भिन्नों के मायने एवं व्याख्या

अनुवाद : अंजली नरोन्हा | पुनरीक्षण : प्रतिका गुप्ता | कॉपी एडिटर : अतुल अग्रवाल

इस लेख का उद्देश्य पाठकों को भिन्नों के विभिन्न मायने व निहित अर्थों को समझने में मदद करना है। इससे शिक्षक को शाला के प्रारम्भिक स्तर पर भिन्न की विभिन्न विशिष्ट अवधारणाओं को सिखाने, समझाने के तरीक़ों (pedagogical content knowledge) को समझने में मदद मिलेगी। उन्हें यह लेख विद्यार्थियों को पूर्ण संख्या से भिन्न की अवधारणा तक पहुँचाने में मदद करेगा।

भिन्न एक समृद्ध गणितीय अवधारणा है जिसका परिचय विद्यालय के शुरुआती दौर में ही दिया जाता है। भिन्न की अभिव्यक्ति द्वि-स्तरीय संख्यात्मक अभिव्यक्ति होती है जो कि पूर्ण संख्याओं से अधिक जटिल होती है। इसलिए भिन्न समझना पूर्ण संख्याओं को समझने से अधिक जटिल है। भिन्न समझाने के लिए उचित सन्दर्भ में सार्थक परिचय देने की ज़रूरत होती है। जब शिक्षक ऐसा किए बिना भिन्नों का परिचय देते हैं, तो यह विषय उन विद्यार्थियों के लिए बोझिल बन जाता है जिन्हें इस अवधारणा की गहरी समझ नहीं होती। भिन्नों को रटवाकर पढ़ाने से विद्यार्थियों को अगली कक्षाओं में और भी समस्याएँ होती हैं।

आमतौर पर एक शुरुआती कक्षा में भिन्न की अवधारणा का परिचय इस प्रकार से दिया जाता है : भिन्नों को \(\frac{a}{b}\) के रूप में व्यक्त किया जाता है। यहाँ a और b दोनों पूर्ण संख्याएँ हैं। a को भिन्न का अंश और b को भिन्न का हर कहा जाता है। हर का मतलब है जितने बराबर भागों में पूर्ण को बाँटा गया है, और अंश का मतलब है जितने बराबर भागों को चुना गया है। (हर में 0 को छोड़कर बाक़ी पूर्ण संख्याएँ होती हैं।) उदाहरण के लिए, \(\frac{1}{4}\) रोटी का मतलब है उस रोटी का एक टुकड़ा जिसे 4 बराबर टुकड़ों में तोड़ा गया है — \(\frac{1}{4}\)भाग 1 टुकड़े को दर्शाता है। \(\frac{1}{4}\) प्रत्येक टुकड़े की माप भी है। इसी प्रकार, \(\frac{3}{4}\) एक ही रोटी से लिए गए 3 ऐसे टुकड़े हैं जिनका हर टुकड़ा \(\frac{1}{4}\)रोटी के बराबर है। यानी \(\frac{3}{4}\) , \(\frac{1}{4}\) आकार के 3 टुकड़ों को दर्शाता है। जब अंश 1 के बराबर होता है (या एक भाग चुना जाता है), हम इसे इकाई भिन्न कहते हैं, और जब अंश 1 से अधिक होता है, उसे ग़ैर-इकाई भिन्न कहते हैं।

मुख्य रूप से तीन प्रकार की भिन्न होती हैं :

  • अंश < हर (जैसे, \(\frac{1}{4}\), \(\frac{3}{8}\) , \(\frac{2}{7}\) , आदि) अंश और हर की परिभाषा से स्पष्ट है कि ऐसी भिन्न एक पूरे या 1 से छोटी होती हैं। इन्हें उचित भिन्न कहते हैं।
  • अंश > हर (जैसे, \(\frac{5}{4}\), \(\frac{9}{2}\) , \(\frac{7}{3}\) , आदि) इन भिन्नों का मान 1 से अधिक होता है। उदाहरण के लिए, \(\frac{5}{4}\) का अर्थ है कि एक पूरी चीज़ को चौथाई (या 4 बराबर भागों) में विभाजित किया गया है, और ऐसे 5 भाग चुने गए हैं। यह स्पष्ट है कि ऐसे 4 भागों को चुनने पर एक पूरा या 1 बनता है, और हमने एक और \(\frac{1}{4}\) चुना है। ऐसी भिन्नों को, जो कि पूरे से बड़ी होती हैं, अनुचित या विषम भिन्न कहते हैं।
  • अंश = हर (जैसे, \(\frac{5}{5}\), \(\frac{7}{7}\) , आदि) इस भिन्न का मान एक के बराबर होता है।

