राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2020 ने विकास के शुरुआती चरण (3 से 8 वर्ष) के दौरान सीखने की एक मज़बूत नींव विकसित करने के महत्त्व को पहचाना है। बच्चों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा – फ़ाउण्‍डेशनल स्‍टेज, 2022 (एनसीएफ़-एफ़एस, 2022) में शारीरिक, सामाजिक, भावनात्मक, नैतिक, संज्ञानात्मक, भाषा, सौन्‍दर्य, सांस्कृतिक मूल्य और सीखने की सकारात्मक आदतें जैसे विकासात्मक डोमेन से जुड़े पाठ्यचर्या लक्ष्यों, दक्षताओं और सीखने के परिणामों की सिफ़ारिश की गई है। इसके साथ ही, गणित के लिए पाठ्यपुस्तकों सहित शिक्षण सामग्री विकसित करते समय सभी डोमेन के एकीकरण पर ज़ोर दिया गया है।

“पाठ्यपुस्तकें अपेक्षित पाठ्यचर्या लक्ष्यों, दक्षताओं और सीखने के परिणामों को प्राप्त करने के लिए एक संगठित, सिलसिलेवार, सुसंगत और सार्थक सीखने का अनुभव प्रदान करके शिक्षक की मदद करती हैं। पाठ्यपुस्तकें बच्चों का मार्गदर्शन भी करती हैं और विश्वसनीय सन्‍दर्भ बिन्‍दु भी प्रदान करती हैं। कक्षा में उपयोग की जाने वाली शिक्षण सामग्रियों में से पाठ्यपुस्तक एक है जो कक्षा प्रक्रियाओं, शिक्षणशास्त्र और आकलन की योजना बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।”

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा – फ़ाउंडेशनल स्‍टेज, 2022 में गणित शिक्षण विधियों के सम्‍बन्‍ध में निम्नलिखित सुझाव दिए गए हैं :

  1. अनुभव → बोली जाने वाली भाषा → चित्र → संकेत भाषा।
  2. गणित सीखने को बच्चे के वास्तविक जीवन और पूर्व ज्ञान से जोड़ना।
  3. गणित को समस्या समाधान के साधन के रूप में देखना।
  4. चर्चा और तर्क का उपयोग करके गणितीय संवाद में शामिल होना।
  5. गणित सीखने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना।

नई नीतियों को ध्‍यान में रखते हुए, एनसीईआरटी ने साल 2023 में कक्षा-1 और 2 के लिए नई पाठ्यपुस्तकें (आनन्‍दमय गणित/जॉयफुल मैथमेटिक्स) विकसित की हैं। इन किताबों में ऐसी कई गतिविधियाँ हैं जो बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अनुभव-आधारित शिक्षा पर ध्यान देने के साथ कक्षा के भीतर और बाहर संगठित होकर काम करने और सीखने को प्रोत्साहित करती हैं। पुस्तक में बच्चे के आसपास के सन्‍दर्भ के ज़रिए भाषा और उम्र के अनुरूप शारीरिक और मानसिक विकास को भी शामिल करने का प्रयास किया गया है क्योंकि गणित की शिक्षा को इनसे अलग नहीं किया जा सकता है। पुस्तक पाठ्यपुस्तक और अभ्‍यास-पुस्तक दोनों तरह से काम करती है और बच्चों को खेल के ज़रिए सीखने, चित्र बनाने, रंग भरने और लिखने के लिए उचित अवसर प्रदान करती है।

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चित्र-1 : एनसीईआरटी पाठ्यपुस्‍तक कक्षा-1, अध्‍याय 5, पेज 48

चित्रों की यह सुन्‍दर शृंखला (चित्र-1) पुरानी पीढ़ी को शामिल करने व उनकी प्रासंगिकता और उनकी देखभाल करने के महत्त्व को बड़ी ही बारीकी से उभारती है। साथ ही, यह बच्चों को गिनती के अभ्यास का मौक़ा भी देती है।

