पेपर फोल्डिंग के माध्यम से वृत्त को समझना

अनुवाद : निशान्‍त राणा | पुनरीक्षण : प्रतिका गुप्‍ता | कॉपी एडिटर : अनुज उपाध्‍याय

पेपर फोल्डिंग की गतिविधि किस तरह एक वृत्त को जानने-समझने में मदद कर सकती है। इस बारे में कक्षा-4 के विद्यार्थियों के साथ लेखक के अनुभव पढ़िए।

मैं कक्षा-\(4\) में विद्यार्थियों को उनके आस-पास की आकृतियों के बारे में समझ बनाने में मदद करने पर काम कर रहा था। विशेष रूप से, मैं चाहता था कि मेरे विद्यार्थी वृत्त के केन्द्र, त्रिज्या और व्यास को पहचान सकें।

इसके लिए आकृतियों के बारे में विद्यार्थियों की आवश्यक पूर्व-समझ जाँचने और फिर अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए मैंने निम्नलिखित योजना बनाई :

  • आस-पास की गोल और वृत्ताकार आकृतियों को देखें और पहचानें।
  • ऐसी वस्तुओं को इकट्ठा करें जो वृत्त की आकृति उकेरने में मदद करती हैं।
  • सिक्कों, चूड़ियों आदि का उपयोग करके वृत्त बनाएँ।
  • काग़ज़ को मोड़कर वृत्त बनाएँ।
  • अलग-अलग लम्बाई के धागों का उपयोग करके बढ़ते और घटते वृत्तों को समझें।
  • वृत्त से जुड़ी शब्दावली सीखें और उसका उपयोग करें।
  • परकार (कम्पास) का उपयोग करके एक वृत्त बनाएँ।

बच्चों ने आसानी से गोल और वृत्ताकार आकृतियों को पहचान लिया। उन्‍होंने बोतल के ढक्कन, कटोरे, चूड़ियों, चाँदा (प्रोट्रैक्टर) आदि का उपयोग करके वृत्त बनाए। फिर मैंने उनसे पूछा कि अगर इन वस्तुओं का उपयोग किए बिना छोटे या बड़े वृत्त बनाना हो तो वे क्या करेंगे। थोड़ा सोचने के बाद, उन्होंने फ़्रीहैंड वृत्त बनाने की कोशिश की (फोटो देखें)। लेकिन उन्हें समझ आया कि ये वृत्त उतने सटीक नहीं बने थे।

फ़्रीहैंड वृत्त बनाते हुए विद्यार्थी।
फ़्रीहैंड वृत्त बनाते हुए विद्यार्थी।

पेपर फोल्डिंग से वृत्त बनाना

जब मैंने कक्षा में काग़ज़ का उपयोग करके एक वृत्त बनाने के बारे में बात की तो सभी बच्चे इस बात को लेकर उत्सुक थे कि यह वृत्त कैसे बनाया जाएगा।

पेपर फोल्डिंग और कैंची से काटकर कुछ रचने की प्रक्रिया को किरिगामी कहते हैं। किरिगामी रचनात्मकता को ज्यामिति से जोड़ने वाली एक अद्भुत प्रक्रिया है। अधिकांश लोग समझते हैं कि काग़ज़ की शिल्पकला यानी सारस, फूल जैसी चीज़ें बनाना है, लेकिन इस सरल और गहन शिल्प के माध्यम से एक सटीक ज्यामितीय आकृति, जैसे कि एक वृत्त, बनाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। किसी सादे काग़ज़ को मोड़कर उससे एक वृत्त बनाना, एक वर्ग या त्रिभुज बनाने जितना सहज नहीं है, लेकिन सही तकनीक से ऐसा कर पाना निश्चित रूप से सम्भव है।

यह लेख बताता है कि किस तरह पेपर फोल्डिंग की कला का उपयोग वृत्त बनाने के लिए किया जा सकता है और कैसे कलात्मकता और गणित को मज़ेदार और शिक्षाप्रद तरीक़े से साथ लाया जा सकता है।

पेपर फोल्डिंग से वृत्त बनाने की चुनौती

पहली नज़र में, काग़ज़ मोड़कर एकदम सटीक वृत्त बनाना असम्भव लग सकता है। आख़िरकार, वृत्त को उन बिन्दुओं के समूह के रूप में परिभाषित किया जाता है जो एक केन्द्रीय बिन्दु से एक समान दूरी पर स्थित होते हैं। काग़ज़ पर हर मोड़ जहाँ सीधी रेखाएँ या तीखे कोण बनाता है, उससे एक विशुद्ध वक्र (घुमाव) बना पाना उल्टी बात करने जैसा लग सकता है।