हैरानी की बात है! कोई आश्चर्य नहीं है कि विद्यार्थियों को भी यही लगता है…

पूर्ण संख्याओं की तुलना में भिन्नों से सम्बन्धित अवधारणात्मक कठिनाइयाँ

  1. भिन्न का लिखित रूप (सांकेतिक अभिव्यक्ति)
    भिन्न को हमेशा दो पूर्ण (या प्राकृत धनात्मक संख्याएँ, जो गिनने वाली संख्याएँ भी कहलाती हैं — हर के रूप में शून्‍य को छोड़कर 1, 2, 3,…) संख्याओं का उपयोग करके लिखा जाता है। लेकिन भिन्न का मात्रात्मक अर्थ उसके अंश और हर में लिखी गई पूर्ण या प्राकृत संख्याओं की मात्रा से बहुत अलग होता है। उदाहरण के लिए, भिन्न \(\frac{2}{5}\) का अर्थ 2 या 5 या 2 और 5 के बीच की कोई संख्या नहीं है। \(\frac{5}{2}\) भी \(\frac{2}{5}\) से अलग है।
    विद्यार्थियों को भिन्न के सांकेतिक प्रारूप और उसके मायने को समझने में दिक़्क़त आती है। इसलिए अलग-अलग और अर्थपूर्ण सन्दर्भों द्वारा विद्यार्थियों को भिन्नों से परिचित कराने के लिए काफ़ी समय लगाने की ज़रूरत है।
  2. नई शब्दावली
    अंश, हर, इकाई भिन्न, ग़ैर-इकाई भिन्न, उचित भिन्न और अनुचित (या विषम) भिन्न जैसी नई शब्दावली पर बहुत जल्दी ज़ोर दिया जाता है। इससे सिखाने की प्रक्रिया और आकलन दोनों में अर्थ के बजाय शब्दावली पर ध्यान केन्द्रित हो जाता है। इससे विद्यार्थी भिन्न के वास्तविक मायने से भटक जाते हैं।
  3. भिन्नों की तुलना और क्रम
    पूर्ण / प्राकृत संख्याओं की तुलना में भिन्नों की तुलना और क्रम अधिक जटिल और कठिन होता है। 8, 2 से बड़ा है। लेकिन \(\frac{1}{2}\) , \(\frac{1}{8}\) से बड़ा है। इससे विद्यार्थियों को काफ़ी भ्रम होता है, ख़ासकर तब जब उन्हें यह नहीं समझाया जाता कि \(\frac{1}{2}\) कैसे \(\frac{1}{8}\) से बड़ा है। आप इसे चित्र से ज़्यादा अच्छे से समझा सकते हैं।
    दो क्रमागत पूर्ण / प्राकृत संख्याओं के बीच कोई और प्राकृत संख्या नहीं होती, लेकिन दो असमान भिन्न संख्याओं के बीच कई भिन्न होती हैं। इसलिए उन्हें क्रम देना कठिन हो जाता है। ग़ैर-इकाई वाली ऐसी भिन्नों की तुलना जिनके हर अलग हों, और भी जटिल और कठिन होती है। इनकी तुलना लघुत्तम समापवर्तक के बिना नहीं की जा सकती।
  4. भिन्नों पर संक्रियाएँ
    प्राकृत संख्याओं को जोड़ने और घटाने की संक्रिया में, इकाइयों को इकाइयों में जोड़ा या घटाया जाता है, दहाई को दहाई में जोड़ा या घटाया जाता है।
    उदाहरण के लिए, 35 + 54 = 89 (4 इकाइयों में 5 इकाइयाँ जोड़ी जाती हैं और 5 दहाई में 3 दहाई जोड़ी जाती हैं) जब इकाई का जोड़ दस से अधिक हो जाता है, प्राप्त दहाई संख्या को दहाई में जोड़ा जाता है। लेकिन भिन्नों में, अंशों को अंशों से जोड़ा या घटाया नहीं जाता है और हर को हर से जोड़ा या घटाया नहीं जाता। उदाहरण के लिए, \(\frac{1}{3}\) + \(\frac{3}{5}\) ≠ \(\frac{4}{8}\) ।
    लेकिन दिलचस्प बात यह है कि गुणा में, अंश का अंश से और हर का हर से गुणा किया जाता है।
    भिन्नों में भाग देना तो और भी अधिक जटिल है। भाजक के अंश और हर को परस्पर बदलकर, उसे भाज्य के साथ गुणा किया जाता है। इन नियमों पर ध्यान केन्द्रित करने से विद्यार्थी एल्गोरिदम की भूलभुलैया में भटक जाते हैं, और एल्गोरिदम सीखना अपने-आप में एक लक्ष्य बन जाता है।