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चित्र-2 : एनसीईआरटी पाठ्यपुस्‍तक कक्षा-1, अध्‍याय 1, पेज 4। इसमें और अन्य अध्यायों में समावेशन के सुझाव दिए गए हैं।
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चित्र-3 : एनसीईआरटी पाठ्यपुस्‍तक कक्षा-1, अध्‍याय 8, पेज 96

ध्यान दें कि इस सरल गतिविधि में कला और संस्कृति को जिस तरह से शामिल किया गया है (चित्र-3) उससे विद्यार्थियों में अवलोकन, संवाद और तर्क करने की क्षमता विकसित होती है और साथ ही उनका सामान्य ज्ञान भी बढ़ता है।

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चित्र-4 : एनसीईआरटी पाठ्यपुस्‍तक कक्षा-1, अध्‍याय 9, पेज 104। बच्चे विविधता को अपनाते हुए अपने आसपास की दुनिया में गणित देख पाते हैं।

कई शिक्षकों ने टिप्पणी की थी कि पिछली किताबों में शब्‍दों की अधिकता (शब्दबहुल) थी और कक्षा में दिए गए कामों को पूरा करने में व्यावहारिक बाधाएँ आ रही थीं। शिक्षक पुरानी किताबों में अभ्यास कार्य की कमी को भी उजागर करते रहे हैं। नई पाठ्यपुस्‍तकों में इन विचारों पर ध्‍यान देने की कोशिश की गई है।

अधिकांश पाठ कविता, खेल, कहानी या बच्चे के आस-पास की दुनिया से सम्‍बन्धित गतिविधि से शुरू होते हैं। उदाहरण के लिए कक्षा-1 की पाठ्यपुस्‍तक की शुरुआत में, बिल्ली इधर-उधर छिपती है और कभी खिड़की के ऊपर, कभी बिस्तर के नीचे, कभी कार के ऊपर, कभी कालीन के नीचे दिखाई देती है। इसी प्रकार, संख्यात्मक अवधारणाओं को समझने के लिए, आसानी से उपलब्ध सामग्रियों जैसे- कंकड़, पत्ते, बटन आदि के उपयोग का सुझाव दिया गया है। स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्रियों (कार्ड, लकड़ी के टुकड़े, उँगलियाँ, बटन, …) के साथ-साथ गिनमाला (संख्या शृंखला), बिन्‍दीदार कार्ड और संख्या पट्टियों जैसी कम लागत वाली सीखने-सिखाने की सामग्री/टीएलएम पर भी प्रकाश डाला गया है। गतिविधियों, खुले सवालों, जाँच-पड़ताल और चर्चा के माध्यम से तार्किक सोच, विश्लेषण और गणितीय संवाद के कौशल विकसित करने पर ज्‍़यादा ध्‍यान दिया गया है।

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चित्र-5 : एनसीईआरटी पाठ्यपुस्‍तक कक्षा-2, अध्‍याय 9, पेज 19। आकृतियों के बारे में समझ विकसित करना।
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चित्र-6 : एनसीईआरटी पाठ्यपुस्‍तक कक्षा-1, अध्‍याय 1, पेज 9

ऐसी खेल-आधारित गतिविधियाँ (चित्र-5 और चित्र-6) विद्यार्थियों को गणित के प्रति एक आत्मविश्वासपूर्ण दृष्टिकोण विकसित करने की गुंजाइश देती हैं।

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चित्र-7 : एनसीईआरटी पाठ्यपुस्‍तक कक्षा-1, अध्‍याय 5, पेज 56

पाठ्यपुस्तक में पहले अंक लिखने और एक अंक की संख्याओं को जोड़ने का अभ्यास दिया गया है। अध्याय 3 में, विद्यार्थियों ने एक प्रोजेक्‍ट के रूप में अपने ख़ुद के नम्‍बर कार्ड तैयार किए हैं, इसलिए इस परियोजना के लिए सामग्री कोई बाधा नहीं है (चित्र-7)। ध्यान दें कि यह मज़ेदार और खुले तरीक़े से जोड़ का अभ्यास करने का मौक़ा देता है। अपने जवाबों की तुलना करने से विद्यार्थियों को चर्चा करने और अपनी रणनीतियों को सही ठहराने का मौक़ा मिलता है।

