गणित में सन्दर्भगत सवाल : स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा का दृष्टिकोण

अनुवाद : सुबोध जोशी | पुनरीक्षण : प्रतिका गुप्ता | कॉपी एडिटर : अनुज उपाध्याय

नीति और कार्यवाई सम्बन्धी संवाद और कार्यक्रम गणित में अधिगम और क्षमता की कमी पर ध्यान देने की कोशिश कर रहे हैं। जब से पाठ्यचर्या रूपरेखाओं में इस पर ज़ोर दिया जाने लगा है कि कौन-सा गणित और उसे कैसे पढ़ाया जाए, तब से ही यह इसके समानान्‍तर एक प्रक्रिया के रूप में चिन्ता का विषय रहा है। महत्त्वपूर्ण गणित किसे माना जाए, ख़ासतौर से गणित शिक्षण के सन्दर्भ में, इसकी समझ विकसित हो रही है। जब इस्तेमाल में आसान कैलकुलेटर अब सुलभ हैं, तब क्या इस बात की आवश्यकता है कि फ़ाउंडेशनल गणित शिक्षा का ध्‍यान केवल कलन विधियों (एल्गोरिद्म) या गणना युक्तियों को रटने पर केन्द्रित रहे?

स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के अनुसार, सवाल तैयार करने, कई वैकल्पिक हल तैयार करने, इष्टतम हल चुनने के लिए विभिन्न हलों का मूल्यांकन करने और हल लागू करने की क्षमता सभी पाँच लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपरिहार्य है। जिन सवालों के लिए मात्रात्मक मॉडल की आवश्यकता होती है, उनके लिए विभिन्न गणितीय प्रक्रियाओं में महारत की आवश्यकता होती है, जो जोड़ और घटाव के सरल अंकगणितीय कौशल से लेकर बीजगणितीय समीकरणों के अधिक जटिल हल तक में उपयोग होती है। सवालों को हल करने के लिए कम्प्यूटेशनल मॉडल के उपयोग के लिए कम्प्यूटेशनल कौशल की आवश्यकता होगी। तार्किक कौशल में औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरह से तर्कों का निर्माण और मूल्यांकन शामिल है।

इस दृष्टिकोण और इससे भी अधिक के साथ हम विद्यार्थी में इन क्षमताओं के विकास के लिए चुने गए सवालों पर दिए गए ज़ोर पर ग़ौर करते हैं। सन्दर्भ की दृष्टि से प्रासंगिक सवाल महज़ इबारती सवाल नहीं होते हैं जिन्हें आकर्षक चित्रों के साथ प्रस्तुत किया जाता है। बेशक, उन्हें बच्चों के जीवन के अनुभवों से उभरना चाहिए। साथ ही, बच्चे को यह समझ आना चाहिए कि सवाल हल करने की ज़रूरत क्या है और ये हल उसके दैनिक जीवन और निर्णयों पर कैसे प्रभाव डाल सकते हैं।

गणित की सामान्य कक्षा विद्यार्थियों को ऐसे अवसर नहीं देती है। लगभग सभी स्कूलों में, बच्चों और शिक्षकों के पास गणित और सवाल हल करने का मज़ा लेने के लिए समय नहीं होता है। न तो पढ़ाई जाने वाली अवधारणाओं के बारे में आराम से संवाद के लिए समय आवंटित किया जाता है और न ही इन अवधारणाओं को बच्चों के परिवेश से जोड़ा जाता है। उदाहरण के लिए, मैथ मैजिक शृंखला (चित्र-1) का एक सवाल वैसे तो इसलिए तैयार किया गया है कि बच्चे उसके सन्दर्भ से सम्बन्धित गणितीय कार्य करें, लेकिन इसे अक्सर यांत्रिक रूप से पढ़ाया जाता है। सवाल एक ऐसी मुद्रा पर टिका है जो अब भारत में प्रचलन में नहीं है। इस वजह से बच्चों के लिए इससे जुड़ पाना तब तक मुश्किल होता है जब तक कि यह दादा-दादी या नाना-नानी के साथ व्यापक मुद्दों पर संवाद या महँगाई जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा का हिस्सा न बने।