मैं इस लेख में, भिन्नों के विभिन्न अर्थों और व्याख्याओं पर चर्चा करूँगा। इससे परिचित होने से शिक्षक को अपनी शिक्षण प्रक्रिया को एल्गोरिदम को याद करवाने और उपयोग करने के लिए कहने की बजाय समझ बनाने और विवेकशीलता पर केन्द्रित करने में मदद मिलेगी।

भिन्न के विभिन्न अर्थ : उदाहरणों और दृष्टान्तों सहित

बेहर, हारेल, पोस्ट, लेश [1], कीरेन [3] और लैमन [4] बताते हैं कि भिन्नों के कई अर्थ और व्याख्याएँ होती हैं। उन्होंने भिन्नों के पाँच अलग-अलग मायनों और व्याख्याओं [2] की पहचान की है। ये नीचे दी गई हैं।

  1. एक पूरी चीज़ के भाग के रूप में भिन्न या सेट (समुच्चय / समूह) के भाग के रूप में भिन्न
  2. माप के रूप में भिन्न
  3. विभाजन के परिणाम या प्रतिफल के रूप में भिन्न
  4. अनुपात के रूप में भिन्न
  5. संक्रियक (operator) के रूप में भिन्न

सोचने में ये काफ़ी अद्भुत लगता है कि एक ही भिन्न का, इनमें से कोई भी अर्थ हो सकता है। जब किसी भिन्न को बिना किसी सन्दर्भ के प्रतीकात्मक रूप से विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत किया जाता है, उन्‍हें यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि उसका वास्तविक अर्थ क्या है। जब विद्यार्थियों को भिन्नों को इन विभिन्न दृष्टिकोणों से और सन्दर्भों में देखने के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है, वे विभिन्न स्थितियों और समस्याओं का अर्थ निकाल पाते हैं। भिन्नों के साथ उनकी समझ और संक्रियाएँ तार्किक और विवेकशील हो जाती हैं।

विद्यार्थियों को भिन्नों का परिचय देने से पहले, किसी शिक्षक को भिन्नों के विभिन्न अर्थों को जान लेना चाहिए, साथ ही प्रारम्भिक विद्यालय के विद्यार्थियों में भिन्न की समझ विकसित होने के तरीक़ों से भी। हम भिन्नों के पाँचों अर्थों पर एक-एक करके चर्चा करेंगे।

