त्रिभुजों से पड़ताल

अनुवाद : प्रमोद मैथिल | पुनरीक्षण : कविता तिवारी | सम्पादन : राजेश उत्साही

रूपरेखा : यह लेख कुछ ऐसे सत्रों के बारे में है जो मैंने कुछ कार्यशालाओं के दौरान पाँचवीं से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के साथ किए थे। अधिकांश विद्यार्थियों ने, गणित को स्कूली पाठ्यचर्या से इतर कभी नहीं ‘देखा’ था। हमारा इरादा उन्हें गणितीय तरीक़े से सोचने देना था। साथ ही, यह देखना था कि अलग-अलग विद्यार्थी एक ही समस्या को कैसे देखते हैं और उसका हल कैसे खोजते हैं।

समस्या

हमने विद्यार्थियों के सामने निम्नलिखित समस्या रखी : एक विषमबाहु समकोण त्रिभुज (Scalene Right-Angled Triangle) की दो प्रतियों का उपयोग करें और उन्हें किसी भी तरह मोड़े, काटे या एक-दूसरे पर रखे/ओवरलैप किए बिना, एक साथ जोड़कर कुछ आकृतियाँ बनाएँ। त्रिभुजों को इस तरह से जोड़ा जाना था कि उनके किनारे एक-दूसरे से पूरी तरह सटे हुए हों।

हमने विद्यार्थियों को समूहों में बाँट दिया और उनसे समस्या के बारे में पड़ताल करने को कहा। फिर हमने उनसे कहा कि त्रिभुजों को जोड़कर जो भी आकृतियाँ उन्होंने प्राप्त की हैं, उनके चित्र अपनी नोटबुक में बनाएँ। रोज़मर्रा के जीवन में उन आकृतियों के समान दिखने वाली की कुछ वस्तुओं का नाम भी बताएँ। उन्होंने उत्साह के साथ इस काम को किया। कोई भी विद्यार्थी इसके प्रति उदासीन नहीं लगा। हालाँकि बोर्ड पर समस्या लिखने के बावजूद बहुत-से विद्यार्थियों के लिए हमें निर्देशों को दोहराना पड़ा और उन्हें प्रदर्शनों के माध्यम से समझाया गया।

पन्द्रह-बीस मिनट के बाद, हमने उन्हें अपने चित्र दिखाने के लिए कहा। ज़्यादातर तीन-चार आकृतियाँ ही बना पाए। कई विद्यार्थी जिस एक आकृति को बनाने से चूक गए, वह थी, समान्तर चतुर्भुज (Parallelogram) (चित्र-6), जो सबसे छोटी भुजाओं को मिलाकर नहीं बनी थी। सभी सम्भावित आकृतियों को बोर्ड पर बनाने के बाद, हमने विद्यार्थियों से उन आकृतियों को बनाने के लिए कहा, जिन्हें बनाने से वे चूक गए थे। हमने देखा कि जब आकृतियों को ‘सामान्य’ से एक अलग तरह के अभिविन्यास (orientation) में बनाया गया तो उनमें से कुछ (शिक्षकों सहित) को आकृतियों से जूझना पड़ा। उदाहरण के लिए, हम आमतौर पर एक समान्तर चतुर्भुज को इस तरह से बनाते हैं कि उसकी दो विपरीत भुजाएँ ‘क्षैतिज’ (horizontal) यानी, ज़मीन के समानान्तर होती हैं। जब हमने एक तिरछा समान्तर चतुर्भुज दिखाया, तो बहुतों को आकृति की पहचान करना कठिन लगा। इस घटना से यह समझ आता है कि एक शिक्षक के लिए, आकृतियों की कल्पना करने (visualization) में लचीलापन विकसित करना कितना महत्त्वपूर्ण है।

चित्र 0
चित्र 0 : एक विषमबाहु समकोण त्रिभुज (Scalene Right-Angled Triangle) की दो प्रतियाँ
चित्र-1
चित्र 1 : पर्वत, जन्मदिन की टोपी, नाक, पिज़्ज़ा का टुकड़ा, काग़ज़ का रॉकेट
चित्र 2
चित्र 2 : लिफ़ाफ़ा, सेलफ़ोन, बोर्ड, मेज़
चित्र 3
चित्र 3 : नाविक का दिकसूचक (compass), वज्र (बिजली), काजू कतली, हीरा
चित्र 4
चित्र 4 : रे-फिश, ढलान वाले पर्वत, ग्लाइडर, घर की छत
चित्र 5
चित्र 5 : पतंग, जहाज़ का आकाशीय दृश्य, रॉकेट, गिरते हुए बर्फ के क्रिस्टल (ओले)
चित्र - 6
चित्र 6 : लिफ्ट के बाहर का बटन, ट्रेन की बोगी

