गणितीय शब्दावली कौन पढ़ाता है?
आइए नीचे दिए गए शब्दचित्र को देखें।
शब्दचित्र-1
क्रिस्टीना अभी कक्षा-1 में है। सत्र के अन्त में अभिभावक-शिक्षक बैठक के दौरान, उसकी क्लास टीचर (जो उसकी गणित टीचर भी हैं) ने उसके माता-पिता से कहा क्रिस्टीना सरल इबारती सवालों को समझ ही नहीं पाती, चाहे मैं उन्हें कितनी भी बार बोर्ड पर हल करूँ। कृपया इस समस्या को सुलझाने के लिए अँग्रेज़ी शिक्षक (यानी भाषा शिक्षक) से बातचीत करें, अन्यथा इससे भविष्य में कई और समस्याएँ पैदा होंगी। यह थोड़ी हैरान करने वाली बात थी, क्योंकि क्रिस्टीना घर पर अधिकांश जोड़ और घटाव के सवालों का तेज़ी से और सही ढंग से उत्तर देती है, चाहे वह 3+5 हो या 7-3। क्रिस्टीना की माँ ने उसकी नोटबुक की बारीकी से जाँच की और उन्हें निम्नलिखित बातें पता चलीं :
जेनिफर ने सुबह 8 बार रस्सी कूदी। फिर उसने शाम को 3 बार रस्सी कूदी। वह दिन में कितनी बार रस्सी कूदी?
क्रिस्टीना का उत्तर : 5
लिनपू नदी किनारे जाता है और 7 मछली पकड़ता है। उसका दोस्त नदी किनारे जाता है और 3 मछली पकड़ता है। लिनपू ने कितनी मछली ज़्यादा पकड़ीं?
क्रिस्टीना का उत्तर : 10
प्रसिदा की प्लेट में 5 इडली हैं। वह 2 इडली खा जाती है। अब उसके पास कुल कितनी इडली हैं?
क्रिस्टीना का उत्तर : 7
क्रिस्टीना जो ग़लतियाँ करती है उन्हें हम आमतौर पर जोड़ और घटाव सीखने के शुरुआती चरणों से जोड़ते हैं। जहाँ त्रुटियाँ हमेशा सीखने के लिए उपयोगी होती हैं, वहीं वे हमें यह जाँचने का अवसर भी प्रदान करती हैं कि क्या ऐसे कोई अन्तर्निहित शैक्षणिक कारण हैं जो शिक्षार्थियों के मन में ग़लत धारणाओं को जन्म दे रहे हैं। क्रिस्टीना की माँ के अनुभव और नोटबुक के जवाबों, दोनों से ही यह स्पष्ट लगता है कि क्रिस्टीना जोड़ और घटाव जानती है। वह बस यह नहीं जानती कि कब किसका उपयोग करना है। इबारती सवाल (word problems) को हल करने में असमर्थता सम्भवतः गणित के शिक्षण से सम्बन्धित सामान्य प्रक्रियाओं से उत्पन्न होती है (Shirali, 2016) (10), जिसका क्रिस्टीना की शिक्षिका ने भी अनुसरण किया होगा :
- गणितीय अवधारणाओं को पढ़ाते समय भ्रमित करने वाली शब्दावली का उपयोग करना या संकेत शब्दों को रटने के लिए प्रोत्साहित करना, जैसे ‘अधिक’ और ‘कुल’ का अर्थ जोड़ना होता है।
- दैनिक जीवन के शब्दों और गणितीय अवधारणाओं के बीच के अन्तर को स्पष्ट नहीं करना। उदाहरण के लिए, यहाँ क्रिस्टीना ने सम्भवतः ग़लती से ‘स्किप’ शब्द का अर्थ ‘घटाना’ समझ लिया है।
- निर्देशों का पालन, चित्रण (visualization) और समस्या-समाधान जैसे महत्त्वपूर्ण कौशल विकसित किए बिना केवल प्रक्रियाओं के रूप में जोड़ और घटाव सिखाना।
- शब्दावली विकास को गणितीय समस्या के रूप में नहीं, बल्कि सिर्फ़ भाषा की समस्या के रूप में देखना।