  1. पूर्ण के भाग या सेट के भाग के रूप में भिन्न
    भिन्न का परिचित और सामान्य अर्थ तथा व्याख्या अंश-पूर्ण (या पूरे का एक हिस्सा) मॉडल है। यह अर्थ आमतौर पर विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय आने से पहले ही अनुभव किया जाता है। बच्चे रोटी, चॉकलेट, चिए, कंचे, लड्डू आदि अपने भाई-बहनों या दोस्तों के बीच बराबर बाँटने के आदी होते हैं। अंश और पूर्ण के बीच का सम्बन्ध भिन्न के अंश-पूर्ण मॉडल का प्रतिनिधित्व करता है। पूर्ण या पूरा दो प्रकार के होते हैं :
  • सतत पूर्ण होना
    सतत पूर्ण का एक उदाहरण रोटी है। यह भिन्न की एक सरल और सबसे बुनियादी समझ है जिसका परिचय भिन्नों को पढ़ाने के शुरुआती चरण में दिया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि एक रोटी चार लोगों के बीच समान रूप से बाँटी जाती है तो प्रत्येक व्यक्ति को रोटी का एक-चौथाई हिस्सा मिलेगा। यह एक अंश का उसके पूरे के साथ सम्बन्ध दर्शाता है। चूँकि प्रत्येक व्यक्ति को रोटी के 4 बराबर भागों में से 1 मिलता है, इसलिए उन्हें रोटी का ( \(\frac{1}{4}\) ) हिस्सा मिलता है। यह एक इकाई भिन्न है। इस व्याख्या का अर्थ है कि हम रोटी के ‘n’ बराबर भागों में से 1 भाग चुन रहे हैं। इसे पूरे के \(\frac{1}{n}\) भाग (पूरे के nवें भाग के रूप में पढ़ें) द्वारा दर्शाया जाता है। अंश-पूर्ण सम्बन्ध का अर्थ यह नहीं है कि हमेशा प्रत्येक टुकड़ा दूसरे टुकड़े के हूबहू दिखेगा या सर्वांगसम होगा। हम हिस्सों के कुछ अन्य पहलुओं की तुलना कर सकते हैं, जैसे कि टुकड़ों का क्षेत्रफल या आयतन। हो सकता है कि टुकड़े सर्वांगसम आकार के न हों, लेकिन उनका क्षेत्रफल या आयतन बराबर हो [2]।

चित्र नीचे दिए गए हैं।

चित्र-1 में, प्रत्येक इकाई टुकड़ा, \(\frac{1}{4}\) ,अन्य इकाइयों के हूबहू और बराबर (सर्वांगसम) है।

चित्र-1

चित्र-2 में, बड़े आयत को 4 बराबर भागों में विभाजित किया गया है। उन्हें चार अलग-अलग रंगों से छायांकित किया गया है। प्रत्येक इकाई टुकड़ा (उदाहरण के लिए, पीला) अन्य इकाई टुकड़ों (हरा, हल्का लाल और नीला रंग) की तरह नहीं दिखता, लेकिन क्षेत्रफल में उनके बराबर है — उनमें से प्रत्येक बड़े आयत का \(\frac{1}{4}\) हिस्सा है।

चित्र-2

चित्र-3 में, बीकर क पानी से भरा है और पूर्ण को दर्शाता है। बीकर ख, ग, घ, बीकर क में मौजूद पानी के आयतन का क्रमशः \(\frac{1}{4}\) , \(\frac{2}{4}\) और \(\frac{3}{4}\) भाग दर्शाते हैं।

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चित्र-3
  • असतत पूर्ण होना
    दूसरे प्रकार का पूर्ण वह है जिसका उपयोग हम अपने दैनिक जीवन में अकसर करते हैं — हम कई चीज़ों का आधा, एक-तिहाई या एक-चौथाई भाग बनाते हैं, जैसे अण्डों, फलों के ढेर, विद्यार्थियों के समूह का आदि। यह संग्रह एक सेट है, और हम उस सेट का एक हिस्सा लेते हैं। सेट के हिस्से का मतलब यह है कि प्रत्येक हिस्से में सुनिश्चित होगा कि उसमें वस्तुओं या व्यक्तियों की बराबर संख्या होगी। मैं आपको हिन्दी फ़िल्म ‘शोले’ का एक प्रसिद्ध दृश्य याद दिलाना चाहूँगा। मार्च करते हुए जेलर असरानी पहरेदारों से कहते हैं (दाएँ हाथ का इशारा करते हुए) आधे इधर जाओ, (बाएँ हाथ का इशारा) आधे इधर जाओ, और बाक़ी मेरे पीछे आओ! इस भिन्न का अर्थ एक सेट (पहरेदारों) का एक भाग है। मज़ाकिया अन्दाज़ में कह सकते हैं कि शायद असरानी को भिन्नों की अच्छी समझ नहीं थी, तभी उनके साथ आने के लिए कोई बचता नहीं! लेकिन, आधा एक सेट का कोई हिस्सा होता है, शायद वे यह समझते थे — उन्हें भिन्न के अर्थ का कुछ तो बोध था।
    इस पूर्ण के सेट को या तो एक पंक्ति या सारणी के रूप में व्यवस्थित किया जा सकता है या अव्यवस्थित छोड़ा जा सकता है। नीचे दिया गया चित्र एक सारणी में व्यवस्थित सेट का एक उदाहरण है।

