कितना लम्बा, कितना ऊँचा, कितना चौड़ा?
जब मैं अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन के साथ अपनी फेलोशिप कर रहा था, उस अवधि के दौरान मुझे अपनी ‘स्कूल अंडरस्टैंडिंग प्रोसेस’ के हिस्से के रूप में नियमित रूप से स्कूलों का भ्रमण करना पड़ता था। ऐसे ही एक भ्रमण पर, कक्षा 5 के विद्यार्थियों को गणित पढ़ाने वाले एक शिक्षक ने अनुरोध किया कि मैं विद्यार्थियों के साथ लम्बाई की माप पर चर्चा करूँ। उनका आकलन था कि विद्यार्थियों ने लम्बाई मापने के लिए उपयोग की जाने वाली इकाइयों को, उनके अन्तर-रूपान्तरण (inter-conversion) की प्रक्रिया के साथ, बस रट लिया है। शिक्षक को लगा कि विद्यार्थियों में इस विषय की वैचारिक समझ की कमी है, क्योंकि वे नहीं जानते हैं कि इन इकाइयों की आवश्यकता क्यों है, कब कौन-सी इकाई का उपयोग करना है, मीटर टेप का उपयोग कैसे करना है आदि। मैंने और फ़ाउण्डेशन के मेरे सहयोगी ने शिक्षक के साथ मिलकर एक योजना बनाई। यह योजना कुछ गतिविधियों के आसपास बुनी गई थी जिन्हें एक क्रम में डिज़ाइन किया गया था ताकि वे विद्यार्थियों को सम्बन्धित अवधारणाओं की समझ बनाने में मदद करें।
इस योजना के तहत पहले दिन हम कुछ ऐसी गतिविधियाँ करते जो विद्यार्थियों को लम्बाई की कल्पना करने (conceptualize) और अनुमान लगाने (estimate) में मदद करतीं। फिर दूसरे दिन हम लम्बाई की इकाइयों पर आगे बढ़ते, और उन्हें विभिन्न वस्तुओं की लम्बाई मापने के कुछ व्यावहारिक (hands-on) मौके देते।
लम्बाई की अवधारणा को समझना
लम्बाई की समझ बनाने के लिए हमने निम्नलिखित गतिविधियाँ कीं :
पहली गतिविधि में, हमने कक्षा को जोड़ियों में विभाजित किया। प्रत्येक जोड़ी को यह पता लगाना था कि उन दोनों में से लम्बा कौन है। उन्होंने एक-दूसरे के बगल में खड़े होकर अपनी ऊँचाइयों की तुलना की। बच्चों ने बहुत सक्रिय रूप से भाग लिया और इसे आसानी से पता लगा लिया।

