी बनाएँगे, वह प्रयोगशाला का हिस्सा बनेगा,” उन्होंने याद किया। यह प्रेरणा काम कर गई। विद्यार्थियों ने विभिन्न गणित शिक्षण संसाधन बनाए, जैसे कि भिन्नों को सीखने के लिए एक खेल, त्रिकोणमितीय कार्य देखने के लिए एक मॉडल आदि। “कभी-कभी एक बैच कुछ बनाता था और अगला बैच उसी चीज़ को बनाने के लिए प्रेरित होता था,” उन्होंने मुझे गर्व से अपने पूर्व विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए संसाधनों से भरी एक अलमारी दिखाते हुए कहा।
इस दौरान मैथ स्पेस ने मंत्रा4चेंज नामक संगठन के साथ एक मूल्यवान साझेदारी भी स्थापित की, जिसने विश्वविद्यालय के कई पूर्व विद्यार्थियों को काम पर रखा। विभिन्न संगठनों में कार्यरत पूर्व विद्यार्थी स्वाती के साथ नए विचारों पर विचार-विमर्श करने के लिए मैथ स्पेस में वापस आते थे। शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले विभिन्न ग़ैर-सरकारी संगठनों के लोग भी उनसे मिलने आते थे और उनके स्थान का उपयोग कुछ सँवारने और कुछ नया करने के लिए करते थे।
मैथ स्पेस ने आगे विकास के तहत स्टूडेंट असिस्टेंटशिप प्रोग्राम की शुरुआत की, जिसने विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय में अंशकालिक नौकरी करना सम्भव बनाया। स्वाती ने बताया, “हमने इसका लाभ उठाया और सेमेस्टर ब्रेक के दौरान कुछ विद्यार्थियों को काम पर रखना शुरू कर दिया।” काम पर रखे गए विद्यार्थी, जो विभिन्न विषयों से सम्बन्धित होते थे, गणित शिक्षण संसाधनों के उत्पादन से सम्बन्धित कार्यों में जुट गए। अपने कौशल के आधार पर, कुछ लोग चित्र बनाते थे, कुछ लोग चीज़ें काटते थे, अन्य लोग प्रबन्धन करते थे, वग़ैरह। इस सुव्यवस्थित तरीक़े ने मैथ स्पेस द्वारा इस तरह की गणित सम्बन्धी सामग्री (mat(h)erial) का थोक उत्पादन करना सम्भव बनाया जो अन्ततः देश भर के स्कूलों में जाएगी।
मैथ स्पेस में अंशकालिक नौकरी के अवसर विद्यार्थियों के बीच इतने लोकप्रिय हो गए कि पिछली गर्मियों में 16 विद्यार्थियों ने नाम दर्ज कराए! स्वाती के लिए यह बहुत सन्तोष की बात थी कि विद्यार्थी सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाली गणित शिक्षा की खोज में इतने व्यस्त हैं और इससे भी ज़्यादा ख़ुशी उन्हें यह देखकर होती थी कि लोग मौजूदा किट के लिए नए विचार और सुधार की कोशिश करते हैं। स्वाती ने हँसते हुए कहा, “लोग सोच रहे थे कि आख़िर यहाँ चल क्या रहा है।” ऑडिटिंग के एक दौर के बाद, अधिकारी आश्वस्त हो गए कि सब कुछ ठीक है।
“अब हमारी बहुत सख़्त सीमाएँ हैं। हम केवल 10 विद्यार्थियों को ही काम दे सकते हैं और हमारे पास बहुत बड़ी प्रतीक्षा सूची है।”
इस बीच, विश्वविद्यालय की इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट फंक्शन (IMF) टीम के साथ एक और रोमांचक साझेदारी पनप रही थी। IMF विश्वविद्यालय के कामकाज के लिए मूलभूत गतिविधियों की एक शृंखला के लिए ज़िम्मेदार है, जिसमें भूमि अधिग्रहण, निर्माण, कार्यालयों की साज-सज्जा, प्रशासन और केन्द्र प्रबन्धन और ख़रीद शामिल है।
