गणित खोजना, गणित खेलना, गणित का अनुभव करना
समीक्षक : पद्मप्रिया शिराली
बच्चों की दैनिक गतिविधियों के पीछे बहुत सारा गणित छिपा होता है जिसमें गिनती, तुलना, अनुमान, पैटर्न की पहचान, अनुक्रमण (sequencing), तार्किक चिन्तन और तर्कशक्ति शामिल है। इन सभी पहलुओं को शामिल करके, सिक्किम एससीईआरटी की गणित की पुस्तकें इस विषय को अधिक बाल-केन्द्रित, कम अमूर्त और अधिक आकर्षक बनाती हैं।
पाठ्यपुस्तकें, विशेष रूप से गणित की शिक्षा में, प्रभावी शिक्षण पद्धति के उपयोग में शिक्षकों का मार्गदर्शन करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अवधारणाओं के परिचय, गणितीय सन्दर्भों के उपयोग, किसी विषय के विकास, प्रक्रियाओं के शिक्षण और विभिन्न प्रकार की समस्याओं एवं कौशल निर्माण के क्षेत्रों में शिक्षक अधिकांश निर्देश सीधे पाठ्य से ही लेते हैं। छोटे विद्यार्थी (Young students) जो अभी पूरी तरह साक्षर नहीं हैं, उन्हें चित्रों और रेखाचित्रों की ओर आकर्षित करने के अलावा शिक्षक द्वारा पाठ्य के माध्यम से ही निर्देशित किया जाता है। दुर्भाग्य से, स्कूलों में अकसर गणित को नीरस और अरुचिकर तरीक़े से पढ़ाया जाता है, जहाँ आमतौर पर केवल गणनाओं (computations) पर जोर दिया जाता है। पुस्तकों का यह सेट चित्रों, संवादों, गतिविधियों, खेलों, पहेलियों और कहानियों के माध्यम से बच्चों को मज़े-मज़े में गणित सीखने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
इन पुस्तकों के लेखकों ने सिक्किम की स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण से सन्दर्भ लेकर, और सतत विकास से सम्बन्धित कहानियों और सन्दर्भों का उपयोग करके, एक एकीकृत दृष्टिकोण पेश किया है जो निश्चित रूप से आज की आवश्यकता है।



संगठन
इन पुस्तकों को कई छोटे अध्यायों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक अध्याय तीन मुख्य श्रेणियों : संख्या, आकृति और मापन में से किसी एक के अन्तर्गत आता है।
कक्षा-1 की पुस्तक संख्या, आकृति, मापन, समय देखना, पैसा और ग्राफ़ सिखाती है।
कक्षा-2 की पुस्तक विनिमय (हासिल) के साथ जोड़ और घटाव, स्थानीय मान, मापन, पैसा, समय देखना, ग्राफ़ और ज्यामितीय आकृतियाँ सिखाती है।
कक्षा-3 की पुस्तक में तीन अंकगणितीय संक्रियाओं (operations), मापन, ग्राफ़, समय और ज्यामिति पर अधिक उन्नत कार्य दिया गया है।
लेखक शुरुआती नोट में निर्धारित किए गए कई दिशानिर्देशों को पूरा करने में सफल रहे हैं।
- प्रस्तावना से : “पुस्तकों की सामग्री बच्चों के सामाजिक-सांस्कृतिक सन्दर्भ और अनुभवों में रची-बसी है।” इस पुस्तक को पढ़ने वाला कोई भी व्यक्ति इस सुन्दर राज्य की संस्कृति और विशिष्ट विशेषताओं के बारे में भी जान सकेगा।
- शिक्षकों और अभिभावकों के लिए नोट से : “इसका उद्देश्य बच्चों को गणित के साथ जुड़ने, अपना ज्ञान स्वयं बनाने और गणितीय रूप से सोचने में मदद करना है।” पुस्तक में संक्रियाओं के लिए संख्या रेखाओं, पहाड़े बनाने के लिए बाँस की खपच्चियों और ज्यामिति तथा मापन के विषयों में अन्य सामग्रियों का बहुत अच्छा उपयोग किया गया है।