अलग-अलग तरह से सीखने वाले विद्यार्थी इस तरह के मानसिक चित्रण (चित्र-8) द्वारा संख्या पैटर्न को बेहतर ढंग से पकड़ पाएँगे। यह उम्‍मीद की जाती है कि शिक्षक भी ऐसी पहेलियों से प्रेरित काउण्टरों और बिल्डिंग ब्लॉकों का उपयोग करके खुद करके सीखने वाली शिक्षा दे पाएँगे।

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चित्र-8 : एनसीईआरटी पाठ्यपुस्‍तक कक्षा-2, अध्‍याय 3, पेज 31
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चित्र-9 : एनसीईआरटी पाठ्यपुस्‍तक कक्षा-2, अध्‍याय 1, पेज 13

समस्या प्रस्तुत करना अवधारणात्मक समझ का एक महत्त्वपूर्ण सूचक/संकेतक है और पाठ्यपुस्तक इसके लिए मौक़े प्रदान करती है। उदाहरण के लिए चित्र-9 देखें।

दोनों कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों के अन्‍त में पहेलियाँ हैं जो बच्चों को अपने तर्क लागू करने और उन्हें हल करने का मौक़ा देती हैं। इन पहेलियों से यह भी उम्‍मीद है कि शिक्षक भी ऐसी पहेलियाँ बना सकते हैं और बच्चों को हल करने के लिए दे सकते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर तैयार की गई इन पाठ्यपुस्तकों में भारत भर की विविधता को शामिल करने की कोशिश की गई है, लेकिन इनकी अपनी सीमाएँ भी हैं। जैसे कि जो सन्‍दर्भ एक इलाक़े के लिए परिचित हैं वे दूसरे इलाक़े के लिए अनजाने हो सकते हैं। इसलिए शिक्षकों को कक्षा में पढ़ाते समय स्थानीय खेल-खिलौनों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों को शामिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं। बेशक, शिक्षकों के लिए यह ज़रूरी हो जाता है कि वे पाठ्यपुस्तकों में दिए गए शिक्षण संकेतों को ध्यान में रखते हुए पाठों की पूर्व-योजना बनाएँ।

पाठ्यपुस्तकों का पिछला सेट लगभग 16 साल पहले इसी दृष्टिकोण के साथ विकसित किया गया था। हालाँकि, उसने वास्तव में इन विचारों को काम-काजी विचारों में तब्‍दील नहीं किया था, जो सिखाई जाने वाली अवधारणाओं के आधार पर शिक्षण विधि और आकलन दोनों में मदद कर सकें। नई पाठ्यपुस्तकों में जो दृष्टिकोण दिखाई देता है, लगभग वही (पुराने) थीम अध्यायों में भी अपनाया गया था, लेकिन शिक्षकों ने दरअसल इन बातों की सराहना नहीं की थी। अब जबकि गणित शिक्षा के लक्ष्यों को कक्षा-1 और 2 की पाठ्यपुस्तकों के अध्यायों में शामिल कर लिया गया है, यह उम्‍मीद की जाती है कि शिक्षक इस लॉन्चिंग पैड का इस्‍तेमाल करके बच्चों की गणितीय समझ और मात्राओं, आकारों और मापन के ज़रिए दुनिया को पहचानने की क्षमता विकसित कर पाएँगे, जैसा कि एनसीएफ़-एफ़एस के पाठ्यचर्या लक्ष्य में लिखा गया है।

सम्‍पादकीय टीप

पाठ्यपुस्तकों से लिए गए सभी चित्र एनसीईआरटी की अनुमति से प्रकाशित किए जा रहे हैं।

  1. National Council for Educational Research and Training (NCERT). (2023). Joyful mathematics (Class 1 and Class 2). https://ncert.nic.in/textbook.php?aejm1=11-13

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