स्वाती ने कहा, “IMF के साथ हमारा अच्छा सम्बन्ध है, जिसके माध्यम से हम चाय की थैलियों के डिब्बे, अनुपयोगी/ पुराने पोस्टर जैसी बेकार सामग्री प्राप्त कर पाते थे।” एक समय के बाद, यह देखकर उन्हें ख़ुशी हुई कि मैथ स्पेस एक तरह से अनौपचारिक संग्रहालय में बदल रहा था। “यहाँ कुछ भी फेंका नहीं जाता है। इसलिए कभी-कभी IMF के लोग यहाँ उन पुराने पोस्टरों की तलाश में आते हैं, जिनकी ज़रूरत उन्हें दस्तावेज़ीकरण के लिए होती है। यह सचमुच मज़ेदार है!” हाल ही में, जब विश्वविद्यालय ने अपने ऐतिहासिक 40-मंज़िला छात्रावास भवन का निर्माण पूरा किया, तो IMF ने मैथ स्पेस को उनके लिए चाबी के 40 बॉक्स बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपी, ताकि चाबियों को मंज़िलवार व्यवस्थित ढंग से रखा जा सके। “IMF के हमारे ग्राहकों में से एक हो गया, तो सामग्री प्राप्त करना बहुत आसान हो गया है। वे इस सब में एक बहुत बड़े साझेदार हैं।”
मैथ स्पेस का प्रभाव तेज़ी से स्पष्ट होता जा रहा है। उनके द्वारा तैयार किए गए गणित संसाधनों को पूर्वोत्तर में काम करने वाले विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा वहाँ के विभिन्न स्कूलों में अपनाया गया। कुछ ने तो राज्य बोर्ड की पाठ्यपुस्तकों में भी स्थान बनाया।
मैंने स्वाती से पूछा कि 3डी प्रिंटिंग और बड़े पैमाने पर उत्पादन के इस युग में, क्या वे अपनी सोच में बदलाव लाते हुए प्लास्टिक और अन्य कृत्रिम सामग्रियों से बने टूलकिट की तरफ़ आकर्षित हुई हैं। क्या उनका उत्पादन जल्दी नहीं होगा, ये लम्बे समय तक नहीं चलेंगे और उन्हें कचरे को इकट्ठा करने और रीसाइकल करने की परेशानी से राहत नहीं मिलेगी? “हमारे संसाधन लम्बे समय तक चलते हैं,” उन्होंने ज़ोर देकर कहा। यह दावा करने के अलावा, उन्होंने बताया, पूरा मुद्दा शिक्षकों और विद्यार्थियों को यह समझने में समर्थ बनाना था कि वे इन सामग्रियों को फिर से बना सकते हैं। “आप इसे तोड़ते हैं, आप इसे ठीक करते हैं। यह इतना सरल है। ऐसा नहीं है कि अगर वे इसे तोड़ते हैं, तो उन्हें सज़ा के तौर पर कोने में खड़ा होना पड़ेगा। इसलिए हम इसे अपने आस-पास उपलब्ध कम लागत वाली या बिना लागत वाली सामग्रियों से बनाते हैं।”
लागत का मामला यहाँ विशेष रूप से प्रासंगिक है। “हमारी सामग्री के प्रभावी होने के लिए, 30 की कक्षा में कम-से-कम 6 सेट होने चाहिए। किस सरकारी स्कूल के पास हर सामग्री के छह सेट ख़रीदने का बजट है?” स्वाती ने अपने एक पूर्व बीएससी-बीएड गणित के विद्यार्थी के उदाहरण से इसे स्पष्ट किया, जिसने अपने स्कूल में ‘गणित प्रयोगशाला’ के परिदृश्य को उसके साथ साझा किया था। “मैं तो उसे ‘गणित का मन्दिर’ कहूँगा! विद्यार्थियों को वहाँ एक क़तार में ले जाया जाता था, उन्हें कुछ भी छूने की अनुमति नहीं थी, वे बस एक बार दर्शन करते हैं और फिर कक्षा में वापस चले जाते हैं।” ऐसी कहानियाँ स्वाती जैसे शिक्षकों के मन में काँटे की तरह चुभती हैं। “ऐसी गणित प्रयोगशाला की क्या सार्थकता है? विद्यार्थियों को सामग्री के साथ खेलना चाहिए, चीज़ों को इधर-उधर करना चाहिए, उन्हें जोड़ना चाहिए और कहना चाहिए ‘ओह! यह हो गया!’ या ‘देखो मैंने क्या बनाया!’।”
अपने अस्तित्व में आने के 10 साल बाद, मैथ स्पेस जीवन्त विश्वविद्यालय एकोसिस्टम के ताने-बाने का एक अभिन्न अंग बन गया है। इसके अलावा अभी और भी बहुत कुछ होना बाक़ी है। स्वाती ने विस्तार से बताया, “हम विभिन्न अवधारणाओं और रचनाओं को पेश करने के लिए व्याख्याओं, अन्वेषणों, पोस्टरों, वीडियो, वर्कशीट्स और एनिमेटेड प्रस्तुतियों पर काम कर रहे हैं। हमें उम्मीद है इसमें हम भविष्य में गेम भी शामिल करने में सफल होंगे।” अब एक वेबसाइट https://sites.google.com/apu.edu.in/mathspace/home भी है, जहाँ इनमें से कई संसाधनों का दस्तावेज़ीकरण किया जा रहा है। ज़ाहिर है, यह केवल शुरुआत है। “ओह और यह हमारा आख़िरी पड़ाव नहीं होने जा रहा है,” स्वाती ने मुझे याद दिलाया। “आगामी कैम्पस कॉमन्स हमारा स्थाई घर होगा।”