गणितीय पैटर्नों की खोज : शॉर्टकट्स के पीछे के तर्क

अनुवाद : कविता तिवारी | पुनरीक्षण : प्रतिका गुप्ता

निखिल की संख्याओं और उनमें छुपे पैटर्नों को खोजने में विशेष रुचि है। वे पलक्कड़ के एक ग्रामीण प्राथमिक स्कूल में अंशकालिक शिक्षक हैं। वे उन विद्यार्थियों की मदद करते हैं जिन्हें बुनियादी संक्रियाएँ करने में कठिनाई होती है। इसी कोशिश में वे ऐसी ‘ट्रिक’ और ‘शॉर्टकट्स’ खोजते हैं जो बच्चों के लिए गणना को आसान बना सकें। जयश्री एक शिक्षक व शिक्षक-प्रशिक्षक हैं। निखिल से उनकी मुलाक़ात शिक्षकों की एक कार्यशाला में हुई। उन्होंने निखिल के सुझाए शॉर्टकट्स के पीछे के तर्कों को समझने और यह जानने की कोशिश की कि वह कब और कैसे उपयोगी हो सकते हैं। इस लेख में हम निखिल द्वारा सुझाए गए कुछ शॉर्टकट्स और उनके पीछे के गणितीय तर्कों पर चर्चा करेंगे। साथ ही यह भी देखेंगे कि इन्हें कक्षा में किस तरह प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है।

घटाने के सवाल को जोड़ के सवाल में बदलना

प्राथमिक कक्षा के बच्चों के लिए घटाने के सवाल अकसर चुनौतीपूर्ण होते हैं, ख़ासकर तब जब ‘उधार लेने’ या पुनर्समूहन (regrouping) की ज़रूरत होती है। इसकी तुलना में जोड़ के सवाल आसान होते हैं। तो कैसा रहेगा यदि हम घटाने के सवाल को जोड़ के सवाल में बदल दें?

चित्र-1

मान लीजिए हमें 101 – 87 का हल निकालना है। चलिए, इसे जोड़ के सवाल में बदलते हैं (चित्र- 1)। सबसे पहले हम छोटी संख्या (यहाँ 87) को लेते हैं। इसके इकाई के अंक (यहाँ 7) को 10 में से घटाते हैं और बाक़ी अंकों को 9 में से। उत्तर आता है 13। इस 13 को 101 में जोड़ते हैं, तो मिलता है 114। अब इसमें से सैकड़े के स्थान का अंक (1) हटा देते हैं तो उत्तर आता है 14।

चलिए, इसे चरण-दर-चरण समझते हैं।

चरण-1 : घटायी जाने वाली संख्या (आगे इसे छोटी संख्या कहा गया है) के इकाई के अंक को 10 में से घटाएँ और बाक़ी अंकों को 9 में से।

चरण-2 : चरण-1 में मिली संख्या को उसी संख्या में जोड़ दें जिसमें से घटाना है (इसे आगे बड़ी संख्या कहा गया है)।

चरण-3 : चरण-2 से मिले उत्तर में दाईं ओर से उतने अंक गिनें जितने कि छोटी संख्या में थे और उसके ठीक बाईं ओर के अंक में से 1 घटा दें।

इससे आपको घटाने के सवाल का जवाब मिल जाएगा। चलिए, कुछ उदाहरण लेकर देखते हैं।

उदाहरण 1 :

उदाहरण 1 में, हमें 312 – 123 का हल निकालना है। तो पहले हम यह पता लगाते हैं कि 312 में कौन-सी संख्या जोड़ने पर उत्तर मिलेगा। इसके लिए हम 123 के इकाई के अंक को 10 में से घटाते हैं और बाक़ी अंकों को 9 में से। इसका उत्तर आता है 877। अब 877 को 312 में जोड़ते हैं, तो मिलता है 1189।

चूँकि 123 तीन अंकों की संख्या है, इसलिए हम 1189 में दाईं ओर से चौथे अंक (चित्र में हाइलाइट की गई हज़ार के स्थान की संख्या) में से 1 घटा देते हैं। उत्तर मिला 189।

उदाहरण 2 :

उदाहरण 2 में, 89 दो अंकों की संख्या है। इसलिए चरण-3 में हम चरण-2 से मिली संख्या के दाईं ओर से तीसरे अंक (सैकड़े के स्थान की संख्या) में से 1 घटाते हैं। यानी कि इस प्रक्रिया के ज़रिए यदि एक अंक की संख्या घटाना हो, तो हम दाईं ओर से दूसरे अंक (यानी दहाई के स्थान) में से 1 घटाएँगे।