हालाँकि, किरिगामी के सिद्धान्तों का उपयोग करके एक लगभग वृत्त बनाना सम्भव है। इस प्रक्रिया में आमतौर पर काग़ज़ को कई बार मोड़ा जाता है। हर मोड़ उसके आकार को परिष्कृत करता है। मोड़ने की प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक कि वह क़रीब-क़रीब वृत्ताकार रूप नहीं ले लेता।

पेपर फोल्डिंग से वृत्त बनाने की बुनियादी तकनीक

काग़ज़ मोड़कर वृत्त बनाने के कई तरीक़े हैं। सभी में काग़ज़ को सटीकता से मोड़ना और सममिति आवश्यक होती है। यहाँ एक वृत्त बनाने के लिए एक सामान्य तरीक़ा चरण-दर-चरण दिया गया है। सबसे पहले एक वर्गाकार काग़ज़ लें। आयताकार काग़ज़ भी लिया जा सकता है, लेकिन वर्गाकार काग़ज़ सममिति देता है और मोड़ने की प्रक्रिया को आसान बनाता है।

चरण-1. विकर्ण से मोड़ें

सबसे पहले, काग़ज़ को एक विकर्ण रेखा पर (एक कोने से तिरछे में विपरीत कोने तक) मोड़ें, फिर दूसरी विकर्ण रेखा पर मोड़ें। जब हम इस तरह मोड़कर काग़ज़ खोलते हैं तो काग़ज़ के केन्द्र में एक क्रॉस दिखाई देता है।

चरण-1
चरण-1

चरण-2 : आड़े और खड़े में काग़ज़ आधा मोड़ें

इसके बाद, काग़ज़ को आड़े और खड़े (क्षैतिज और लम्बवत स्थिति) में आधा मोड़ें। जब हम काग़ज़ को खोलते हैं, तो हम पाते हैं कि काग़ज़ के मध्य में दो और रेखाएँ बन गईं, जो पहले बने क्रॉस से होकर गुज़र रही हैं।

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चरण-3 : कोनों को केन्द्र की ओर मोड़ें

इसके बाद, काग़ज़ को इस तरह मोड़ें कि एक आयत बने और फिर इस तरह मोड़ें कि एक वर्ग बने। अब इससे त्रिभुज बनाने के लिए वर्ग के दो विपरीत कोनों को एक साथ लाएँ। त्रिभुज की दो एक-जैसी भुजाओं को एक साथ लाकर (मोड़कर) एक छोटा त्रिभुज बनाएँ और बाहर निकल रहे अतिरिक्त हिस्से को काट दें। काग़ज़ को खोलें, आपको एक बहुभुज मिलेगा।

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चरण-3

चरण-4 : आकार को परिष्कृत करें

बहुभुज को देख लेने के बाद काग़ज़ को फिर से मोड़ें और नुकीले कोनों को (काटकर) हटा दें और धीरे-धीरे इसे लगभग वृत्ताकार रूप दें। हालाँकि इन मोड़ों से सम्पूर्ण, सटीक गणितीय वृत्त नहीं बनेगा, लेकिन ये लगभग वृत्त बनाने में मदद करते हैं।

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चरण-4

पेपर फोल्डिंग से लगभग वृत्त क्यों मिलता है

काग़ज़ मोड़कर लगभग वृत्त बनाना सम्भव है क्योंकि यह ज्यामितीय निकटीकरण के गुणों पर आधारित है। जब भी आप किनारों को केन्द्र की ओर मोड़ते हैं, तो आप धीरे-धीरे सीधी भुजाओं (किनारों) की संख्या कम करते जाते हैं और एक आदर्श वृत्त के क़रीब एक आकार बनाते हैं। प्रत्येक मोड़ के साथ, काग़ज़ अधिक ‘वक्रित’ ज्यामिति की ओर बढ़ता है, भले ही परिणाम एक लगभग वृत्त ही हो। हमारे ऐसा करने के बाद, बच्चों ने प्रत्येक त्रिज्या खण्ड में रंग भरे।

यह नोट करना महत्त्वपूर्ण था कि इस बिन्दु पर बच्चों ने कहा कि प्रत्येक रंगे हुए हिस्से में, केन्द्र से किनारे तक जो सीधी रेखाएँ आ रही हैं, हर जगह उसकी लम्बाई समान है। फिर हमने ‘त्रिज्या’ शब्द पर चर्चा की। मैंने समझाया कि यह केन्द्र से वृत्त के किनारे तक आने वाली कोई भी रेखा हो सकती है। ऐसी सभी रेखाएँ समान लम्बाई की थीं। कुछ बच्चों ने जो काग़ज़ मोड़ा था वे उसमें आसानी से देख सकते थे। बच्चों ने यह भी देखा कि एक किनारे से दूसरे किनारे तक एक मोड़ है जो वृत्त के केन्द्र से होकर गुज़रता है और त्रिज्या की लम्बाई का दोगुना है। मैंने समझाया कि इसे वृत्त का व्यास कहा जाता है।