- ग़लत तरीके से तैयार किए गए इबारती सवाल, जो अक्सर विद्यार्थियों के सन्दर्भ से सम्बन्धित नहीं होते हैं।
- गणितीय प्रश्नों को हल करने की विचार प्रक्रिया को ‘बोलकर न सोचना’ या दर्शाना/मौखिक रूप से प्रदर्शित नहीं करना, जबकि ऐसा करने से बच्चे न केवल प्रश्न हल करने के चरणों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं, बल्कि वैचारिक स्पष्टता भी विकसित कर सकते हैं।
- विद्यार्थियों के लिए अपनी विचार प्रक्रियाओं को साझा करने के अवसर तैयार न करना।
- बच्चों की अपनी गणितीय प्रश्नों को तैयार करने और हल करने की क्षमता को कम आँकना।
शब्दावली और समझ के बीच का सम्बन्ध जटिल है। जिन बच्चों के पास समृद्ध शब्दावली होती है, वे न केवल बातचीत में भाग लेने, खेलने, चुटकुले सुनाने और कहानियाँ सुनने व सुनाने जैसी समृद्ध भाषायी परिस्थितियों के साथ गहराई से जुड़ पाते हैं, बल्कि गणितीय प्रश्नों से अर्थ निकालने में भी सक्षम होते हैं। जैसा कि क्रिस्टीना के मामले में था, कई शिक्षार्थियों को गणना के लिए कोई ख़ास समस्या का सामना नहीं करना पड़ता, लेकिन उन्हें भाषा को समझने और उपयोग करने में संघर्ष करना पड़ता है। यह देखा गया है कि शब्दावली के स्पष्ट निर्देश से शिक्षार्थियों, जिनमें विकलांग बच्चे भी शामिल हैं, के बीच सभी विषयों में समझ में सुधार होता है। (Powell & Driver 2014) (9)।
हालाँकि फ़ाउंडेशनल और प्रारम्भिक चरण (प्री-स्कूल से कक्षा 5 तक) में भी शिक्षकों को इस स्पष्ट अपेक्षा के साथ भर्ती किया जाता है कि वे सभी विषयों को पढ़ाएँगे, लेकिन इसमें कुछ ज़मीनी स्तर की वास्तविकताएँ हैं, जैसे :
- अपेक्षित सेवापूर्व योग्यताएँ होने के बावजूद स्कूल के सभी विषयों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की तैयारी नहीं होती।
- शिक्षकों द्वारा कई कक्षाओं में केवल एक/दो विषय पढ़ाना, यानी अलग-अलग विषय पढ़ाने वाले अलग-अलग शिक्षक। यह परिदृश्य शब्दचित्र-1 के समान है जहाँ गणित शिक्षक भाषा शिक्षक पर ज़िम्मेदारी डाल देती है। इसके परिणामस्वरूप विषयों के बीच स्पष्ट विभेदन होता है। इसके परिणामस्वरूप विषयों के बीच स्पष्ट अलगाव हो जाता है जो न केवल इस बात में परिलक्षित होता है कि समय को कैसे व्यवस्थित किया जाता है (समय-सारणी) बल्कि इस बात में भी परिलक्षित होता है कि विभिन्न विषयों को कैसे पढ़ाया जाता है — जहाँ कई सहज अवसर होने के बावजूद विषयों के बीच कोई अन्तर्सम्बन्ध नहीं बनाए जाते — विशेष रूप से फ़ाउंडेशनल और प्रारम्भिक चरण की कक्षाओं में।
- विभिन्न विषयों में शिक्षकों की रुचि के अलग-अलग स्तर। दूसरे शब्दों में, शिक्षक कुछ विषयों को पढ़ाने में अधिक रुचि लेते हैं और अन्य में नहीं।
- स्वयं शिक्षकों में गणित का डर रहता है, जो बच्चों में स्थानान्तरित होता है।
इसके बजाय क्रिस्टीना की शिक्षिका क्या कर सकती हैं?