चित्र-4 में 12 अण्डे हैं। \(\frac{1}{2}\) अण्डे एक पंक्ति में हैं। लेकिन \(\frac{1}{6}\) अण्डे एक कॉलम में हैं।

चित्र-4
  1. माप के रूप में भिन्न
    भिन्न का यह अर्थ माप से सम्बन्धित है। उदाहरण के लिए, 124 मीटर लम्बी एक रस्सी को 5 बराबर भागों में काटा जाता है। 120 मीटर को आसानी से 5 बराबर भागों में विभाजित किया जा सकता है। इनमें प्रत्येक की लम्बाई 24 मीटर है, 4 मीटर शेष बचेगा। बचे 4 मीटर को 400 सेमी में परिवर्तित करके 5 बराबर भागों में विभाजित किया जा सकता है। इससे प्रत्येक भाग 80 सेमी लम्बा होगा। इस प्रकार, 124 मीटर को पाँच भागों में बाँटने पर प्रत्येक भाग 24 मीटर और 80 सेमी का होगा। इस तरह हम लम्बाई, भार और आयतन को तब तक उनकी छोटी इकाइयों में परिवर्तित करके बाँटते जाते हैं जब तक अन्तिम मात्रा प्राप्त नहीं हो जाती। इसे भिन्न \(\frac{124}{5}\) मीटर के रूप में लिखा जा सकता है। यह भिन्न के विभाजन अर्थ को भी दर्शाता है। इसी प्रकार, \(\frac{14}{10}\) को 14 लीटर तेल के सन्दर्भ में देखा जा सकता है जिसे 10 लोगों में बाँटना है। यहाँ पर 10 लीटर 10 लोगों में एक-एक लीटर बँट जाएँगे। बचे 4 लीटर को मिलीलीटर में बदलेंगे। 4 लीटर के 4000 मिलीलीटर हुए। 4000 ÷ 10 = 400, तो हर 1 व्यक्ति को 1 लीटर और 400 मिलीलीटर तेल मिलेगा। 1 पूर्ण से कम या पूर्ण के बीच की मात्रा को मापने के लिए हम भिन्नात्मक इकाइयों का उपयोग करते हैं, मूल रूप से इकाई को समान उप-इकाइयों में परिवर्तित करते हैं। उदाहरण के लिए, यदि 1 मीटर कपड़े को तीन बराबर भागों में काटा जाए तो प्रत्येक भाग की लम्बाई \(\frac{1}{3}\) मीटर होगी। इसी प्रकार, यदि 3 लीटर जूस 9 लोगों में बाँटा जाए तो प्रत्येक को \(\frac{3}{9}\) या \(\frac{1}{3}\) लीटर जूस मिलेगा।

यह केवल लम्बाई और आयतन माप तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वज़न, क्षेत्रफल और समय माप पर भी समान रूप से लागू होता है, जैसे 200 मिली = \(\frac{1}{5}\) लीटर, 250 ग्राम = \(\frac{1}{4}\) किग्रा। इसे नीचे दिए गए तरीक़े से और विस्तार से समझा जा सकता है।

52 ग्राम = \(\frac{52}{1000}\) किग्रा = 52 किग्रा को 1000 भागों में विभाजित किया = यानी 52 बार \(\frac{1}{1000}\) किग्रा किया।

27 मिली = \(\frac{27}{1000}\) लीटर = 27 लीटर को 1000 भागों में विभाजित किया अर्थात 27 बार \(\frac{1}{1000}\) लीटर किया।

  1. भाग के परिणाम के रूप में भिन्न
    कोई भिन्न किन्हीं दो संख्याओं के भाग का परिणाम यानी भागफल हो सकता है। यहाँ पूर्ण सतत भी हो सकता है या असतत भी। इसे नीचे विस्तार से समझाया गया है।

वस्तुओं का समूह (Discrete objects)