NCERT Textbook Class
चित्र-1 : एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक कक्षा-5, अध्याय-4, पेज-65

दूसरा, विद्यार्थियों को समस्या की प्रकृति जानने और उसमें से समस्या से प्रासंगिक जानकारी निकालने का कोई अवसर नहीं दिया जाता है। ऐसा होगा तभी वे सवाल का उद्देश्य समझ पाएँगे और यह समझ पाएँगे कि उपलब्ध जानकारी से चाही/ माँगी गई जानकारी तक कैसे पहुँचा जा सकता है। प्रयास तो यह होता है कि कलन विधियों को चरणबद्ध तरीक़े से लागू करने और एक मशीनी कवायद (ड्रिल) की तरह चरणों को याद रखने की क्षमता विकसित कर दी जाए। सन्देश है, “चरणों से भटकें नहीं, उन्हें सटीक ढंग से लागू करें।” सलाह यह है कि अपनी अवधारणात्मक समझ का उपयोग न करें और हल के लिए एक अलग विधि न अपनाएँ, क्योंकि आप ग़लती कर सकते हैं। कक्षा की प्रक्रियाएँ और तथाकथित सीखने-सिखाने की सामग्री (टीएलएम), अक्सर इसी उद्देश्य से तैयार की जाती हैं। एक तरह से, उनसे उम्मीद की जाती है कि वे शिक्षार्थियों के सामने कलन विधि के ‘ठोस’ चरण प्रस्तुत करें और उन्हें याद रखने में मदद करें। वे न तो प्रक्रिया और चरण समझाने की कोशिश करती हैं और न ही बच्चों को वैकल्पिक रणनीतियों का उपयोग करने की गुंजाइश देती हैं। सवाल भी इस तरह से तैयार किए जाते हैं कि यंत्रवत् कलन विधियों के अभ्यास पर ज़ोर दिया जा सके। उदाहरण के लिए, एनसीईआरटी की कक्षा-5 की पाठ्यपुस्तक का यह पृष्ठ (चित्र-2), हालाँकि केवल गुणन की कलन विधि के संखण्डन और खण्डों में इसके अभ्यास पर केन्द्रित है, फिर भी शिक्षक के लिए कलन विधि सम्बन्धी ‘क्यों’ पर चर्चा करने के लिए पर्याप्त गुंजाइश दे सकता है, लेकिन यह कितनी बार किया जाता है?

Figure 2 NCERT Textbook Class
चित्र-2 : एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक कक्षा-5, अध्याय-13, पेज-171

अमित कुलश्रेष्ठ पेशे से एक गणित शिक्षक और शोधकर्ता हैं। उन्‍हें गणित में आनन्‍द भी आता है। पत्रिका पाठशाला भीतर और बाहर [1] में उनके लेख और उसी पर बाद के एक वेबिनार [2] का सारांश नीचे दिया गया है।

ज़्यादातर विद्यार्थियों को इबारती सवाल हल करने के तरीक़े बताने की जल्दी में, शिक्षक सुझाव देते हैं कि वे महत्त्वपूर्ण शब्दों (की-वर्ड) की तलाश करें ताकि यह तय करने में मदद मिल सके कि किन संक्रियाओं का उपयोग करना है। उनका तर्क है कि कक्षा में पूरा ध्यान वास्तव में इस बात पर रहता है कि बच्चों को सही संख्याएँ निकालने, सही कलन विधियाँ लागू करने और सवाल हल करने के लिए ज्ञात मानक नियमों को याद रखने का अभ्यास कराया जाए। कक्षा का ध्यान स्पष्टीकरण देने और उत्तर तक पहुँचने के लिए अपनाए जाने वाले चरणों पर केन्द्रित होता है। बच्चों को इस बात की गुंजाइश देने के लिए कोई स्थान नहीं होता है कि वे दिए गए सवालों पर विचार करें और अपनी रणनीति और दृष्टिकोण विकसित करें। हालाँकि, वर्तमान राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा सहित राष्ट्रीय पाठ्यचर्या दस्तावेज़ दृढ़तापूर्वक तर्क देते हैं कि बच्चों को न केवल गुंजाइश दी जानी चाहिए बल्कि सवाल हल करने के लिए अपनी रणनीति विकसित करने और खोजने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्हें यह समझना सीखना चाहिए कि सवाल हल करने के लिए कई रणनीतियाँ हो सकती हैं और कभी-कभी, कई उत्तर भी हो सकते हैं। स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (2023) यह सलाह भी देती है कि कक्षाएँ कई तरीक़ों को प्रोत्साहित करें ताकि विद्यार्थी अपनी रणनीतियाँ तैयार कर सकें। गणित के लिए एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकें और साथ ही स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा बच्चों के लिए सवाल बनाने में सक्षम होने की आवश्यकता पर ज़ोर देती हैं।