शिक्षकों की सहायता के लिए
अभिभावकों और शिक्षकों के लिए एक नोट भी है जो गणित शिक्षा के दृष्टिकोण और इस पुस्तक के संगठन के पीछे की सोच को रेखांकित करता है, साथ ही इसमें अपेक्षित अधिगम के प्रतिफलों (learning outcomes) का विवरण देने वाली एक सूची भी है। चुनिन्दा अध्यायों के लिए दिए गए ‘शिक्षक पृष्ठ’ बहुत अच्छी तरह लिखे गए हैं और मैनिप्यूलेटिव्स के उपयोग के लिए पर्याप्त सुझाव प्रदान करते हैं।
पाठ में कई स्थानों पर शिक्षकों के लिए निर्देश दिए गए हैं जो सुझाव प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए: “शिक्षक नोट : बच्चों से पता करवाएँ – आपके परिवार में कितने सदस्य हैं? उनमें से सबसे छोटा कौन है? आपकी फ़ैमिली में सबसे लम्बा कौन है?” इन पर अमल करके, शिक्षक बच्चों को कक्षा में सीखी गई अवधारणाओं को घर की स्थितियों से जोड़ने में मदद कर सकते हैं।
विद्यार्थी-केन्द्रित विशेषताएँ
- सामग्री विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान, कौशल, अनुभव और रुचियों से सम्बन्ध जोड़ती है।
- इसमें विभिन्न प्रकार के प्रदर्शन (representations), चित्र, ग्राफ़, मॉडल, तालिकाएँ, रेखाचित्र, मैनिप्यूलेटिव्स और प्रतीकात्मक अभिव्यक्तियाँ शामिल हैं जो गणितीय सम्बन्धों को परिभाषित करती हैं, ताकि विद्यार्थियों को अपनी सोच व्यवस्थित करने और गणितीय स्थितियों की व्याख्या करने में मदद मिल सके।
- उपयोग की गई भाषा सरल और स्पष्ट है, जो विद्यार्थियों की समझ के दायरे में है। इस्तेमाल किए गए फॉन्ट बड़े और पठनीय हैं, और पुस्तकों को एक आकर्षक कवर के साथ डिज़ाइन किया गया है। कक्षा-1 की पुस्तक में सुन्दर चित्रों के साथ बुनियादी गणितीय शब्दावली का परिचय दिया गया है।
- चिह्नों और प्रतीकों को लिखने की क्षमता से पहले अवधारणाओं की समझ विकसित करने पर जोर दिया गया है। यह देखना अच्छा है कि <और> जैसे प्रतीकों के उपयोग से पहले ‘कम’ और ‘अधिक’ जैसे शब्दों का उपयोग किया गया है।
- छोटी संख्याओं और उनके साथ संक्रियाओं (operations) के बारे में बात करने के लिए ‘पिट्टू’ जैसे परिचित खेलों का उपयोग किया गया है।
- ‘नीरज का किचन गार्डन’ जैसे विषय विभिन्न गणितीय समस्याओं के निर्माण की गुंजाइश प्रदान करते हैं। इन चित्रों के इर्द-गिर्द बहुत सारी गणितीय चर्चा हो सकती है। एक अच्छा शिक्षक बच्चों को आगे सोचने में मदद करने के लिए इन पुस्तकों के चित्रों का रचनात्मक तरीकों से उपयोग कर सकता है।
- विभिन्न स्थानों पर खुले-अन्त वाले (open-ended) प्रश्नों को शामिल किया गया है।
- सभी स्तरों पर ‘इबारती सवालों’ को शामिल किया गया है, जिसके लिए विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन के सन्दर्भों में गणितीय भाषा के उपयोग की दक्षता विकसित करने की आवश्यकता होती है। गणितीय भाषा का बार-बार सामना करने से, बच्चे अपनी समझ को व्यक्त करने और सटीक शब्दों में संवाद करने में सक्षम होंगे।