जैसा कि हमने देखा चरण-1 के अनुसार इकाई के अंक को 10 में से और बाक़ी अंकों को 9 में से घटाना होता है। पर यदि इकाई का अंक 0 हो तो क्या करेंगे? ऐसी स्थिति में इकाई का अंक 10 हो जाता है। उदाहरण 3 में दर्शाया गया है कि इस स्थिति में हमें क्या करना है।

उदाहरण 3 :

उदाहरण 3 में, सबसे पहले हम 0 को इकाई के स्थान पर ही रखते हैं और उससे ठीक पहले वाले अंक में 1 जोड़ देते हैं। अब 9 में से 4 घटाते हैं जिससे हमें 5 मिलता है। यह जोड़ी जाने वाली संख्या का दहाई का अंक होगा। अब इकाई के अंक से मिले अतिरिक्त 1 को इस 5 में जोड़ देते हैं, जिससे यह 6 बन जाता है। इस तरह पूरी संख्या बनती है 60। बाक़ी के सभी चरण पहले जैसे ही रहते हैं।

यह विधि क्यों काम करती है? इस एल्गोरिद्म में हम असल में क्या कर रहे हैं? चरण-1 पर ग़ौर कीजिए। जब हम इकाई के अंक को 10 से और बाक़ी के अंकों को 9 से घटाते हैं तो वास्तव में हम संख्या को 10 की किसी घात में से घटा रहे होते हैं। है ना?

87 को घटाने के लिए हमने 13 जोड़ा, यानी 100 – 87
123 को घटाने के लिए हमने 877 जोड़ा, यानी 1000 – 123
89 को घटाने के लिए हमने 11 जोड़ा, यानी 100 – 89
40 को घटाने के लिए हमने 60 जोड़ा, यानी 100 – 40

तो दरअसल किसी संख्या N को घटाने के बजाय उपरोक्त प्रक्रिया में हम 100 – N, या 1000 – N, या 10nN जोड़ते हैं। यहाँ n छोटी संख्या N के अंकों की संख्या है। (उदाहरण के लिए, यदि N दो अंकों की संख्या है, तो n = 2) लेकिन चूँकि हमने 10n को जोड़ा था, इसलिए अब सही उत्तर निकालने के लिए हमें उस 10ⁿ को वापस घटाना होता है। यही काम तीसरा चरण करता है, जिसमें हम दाईं ओर से उपयुक्त स्थान पर मौजूद अंक में से 1 घटा देते हैं।

संक्षेप में कहें तो,

पहले चरण में हम 10nN निकालते हैं। दूसरे चरण में इसे M में जोड़ते हैं और तीसरे चरण में 10n को घटा देते हैं।

यह शॉर्टकट दशमलव संख्या पद्धति और इस पद्धति के भीतर मौजूद संख्यात्मक सम्बन्धों पर आधारित है। प्राथमिक कक्षाओं में हम अकसर नम्बर बॉन्ड्स पर ज़ोर देते हैं, जैसे कि 1 और 9, 2 और 8, 3 और 7, 6 और 4 तथा 5 और 5। ये नम्बर बॉन्ड्स संख्याओं की उन जोड़ियों को दर्शाते हैं जिनका योगफल 10 होता है। नम्बर बॉन्ड्स की इस अवधारणा को हम 10 की अन्य घातों (जैसे 100, 1000 आदि) तक भी बढ़ा सकते हैं। यह शॉर्टकट संख्याओं के उन जोड़ों पर आधारित है जिनका योगफल 100, 1000 या 10 की किसी अन्य घात के बराबर होता है।

यह शॉर्टकट तब भी काम आ सकता है जब हमें किसी संख्या को 9, 99, 999 आदि से गुणा करना हो। ये संख्याएँ क्रमशः 10, 100, 1000 आदि से एक कम होती हैं। इसलिए इनसे गुणा करना आसान हो जाता है। इसके लिए संख्या को पहले 10, 100 या 1000 से गुणा करते हैं और फिर गुणक (multiplicand) को प्राप्त गुणनफल में से घटा देते हैं। इसे करने के लिए हम घटाने का शॉर्टकट भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

उदाहरण 4 :

अब इसे निकालने के लिए हम ऊपर बताए शॉर्टकट का इस्तेमाल कर सकते हैं।

39200 – 392 का हल पता करने के लिए हम संख्याओं के अन्य सम्बन्धों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं, जैसे कि