क्रिस्टीना की शिक्षिका को निश्चित रूप से मदद मिलेगी यदि वह अपनी शिक्षण विधियों को फ़ाउंडेशनल स्टेज के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा – (एनसीएफ़-एफ़एस) 2022 (6) में सूचीबद्ध पाठ्यचर्या के उद्देश्यों और दक्षताओं से प्राप्त करती हैं। गणित से जुड़ा पाठ्यचर्या का उद्देश्य (CG-8, संज्ञानात्मक विकास के क्षेत्र के अन्तर्गत) शिक्षार्थियों से अपेक्षा करता है कि वे ऐसी गणितीय समझ और क्षमताएँ विकसित करें ताकि मात्राओं, आकारों और मापों के माध्यम से दुनिया को समझ सकें। इस उद्देश्य से जुड़ी 13 दक्षताओं में से, जोड़ और घटाव से जुड़ी दक्षता (C-8.6) स्पष्ट रूप से बताती है कि बच्चों को धाराप्रवाह रूप से और लचीली रणनीतियों का उपयोग करके जोड़-घटाव करने में सक्षम होना चाहिए। इस दक्षता को एक अन्य दक्षता (C-8.13) के साथ देखा जाना चाहिए, जो बच्चों से सरल गणितीय प्रश्नों को तैयार करने और हल करने में सक्षम होने की अपेक्षा करती है। इसके अलावा, मात्राओं, आकारों, स्थान और मापों से सम्बन्धित अवधारणाओं और प्रक्रियाओं को समझने और व्यक्त करने के लिए पर्याप्त और उचित शब्दावली विकसित करने की एक और पूरी दक्षता (C-8.12) है। हालाँकि, CG-8 को पृथक करके नहीं पढ़ा जा सकता है। पिछला पाठ्यचर्या उद्देश्य (CG-7) बच्चों को गणित के लिए उनकी समझ और क्षमताओं को विकसित करने में मदद करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह इस बारे में है कि बच्चे कैसे अपने आस-पास की दुनिया का निरीक्षण कर सकते हैं और श्रेणियों व उनके सम्बन्धों को समझने के लिए तार्किक रूप से सोच सकते हैं।
ऊपर सार रूप में बताए गए सीखने के मानक एक स्पष्ट तरीक़े का सुझाव देते हैं जिसे शिक्षक को गणित पढ़ाते समय अपनाने की आवश्यकता है :
- दुनिया में मौजूद मात्राओं, आकारों और मापों से परिचित होने के लिए दैनिक जीवन की भाषा का उपयोग करते हुए बात करना।
- यह पहचानना कि वास्तविक जीवन के मूर्त अनुभवों और दुनियाभर की जानकारी को बेहतर वैचारिक स्पष्टता विकसित करने के लिए गणितीय अवधारणाओं के शिक्षण के साथ कैसे एकीकृत किया जा सकता है।
- गणित सीखने को अन्य विषयों के साथ एकीकृत करना और इसे एक अलग समय में विकसित होने वाली अलग-अलग अवधारणाओं और कौशलों के रूप में नहीं देखना, यानी कहानियों, कविताओं, गेम्स, खेल और कला के माध्यम से गणित सीखने के अवसरों की खोज करना।
- यह समझने के लिए भाषा शिक्षक (यदि वे अलग हों) के साथ मिलकर काम करना, कि कैसे सभी कक्षाएँ शब्दावली विकास और समझ विकसित करने में व्यापक तरीक़े से मदद कर सकती हैं।
नीचे, कक्षा 1 (8) के लिए एनसीईआरटी द्वारा तैयार की गई गणित की नई पाठ्यपुस्तकों के कुछ नमूने दिए गए हैं, जहाँ गणित पढ़ाने के लिए कहानियों, कविताओं, चित्रों, क़िस्सों और कॉमिक स्ट्रिप्स जैसे विविध सन्दर्भों का उपयोग किया गया है। नमूनों में भाषा के उपयोग और बच्चों के वास्तविक जीवन के अनुभव से प्राप्त सन्दर्भों की समृद्धि पर ध्यान दें। हाल ही में विकसित ये पाठ्यपुस्तकें एनसीएफ़-एफ़एस 2022 में परिभाषित पाठ्यचर्या के उद्देश्यों और दक्षताओं के अनुरूप हैं।






रणनीतियाँ
आइए तीन ऐसी विशिष्ट रणनीतियों पर नज़र डालें जो फ़ाउंडेशनल स्टेज में गणित से सम्बन्धित शब्दावली को मज़बूत करने के लिए उपयोगी हैं। ये रणनीतियाँ ऊपर दिखाए गए पाठ्यपुस्तक के नमूनों में भी परिलक्षित होती हैं। जैसी कि पहले चर्चा की गई है, इनका उपयोग सभी शिक्षकों द्वारा समय-सारणी में विभिन्न अवधियों (periods) /ब्लॉकों में किया जा सकता है। कृपया ध्यान दें कि ये रणनीतियाँ उन गणितीय खेलों के अतिरिक्त हैं जिनके आप कई उदाहरण प्राप्त कर सकते हैं।
चित्रों के बारे में पढ़ना/बात करना
चित्रों पर चर्चा करने से विद्यार्थियों को चित्रित जानकारी का दृश्य विश्लेषण और व्याख्या करने के लिए प्रोत्साहित करके उनकी गणितीय सोच को बढ़ाया जा सकता है, जिस पर शिक्षक की रचनात्मकता के आधार पर आगे और प्रश्न बनाए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, सौम्या मेनन (4) द्वारा बनाई गई ‘मार्केट मेहेम’ (Market Mayhem) की नीचे दी गई तस्वीर ऊपर उल्लिखित कई गणितीय अवधारणाओं के लिए एक समृद्ध सन्दर्भ प्रदान करती है। क्या आप सोच सकते हैं कि आप अपनी कक्षा में इस चित्र का उपयोग कैसे करेंगे?