दूसरी गतिविधि में, उन्हें कक्षा के दरवाज़े की ऊँचाई की तुलना, स्कूल की एक मंज़िला इमारत के मुख्य द्वार के शटर की ऊँचाई से करने के लिए कहा गया। इस मामले में, वे वस्तुओं को अगल-बगल रखकर उनकी ऊँचाइयों की तुलना नहीं कर सके। कुछ बच्चों ने तो बस अन्दाज़ा लगाया कि शटर, दरवाज़े से लम्बा था। लेकिन कुछ विद्यार्थियों ने एक झाड़ू पकड़ी और अपनी बाँह ऊपर की ओर तब तक फैलाई जब तक कि झाड़ू का ऊपरी सिरा शटर के ऊपरी सिरे तक नहीं पहुँच गया। फिर वे झाड़ू को उसी स्थिति में पकड़े हुए कक्षा के दरवाज़े तक गए। उन्होंने पाया कि झाड़ू का ऊपरी सिरा दरवाज़े के ऊपरी किनारे से नीचा था। इसलिए, उन्होंने दावा किया कि दरवाज़ा शटर से थोड़ा ऊँचा था।
तीसरी गतिविधि मोटाई (thickness) के बारे में थी – जो एक सम्बन्धित अवधारणा है। उन्हें फिर से जोड़ियों में बाँटा गया। प्रत्येक जोड़ी को एक धागा दिया गया और उनसे एक-दूसरे के सिर की परिधि (circumference) की तुलना करने के लिए कहा गया, इस तर्क का उपयोग करते हुए कि परिधि जितनी बड़ी होगी, मोटाई (सिर का व्यास) उतनी ही अधिक होगी। इस मामले में, जिसका धागा लम्बा था, उसकी परिधि बड़ी थी।
इसके बाद, उन्होंने दरवाज़े और शटर पर फिर से ध्यान देने का फैसला किया। धागे का उपयोग करके दोनों की ऊँचाई मापी गई और तब पता चला कि दोनों की ऊँचाई समान थी! इसके बाद लम्बाई और उसके गुणों पर एक चर्चा हुई।
हमने चर्चा की कि लम्बाई वस्तु की वह विशेषता है जिसमें हम परिभाषित करते हैं कि वह कितनी लम्बी (या ऊँची, या चौड़ी) है। यहाँ, हम मानते हैं कि माप एक सातत्य (continuum) में है, यानी वस्तु खण्डित हिस्सों में नहीं है। हमने लम्बाई और दूरी के बीच के अन्तर पर भी चर्चा की। उदाहरण के लिए, हम आमतौर पर कहते हैं कि स्थान अ और ब के बीच की दूरी इतनी-इतनी है। हम कभी नहीं कहते कि स्थान अ और ब के बीच की लम्बाई इतनी-इतनी है। हालाँकि, हम उस सड़क की लम्बाई के बारे में बात कर सकते हैं जो स्थान अ और ब को जोड़ती है।
फिर हमने लम्बाई मापने के बुनियादी गुणों पर चर्चा की जो इस प्रकार हैं :
- किसी वस्तु की लम्बाई वस्तु के अभिविन्यास (orientation) पर निर्भर नहीं करती है।
- लम्बाई कभी नहीं बदलती, भले ही आप किसी भी पैमाने/इकाई का उपयोग करें।
- यह माप की इकाई से स्वतंत्र है, यानी आप जिस भी इकाई में मापते हैं, लम्बाई वही रहती है। हालाँकि, इसका प्रतिनिधित्व विभिन्न इकाइयों में भिन्न हो सकता है।
फिर होमवर्क के एक हिस्से के रूप में, मैंने विद्यार्थियों से अपने घर में सबसे लम्बी वस्तु का पता लगाने के लिए कहा। अगले दिन, विद्यार्थियों ने निम्नलिखित उत्तर दिए :
मोनिका : घर की दीवार
रेणुका : छत का लकड़ी का शहतीर (Wooden Beam)
नीरज : बिजली का तार
घनश्याम : बाँस की छड़ी
लेमन : कपड़े सुखाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली रस्सी
इकाइयाँ : आवश्यकता और रूपान्तरण
दूसरे दिन हम इकाइयों पर आगे बढ़े। पिछले दिन की चर्चा के संक्षिप्त पुनरीक्षण के बाद, हमने कुछ प्राचीन माप तकनीकों पर चर्चा की जिनका उपयोग हम अभी भी कभी-कभी करते हैं। हमने अपने शरीर के अंगों का उपयोग करके लम्बाई मापने के बारे में बात की और कुछ विद्यार्थियों ने बताया कि वे क्या उपयोग करते हैं, जैसे : हाथ को ‘हाथ’ के रूप में, उँगलियों को ‘अंगुल’ के रूप में, अँगूठे से छोटी उँगली तक पूरे फैलाव को ‘बित्ता’ के रूप में। फिर मैंने उनसे इन तीनों इकाइयों में से प्रत्येक से कुछ वस्तुओं को मापने और दिए गए प्रारूप में डेटा रिकॉर्ड करने के लिए कहा।


| वस्तु | बालिश्त (बित्ता) | ऊँगली | हाथ |
|---|---|---|---|
| टेबल | |||
| खिड़की |
उन्होंने लगन से प्रत्येक वस्तु को मापा, और इसमें काफ़ी समय लगा। फिर उन्होंने अपनी नोटबुक में रीडिंग रिकॉर्ड की। फिर मैंने उनसे रीडिंग की एक-दूसरे से तुलना करने के लिए कहा। यह देखा गया कि कोई भी दो रीडिंग समान नहीं थीं। इसलिए, शरीर के अंगों को माप की इकाई के रूप में उपयोग करना अच्छा नहीं है क्योंकि यह व्यक्ति-दर-व्यक्ति भिन्न होता है निम्नलिखित कहानी ने विद्यार्थियों को इस विचार को आत्मसात करने में मदद की।
एक समय की बात है, एक राजा ने अपनी रानी को उसके जन्मदिन पर एक नया पलंग देने के बारे में सोचा। बढ़ई को पलंग के माप की आवश्यकता थी, ताकि वह रानी के लिए आराम से सोने के लिए पर्याप्त लम्बा और चौड़ा पलंग बना सके। राजा ने रानी को फर्श पर लेटने के लिए कहा और राजा ने अपने पैर से उसकी लम्बाई मापी – 3 पैर चौड़ी और 6 पैर लम्बी। बढ़ई ने पैर को एक इकाई माना और अपने प्रशिक्षु (apprentice) के छोटे पैरों के आधार पर पलंग बना दिया। स्वाभाविक रूप से, पलंग सुन्दर होने के बावजूद, वह रानी के लिए बहुत छोटा था। राजा ग़ुस्सा हुआ और परिणामस्वरूप प्रशिक्षु को जेल में डाल दिया गया। बढ़ई ने सोचा कि क्या ग़लत हुआ और महसूस किया कि पलंग बनाने के लिए उसे राजा के पैर के आकार को जानने की ज़रूरत है। इसलिए, राजा के पैर की एक संगमरमर की प्रतिकृति बनाई गई और बढ़ई को भेजी गई। संगमरमर के पैर की नाम से एक और पलंग बनाया गया। अब यह रानी के लिए एकदम सही था और ठीक उनके जन्मदिन के समय पर! आगे जब भी राजा के पैर के आकार के आधार पर कुछ भी बनाने की ज़रूरत होती थी, तो संगमरमर के पैर का उपयोग किया जाता था।