  • सेट का भाग : यदि 12 आम 4 विद्यार्थियों में बराबर-बराबर बाँटे जाते हैं तो प्रत्येक विद्यार्थी को 3 या ( \(\frac{12}{4}\) ) आम मिलते हैं। चूँकि 12, 4 से भाज्य है, इसलिए भागफल एक पूर्ण संख्या है।
  • सेट का भाग : यदि 12 सेब 5 विद्यार्थियों में बराबर-बराबर बाँटे जाते हैं तो प्रत्येक विद्यार्थी को \(2\frac{2}{5}\) (मिश्रित भिन्न) सेब मिलते हैं।

सतत पूर्ण

  • पूर्ण का भाग : मान लीजिए सेब का 1 लीटर जूस 3 व्यक्तियों में बराबर-बराबर बाँटा जाता है। उनमें से प्रत्येक को \(\frac{1}{3}\) लीटर जूस मिलता है।
  • पूर्ण का भाग : मान लीजिए 1 तरबूज़ 9 व्यक्तियों में बराबर-बराबर बाँटा जाता है। उनमें से प्रत्येक को तरबूज़ का \(\frac{1}{9}\) भाग मिलता है।

हालाँकि क, ख, ग और घ सभी परिदृश्यों में बराबर बँटवारा होता है। परिदृश्य क और ख एक सेट के भाग की अवधारणा के साथ सम्बन्धित हैं, और ग व घ किसी सम्पूर्ण रचना के भाग की अवधारणा से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त, परिदृश्य ग भिन्न के माप अर्थ से भी सम्बन्धित है।

  1. अनुपात के रूप में भिन्न
    अनुपात एक मात्रात्मक सम्बन्ध है जो एक राशि के दूसरी राशि के सापेक्ष माप को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, यदि एक आयत की लम्बाई और चौड़ाई क्रमशः 12 सेमी और 3 सेमी है तो लम्बाई और चौड़ाई का अनुपात 4:1 है। इसे भिन्न में \(\frac{4}{1}\) के रूप में लिखा जा सकता है। इसका अर्थ है कि लम्बाई चौड़ाई की 4 गुना है। यह लम्बाई और चौड़ाई के बीच योगात्मक सम्बन्ध (लम्बाई, चौड़ाई से 9 सेमी अधिक है) के बजाय गुणात्मक / आनुपातिक सम्बन्ध दर्शाता है।

अंश-पूर्ण सम्बन्ध आसानी से अनुपात में परिवर्तित हो सकता है। मान लीजिए 30 गेंदें हैं। इनमें से 20 गेंदें नीली हैं और बाक़ी लाल। नीली गेंदें कुल गेंदों की संख्या का \(\frac{2}{3}\) हैं। हम इसे अनुपात के रूप में लिख सकते हैं। नीली गेंदों का कुल गेंदों की संख्या से अनुपात 2:3 है। यहाँ भिन्न को अनुपात के रूप में लिखा जा सकता है, इसलिए \(\frac{2}{3}\) = 2:3। यह तब काम करता है जब वे एक ही इकाई में हों। (अब आप सोचें कि नीली गेंदें लाल गेंदों के अनुपात में कितनी हैं?)

अवधारणात्मक रूप से, अनुपातों में शामिल दो राशियाँ अलग-अलग माप / इकाइयों में नहीं हो सकतीं। उदाहरण के लिए, अगर एक कार को 150 किमी की यात्रा करने के लिए 10 लीटर पेट्रोल लगता है। तय की गई दूरी और उपयोग किए गए पेट्रोल की मात्रा का अनुपात 15:1 सोचना सही नहीं है। इसका मतलब है कि 15 किमी की यात्रा करने के लिए उस कार को 1 लीटर पेट्रोल की आवश्यकता होती है। यदि हम इस अनुपात को एक भिन्न में बदलें तो यह \(\frac{15}{1}\) हो जाता है। यदि हम केवल भिन्न के अंश-पूर्ण मायने पर विचार करते हैं तो \(\frac{15}{1}\) अर्थहीन या बेमानी है। इसके बजाय हम भिन्न के विभाजन अर्थ के बारे में सोच सकते हैं। अगर हम यह जानना चाहें कि कार पेट्रोल के प्रत्येक लीटर (इकाई) में कितनी यात्रा कर सकती है तो यह 15 किमी होगा।