बाल साहित्य
गणित पढ़ाने के लिए बच्चों के साहित्य का चयन करते समय, उन कहानियों/क़िस्सों को प्राथमिकता दें जिनमें स्वाभाविक रूप से गणितीय अवधारणाएँ शामिल हों। बच्चों के दैनिक जीवन से जुड़े शब्दों को शामिल करने, गणित को अधिक प्रासंगिक बनाने और परिचित सन्दर्भों के माध्यम से समझ को बढ़ाने के अवसरों की तलाश करें। उदाहरण के लिए, ड्राफ्ट सिक्किम प्री-स्कूल पाठ्यचर्या (एससीईआरटी, 2024) (11) में सीखने के अनुभव ‘कुन लामो, कुन छोटो?’ (कौन लम्बा है, कौन छोटा है?) में निहित नेपाली कहानी जंगल में एक अकेली डण्डी के बारे में है, जो इधर-उधर उछलती है और अलग-अलग लम्बाइयों की अन्य डण्डियों से मिलती है, जो उसके हाथ और पैर बन जाती हैं। शिक्षक कहानी सुनाती हैं और साथ-साथ बच्चों द्वारा बाहर से एकत्र की गई असली डण्डियों का उपयोग करके डण्डियों से बनी एक आकृति बनाती हैं। बाद की गतिविधियों में बच्चे स्वयं डण्डियों की आकृतियाँ बनाते हैं और आकृति के शरीर, बाँहों और पैरों के लिए उपयोग की जाने वाली डण्डियों की लम्बाइयों की तुलना करते हैं। शिक्षक नेपाली में ‘लामो’ और ‘छोटो’ जैसे शब्दों का उपयोग करती हैं लेकिन साथ में अँग्रेज़ी शब्दों से भी अवगत कराती हैं।
यहाँ अनुपमा अजिंक्या आप्टे (1) की ‘गुल्ली का गज़ब पिटारा’ (Gulli’s Box of Things) नामक कहानी का एक और उदाहरण है, जहाँ गुल्ली द्वारा अपने छोटे-से बक्से में एकत्र की गई वस्तुओं के वर्गीकरण का वर्णन करते समय ‘छोटा’, ‘बड़ा’, ‘चौड़ा’, ‘ऊपर’ जैसे शब्दों का उपयोग किया जाता है।
“क्या हुआ मंगल चाचा?” एक रविवार को गुल्ली ने पूछा।
“मुझे इस पैकट से तेल निकालकर बोतल में डालना है, और देखो ना बोतल का मुँह बहुत छोटा है! मुझे यकीन है कि आज मेरी रसोई ज़रूर गन्दी हो जाएगी।” मंगल चाचा ने कहा।
“चिन्ता न करें चाचा, मैं बस यूँ गया और यूँ आया।” गुल्ली बोला।
टन-टना टन! धड़ाम-धूम! आओ देखें क्या निकलता है गुल्ली के गज़ब पिटारे से!!
अरे, यह क्या! एक बड़ी, चौड़े मुँह वाली कीप। इसमें ऊपर से कुछ भी उड़ेलें और देखें कितनी सफ़ाई से वह बूँद-बूँद करके नीचे आता है!