चौथी गतिविधि एक मापने वाले टेप (जैसे दर्जी उपयोग करता है या जो हमें हार्डवेयर स्टोर में मिलता है) का उपयोग करना था। हमने कक्षा को जोड़ियों में बाँटा किया उनसे टेप से एक-दूसरे की ऊँचाई मापने के लिए कहा। कुछ विद्यार्थी टेप से माप करने में सक्षम थे जबकि कुछ नहीं कर पाए और उन्हें अन्य ने मदद की। कुछ बच्चों की ऊँचाइयाँ इस प्रकार थीं :
| ऋतिक : 1 मी 40 सेमी | ऋतिक : 1 मी 40 सेमी | रेणुका : 1 मी 45 सेमी |
|---|---|---|
| तान्या : 1 मी 41 सेमी | नीरज : 1 मी 31 सेमी | घनश्याम : 1 मी 38 सेमी |
फिर उन्हें अपनी ऊँचाइयों के आरोही क्रम (ascending order) में ख़ुद को व्यवस्थित करने के लिए कहा गया। इससे वे ऊँचाइयों के संख्यात्मक मानों को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करने में सक्षम हुए। इससे उन्हें इस तरह की मिश्रित इकाइयों में व्यक्त की गई लम्बाई/ऊँचाइयों की तुलना कैसे करें, इस पर कुछ विचार मिले।
विद्यार्थी पहले से ही इकाई रूपान्तरण (unit conversions) के बारे में थोड़ा जानते थे। वे जानते थे कि 1 मीटर में 100 सेंटीमीटर होते हैं, और 1 किलोमीटर में 1000 मीटर होते हैं। वे जानते थे कि एक मीटर एक सेंटीमीटर से लम्बा होता है। हमने विद्यार्थियों के साथ उन विभिन्न इकाइयों पर चर्चा की जो आजकल उपयोग की जाती हैं। मैंने उन्हें बताया कि एक बड़ी इकाई से एक छोटी इकाई में बदलने के लिए, किसी को गुणा करना होता है और एक छोटी इकाई से एक बड़ी इकाई में बदलने के लिए, किसी को भाग देना होता है। उदाहरण के लिए,
5 मी =…………..सेंटीमीटर सवाल में सेंटीमीटर की तुलना में मीटर बड़ी इकाई है, इसलिए आपको इसे 100 से गुणा करना होगा। जबकि दूसरे सवाल,
14 सेमी =…………..मीटर में मीटर की तुलना में सेंटीमीटर छोटी इकाई है, इसलिए आपको 100 से भाग करना होगा (इस समय तक वे दशमलव के बारे में पढ़ चुके थे)।
उन्होंने किलोमीटर और मीटर के बीच का रूपान्तरण स्वयं ही कर लिया। कुछ विद्यार्थियों को रूपान्तरणों में कठिनाई हो रही थी। इसलिए, हमने अन्य विद्यार्थियों को उनकी मदद करने के लिए कहा।
उदाहरण के लिए मान लीजिए कि समझने वाला बच्चा C1 है और जो नहीं समझा वह C2 है।
C1 : 1 किलोमीटर में कितने मीटर होते हैं?
C2 : यह आसान है। 1000 मीटर
C1 : तो फिर 2 किलोमीटर में?
C2 : 2000 मीटर
C1 : तो फिर 3 किलोमीटर में?
C2 : 3000 मीटर
C1 : तो फिर 14 किलोमीटर में?
इस तरह C2 को यह समझ आ गया और उसने और सवाल माँगे!!हालाँकि, बाद में मैंने महसूस किया कि मीटर को एक लम्बाई के रूप में कैसे समझाया जाए।
हालाँकि, बाद में मैंने महसूस किया कि मीटर को एक लम्बाई के रूप में कैसे समझाया जाए।
तीसरे दिन हमने पिछले दिन की चर्चा को याद किया। मैंने उन्हें सेंटीमीटर और मीटर के बारे में बताने के लिए डाइन्स ब्लॉक्स (जो स्कूल में उपलब्ध थे) का उपयोग करने का फैसला किया। वैकल्पिक रूप से, चित्र में दिखाए गए किट (फ्लैट्स, लॉन्ग्स, यूनिट्स) का भी उपयोग किया जा सकता है। प्रत्येक यूनिट प्रत्येक आयाम के साथ 1 सेमी है। दहाई के प्रत्येक लॉन्ग्स की लम्बाई 10 सेमी ×1 सेमी × 1 सेमी है। इसलिए, यदि हम 10 लॉन्ग्स को एक पंक्ति में लगाएँ, तो कुल लम्बाई 100 सेमी या 1 मीटर होगी। हालाँकि, केवल एक सेट का उपयोग करके 1 किमी की लम्बाई बनाना मुश्किल होगा, क्योंकि इसके लिए 10,000 लॉन्ग्स की आवश्यकता होगी! एक मीटर दिखाने के लिए 10 सेमी × 10 सेमी × 1 सेमी के फ्लैट्स या किलोमीटर दिखाने के लिए दस 10 सेमी × 10 सेमी × 10 सेमी के घनों का उपयोग करना आकर्षक लगता है, लेकिन इससे विद्यार्थियों को लम्बाई का परिमाण नहीं पता चलता। दूसरे शब्दों में, 100 सेमी, जो एक लम्बाई है, को 100 यूनिट-घन से जोड़ने के लिए बहुत अधिक कल्पना की आवश्यकता होती है, जो एक फ्लैट्स-घन बनाते हैं, हालाँकि वे संख्यात्मक रूप से बराबर होते हैं। हालाँकि, विद्यार्थियों के लिए निम्नलिखित की कल्पना करना सम्भव है :