  1. संक्रियक के रूप में भिन्न
    संक्रियक के रूप में, भिन्न किसी संख्या को छोटी करती / घटाती या बड़ी करती है, सिकोड़ती या फैलाती है, और किसी संख्या में गुणा या भाग करती है [4]।

संक्रियक वे परिवर्तक (transformers) होते हैं जो

  • किसी रेखाखण्ड की लम्बाई बढ़ाते या घटाते हैं
  • किसी आकृति या आयतन का क्षेत्रफल बढ़ाते या घटाते हैं
  • वस्तुओं के सेट में वस्तुओं की संख्या बढ़ाते या घटाते हैं।

जब संक्रियक होता है :

  • एक उचित भिन्न, यह सिकोड़ती है, घटाती है, कम करती है
    एक दुकानदार ₹3 में 2 चॉकलेट बेचता है। ₹x ख़र्च करने पर एक ख़रीदार के पास कितनी चॉकलेट होंगी? इसका मतलब कि चॉकलेट की संख्या हमेशा ख़र्च की गई राशि से कम होगी, जैसा कि तालिका-1 में दिखाया गया है। ख़रीदी जा सकने वाली चॉकलेट की संख्या ख़र्च की गई राशि का \(\frac{2}{3}\) है। यहाँ चॉकलेट की संख्या ख़र्च किए गए रुपए से कम है।
इनपुट (रुपए)संक्रियकआउटपुट (चॉकलेट की संख्या)
9\(\frac{2}{3}\)6
12\(\frac{2}{3}\)8
15\(\frac{2}{3}\)10
18\(\frac{2}{3}\)12
तालिका-1
  • एक अनुचित या मिश्रित भिन्न, यह बड़ी करती या फैलाती है
    आइए, पिछले उदाहरण को थोड़ा बदल दें। यदि एक दुकानदार ₹2 में 3 चॉकलेट बेचता है, तो ₹x ख़र्च करने के बाद ख़रीदार के पास कितनी चॉकलेट होंगी? यहाँ ख़रीदी जा सकने वाली चॉकलेट की संख्या ख़र्च की गई राशि का \(\frac{3}{2}\) है। इसका अर्थ है कि चॉकलेट की संख्या हमेशा ख़र्च की गई राशि से अधिक होती है, जैसा कि तालिका-2 में दर्शाया गया है।
इनपुट (रुपए)संक्रियकआउटपुट (चॉकलेट की संख्या)
8\(\frac{3}{2}\)12
10\(\frac{3}{2}\)15
12\(\frac{3}{2}\)18
6\(\frac{3}{2}\)9
तालिका-2

हमने अभी देखा कि भिन्न का अंश-पूर्ण वाला अर्थ उसके विभिन्न परिदृश्यों की स्पष्ट तस्वीर देने के लिए अपर्याप्त है। \(\frac{2}{5}\) मीटर कपड़ा, दुकान की \(\frac{2}{3}\) किताबें अँग्रेज़ी में हैं, \(\frac{9}{7}\) सेब आदि के क्रमशः माप, अनुपात और बराबर हिस्से जैसे अन्य अर्थ हैं। भिन्न के केवल अंश-पूर्ण वाले मायने से परिचित होने से, ऊपर दी गई जैसी स्थितियों के बारे में विद्यार्थियों की समझ कमज़ोर और अधूरी रह जाती है। जब विद्यार्थी भिन्न के विभिन्न अर्थों और व्याख्याओं से परिचित होते हैं, वे विभिन्न स्थितियों और समस्याओं को समझते हैं, और भिन्न की उनकी समझ समृद्ध होती है।