नमूने की तीसरी कहानी जेन डि सूज़ा (Jane De Suza) (5) की ‘चौंका देने वाला रिपोर्ट कार्ड’ (The Very Shocking Report Card ) एक लड़के पट्टू के बारे में है, जो अपना रिपोर्ट कार्ड प्राप्त करने से डर रहा है क्योंकि वह जानता है कि उसे बहुत अच्छे नम्बर नहीं मिलेंगे। कहानी गणितीय और सामाजिक-भावनात्मक व नैतिक विकास को जोड़ती है। यह जोड़ और घटाव जैसी सरल गणनाएँ करने का अवसर भी प्रदान करती है।
इसीलिए इस बार पापा पट्टू के साथ चल पड़े थे टीचर से रिपोर्ट कार्ड खुद ही लेने को। पापा ने रिपोर्ट कार्ड में नज़रें गड़ाईं। उनकी पपीते की फाँक बराबर हँसी, सिकुड़कर बस पतली-सी नींबू की फाँक जितनी रह गई।
10 में से 3 पढ़ने में — दो लड़ते हुए साँडों की तरह पापा की भँवें एक-दूसरे से आ मिलीं।
10 में से 4 कविता आवृति में — तूफान में हिलते पेड़ की तरह पापा का सिर इस तरफ से उस तरफ हिलने लगा।
10 में से 2 श्रुतलेख में — रेलगाड़ी के इंजन की तरह एक वहूउउउश-सी आवाज़ निकली पापा के मुँह से।
घर जाते समय, पट्टू का सामना अपने पड़ोस के अलग-अलग लोगों से होता है और उनकी बातचीत के माध्यम से, पापा को एहसास होता है कि पट्टू एक विचारशील बच्चा है जो हर किसी का ख़्याल रखता है। घर आकर, पट्टू अपनी माँ को अपने नम्बर बताने से डरता और शर्मिन्दा होता है। लेकिन वहाँ पापा एक अलग ही रिपोर्ट कार्ड सामने रखते हैं…
“10 में से 9 साझेदारी में,” पापा ने कहा।
“10 में से 10 दयालु होने के लिए,”
“10 में से 11 बड़ों के प्रति श्रद्धा और सम्मान के लिए।”
चित्र संयोजक

चित्र संयोजक आरेखों, तालिकाओं, मानचित्रों आदि के रूप में विषयवस्तु के दृश्य चित्रण होते हैं। वे बच्चों के लिए सन्दर्भ-आधारित शब्दावली का उपयोग करके गहरी वैचारिक समझ विकसित करने और प्रदर्शित करने के लिए एक नया और आकर्षक उपकरण हैं (Bay-Williams & Livers, 2009) (2)। चित्रात्मक वर्णन, विशेष रूप से फ़ाउंडेशनल स्टेज के छोटे बच्चों द्वारा किए गए, शब्दावली को दृश्यमान बनाते हैं और चित्रों को पढ़ने के समान ही समझ में योगदान करते हैं। 1997 में किए गए एक अध्ययन में, चित्र संयोजकों के माध्यम से शब्दावली निर्देश प्राप्त करने वाले शिक्षार्थियों ने परिभाषाओं के माध्यम से शब्दावली निर्देश प्राप्त करने वाले शिक्षार्थियों से काफ़ी बेहतर प्रदर्शन किया (Monre & Pendergrass, 1997, जैसा कि Powell & Driver 2014 में उद्धृत किया गया है) (9)।
दिए गए चित्र संयोजक (Bruun et al., 2015) (3) में, विद्यार्थी घटाव की अवधारणा पर काम करता है, इसे परिभाषित करता है, एक उदाहरण और ग़ैर-उदाहरण के साथ अपने ख़ुद के गणितीय सवाल तैयार करता है, और घटाव को प्रदर्शित करने वाली एक तस्वीर तैयार करता है।
शिक्षक इस संयोजक का उपयोग विद्यार्थी के तर्क का पता लगाने के लिए कर सकते हैं (बच्चा उदाहरण के तौर पर ‘0 – 10 = 0’ क्यों देता है? क्या बच्चा ‘10 – 10 = 0’, या ‘10 – 0 = 0’ लिखने का इरादा रखता था, या फिर कोई अन्य कारण है?); ग़लत धारणाओं की पहचान कर सकते हैं (चित्र में, उदाहरण ‘5 – 3 = 2’ सही है, लेकिन चित्र में दो मुड़ी हुई उँगलियाँ और तीन खुली उँगलियाँ क्यों दिखाई दे रही हैं? उत्तर तक पहुँचने के लिए बच्चे की प्रक्रिया क्या है?); और शिक्षण योजना पर अन्तर्दृष्टि प्राप्त कर सकते हैं (क्या परिभाषाओं को पढ़ाया जाना चाहिए और उन्हें पुनरुत्पादित किए जाने की उम्मीद की जानी चाहिए? क्या बच्चे अपनी स्वयं की परिभाषाओं पर पहुँच सकते हैं?)।
सारांश