- 5 लॉन्ग्स को सिरे से सिरा मिलाकर व्यवस्थित करने पर कुल लम्बाई कितनी होगी?

- 7 लॉन्ग्स और 4 यूनिट्स की कुल लम्बाई कितनी होगी? 74 सेमी = 0.74 मीटर

- 2 किलोमीटर लम्बी लाइन बनाने के लिए कितने लॉन्स की आवश्यकता होगी? 2 किमी = 2000 मीटर 2000 × 100 सेमी यानी 20000 लॉन्ग्स

इस प्रकार, हमने लम्बाई पर एक बाल-केन्द्रित (child-centric) तरीक़े से चर्चा की जिसे मैंने प्रभावी पाया, क्योंकि विद्यार्थियों ने अवधारणा को समझा और इसे अपने दैनिक अनुभवों से जोड़ा। साथ ही, वे हमारे द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देने में सक्षम थे।
पूरी योजना का प्रवाह कुछ इस तरह रहा :

विद्यार्थियों ने सभी गतिविधियों में बहुत उत्साह और ईमानदारी के साथ सक्रिय भाग लिया। गतिविधियों को धीरे-धीरे उनकी समझ बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया था। बच्चों को खोज करने (explore) और मापने का अवसर मिला, और इस सक्रिय जुड़ाव ने उनकी शिक्षा को गहरा बनाया। प्रत्येक गतिविधि के बाद की चर्चाओं ने उनकी समझ को मज़बूत करने में मदद की। सहकर्मी शिक्षण (Peer learning) स्पष्ट था क्योंकि उन्होंने एक-दूसरे की मदद की। एक बच्चा, जो अपने दोस्त से पूछने में शर्माता था, अब अपने शिक्षक से पूछने में संकोच नहीं कर रहा था।
इस प्रकार, दो या तीन कक्षाओं में, बच्चे केवल इकाइयों और इकाई रूपान्तरणों को जानने से लेकर, लम्बाई की गहरी वैचारिक समझ, विभिन्न इकाइयों के साथ चीज़ों को मापने और उनके रूपान्तरणों को एक अनुभवात्मक (experiential) तरीक़े से जानने तक पहुँच गए।
- At Right Angles PullOut (Measurements/मापन) available at https://publications.azimpremjiuniversity.edu.in/6147/1/AtRiA_Vol-4_No.2_July-2015_English_Measurment.pdf
- Myller, Rolf How Big is a Foot (1962)