हम \(84 × 67\) जैसी दो अंकों वाली दो संख्याओं का गुणा कैसे करते हैं? पहले चरण में हम \(84 × 7\) को हल करते हैं। इसमें ‘हासिल’ लगाया जाता है या पुनर्समूहीकरण किया जाता है, अर्थात \(84 × 7 = (4 + 80) × 7 = 4 × 7 + 80 × 7\). तो,

multiplication-fig1
चित्र-1
  • हम हल करने की शुरुआत \(4 × 7 = 28\) से करते हैं
  • और 28 के \(8\) को नीचे लिख देते हैं
  • हमें यह भी याद रखना होगा कि हासिल आए \(2\) को अगले गुणनफल में जोड़ना है
  • अब, \(80 × 7\) या यूँ कहें कि \(8 × 7 = 56\) को ज्ञात करें।
  • और इस गुणनफल में हासिल \(2\) जोड़ दें, अर्थात \(56 + 2 = 58\)
  • अब 84 × 7 का गुणा करें यानी \(84 × 7 = 588\)

और यह सिर्फ़ चरण-1 है (चित्र-1)!

आपने देखा कि यह कितना जटिल है! जब हम ‘जोड़’ करते हैं तब हम केवल एक ही संक्रिया लागू कर रहे होते हैं और इसमें सभी अंकों को जोड़ना होता है। लेकिन यहाँ दो अंकों वाली संख्या का गुणा करने के लिए पहले हमें \(8\) और \(7\) का गुणा करना पड़ता है फिर इसके गुणनफल में हासिल का \(2\) जोड़ना पड़ता है। दूसरे शब्दों में कहें तो, इस चरण में दो संक्रियाएँ होती हैं — गुणा और जोड़। इसीलिए, इन दोनों संक्रियाओं का क्रम मायने रखता है क्योंकि \((7 × 8) + 2 ≠ 7 × (8 + 2)\)। लेकिन यह स्वाभाविक है कि कोई भी सीखने वाला इससे भ्रमित हो सकता है कि पहले (7 से) गुणा करें और फिर (2) जोड़ें या इसका उल्टा करें (यानी पहले 2 जोड़ें और फिर \(7\) से गुणा करें)। इसके अलावा जोड़ के सवाल हल करने के विपरीत गुणा में आमतौर पर हल करने की प्रक्रिया में ‘हासिल’ को कहीं लिखा नहीं जाता है। ऐसे में काफ़ी चीज़ें हल करने वाले को ध्यान में रखनी पड़ती हैं।

यही चरण \(84 × 60\) या \(84 × 6 = 504\) के लिए दोहराए जाते हैं। इसमें भी ‘हासिल’ देना पड़ता है। चूँकि ऐसे कई हासिल के अंक लिखने से भ्रम हो सकता है, इसलिए आमतौर पर कोई भी अंक लिखा नहीं जाता है। लेकिन शुरुआत में ऐसा करना बमुश्किल ही सीखने वालों के लिए मददगार होता है।

fig2
चित्र-2

इसके अलावा, इकाई का स्थान अकसर ख़ाली छोड़ा जाता है या वहाँ ‘x’ लिखा जाता है (देखें चित्र-2)। फिर हम \(588\) और \(504x\) जोड़ देते हैं। किसी को भी 8 + x जोड़ना नहीं सिखाया जाता है लेकिन यहाँ इन्हें जोड़ने की अपेक्षा की जाती है।

यह आश्चर्य की बात है कि यह अभी भी कक्षाओं में ज़ारी है जबकि पाठ्यपुस्तकों में बदलाव हुए कम-से-कम \(20-25\) साल गुज़र चुके हैं। चूँकि हम \(10\) के गुणज, जो इस उदाहरण में \(60\) है, से गुणा करते हैं तो हम \(84 × 60\) के आंशिक गुणनफल को \(5040\) क्यों नहीं लिख सकते हैं? हम उम्मीद करते हैं कि शिक्षक इस जड़ता को तोड़कर ‘x’ का प्रयोग करना बन्द कर देंगे और अपने शिक्षाशास्त्र को अधिक सार्थक बनाएँगे।

ऐसी समस्याओं से बचने के लिए अन्य क्या तरीक़े हैं? सौभाग्य से, एक तरीक़ा है। और यह तरीक़ा किन्हीं भी दो पूर्ण संख्याओं के गुणा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है चाहे वे संख्याएँ कितनी भी बड़ी संख्या क्यों न हों।

ऊपर बताई गई मानक विधि केवल एक ही बार वितरण गुण का उपयोग करती है अर्थात, \(84 × 67 = 84 × (7 + 60) = 84 × 7 + 84 × 60\)
जिसके परिणामस्वरुप दो आंशिक गुणनफल \(588\) और \(5040\) प्राप्त होते हैं जो अन्त में जोड़ दिए जाते हैं।

हालाँकि, हम वितरण गुण का दो बार उपयोग कर सकते हैं, यानी दोनों संख्याओं के लिए, और चार आंशिक गुणनफल प्राप्त कर सकते हैं।
\(84 \times 67 = (80 + 4) \times (60 + 7) = (80 \times 60) + (4 \times 60) + (80 \times 7) + (4 \times 7)\)

x607
804800560
424028
चित्र-3

इसे द्वि-आयामी तालिका में अच्छे-से सारणीबद्ध किया जा सकता है (चित्र-3)। और फिर प्राप्त आंशिक गुणनफल को जोड़ा जा सकता है। ध्यान दें कि यह तरीक़ा पहले वाली विधि से पूरी तरह से भिन्न नहीं है। ये कॉलम-वार योग वही आंशिक गुणनफल हैं जो हमें पहले मिले थे।

x800205
30024000060001500
70560001400350
9720018045
चित्र-4

तीन-तीन अंकों वाली संख्याओं, मसलन \(379 × 825\), के गुणनफल के लिए, तालिका चित्र-4 की तरह होगी। हालाँकि, जब और भी अधिक अंकों वाली संख्याओं के गुणा की तरफ़ बढ़ेंगे, इतने सारे शून्य लिखना बोझिल हो सकता है। लेकिन इसका भी एक हल है।