यहाँ कुछ उदाहरण दिए गए हैं जो बताते हैं कि सवाल अक्सर ऐसे शब्दों में लिखे जाते हैं और उनमें ऐसी स्थितियाँ शामिल होती हैं जो बच्चों के सन्दर्भ में स्वाभाविक नहीं होती हैं।

  1. एक पेड़ पर 114 पक्षी बैठे थे। 21 और पक्षी उड़कर पेड़ पर आए। पेड़ पर कुल मिलाकर कितने पक्षी थे?

यह सम्भव नहीं है कि कोई भी पेड़ की तरफ़ उड़ते पक्षियों को गिन सके। इसलिए, सवाल का सन्दर्भ किसी भी वास्तविक अनुभव, जिससे बच्चे जुड़ सकें, की बजाय महज़ औपचारिकता अधिक लगता है।

  1. जेन के पास 63 मीटर रिबन है। यदि वह इसमें से 56 मीटर 21 सेमी रिबन काटती है, तो रिबन की लम्बाई कितनी बचेगी?

भले ही हम नाम बदल दें (जैसा कि अक्सर स्थानीय सन्दर्भ शामिल करने के लिए किया जाता है), सवाल में संख्याओं का कोई मतलब नहीं है। 63 मीटर के रिबन के बारे में आमतौर पर नहीं सुना जाता है और फिर 56 मीटर और 21 सेमी की लम्बाई को काटना भी स्वाभाविक नहीं लगता।

  1. एक किराना दुकान में सुबह 2510 किलो 350 ग्राम गेहूँ था। दिन भर में 890 किलो 600 ग्राम गेहूँ बिक गया। शाम को दुकान में कितना गेहूँ बचा था?

यह स्टॉक में गेहूँ की एक विचित्र मात्रा है और बेची गई मात्रा भी उतनी ही विचित्र है! आमतौर पर दुकानें गेहूँ का स्टॉक ग्राम की बजाय बोरियों की संख्या में रखती हैं।

  1. विशाल 48 सेमी ऊँचाई की एक पुस्तक मीनार बनाना चाहता है। यदि प्रत्येक किताब की मोटाई 12 मिमी है, तो चाही गई ऊँचाई की मीनार बनाने के लिए उसे कितनी किताबों की ज़रूरत होगी?
  1. एक किराना दुकान पर 144 किलो 780 ग्राम वज़नी फ्रोज़न सब्ज़ियों का एक डिब्बा डिलीवर किया गया। यदि डिब्बे के अन्दर समान वज़न के 15 बैग थे, तो प्रत्येक बैग का वज़न क्या था?

ये दोनों सवाल सन्दर्भगत माने जाते हैं। लेकिन यह स्पष्ट है कि इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को एक संख्या का दूसरी से विभाजित करने का अभ्यास कराना है। निश्चित रूप से किसी भी विचारशील विद्यार्थी को आश्चर्य होगा कि एक विशिष्ट ऊँचाई की मीनार कौन बनाना चाहेगा? यदि इसकी ज़रूरत है भी, तो किसी के पास एक ही ऊँचाई की इतनी सारी किताबें क्यों होंगी और उसे थप्पी में पुस्तकों की संख्या पता करने की ज़रूरत क्यों होगी? सब्ज़ियों के डिब्बों के इतने सटीक वज़न की ज़रूरत क्यों होगी?

  1. एक कमरे की लम्बाई, चौड़ाई और ऊँचाई क्रमशः 24, 18 और 12 फीट है। सबसे लम्बा टेप कौन-सा होगा जिसका उपयोग इन्हें मापने के लिए किया जा सकता है?