जब हमने पूछा कि हम कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि ऐसी सिर्फ़ छह आकृतियाँ सम्भव हैं, जिन्हें दो विषमबाहु समकोण त्रिभुजों का उपयोग करके बनाया जा सकता है, तो कई इस बात पर दृढ़तापूर्वक तर्क नहीं कर पाए। लेकिन कुछ विद्यार्थी अपनी सोच में काफ़ी स्पष्ट थे : “प्रत्येक त्रिभुज में तीन भुजाएँ हैं और दो समान माप वाली भुजाओं (Congruent Sides) को दो तरह से जोड़ा जा सकता है — दूसरा तरीक़ा है एक आकृति को पलटकर रखना। इस प्रकार, तीन गुना दो बराबर छह यानी आकृतियों की रचना के छह तरीक़े निकलते हैं।” अगला प्रश्न यह जाँचने के लिए था कि क्या उन्हें यही उत्तर मिलेगा यदि दो सर्वांगसम समकोण त्रिभुज, समद्विबाहु त्रिभुज (Isoscele Triangle) हों। इससे उन्हें अपने तर्क को बेहतर तरीक़े से व्यक्त करने में मदद मिली। हम पाठकों को यह अनुमान लगाने के लिए छोड़ देते हैं कि उनके तर्क क्या रहे होंगे।

अगला सवाल यह था। कल्पना करो कि यह आकृतियाँ दौड़ के ट्रैक हैं; आपको इनमें से एक को चुनना है। जो अपनी पसन्द की आकृति के परिमाप में दौड़ते हुए इस दौड़ को ख़त्म करेंगे, उनके लिए कुछ आइसक्रीम रखी गई हैं। यह मानते हुए कि आप आइसक्रीम खाने के इच्छुक हैं, आप किस ट्रैक का चयन करेंगे?

पाँचवीं कक्षा के एक विद्यार्थी को छोड़कर, जिसने लगभग तुरन्त उत्तर दिया था, कोई भी सही तर्क पर नहीं पहुँच सका। दिए गए कुछ सामान्य उत्तर थे :

  1. चूँकि हमने एक समान दो त्रिभुजों का उपयोग करके सभी आकृतियाँ बनाई हैं, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आप किस ट्रैक को चुनते हैं।
  2. दो त्रिभुजों में से किसी एक को चुनें क्योंकि त्रिभुजों की तीन भुजाएँ होती हैं और अन्य चारों चतुर्भुज हैं।
  3. उस त्रिभुज को चुनें जिसकी ऊँचाई कम हो।
  4. त्रिभुज चुनें क्योंकि उसमें आपको केवल तीन तीव्र मोड़ों पर मुड़ना होगा (चतुर्भुज के मामले में चार तीव्र मोड़ों पर मुड़ने की तुलना में; क्योंकि तीव्र मोड़ हमें धीमा करने का काम करते हैं।)

एक विद्यार्थी ने यहाँ तक ​​कहा कि वह एक त्रिभुज का चयन करेगा क्योंकि इसमें ढलान (कर्ण) है और उस ढलान पर वह तेज़ी-से दौड़ सकता है। मुझे उम्मीद नहीं थी कि कोई इस तरह से सोचेगा। मुझे बस ख़ुद को याद दिलाना था कि एक विद्यार्थी कितने ही तरीक़ों से सोच सकता है और एक शिक्षक के लिए यह कितना महत्त्वपूर्ण है कि वह उन सभी मान्यताओं के प्रति सचेत रहे जो एक विद्यार्थी बना सकता है।

एक टीम ने सिर्फ़ एक स्केल लिया, परिमाप को मापा, और इसका हल खोज लिया। तब मैंने महसूस किया कि मैंने उन्हें कभी नहीं कहा था कि उन्हें परिमाप को मापकर उत्तर खोजने की अनुमति नहीं है। वास्तव में यह उनका स्मार्ट क़दम था। परन्तु, दूसरों ने ऐसा क्यों नहीं सोचा? क्या उन्होंने मान लिया था कि मापन की अनुमति नहीं है? या उन्होंने इसके बारे में बिल्कुल नहीं सोचा था?

