10-फ्रेम 2 x 5 के फ्रेम होते हैं जिनका उपयोग पहली 10 प्राकृत संख्याओं 1, 2, 3, … 10 को दर्शाने के लिए किया जा सकता है। इन्हें बनाने के तरीक़े सहित, अन्य विस्तृत जानकारी आप इस लिंक https://bit.ly/4kmFdoh पर देख सकते हैं।

सम और विषम संख्याओं का योग वाला पोस्टर कक्षा में लगाने के लिए बनाया गया है, ताकि विद्यार्थी 10-फ्रेम के ठोस मॉडल से आगे बढ़कर, उसमें से चुनी गई संख्याओं के अलग-अलग संयोजनों (combinations) को समझना सीख सकें। विद्यार्थियों को पैटर्न देखने, पूछे गए सवालों पर सोचने और अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। यहाँ दिखाए गए जोड़ के सवालों की एक साधारण सूची भी उन्हें यह समझने में मदद करती है कि ऐसे कितने संयोजन सम्भव हैं और क्या ऐसे सभी संयोजन दिखाए गए हैं। साधारण अवलोकन से सामान्यीकरण की ओर बढ़ना गणित में एक बहुत बड़ा क़दम है और यह पोस्टर इस तरह की समझ बनाने में मदद करता है। आगे दिए गए शिक्षक नोट्स का उद्देश्य शिक्षक को इस सीखने के सफ़र में मदद करना है; और यह ध्यान रखना चाहिए कि केवल उत्तरों पर ध्यान केन्द्रित करने से विद्यार्थी की गणितीय सोच का विकास नहीं होगा। ये सवाल विद्यार्थियों को सोचने की शुरुआत करने में मदद करने के लिए बनाए गए हैं और सहपाठियों के साथ चर्चा विद्यार्थी-नेतृत्व वाली खोज को सम्भव बनाएगी।

Using Ten-Frames-fig-1
चित्र-1

पोस्टर में दिए पहले सवाल, एकान्तर संख्याओं के शीर्ष पर आपको क्या दिखाई देता है? के आधार पर पोस्टर ध्यान से देखने पर पता चलता है कि पहली संख्या से शुरू करके प्रत्येक एकान्तर संख्या के शीर्ष पर एक ‘विषम’ (odd) बिन्दु होता है; जबकि दूसरी, चौथी आदि संख्याओं का शीर्ष सपाट या ‘सम’ (even) होता है। यह दृश्य-चित्रण (visualisation) विद्यार्थियों को ‘संख्या की समता’ (parity), यानी, कोई संख्या ‘विषम’ है या ‘सम’ और इन शब्दों से जुड़े गणितीय सिद्धान्तों के बीच सम्बन्ध समझने में मदद कर सकता है। ध्यान दें कि यह दृश्य-चित्रण आगे चलकर, किसी सम संख्या को 2n के रूप में और किसी विषम संख्या को 2m – 1 या 2m + 1 के रूप में दर्शाने के मानक बीजगणितीय तरीक़े को समझने में भी मदद करता है।

तीनों समूह , और के प्रत्येक चित्र में दो अलग रंगों से दर्शाई गई दो संख्याएँ जोड़ी गई हैं। इन संख्याओं और उनके योग के बारे में आप क्या पैटर्न देखते हैं? इस दूसरे सवाल के हमारे उत्तर नीचे दिए गए हैं :

समूह में, हमें एक-अंकीय विषम (नारंगी रंग) और एक-अंकीय सम (नीले रंग) संख्याओं के सभी सम्भावित संयोजनों का योग दिखता है।

समूह में, हमें एक-अंकीय दो सम संख्याओं के सभी सम्भावित संयोजनों का योग दिखता है।

इसी प्रकार समूह में, हमें एक-अंकीय दो विषम संख्याओं का योग दिखता है।

अंकों के सभी संयोजनों की सूची बनाना और उनके योगों का अवलोकन करना विद्यार्थियों को व्यवस्थित रूप से काम करने में मदद करेगा।

यह सवाल पूछे जा सकते हैं :