इसके बारे में मुद्दा यह है कि जब बच्चे मापने वाले टेप का उपयोग करते हुए देखते हैं तो उनका सामान्य अनुभव यह होता है कि छोटी दूरी को मापने के लिए बहुत लम्बे टेप का उपयोग किया जा सकता है। यदि हम टेप को उठाना नहीं चाहते हैं और टेप के पिछले स्थान के अन्तिम बिन्दु से माप जारी नहीं रखना चाहते हैं तो हमें एक लम्बे टेप की ज़रूरत होती है। अन्यथा, हम किसी भी टेप का उपयोग कर सकते हैं और लम्बाई माप सकते हैं। इसलिए, हम 24 फीट से अधिक लम्बाई वाले किसी भी टेप का उपयोग कर सकते हैं, जिसमें 24 फीट लम्बा टेप भी शामिल है। सवाल तैयार करने वालों का इरादा यह परीक्षण करना था कि क्या बच्चा 24, 18 और 12 का महत्तम समापवर्तक ढूँढ़ सकता है और क्या वह उसे सबसे लम्बे टेप के रूप में उपयोग कर सकता है ताकि अलग-अलग भागों/ टुकड़ों में मापने की ज़रूरत न हो। सवाल की शब्दावली उसके उद्देश्य से मेल नहीं खाती है। सवाल की भाषा कभी-कभी अस्पष्ट हो सकती है, लेकिन अपेक्षित जवाब बहु-विकल्पों की अनुमति नहीं देता है।

स्पष्ट रूप से, यहाँ विचार यह है कि बच्चों से कुछ संक्रियाएँ कराई जाएँ और वह भी कुछ विशिष्ट प्रकार की संख्याओं के साथ और सन्दर्भ केवल एक दिखावा है जो संख्याओं की अवधारणा या धारणा की समझ प्राप्त करने में कोई मदद नहीं करता है। यह उन्हें प्रक्रियात्मक स्पष्टता भी प्रदान नहीं करता है, क्योंकि वे जवाब के रूप में प्राप्त संख्या को समझ नहीं पाते हैं और यह जानने का कोई तरीक़ा नहीं है कि यह लगभग सही भी है या नहीं। एकमात्र स्थान जहाँ लोग 69 तरबूज़ खरीदते हैं और कोई आश्चर्य नहीं करता ऐसा क्यों है।

चित्र-3
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हालाँकि इन सभी को सवाल की भाषा समझने का अभ्यास कहा जा सकता है, लेकिन यह गणित को जीवन से जोड़ने और सम्बन्ध समझने के मामले में मदद नहीं कर पाते हैं। वास्तव में, जटिल संख्याओं और कलन विधियों के बोझिल उपयोग से ये सवाल अक्सर और ज़्यादा पेचीदा हो जाते हैं। अक्सर यह तार्किक रूप से स्पष्ट नहीं होता है कि हल तक कैसे पहुँचा जाए और शिक्षक के लिए समाधान के चरणों की रूपरेखा बताना आवश्यक हो जाता है।

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यहाँ कुछ सवाल सुझाए गए हैं जो बच्चे के सन्दर्भ से बेहतर ढंग से सम्बद्ध हो सकते हैं।

  1. सुरेश रोज़ सुबह नहाने के लिए बाल्टी और मग का इस्तेमाल करता है। उसने देखा कि भरी हुई बाल्टी से उसे पूरे 12 मग पानी मिला। एक दिन, उसने पाया कि उसे केवल 9 मग पानी मिला। उसे एहसास हुआ कि मग नया था। पुराने की तुलना में नए मग में क्या अन्तर रहा होगा?