जिस विद्यार्थी ने लगभग तुरन्त जवाब दिया था, उसने कहा (उसके शब्दों में), “सर, यह स्पष्ट है कि हमें सबसे कम परिमाप वाली आकृति खोजना है। हम त्रिभुजों की सबसे लम्बी भुजाओं को जोड़कर इस आकृति को प्राप्त कर सकेंगे।” मुझे अच्छा लगा जब उसने ‘स्पष्ट है’ शब्द का इस्तेमाल किया।

शेष विद्यार्थियों के लिए, हमने उत्तर खोजने का एक तरीक़ा पता लगाने की कोशिश की। इसके लिए हमने  \(a\), \(b\), \(c\) लम्बाई की कुछ भुजाएँ लीं, जहाँ \(a \lt b\lt c\) और इन चरों के आधार पर आकृतियों की तुलना करने की कोशिश की। इसने विद्यार्थियों को यक़ीन दिलाया कि किन आकृतियों का परिमाप कम से कम था।

सत्र से जो पता चला :

  1. विद्यार्थियों ने ख़ुद ही अवलोकन किया कि एक ही क्षेत्रफल वाली आकृतियों के परिमाप अलग-अलग हो सकते हैं। मुझे लगता है कि यह सीख लम्बे समय तक रहेगी क्योंकि उन्होंने इसे ग़लतियाँ करके ख़ुद से सीखा था।
  2. हमने विद्यार्थियों को उनके दावों का कारण बताने के लिए प्रेरित किया। वे दूसरों के विचारों को भी सुन सकते थे और उनके बारे में सोच सकते थे।
  3. उन्होंने वास्तविक जीवन की वस्तुओं को एक अलग तरीक़े से देखना शुरू किया। उदाहरण के लिए, पाँचवीं कक्षा के विद्यार्थियों को नहीं पता था कि समकोण क्या होता है। मैंने उन्हें बताया कि यह एक L आकृति की तरह होता है और उन्हें कुछ ऐसी आकृतियाँ भी दिखाईं। एक मिनट से भी कम समय में, उन्होंने कमरे में कम-से-कम 20 ऐसी वस्तुओं की पहचान की जिसमें एक समकोण था। अपने अवचेतन मन में, उन्होंने महसूस किया होगा कि रोज़मर्रा के जीवन की कई परिस्थितियाँ हैं जिनमें हम समकोण का उपयोग करते हैं। उन्होंने वास्तविक जीवन की अन्य वस्तुओं में ज्यामितीय आकृतियों को भी देखा।
  4. वे 75 मिनट के लिए सक्रिय शिक्षार्थी थे, क्योंकि वे अपने हाथों से कुछ कर रहे थे, समूह के सदस्यों और शिक्षक के साथ बातचीत कर रहे थे। एक कक्षा जहाँ केवल एकालाप होता है, किसी के लिए दिलचस्प नहीं होती है।
  5. हमने सत्र की शुरुआत विद्यार्थियों को यह बताने से नहीं की कि वे क्या सीखने जा रहे हैं। कई बार, अगर कुछ विद्यार्थियों ने कक्षा में पढ़ाए जाने वाले टॉपिक का पहले से ही अध्ययन किया है (शायद ट्यूशन शिक्षक के साथ), तो वे कक्षा में सीखने के इच्छुक नहीं होते हैं। अत: इनमें से कुछ विद्यार्थी कक्षा में ध्यान नहीं देते हैं। चूँकि यह सामान्य तौर पर अपनाई जाने वाली पद्धति से अलग और नई थी, उन्होंने ध्यान दिया। शिक्षकों के लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि इस बात को ध्यान में रखें और शिक्षण के नियमित तौर-तरीक़ों के साथ-साथ नए और नवाचारी तरीक़ों से भी सिखाएँ।

विद्यार्थियों की नज़र से आकृतियाँ

आभार

सबसे छोटे परिमाप का पता लगाने के लिए प्रश्न का विस्तार करने की प्रेरणा इस वीडियो से मिली थी : Year 4 Singapore Math Model Lesson: Measuring Area – Maths No Problem

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