हमने भिन्न के विभिन्न अर्थों और व्याख्याओं पर चर्चा की। शोधकर्ता इस बात का समर्थन करते हैं कि भिन्न के अंश-पूर्ण और किसी सेट के अंश वाले अर्थ के रूप में भिन्न का परिचय प्राथमिक शाला (कक्षा-3 और 4) के आरम्भ में किया जा सकता है। भिन्न के अन्य अर्थों का परिचय माध्यमिक कक्षाओं में कराया जाना उचित होगा। माध्यमिक स्तर पर उनकी गहराई से समझ बढ़ाई जा सकती है। इसका यह मतलब नहीं है कि प्राथमिक कक्षाओं में उनका हल्का परिचय भी नहीं दिया जाना चाहिए। यह महत्त्वपूर्ण है कि शिक्षक भिन्न के विभिन्न अर्थों और व्याख्याओं से अवगत हों, उन्हें समझें। इससे वे अपने शिक्षण की योजना बनाते समय, उदाहरण चुनते वक़्त, रचनात्मक आकलन और उपचारात्मक शिक्षण करते समय, इस व्यापक समझ को ध्यान में रख सकेंगे। लेकिन इसका ध्यान रखा जाना चाहिए कि किसी भी हालत में विद्यार्थियों पर परिभाषाओं का बोझ न डाला जाए। उदाहरण के लिए, नीचे दिया गया कार्य केवल शिक्षकों के लिए है। यह प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थियों पर बोझ डालने के लिए नहीं है।

ऊपर दी गई चर्चा के आधार पर, यहाँ शिक्षकों के लिए एक कार्य दिया गया है (तालिका-3)। प्रत्येक इबारती सवाल देखें, उसके अर्थों और व्याख्याओं का विश्लेषण करें, और नीचे दी गई तालिका से सम्बन्धित ख़ाने में सही का निशान लगाएँ। याद रखें कि ये अर्थ और व्याख्याएँ एक-दूसरे से सम्बन्धित भी हो सकती हैं।

स.क्र.इबारती सवाल / सन्दर्भएक पूरे का भाग / सेटमापबराबर बाँटनासंक्रियकअनुपात
पूर्ण सतत के रूप मेंपूर्ण वस्तुओं के समूह रूप में
1वामशी और ध्रुव के बग़ीचे बिल्कुल एक जैसे आकार के हैं। वामशी ने अपने बग़ीचे की \(\frac{1}{6}\) जगह टमाटर उगाने में इस्तेमाल की और ध्रुव ने अपने बग़ीचे का \(\frac{1}{7}\) भाग आलू बोने में लगा दिया। किसके बग़ीचे में ज़्यादा जगह बची है? आपको ऐसा क्यों लगता है?
2श्रीराम एक पुस्तकालय चलाते हैं जिसमें 420 किताबें हैं। \(\frac{1}{3}\) किताबें विज्ञान की हैं और \(\frac{1}{4}\) गणित की। गणित और विज्ञान की कितनी-कितनी किताबें हैं? किताबों का कितना भाग अन्य श्रेणियों में है?
3एक कद्दू का वज़न \(2\frac{3}{4}\) किलोग्राम और एक तरबूज़ का वज़न 2340 ग्राम है। क्‍या ज़्यादा भारी है — कद्दू या तरबूज़?
4रबीना ने एक विशेष पेय बनाने के लिए 3 कप जूस को 4 कप पानी में मिलाया। पेय का कितना भाग जूस है?
5मुथुलक्ष्मी अपने मासिक वेतन का \(\frac{2}{5}\) हिस्सा घरेलू ख़र्चों पर व्यय करती हैं। उन्होंने कितना हिस्सा बचाया?
6तीन बराबर आकार के पराठे 11 विद्यार्थियों में बराबर-बराबर बाँटे गए। उनमें से प्रत्येक को पराठे का कितना हिस्सा मिला?
तालिका-3

  1. Behr, M. J., Harel, G., Post, T. R., & Lesh, R. (1992). Rational number, ratio, and proportion. In D. A. Grouws (Ed.), Handbook of research on mathematics teaching and learning: A project of the National Council of Teachers of Mathematics (pp. 296–333). Macmillan.
  2. Chapin,S., & Johnson, A. (2006). Fractions. In Math matters: Understanding the math you teach (Grades K-6) (pp.99-112). Math Solutions Publications.
  3. Kieren, T. E. (1988). Personal knowledge of rational numbers: Its intuitive and formal development. In J. A. Hiebert & M. J. Behr (Eds.), Number concepts and operations in the middle grades (pp. 162–181). Lawrence Erlbaum.
  4. Lamon, S. J. (2020). Teaching fractions and ratios for understanding: Essential content knowledge and instructional strategies for teachers. Routledge.

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