- इबारती सवालों में विभिन्न अवधारणाओं को लागू करने के लिए पर्याप्त विविधता दी गई है ताकि विद्यार्थी सन्दर्भ पर विचार करें और उन्हें यंत्रवत हल न करें।
- अवधारणाओं को समझाने और कौशल निर्माण में मदद करने के लिए उपयुक्त स्थानों पर गतिविधियों को शामिल किया गया है।
- किसी चीज़ के आनन्द के बारे में किसी को तब तक सिखाना मुश्किल है जब तक कि वह ख़ुद उसका अनुभव न कर ले। पूरी पुस्तक में विद्यार्थियों को हल करने के लिए विभिन्न मनोरंजक समस्याएँ दी गई हैं। गणितीय क्षमताओं के विस्तृत दायरे वाले विद्यार्थी ऐसी गतिविधियों और कार्यों को खोज पाएँगे जो उनमें रुचि जगाते हैं और जिनसे वे उत्पादक रूप से जुड़ सकते हैं। विद्यार्थियों में आत्मविश्वास पैदा करने के लिए कई हल किए गए उदाहरण भी दिए गए हैं। इसमें प्रदर्शन (representation), चर्चा और रेखाचित्रों के माध्यम से गणितीय अवधारणाओं को सम्प्रेषित करने की पर्याप्त गुंजाइश है।
- विद्यार्थी समस्याओं को हल करने के कई तरीक़े भी देखते हैं। ऐसे प्रश्न भी हैं जो विद्यार्थियों को कुछ समस्याओं को अलग-अलग तरीक़ों से हल करने के लिए प्रेरित करते हैं। जैसे : ‘उंगलियाँ : क्या आप 8 को किसी और तरीक़े से दिखा सकते हैं?’
- सभी पुस्तकों में थीम आधारित समस्या समाधान का उपयोग किया गया है (उदाहरण के लिए, मेघा मेला), और प्रत्येक थीम के तहत कई अवधारणाओं को शामिल किया गया है। यह सामान्य पुनरावृत्ति अभ्यास (review exercise) का एक आकर्षक विकल्प है और सीखी गई अवधारणाओं तथा कौशलों को पुख़्ता करता है।
- किसी भी गणित पाठ्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को केवल समस्या समाधान की तकनीक रटाने के बजाय उन्हें गणितीय रूप से सोचने के लिए तैयार करना होता है। मापन, ज्यामिति, आकृतियों आदि में विद्यार्थियों को प्रयोग करने, निरीक्षण करने और तर्क करने के लिए प्रोत्साहित करके एक अच्छा प्रयास किया गया है। गणित सीखने के लिए तर्क करना और समझना अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।
सुझाव
- हालाँकि विभिन्न सामग्रियों के उपयोग के माध्यम से स्थानीय मान (place value) को अच्छी तरह से समझाया गया है, लेकिन कक्षा-3 की पुस्तक में अनुवर्ती संख्याओं (preceding numbers) पर अधिक कार्य और निकटतम दहाई तथा सैकड़े में संख्याओं के संक्रमण (transition) पर अधिक ज़ोर देना मददगार होता। संक्रमण बिन्दु (transition points) जैसे कि 299 से 300 या 419 से 420 तक का सफर (अंकों के बदलने के तरीक़े को समझना) विद्यार्थियों के लिए हमेशा कठिन क्षेत्र होते हैं। ‘सौ’ और अन्य सैकड़ों के परिचय में ‘दहाई’ के ‘सैकड़े’ के साथ सम्बन्ध पर अधिक ज़ोर दिया जा सकता था।