समूह क मेंसमूह ख मेंसमूह ग में
ऊपर वाली संख्या ___________ है (क्योंकि ___________) और नीचे वाली संख्या ______________ है (क्योंकि _________________)

अतः योग ______________ है (क्योंकि _________________)
दोनों संख्याएँ ___________ हैं (क्योंकि _________________)

अतः योग ______________ है (क्योंकि _________________)
दोनों संख्याएँ ___________ हैं (क्योंकि _________________)

परन्तु योग _____________ है (क्योंकि _________________)
  • हर समूह में सबसे छोटा योग क्या है? और सबसे बड़ा योग क्या है?
  • प्रत्येक समूह की संख्याओं के योगों में क्या समानता है? क्या हम सामान्यीकरण कर सकते हैं?
  1. विषम संख्या + सम संख्या = _____ संख्या
  2. सम संख्या + सम संख्या = _____ संख्या
  3. विषम संख्या + विषम संख्या = _____ संख्या

ये दृश्य-चित्रण, यह समझने में मदद करते हैं कि सम संख्या जोड़ने से योग की समता नहीं बदलती, अर्थात विषम + सम = विषम (जैसा में दिखाया गया है) और सम + सम = सम (जैसा में दिखाया गया है)।

लेकिन विषम संख्या जोड़ने से समता बदल जाती है। जब दो विषम संख्याएँ जोड़ी जाती हैं, तो वे अपनी विषमता की भरपाई कर लेती हैं और योग को सम बना देती हैं; दो विषम संख्याएँ मिलकर में दिखाए अनुसार एक सम संख्या बनाती हैं। दूसरे शब्दों में, विषम + विषम = सम, जबकि यह दर्शाता है कि विषम + सम = विषम।

विस्तार प्रश्न : क्या शून्य विषम है या सम?

शून्य के विषम न होने के कई कारण हैं। उदाहरण के लिए, यदि यह विषम होता, तो इसके शीर्ष पर एक ‘विषम’ बिन्दु होना चाहिए। लेकिन शून्य का कोई बिन्दु नहीं हो सकता। इसलिए यह विषम नहीं हो सकता। अतः यह सम होना चाहिए।

साथ ही, सम संख्या जोड़ने से समता नहीं बदलती। अतः विषम + सम = विषम और सम + सम = सम। शून्य इसे बनाए रखता है क्योंकि किसी संख्या में शून्य जोड़ने पर वह नहीं बदलती। इसलिए शून्य सम होना चाहिए।

अगले प्रश्नों का समूह :

  • यदि आपके पास पर्याप्त 10-फ्रेम हों तो क्या आप 13, 18, या शून्य से बड़ी कोई भी पूर्ण संख्या बना सकते हैं? और कैसे?
  • तो क्या 125, 602 या 1234 भी बना सकते हैं?
  • किसी संख्या का इकाई अंक यह क्यों निर्धारित करता है कि वह विषम है या सम?

ये प्रश्न भी सामान्यीकरण की दिशा में एक क़दम हैं।

10 या उससे बड़ी कोई भी पूर्ण संख्या 10-10 के समूह और एक एक-अंकीय संख्या (0, 1, 2, … 9) का संयोजन होती है। उदाहरण के लिए 43 = 4 x 10 + 3, 602 = 60 x 10 + 2, 1234 = 123 x 10 + 4। इसलिए इन संख्याओं में से प्रत्येक को उतने पूर्ण फ्रेमों और उसके बाद, एक-अंकीय संख्या के रूप में दर्शाया जा सकता है, जैसे 43 को चित्र-2 में बताए अनुसार दर्शाया जा सकता है।

Using Ten-Frames-fig-2
चित्र-2

इस समझ से यह सामान्यीकरण निकलता है कि किसी संख्या का इकाई अंक उसकी समता निर्धारित करता है।

यदि आपको यह रोचक लगे, तो एट राइट एंगल्‍स के नवम्बर 2022 अंक में प्रकाशित 10-फ्रेम की समीक्षा यहाँ देख सकते हैं। इसमें एक वर्कशीट भी दी गई है।

और लेख