फ़ाउंडेशनल स्टेज में गिनती, संख्याओं की पहचान और मात्राओं की तुलना से सम्बन्धित मूलभूत पूर्व-संख्यात्मक अवधारणाएँ बच्चों को जोड़ने और घटाने जैसी सफल गणनात्मक क्षमताएँ, बुनियादी आकारों और माप की समझ और प्रारम्भिक गणितीय सोच-विचार विकसित करने में सक्षम बनाती हैं। भाषा के उपयोग से उत्पन्न ग़लतफ़हमियाँ गणितीय समझ में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं। विद्यार्थियों के वास्तविक जीवन के अनुभवों से सम्बन्धित विषयवस्तु का उपयोग करने वाले स्पष्ट शब्दावली निर्देशों और विभिन्न अनुभव (यहाँ मुख्य शब्द ‘एकाधिक या विभिन्न’ है, न कि ‘दोहराए हुए’ है!) प्रदान करने वाली विविध रणनीतियों को दैनिक कार्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए और विशेष रूप से किसी एक शिक्षक या पीरियड/कक्षा पर ही नहीं छोड़ा जाना चाहिए। पाठ्यचर्या के उद्देश्यों और दक्षताओं के अनुरूप एक पद्धति विकसित करने से शिक्षार्थियों को स्कूली शिक्षा के लिए एनसीएफ़ (एनसीएफ़-एसई, 2023) (6) यानी बुनियादी संख्याज्ञान; गणितीय सोच; समस्या-समाधान; गणितीय अन्तर्ज्ञान; और आनन्द, जिज्ञासा, और आश्चर्य! में दिए गए गणित शिक्षा के प्रमुख पाठ्यचर्या उद्देश्यों की दिशा में प्रगति करने में मदद मिल सकती है।
सम्पादक की टिप्पणी
पाठ्यपुस्तकों से लिए गए सभी चित्र एनसीईआरटी की अनुमति से प्रकाशित किए जा रहे हैं।
- Apte, A. A. (2015, June 22). Gulli’s box of things. https://storyweaver.org.in/. https://storyweaver.org.in/en/stories/486-gullis- box-of-things
- Bay-Williams, J. M., & Livers, S. D. (2009). Supporting mathematics vocabulary acquisition. Teaching Children Mathematics, 16(4), 238–246. https://doi.org/10.5951/tcm.16.4.0238
- Bruun, F., Diaz, J., & Dykes, V. J. (2015). The language of mathematics. Teaching Children Mathematics, 21(9), 530–536. https://doi.org/10.5951/teacchilmath.21.9.0530
- Menon, S. (2016, November 21). Market mayhem. https://storyweaver.org.in/. https://storyweaver.org.in/en/stories/9740-marketmayhem
- De Suza, J. (2018, February 8). The very shocking report card. https://storyweaver.org.in/. https://storyweaver.org.in/en/ stories/26976-the-very-shocking-report-card
- National Council for Educational Research and Training (NCERT). (2022). Foundational Stage National Curriculum Framework. https://ncert.nic.in/pdf/NCF_for_Foundational_Stage_20_October_2022.pdf
- National Council for Educational Research and Training (NCERT). (2023). School Education National Curriculum Framework.
https://ncert.nic.in/pdf/NCFSE-2023-August_2023.pdf - National Council for Educational Research and Training (NCERT). (2023). Joyful mathematics (Class 1). https://ncert.nic.in/textbook.php?aejm1=11-13
- Powell, S. R., & Driver, M. K. (2014). The influence of mathematics vocabulary instruction embedded within addition tutoring for First-Grade students with mathematics difficulty. Learning Disability Quarterly, 38(4), 221–233. https://journals.sagepub.com/doi/10.1177/0731948714564574
- Shirali, P. (2016). Teaching word problems: A practical approach. At Right Angles, 5(1). http://publications.azimpremjiuniversity. edu.in/id/eprint/3124 11. State Council for Educational Research & Training (SCERT). (2024). Draft Sikkim Preschool Curriculum.
- State Council for Educational Research & Training (SCERT). (2024). Draft Sikkim Preschool Curriculum.