यह प्राकृत संख्याओं के गाँव की कहानी पर बने 13 मिनट के एक वीडियो की समीक्षा है। कहानी में एक चोर संख्या आती है जो स्पष्ट तौर पर एक प्राकृत संख्या नहीं है। बाद में पता चलता है कि वह एक (धनात्मक) परिमेय संख्या है। चूँकि सभी पात्र संख्याएँ धनात्मक हैं, यह कहना उचित होगा कि यह वीडियो प्राकृत संख्याओं व भिन्नों और इनके बीच के सम्बन्ध के बारे में है! यहाँ पार्ट-होल मॉडल का उल्लेख किया जाता है। इसका उपयोग धनात्मक परिमेय संख्या को परिभाषित करने के लिए किया जाता है। साथ ही समतुल्य भिन्नों की व्याख्या करने और यह बताने के लिए भी किया जाता है कि प्रत्येक प्राकृत संख्या एक परिमेय संख्या होती है।

लेकिन इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यह बच्चों को भिन्नों को समझने में होने वाली अधिकांश कठिनाइयों की ओर इशारा करती है। इसमें गिनती से परे जाकर मापन करना भी शामिल है। यह उल्लेख करती है कि भिन्न (और परिमेय संख्याएँ) दो मंज़िला संख्याओं की तरह दिखती हैं। इन्हें और सरल नहीं किया जा सकता है। भिन्न को पहली बार देखने पर कुछ पात्रों (प्राकृत संख्याएँ पढ़ें) की प्रतिक्रियाएँ वैसी ही होती हैं, जैसा कि बच्चे पहली बार भिन्नों को देखने पर महसूस करते हैं। यह तथ्य कहानी में अच्छी तरह से सामने लाया गया है कि किसी दी गई भिन्न के अनगिनत, कई समतुल्य रूप हो सकते हैं।

कहानी इस संकेत के साथ समाप्त होती है कि परिमेय संख्याओं से परे और भी संख्याएँ हो सकती हैं, लेकिन कहानी के पात्र (अर्थात, धनात्मक परिमेय संख्याएँ) इसकी कल्पना भी नहीं कर पा रहे थे। यह दर्शकों को पायथागॉरियन स्कूल की याद दिलाती है जिसने परिमेय संख्याओं से परे कुछ भी स्वीकार करने से इन्कार कर दिया था। जब एक व्यक्ति ने √ 2 (यानी, एक इकाई वर्ग के विकर्ण की लम्बाई) की अपरिमेयता की खोज की, तो उसे गम्भीर परिणाम भुगतने पड़े थे।

शिक्षकों के साथ साझा करने के लिए यह एक बेहतरीन वीडियो है। कुछ फालोअप गतिविधियों के साथ इसे भिन्नों के परिचय के रूप में बच्चों को दिखाया जा सकता है।

अजीब संख्याएँ

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