सीखने के विविध उद्देश्यों के लिए प्रश्न तैयार करना
आमतौर पर जो प्रश्न हम परीक्षाओं में पूछते हैं वे सीधे व बिना पेंच के होते हैं। उनमें सोचने-विचारने की गुंजाइश नहीं होती है। बच्चे स्वाभाविक रूप से जिज्ञासु होते हैं और गणित के सीधे-सीधे प्रश्न हमेशा उनकी जिज्ञासा को उकसा नहीं पाते हैं। विशिष्ट उद्देश्यों (जैसे कि अवधारणाओं की समझ को बढ़ावा देना, कौशल विकसित करना और नए गुणधर्मों को समझना) को ध्यान में रखकर तैयार किए गए प्रभावी प्रश्न बच्चों के लिए काफ़ी फ़ायदेमन्द हो सकते हैं। ऐसे प्रश्नों को हमारे आकलन का हिस्सा होना चाहिए ताकि विद्यार्थी अवधारणाओं को गहराई से समझ सकें और रटने के तरीक़ों से दूर हो सकें।
चित्र-1 और चित्र-2 में दिए गए प्रश्नों पर विचार करें। चित्र-1 में सही समय चुनने के लिए पूछे जाने वाला एक मानक प्रश्न दिया गया है। हालाँकि समय की समझ को जाँचने-परखने के लिए यह एक अच्छा प्रश्न है, लेकिन इसमें सोचने की कोई ख़ास गुंजाइश नहीं है। चित्र-2 में इसी प्रश्न को थोड़ा बदल दिया गया है। इसमें घड़ी का मिनट का काँटा हटा दिया गया है। यह प्रश्न सोचने के लिए प्रेरित करता है और हमें समय का अनुमान लगाना सिखाता है।


आजकल ली जाने वाली अधिकांश परीक्षाएँ अवधारणाओं को समझने की बजाय तथ्यों को रटने पर आधारित होती हैं। 2020 में आई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के साथ शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने और आकलन के उद्देश्य को उच्च स्तरीय सोच की ओर केन्द्रित करने के लिए नई पहल की जा रही हैं। इसी दिशा में ‘परख’ (PARAKH – Performance Assessment, Review, and Analysis of Knowledge for Holistic Development) की शुरुआत की गई है। ‘परख’ का उद्देश्य बच्चों के समग्र विकास का आकलन करना है। यह केवल उनके शैक्षणिक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उनके संज्ञानात्मक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को भी ध्यान में रखा जाता है।
‘ओपन डोर एजुकेशन’ (www.opendooreducation.in) में हम ऐसे प्रश्न बनाते हैं जो न केवल समझ को परखते हैं, बल्कि प्रश्नों को हल करते समय रचनात्मक रूप से सोचने के लिए बच्चों को प्रेरित भी करते हैं। हम विविध प्रकार के प्रश्न बनाते हैं जो अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं और बच्चों को उन्हें गहराई से समझने में मदद करते हैं। इस लेख में, हम ऐसे कुछ प्रश्नों के उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं ताकि यह दिखाया जा सके कि विभिन्न उद्देश्यों को ध्यान में रखकर बनाए गए प्रश्न किस तरह चर्चा को प्रेरित कर सकते हैं। और कैसे किसी विशिष्ट विषय पर विभिन्न प्रकार के प्रश्न बनाकर उनकी दक्षता का आकलन किया जा सकता है।
सोचने को प्रेरित करने वाले प्रश्न बनाना
चित्र-3 में दिया गया प्रश्न बच्चों को अप्रत्यक्ष रूप से यह सिखाने के लिए तैयार किया गया है कि “पूर्ण संख्याओं के समुच्चय में कोई सबसे बड़ी पूर्ण संख्या नहीं होती।” जब विद्यार्थी इस प्रश्न को हल करने की कोशिश करते हैं, तो वे सामान्यत: उस सबसे बड़ी संख्या को लिखते हैं जो उन्हें सूझती है। लेकिन जल्दी ही वे यह समझ जाते हैं कि वे हमेशा उस संख्या से बड़ी संख्या चुन सकते हैं, जो उन्होंने अभी लिखी है। इस तरह वे इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि कोई सबसे बड़ी पूर्ण संख्या नहीं होती। यह प्रश्न दर्शाता है कि गणित के प्रश्नों को थोड़े अलग ढंग से पूछने से वे कहीं अधिक इंटरैक्टिव और दिलचस्प गतिविधि बन सकते हैं।