मुख्य बात यह है कि संख्याओं के आपसी सम्बन्धों को रचनात्मक ढंग से इस्तेमाल करके गणना करने के आसान तरीक़े खोजे जाएँ। जब इन तरीक़ों को केवल उत्तर निकालने के लिए ‘कैसे करें’ वाले चरण-दर-चरण निर्देशों की शृंखला के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो ये उन संख्यात्मक सम्बन्धों को छुपा देते हैं जो उस शॉर्टकट का आधार होते हैं। यही बात गणना की कई अन्य तकनीकों पर भी लागू होती है, जिन्हें सामान्यतः ‘वैदिक गणित’ के अन्तर्गत रखा जाता है। यदि इन्हें केवल प्रक्रियात्मक नियमों की शृंखला के रूप में बताया जाता है तो यह ख़तरा रहता है कि बच्चों को गणित महज़ कुछ चतुराई भरी तरक़ीबों का संग्रह लगने लगे।

इससे उलट, यदि हम गणना की शुरुआत ऐसे तरीक़ों से करें जो संख्याओं के आपसी सम्बन्धों पर आधारित हों और बच्चों को प्रेरित करें कि वे स्वयं अपने ‘कैसे करें’ वाले चरण बनाएँ, तो उनका ध्यान नियम रटने से हटकर उनके पीछे छिपी संरचना को समझने पर केन्द्रित हो जाता है। थोड़ी-सी पड़ताल और चिन्तन करने पर उन बातों का राज़ खुल जाता है, जो पहले जादू जैसी लगती थीं। और जो तरीक़ा पहले ट्रिक जैसा लगता था, वही समस्या को हल करने का सबसे स्वाभाविक तरीक़ा लगने लगता है।

संख्याओं पर आधारित ऐसी रणनीतियों के साथ काम करना बच्चों में संख्याओं की समझ विकसित करने का एक प्रभावी तरीक़ा है। उदाहरण के लिए, नीचे दिए गए तरीक़े 10 की घातों (powers of 10) से जुड़ी संक्रियाओं के गुणधर्मों पर आधारित हैं। बच्चों से कहें कि वे इन्हें चरण-दर-चरण प्रक्रिया के रूप में लिखें।

logic4

किसी शॉर्टकट के काम करने का कारण समझना भी संख्याओं के इन सम्बन्धों को खोजने का एक अच्छा अभ्यास हो सकता है। अब हम एक और शॉर्टकट साझा कर रहे हैं। इसके पीछे का तर्क आप स्वयं खोजें।

98 से गुणा करना : क्या आप इसके पीछे का तर्क खोज सकते हैं?

यदि गुणक 50 से कम (छोटा) हो, तो

चरण-1 : गुणक में से 1 घटाएँ और उत्तर को लिख लें।

चरण-2 : गुणक को 50 में से घटाकर उसे 2 से गुणा करें। फिर गुणनफल की संख्या को चरण 1 में लिखी संख्या के बाद लिख दें।

उदाहरण 5 :

अगर संख्या 50 से ज़्यादा हो :

चरण-1क : गुणक में से 2 घटाएँ और उत्तर को लिख लें।

चरण-2क : गुणक को 100 में से घटाकर उसे 2 से गुणा करें। फिर गुणनफल की संख्या को चरण-1क की संख्या के बाद लिख लें

उदाहरण 6 :

पाठकों के सोच-विचार के लिए कुछ प्रश्न : यह तरीक़ा क्यों काम करता है? तीन अंकों की संख्याओं पर आप इसे किस तरह लागू करेंगे? यह शॉर्टकट 102 से गुणा करने से कैसे सम्बन्धित है? 998 से गुणा करने के लिए इसी तरह का शॉर्टकट कैसे बना सकते हैं? इस तरह का शॉर्टकट किस प्रकार की संख्याओं के लिए उपयोगी होगा?

समापन टिप्पणी

बतौर शिक्षक हममें से कई लोगों के सामने ऐसे मौक़े आए होंगे जब बच्चों ने गणना करने के अपने अनोखे शॉर्टकट या वैकल्पिक तरीक़े खोज निकाले हों (जैसे निखिल की शिक्षक श्रीमती रोसली ने भी अनुभव किया होगा)। ऐसे मौक़ों को दुनिया की ‘सबसे सामान्य बातें’ मानकर नज़रअन्दाज़ करने के बजाय छोटी-सी खोज के रूप में इनकी सराहना करनी चाहिए (जैसा कि निखिल भी मानते हैं)। साथ ही यह परखना भी ज़रूरी है कि ये तरीक़े हर बार काम करेंगे या नहीं, और यदि हाँ, तो कब और क्यों।

आभार : निखिल ट्रेनर और पलक्कड़ ब्लॉक के रिसोर्स कोऑर्डिनेटर श्री प्रवीण आर. के सहयोग के लिए आभारी हैं। वे अपनी गणित शिक्षक श्रीमती रोसली के भी विशेष आभारी हैं, जिनके लगातार प्रोत्साहन ने उनमें गणित के प्रति गहन रुचि जगाई।

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