- सबसे बड़ी संख्या कैसे ज्ञात की जाए, इस पर चर्चा मददगार हो सकती थी। ऐसी समस्याएँ जिनमें 101, 9 और 45 जैसे संख्या समूहों को क्रम में रखने की आवश्यकता होती है, वे विद्यार्थियों के स्थानीय मान की समझ का परीक्षण कर सकती थीं।
- छोटे बच्चों के लिए, किसी भी कार्यक्रम को वैचारिक समझ के लिए तीन-चरणीय प्रक्रिया का उपयोग करके एक ठोस नींव रखने की आवश्यकता होती है। यह बच्चों को मूर्त (concrete) से चित्रात्मक (pictorial) और अन्त में अमूर्त (abstract) रूप की ओर ले जाने वाली होनी चाहिए। अमूर्तता वाली समस्याओं से पहले ठोस सामग्री से जुड़े अभ्यासों को रखकर पुस्तक में इस क्रम को बनाए रखा जा सकता था। उदाहरण के लिए, पुस्तक-2 में, संख्या चार्ट और संख्या रेखा पर चर्चा करने से पहले ‘छुर्पी‘ (स्थानीय पनीर के टुकड़े) का उपयोग किया जा सकता था।
- पुस्तक-2 में, संख्या रेखा पर जोड़ के विषय को धीरे-धीरे विकसित किया जा सकता था : पहले एक अंक वाली संख्याओं को जोड़ना, उसके बाद दो अंकों और एक अंक वाली संख्याओं को, फिर दो अंकों और दस के गुणजों को, और अन्त में दो अंकों वाली दो संख्याओं को जोड़ना। यही बात ‘गणितमाला‘ के अभ्यासों पर भी लागू होती है।
- संख्या रेखा पर प्रदर्शित करने से पहले घटाव की शुरुआत ठोस सामग्रियों के उपयोग से की जा सकती थी। संख्या रेखा पर भी, आगे की गिनती और पीछे की गिनती दोनों का उपयोग करके इस विषय को धीरे-धीरे आगे बढ़ाना बेहतर होता।
- गणित पढ़ाने में शामिल एक बुनियादी सिद्धान्त ज्ञात तथ्यों से नए तथ्य निकालना है। जोड़ और घटाव की प्रक्रियाओं के सम्बन्ध को समझने से बच्चे की जोड़-घटाव की समस्याओं को हल करने की क्षमता मज़बूत होती है। इस तथ्य पर थोड़ा और ज़ोर दिया जा सकता था कि प्रत्येक जोड़ का फ़ैक्ट दो घटाव के फ़ैक्टों को जन्म देता है।
- 3 अंकों के ऊर्ध्वाधर (vertical) जोड़ और घटाव की समस्याओं में ‘लुप्त अंक’ (missing digit) वाली समस्याएँ एक अच्छी चुनौती साबित हो सकती थीं।
इस स्तर पर, यह पुस्तक गणितीय तथ्यों को रटाने के बजाय अवधारणात्मक समझ (conceptual understanding) पर ज़ोर देती है। शिक्षकों को अभ्यास का आवश्यक स्तर प्रदान करने के लिए इनमें से कुछ क्षेत्रों में अतिरिक्त अभ्यासों के साथ पाठ्यपुस्तक को पूरक (supplement) करने की आवश्यकता हो सकती है।
समापन टिप्पणी
कुल मिलाकर, तीन पुस्तकों का यह सेट विभिन्न गणितीय अवधारणाओं को आकर्षक रूप से प्रस्तुत करने में सफल रहा है, जिससे सभी विद्यार्थियों को लाभ होगा। हर अवधारणा का मूर्त परिचय, गणितीय तथ्यों को पूरी तरह याद किए बिना भी नई इकाइयों (units) को सुलभ बनाता है। आकर्षक चित्रात्मक लेआउट विद्यार्थियों को पाठ में शामिल करेगा और सीखने को आनन्दमय बनाएगा।
यह सराहनीय है कि इन पुस्तकों को बच्चों के लिए चित्रात्मक और विषयवस्तु, दोनों ही रूपों में बेहद आकर्षक ढंग से डिज़ाइन किया गया है। ये ऐसी किताबें हैं जिन्हें बच्चे ख़ुद भी ख़ुशी-ख़ुशी पलटकर देखना पसन्द करेंगे।