गणित में दो महत्त्वपूर्ण संख्याएँ होती हैं : \(0\) और 1 । 0 को पूर्ण संख्याओं के लिए योज्य तत्समक (additive identity) माना जाता है, और \(1\) को पूर्ण संख्याओं के गुणनात्मक तत्समक (multiplicative identity) के रूप में जाना जाता है। एक प्रश्न को हल करके इन तकनीकी शब्दों का महत्त्व समझना दिलचस्प होगा। हमने कक्षा-\(6\) के बच्चों के लिए ऐसा ही एक प्रश्न (चित्र-4 देखें) तैयार किया है, जो इन गणितीय शब्दों के उपयोग को स्पष्ट करता है।


यदि x और y कोई पूर्ण संख्याएँ हैं, तो \(x + 0 = x\) और \(y × 1 = y\) होता है। हम देखते हैं कि किसी भी पूर्ण संख्या में \(0\) जोड़ने पर वही संख्या मिलती है, और किसी भी पूर्ण संख्या को \(1\) से गुणा करने पर भी वही संख्या मिलती है। यदि हम इसे व्यापक रूप में देखें, तो हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि यह गुणधर्म किसी भी संख्या प्रणाली पर लागू होता है। चित्र-4 में दिए गए प्रश्न को हल करने के लिए बच्चों को सिर्फ़ इन प्रतीकों के पैटर्न को ध्यान से देखना होगा और यह जानना होगा कि \(1\) गुणनात्मक तत्समक होता है।
आइए, अब देखते हैं कि एक प्रश्न के ज़रिए रोचक गुणधर्मों को खोजने में हम बच्चों की मदद किस तरह कर सकते हैं।
हम जानते हैं कि यदि किसी संख्या के अंकों का योग \(3\) से विभाजित होता है, तो वह संख्या भी \(3\) से विभाजित होती है। एक सामान्य-सा अवलोकन यह है कि यदि हम उन अंकों के स्थान बदलकर एक नई संख्या बनाएँ, तो वह संख्या भी \(3\) से विभाजित होगी क्योंकि अंकों का योगफल तो वही रहेगा। चित्र-\(5\) में दिया गया प्रश्न कुछ स्कूलों में कक्षा-5 के बच्चों से पूछा गया है। हालाँकि यह प्रश्न सरल है, लेकिन फिर भी यह बच्चों को गणित के कुछ रोचक गुणधर्मों की खोज व पड़ताल करने के लिए प्रेरित करता है। चित्र-6 में इसी प्रश्न का थोड़ा अधिक चुनौतीपूर्ण और संशोधित रूप प्रस्तुत किया गया है।


चित्र-6 में दिए गए प्रश्न को हल करते हुए आपने कौन-से रोचक गुणधर्म देखे?
प्राथमिक स्कूल के बच्चों के लिए भिन्न सम्बन्धी विभिन्न स्तरों के प्रश्न
किसी विषय में प्रवीणता का आकलन करने के लिए यह ज़रूरी है कि कठिनाई के अलग-अलग स्तरों वाले विविध प्रकार के प्रश्न पूछे जाएँ। किसी एक ही अवधारणा पर आधारित कई प्रश्न बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। साथ ही, हर प्रश्न में ऐसे तत्त्व होने चाहिए जो सम्भावित ग़लतफ़हमियों (ग़लत अवधारणाओं) या कठिनाइयों की पहचान करने में मदद करें। प्रश्नों को प्रस्तुत करने के तरीक़ों में विविधता लाकर और नए दृश्यों (visuals) को जोड़कर हम किसी विशिष्ट विषय पर प्रश्नों की एक विस्तृत शृंखला तैयार कर सकते हैं (देखें चित्र-7)। प्रश्न-1 से 10 भिन्न की अवधारणा के इर्द-गिर्द बनाए गए हैं और इनमें कठिनाई का स्तर अलग-अलग है। इनमें बहुविकल्पीय (MCQ) और इंटरैक्टिव ड्रैग-एंड-ड्रॉप प्रकार के प्रश्न शामिल हैं। (चूँकि यह उदाहरण डिजीटल माध्यम के हैं, अत: इनमें कई जगह ऐसे निर्देश दिए गए हैं जो कम्प्यूटर पर हल करते समय लागू होंगे। उन्हें यहाँ नज़रअन्दाज़ किया जा सकता है।)