हम एक लघु जाली बना सकते हैं, जैसा कि \(84 × 67\) के लिए चित्र-5 में दर्शाया गया है। लेकिन आंशिक गुणनफल के शून्यों (जैसे कि चित्र-3 की दीर्घ तालिका में दिखाया गया है) को ध्यान रखने के लिए प्रत्येक खाने को चित्र-6 की तरह विकर्ण से बाँटने में मदद मिलती है।

multiplication-fig5
चित्र-5
multiplication-fig6
चित्र-6

ध्यान दें कि प्रत्येक विकर्ण के अंक (निचले बाएँ से ऊपरी दाएँ तक) किस तरह आंशिक गुणनफल के योग (दाएँ से बाएँ) के अनुरूप हैं, जैसा कि चित्र-7 में दिखाया गया है। इसे हम दीर्घ जाली बनाने के लिए तीर कार्ड का इस्तेमाल कर और लघु जाली में इसके रंगों के अनुरूप रंगों से अंक लिखकर समझा सकते हैं (चित्र-8)।

Addition
चित्र-7

इस तरह हम विकर्णों से भी योग कर सकते हैं (चित्र-9)।
यदि हम इस विधि को और सटीक या शुद्ध करें तो यह कुछ इस तरह होगी,

  • जिन संख्याओं का गुणा करना है उनकी द्वि-आयामी जाली बनाएँ
  • प्रत्येक खाने में विकर्ण बना लें
  • अंक-दर-अंक को गुणा करके प्रत्येक खाने को भरें
  • निचले दाएँ खाने से शुरू करके प्रत्येक विकर्ण पर स्थित अंकों के समूह जोड़ें
multiplication-fig8
चित्र-8
multiplication-fig-9
चित्र-9

चलिए अब, 379 x 825 को इसी ताली रूप में प्रदर्शित करते हैं।

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चित्र-10

इकाई, दहाई, सैकड़ा, हज़ार। या बस इकाई के स्थान से जोड़ना शुरू कर दें। ध्यान दें कि जब हम इस विधि से गुणा करते हैं, तो पहले केवल अंक-दर-अंक गुणा होता है, जिसमें कोई जोड़ नहीं होता और इसलिए गुणा के बीच में कोई हासिल या पुनर्समूहन नहीं होता है। और एक बार जब सारा गुणा पूरा हो जाता है तब हम जोड़ते हैं। इसीलिए यह पिछली प्रक्रिया की तरह लिखित प्रक्रिया ही है। लेकिन बार-बार गुणा फिर जोड़, फिर गुणा, फिर जोड़ पर आए-जाए बग़ैर। और 0 के स्थान पर (स्थान भरने के लिए) कोई ‘×’ नहीं होता।

हालाँकि, शैक्षिक दृष्टि से देखें तो शुरुआत बड़ी जाली से करनी चाहिए और उसके बाद तीर कार्ड के माध्यम से छोटी जाली पर आना चाहिए। इस पत्रिका के मार्च 2024 के अंक में हमने इस बात की समीक्षा की थी कि कुछ 2D बेस-10 ब्लॉक यानी फ्लैट्स-लॉन्ग्स-यूनिट्स (FLU) दो अंकों से दो अंकों वाली संख्या के गुणा के लिए काफ़ी मददगार होती हैं। लेकिन बड़ी संख्याओं के लिए रेखाएँ खींचने और उनको प्रतिच्छेद करने वाले बिन्दुओं की संख्या गिनने से मदद मिलती है। दहाइयों और इकाइयों में अन्तर करने के लिए रेखाओं को तयशुदा रंग से रंगना चाहिए, वग़ैरह-वग़ैरह। द्वि-आयामी तालिका के विकर्णों को प्रत्येक प्रतिच्छेदी बिन्दु की संख्याओं को गिनकर भरा जा सकता है। उदाहरण के लिए इसे हम \(379 × 825\) से समझते हैं (चित्र-11)। (गुणन के लिए प्रतिच्छेदी रेखा खींचने के तरीक़े को लेटिस विधि (lattice method) के नाम से भी जाना जाता है।)

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चित्र-11

वास्तविक जीवन में ख़ुद हाथ से गुणा करने की ज़रूरत निश्चित रूप से कम हो गई है और इसका श्रेय तकनीकी को जाता है। लेकिन स्कूल में और बोर्ड परीक्षाओं में, विद्यार्थियों को बड़े अंकों की संख्याओं का गुणा हाथ से ही करना पड़ता है। प्रतिशत और क्षेत्रमिति के विभिन्न सवालों में ऐसे गुणा की आवश्यकता पड़ सकती है। हमें उम्मीद है कि यह विधि मानक विधि की तुलना में गुणा करने में आसानी लाएगी।

  1. Initiating multiplication (ppt): https://bit.ly/3L8CGgs
  2. Lattice multiplication (ppt): https://bit.ly/3W6NjGY
  3. Flats-Longs-Units (review): https://bit.ly/3RM3W87

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