अपने सपनों में शैतान से सावधान रहें!
विष्णु लक्ष्मण द्वारा समीक्षित
मैं एक ग्यारह साल के बच्चे के रूप में, शायद ही कभी पढ़ता था। मुझे किताबों को पढ़ने में शायद ही कभी मज़ा आता था। इसके बजाय मैं बाहर खेलना, चट्टानों पर चढ़ना या ऐसा कुछ भी करना पसन्द करता था जो मुझे एक जगह बैठकर शब्दों को घूरने के लिए मजबूर न करे।
इसी दौरान, मेरी स्कूल की लाइब्रेरियन ने मुझे ‘द नम्बर डेविल’ (संख्याओं का शैतान) नाम की एक किताब से परिचित कराया। इसके लेखक हंस एन्जेंसबर्गर हैं। उस अलमारी की बाकी किताबों के बीच वह किताब सबसे अलग थी — लम्बी, चौड़ी और उसके कवर पर एक अजीब-सा, शैतान जैसा दिखने वाला आदमी था। मैंने उसके पन्ने पलटे और देखा कि उसमें दिलचस्प चित्र थे और उसका टैक्सट बड़े फॉन्ट (अक्षरों) में था। इसलिए मैंने उसे पढ़ने का फ़ैसला किया।
पहली बार पढ़ते ही मुझे इस किताब से प्यार हो गया। और फिर एक ऐसे इंसान के रूप में जो अकसर किताबें नहीं पढ़ता, मैंने इस किताब को पाँच बार पढ़ा है!
यह किताब रॉबर्ट नाम के एक दस साल के लड़के के बारे में है, जो गणित और अपने कठिन गणित के शिक्षक से नफ़रत करता है। उसे न तो क्लास में कुछ समझ आता है और न ही उसका दिमाग़ उलझी हुई संख्याओं को सम्हाल पाता है। एकमात्र परम सत्य जिसे वह सच मानता है, वह यह है कि उसे किसी भी गणितीय चीज़ से नफ़रत है!
पहली बार पढ़ते ही मुझे इस किताब से प्यार इसलिए हो गया क्योंकि यह उन गणितीय अवधारणाओं को सरल बनाने में सक्षम थी जो निश्चित रूप से मेरे स्तर से काफी ऊपर थीं —जैसे कि घातांक (exponents), अपरिमेय संख्याएँ (irrational numbers) और अभाज्य संख्याएँ (prime numbers)। उन्नत गणितीय अवधारणाएँ न केवल अधिक सीधी और आसान हो गईं, बल्कि सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वे व्यावहारिक (applicable) लगने लगीं। उदाहरण के लिए वह तरीक़ा, जिसमें नम्बर डेविल, रॉबर्ट के दोस्तों के क्लास में बैठने के अलग-अलग तरीक़ों के माध्यम से क्रमचय और संचय (permutations and combinations) को समझाता है।
मुझे पूरा यक़ीन है कि जब मैंने इसे पहली बार पढ़ा था, तब मैं इसकी सारी अवधारणाओं को पूरी तरह से नहीं समझ पाया था। उदाहरण के लिए, अनन्त के योग (sum to infinity) की अवधारणा को समझना विशेष रूप से कठिन था। अकसर मैं सिर्फ़ उन नतीजों को देखकर हैरान रह जाता था जैसे कि — जब आप आधे (½) से शुरू करते हैं, उसे बार-बार दो से विभाजित करते हैं और फिर उन सबको आपस में जोड़ते हैं, तो उनका योग एक (1) के बराबर होता है! और मैंने इसे पाँच बार पढ़ा, हर बार मुझे कोई ऐसी अवधारणा समझ आई जो मुझे पहले समझ नहीं आई थी, या फिर मैं किसी नतीजे के पीछे के गणित को और बेहतर तरीक़े से समझने में सक्षम हो सका।
गणित से तंग आने के साथ-साथ, रॉबर्ट सपनों को देखने से भी ऊब चुका था। उसे सपने में हमेशा एक बड़ी मछली निगल जाती थी, या फिर वह साइकिल या कम्प्यूटर गेम उसे डराते थे जो उसके पास कभी थे ही नहीं। हालाँकि, एक रात कुछ अलग हुआ। न तो कोई मछली उसे निगलने आई, न साइकिल थी और न ही कम्प्यूटर — इसके बजाय उसकी मुलाकात एक ऐसे आदमी से हुई जो ख़ुद को ‘नम्बर डेविल’ कहता है। शुरुआत में रॉबर्ट थोड़ा डरा हुआ होता है, और सबसे बड़ी बात, वह सपने में भी होमवर्क मिलने के विचार को बर्दाश्त नहीं कर पाता! एक बार जब रॉबर्ट अपने प्रति नम्बर डेविल के इरादों पर भरोसा कर लेता है, तो वह जल्दी