यह अलग-अलग पात्रों में पानी भरने से सम्बन्धित हो सकता है और दिलचस्प संवादों के साथ-साथ अन्य अनुभव भी प्रदान कर सकता है और धारिता को अनुपातों और भिन्नों से भी जोड़ सकता है।

  1. वर्गाकार टाइलों का उपयोग करके आप 144 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाले वर्गाकार फ़र्श को भरने के लिए विभिन्न साइज़ की कितनी टाइलों का उपयोग कर सकते हैं?
  1. क्या कोई आयताकार टाइल भी 144 वर्गमीटर के समान फ़र्श क्षेत्रफल को भर सकती है? प्रत्येक स्थिति में किस साइज़ के आयतों और कितने आयतों की आवश्यकता होगी?
  1. यह देखते हुए कि फ़र्श का क्षेत्रफल \(a 2\) वर्ग मीटर है, जहाँ ‘a’ एक पूर्ण संख्या है, वर्गाकार टाइलों की सम्भावित साइज़ क्या है जो सतह को भर सकेगी?

ध्यान दें कि सवाल हर चरण में अधिक जटिल (और अधिक दिलचस्प) होते जा रहे हैं। यदि हम स्वयं इन सवालों को हल करने का प्रयास करें, तो हम देख सकते हैं कि यह संयोजनों की संख्या की ओर ले जाता है और ये अपने आप में अन्वेषण के अवसर होते हैं। या कोई

इससे आगे जा सकता है और इसे इस तरह से हल करने का एक तरीक़ा ढूँढ़ने का प्रयास कर सकता है जो संख्याओं के सम्भावित संयोजनों या वर्गाकार टाइलों के आकार के लिए एक सामान्य सूत्र निर्माण की गुंजाइश देता हो।

ऐसे सवाल समय की माँग हैं जो गणितीय वस्तुओं और अवधारणाओं को समझने और जिज्ञासा और रोमांच की भावना विकसित करने में विद्यार्थियों को सक्षम बनाते हों। ऐसे सवाल तैयार करने के दौरान एक अच्छा मार्गदर्शक प्रश्न यह है : अभ्यास कार्य देने का उद्देश्य क्या है और हम गणित की प्रकृति और उसके अधिगम को कैसे देखते हैं? सवाल हल करने के लिए शिक्षार्थी को क्या करना होगा? किसी कार्य के उद्देश्य गणित की नींव की हमारी समझ और अधिगम के मार्ग की हमारी कल्पना से उत्पन्न होते हैं। और आपने शिक्षार्थी को जो कार्य दिया है उसमें यह स्पष्ट होना चाहिए कि शिक्षार्थी को क्या करना है। इस समय इस प्रकार के सवाल यदि पूरी तरह से अनुपस्थित नहीं तो दुर्लभ ज़रूर हैं जिनके इर्द-गिर्द सन्दर्भगत संवाद सुगम बनाए जा सकते हैं। यह सच है कि इन्हें तैयार करना आसान नहीं है, साथ ही यह भी सम्भव नहीं है कि इन पर चर्चा के लिए ज़्यादा समय दिया जा सके। आकलन के बारे में चिन्ता के चलते गणित सीखने-सिखाने की पूरी प्रक्रिया मुख्यतः याद रखने और कलन विधि पर केन्द्रित रहती है, इसलिए समझने और गणित के बारे में अन्वेषण करने और सहज महसूस करने की किसी भी वास्तविक क्षमता की कमी बनी रहती है। स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-SE) 2023 बताती है कि “अधिकांश आकलन तकनीकें और सवाल तथ्यों, प्रक्रियाओं और सूत्रों को याद रखने पर केन्द्रित रहती हैं।” अलबत्ता, आकलन का ध्यान समझ, तर्क और इस बात पर केन्द्रित होना चाहिए कि विभिन्न सन्दर्भों में किसी गणितीय तकनीक का उपयोग कब और कैसे किया जाए। यह कोई नया विचार नहीं है और सदी की शुरुआत से ही और भारत के कुछ स्थानों में इससे भी पहले व्यक्त किया गया है, लेकिन इसे स्थापित करने का तरीक़ा ढूँढ़ना बेहद कठिन रहा है। यदि ऐसा किया जाता है, तो स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-SE) में परिभाषित गणित शिक्षा के लक्ष्यों को पूरा करने की कहीं अधिक सम्भावना होगी।

सम्‍पादकीय टीप

पाठ्यपुस्तकों से लिए गए सभी चित्र एनसीईआरटी की अनुमति से प्रकाशित किए जा रहे हैं।

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