इनमें से प्रत्येक प्रश्न का एक विशेष उद्देश्य है। कुछ विकल्प भटकाने के लिए भी दिए गए हैं। प्रश्न-1 इस बात पर केन्द्रित है कि क्या बच्चे यह समझते हैं कि भिन्नों को कैसे दर्शाया जाता है। प्रश्न-2 इस समझ को जाँचने के लिए है कि दी गई आकृतियों में सभी हिस्से बराबर बँटे होना चाहिए और किसी भिन्न को दर्शाने वाले छायांकित हिस्से बाकी हिस्से के बराबर होने चाहिए।
भिन्नों से सम्बन्धित प्रश्नों को हल करने के दौरान कुछ बच्चों को यह भम्र हो सकता है कि एक पूर्ण या सम्पूर्ण भाग को कैसे दर्शाया जाए। प्रश्न-3 यह जानने के लिए बनाया गया है कि क्या बच्चे यह समझते हैं कि भिन्नों के सन्दर्भ में पूर्ण (या ‘सम्पूर्ण’) को कैसे दर्शाया जाता है।
हालाँकि प्रश्न-4 काफ़ी सीधा और स्पष्ट प्रश्न है, फिर भी कई बच्चों को वस्तुओं के सन्दर्भ में भिन्नों को दर्शाने को लेकर ग़लतफ़हमियाँ होती हैं। इस प्रश्न में बच्चे शायद यह सोचकर 3/4 का चयन कर लें कि उन्हें नीले पेन की संख्या अंश के रूप में और लाल पेन की संख्या हर के रूप में लिखनी है।
दिलचस्प बात यह है कि किसी सममित आकृति को आधे में बाँटना किसी असममित आकृति को आधे में बाँटने से सरल होता है। प्रश्न-5 एक इंटरैक्टिव प्रश्न है जिसे इस अवधारणा को समझाने के लिए तैयार किया गया है। प्रश्न-6 ग़लतफ़हमी से जुड़ा प्रश्न है, जो यह परखता है कि क्या बच्चे यह समझते हैं कि 1/2 को सही ढंग से कैसे दर्शाया जाए। कई बार बच्चे बतौर उत्तर ‘हाँ’ का विकल्प चुन लेते हैं क्योंकि वे सोचते हैं कि आकृति को दो भागों में बाँटा गया है। लेकिन वे इस बात पर ध्यान देने से चूक जाते हैं कि ये दोनों भाग समान होने चाहिए।

यह सोचने की बात है कि क्या समान आकृति की दो अलग-अलग माप की दो वस्तुओं का आधा भाग बराबर होता है। प्रश्न-7 इस विचार को समझाने की कोशिश करता है कि संख्यात्मक रूप से आधे भाग बराबर होते हैं। लेकिन अलग-अलग माप की दो समान आकृति की वस्तुओं के आधे हिस्से आपस में बराबर नहीं होते। प्रश्न-8 एक इंटरैक्टिव प्रश्न है, जो यह पड़ताल करता है कि अगर हमें किसी संख्या का आधा पता हो, तो क्या हम पूरी संख्या का पता लगा सकते हैं।
अकसर हमसे किसी वस्तु का एक-तिहाई भाग निकालने के लिए कहा जाता है। लेकिन प्रश्न- 9 में इस बात पर विचार करना दिलचस्प हो जाता है कि अगर हमें किसी वस्तु का एक-तिहाई हिस्सा चाहिए, तो पहला कट कहाँ करना चाहिए। प्रश्न-10 भिन्नों के अनुमान से जुड़ा हुआ है।
हमने एक ही अवधारणा के इर्द-गिर्द रचे गए कई प्रश्नों को देखा। यह प्रश्न न केवल बच्चों की भिन्नों की समझ को परखते हैं, बल्कि किसी विशिष्ट प्रश्न को हल करते समय ज़्यादा गहराई से सोचने के लिए उन्हें प्रेरित भी करते हैं।
निष्कर्ष
प्रश्नों की रचना बच्चों को सीखने के विविध लक्ष्यों तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस बात की बहुत सम्भावना है कि विभिन्न प्रकार के प्रश्नों को इस तरह तैयार किया जाए कि वे कई तरह के शैक्षिक उद्देश्यों को पूरा कर सकें। आकलन का उद्देश्य केवल बच्चों के ज्ञान की जाँच करना नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें ऐसे प्रश्न भी शामिल होने चाहिए जो उनकी सोच को चुनौती दें और उनकी जिज्ञासा को जगाएँ।