ही उसके सिखाने के आकर्षक तरीक़ों का कायल हो जाता है; जैसे कि त्रिकोणीय संख्याओं (triangle numbers) को समझाने के लिए नारियल का उपयोग करना, या फाइबोनैचि संख्याओं (Fibonacci numbers) को सिखाने के लिए खरगोशों का उपयोग करना। वे दोनों मिलकर गणित की बुनियादी चीज़ों — जैसे घातांक और अभाज्य संख्याओं — से आगे बढ़ते हुए अधिक रोमांचक विषयों तक का सफ़र तय करते हैं, जिन्हें समझने की कल्पना रॉबर्ट ने अपने नए दोस्त से मिलने के कुछ ही समय पहले तक सपने में भी नहीं की थी।
किसी को, विशेष रूप से एक छोटे बच्चे को, किसी ऐसे विषय का आनन्द लेने के लिए मजबूर करना अनुचित और शायद असम्भव है, जिसमें उसे कठिनाई हो रही हो। गणित के मामले में, इसके कारण बहुत सरल हो सकते हैं — जैसे कि यह बहुत कठिन है, या बहुत अमूर्त (abstract) है, या उबाऊ और बार-बार दोहराया जाने वाला है, और इस वजह से बच्चा धीरे-धीरे इसमें रुचि खो देता है। शिक्षकों को यह किताब पढ़नी चाहिए और बच्चों को थोड़े अधिक जटिल विषयों से परिचित कराने के तरीक़े के रूप में अपनी कक्षा में इसका उपयोग करना चाहिए, जो उन्हें उस चीज़ से थोड़ा ब्रेक दे सके जो वे वर्तमान में सीख रहे हैं; क्योंकि यह इस विषय में उनकी रुचि को फिर से जगा सकता है। वे कक्षा में इस किताब के अध्यायों को ज़ोर से पढ़कर भी सुना सकते हैं। कहानी सुनाने (story-telling) की यह लेखन शैली आसान है, और इसका कथानक (plot) सीधा और समझने में सरल है। विद्यार्थियों को शैतान का बेपरवाह रवैया पसन्द आएगा! पूरे पन्ने पर बने बड़े-बड़े चित्र बेहद आकर्षक हैं और एक छोटे बच्चे की कल्पना को उड़ान देते हैं। इसका असली मज़ा सरल विचारों से आता है, जैसे कि किसी जटिल गणितीय अवधारणा को सच साबित करने के लिए नम्बर डेविल का पेड़ों पर कूदना और फलों को गिनना।
पहली बार मैंने जब यह किताब पढ़ी थी, तब इसे अपने पिताजी के साथ पढ़ा था, जिससे इस बात में बहुत बड़ा अन्तर आया कि मैं इसकी सामग्री को कितना समझ पाया। इसलिए, यदि आप ग्यारह या बारह वर्ष के हैं, तो मेरी सलाह है कि आप इसे किसी वयस्क के साथ पढ़ें, जबकि बड़ी उम्र में आप इसे अकेले भी पढ़ सकते हैं।
इस किताब की एक आलोचना यह है कि इसके कुछ अध्याय काफी लम्बे हैं, ख़ासकर तब जब एक ही विषय से जुड़ी कई अवधारणाओं को शामिल किया जा रहा हो (उदाहरण के लिए, क्रमचय और संचय वाला अध्याय)। छोटे अध्याय, जिनमें केवल एक ही अवधारणा को समझाया गया हो, इसे पढ़ने में अधिक आसान बना सकते थे। इसके अतिरिक्त, कुछ अध्यायों में स्पष्टीकरण बहुत विस्तृत हो जाता है। हालाँकि, कुछ लोग यह तर्क दे सकते हैं कि यह बेहतर ही है, क्योंकि आखिर रॉबर्ट भी तो ग्यारह साल का है, इसलिए उसे कुछ अतिरिक्त स्पष्टीकरण की आवश्यकता तो होगी ही!
अपने सपनों में एक नम्बर डेविल से मिलने की अवधारणा के अनूठेपन ने मुझे वास्तव में बहुत आकर्षित किया, विशेष रूप से पहली बार में। मैं अकसर यह कामना करता था कि काश मेरे सपनों में भी कोई ऐसा आए, जो उन सभी विषयों में मेरी मदद करे जिनमें मुझे कठिनाई होती थी! और वास्तव में, रॉबर्ट की कहानी यह दिखाती है कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में हम सभी को संघर्षों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन हमारी समस्याओं में मदद करने के लिए हमेशा कोई-न-कोई ‘नम्बर डेविल’ मौजूद होते हैं, और वे सबसे असामान्य तरीक़ों से हमारे सामने प्रकट हो सकते हैं!