मोड़ की रेखाओं का उपयोग करके वृत्त के केन्द्र, त्रिज्या और व्यास पर चर्चा करने के बाद मैंने बच्चों से कक्षा से बाहर जाने और उन्होंने जो सीखा था, उसका उपयोग करके वृत्त बनाने के तरीक़ों के बारे में सोचने के लिए कहा।

बच्चे अपने पैरों का उपयोग करके एक वृत्त बनाते हैं
बच्चों ने रस्सी के दोनों छोर पर नुकीली वस्तुएँ बाँधी और वृत्त बनाया

दोनों मामलों में, जिस बात ने मुझे ख़ुश किया वह यह थी कि उन्होंने केन्द्र और त्रिज्या के महत्त्व को पहचाना। यहाँ तक कि रस्सी की लम्बाई बदलकर वे बड़े और छोटे वृत्त बना पा रहे थे। इसके बाद, इस पर चर्चा हुई कि अपनी नोटबुक में वृत्त कैसे बनाया जाए। इस चर्चा में एक बच्चे ने कहा कि उसने कुछ बच्चों को परकार से वृत्त बनाते देखा है। रस्सी के अनुभव का उपयोग करते हुए निम्नलिखित विधि सोची गई।

परकार की मदद से

  1. परकार के गोले में पेंसिल फसाएँ और परकार की नोक को वहाँ रखें जहाँ आप वृत्त का केन्द्र रखना चाहते हैं।
  2. परकार को उतना खोलें जितनी लम्बाई की आपको त्रिज्या चाहिए।
  3. परकार की नोक को स्थिर रखते हुए, परकार को घुमाकर वृत्त बनाएँ।

परिभाषाओं पर पहुँचना

  • केन्द्र : वृत्त का केन्द्रीय बिन्दु।
  • त्रिज्या : केन्द्र से वृत्त (रेखा) पर स्थित किसी भी बिन्दु तक की दूरी।
  • व्यास : वृत्त के एक सिरे से दूसरे सिरे तक की वह दूरी जो केन्द्र से होकर गुज़रती है। (त्रिज्या का दोगुना)
  • परिधि : वृत्त के चारों ओर (बाहरी दायरे) की दूरी।
  • चाप : वृत्त की परिधि का एक भाग।
  • जीवा : वृत्त की परिधि पर स्थित किन्हीं दो बिन्दुओं को जोड़ने वाला रेखाखण्ड।
  • स्पर्श रेखा : वह रेखा जो वृत्त को ठीक एक बिन्दु पर स्पर्श करती है।

वृत्त के बारे में सीखने के लिए गतिविधियाँ और प्रश्न

  1. एक वृत्त बनाएँ : परकार या गोल वस्तु का उपयोग करके एक वृत्त बनाएँ।
  2. त्रिज्या और व्यास मापें : एक वृत्त की त्रिज्या और व्यास को मापने के लिए पैमाने का उपयोग करें। यह कक्षा में किया गया था।
  3. एक वृत्त के चारों ओर चलें : किसी गोल वस्तु, जैसे फ़्रिसबी या प्लेट, के चारों ओर चलकर परिधि को समझें।
  4. वृत्त की विशेषताओं पर चर्चा करें। हमारी चर्चा के निष्कर्ष थे :
    • एक वृत्त में कोई कोने या किनारे नहीं होते।
    • वृत्त पर स्थित सभी बिन्दु इसके केन्द्र से समान दूरी पर होते हैं।
    • आप उन सभी बिन्दुओं को जोड़कर एक वृत्त बना सकते हैं जो केन्द्र से समान दूरी पर हैं।

वृत्त हमारे चारों ओर हैं! वृत्त को समझना गणित, विज्ञान और यहाँ तक कि हमारे दैनिक जीवन में भी मदद कर सकता है। याद रखें, एक वृत्त एक गोल आकार है जिसमें एक केन्द्र, त्रिज्या, व्यास और परिधि होती है।

अनुप्रयोग और अन्तर्दृष्टि

काग़ज़ मोड़कर वृत्त बनाना केवल एक शिल्पकला नहीं है; यह ज्यामिति और सममिति के बारे में महत्त्वपूर्ण अन्तर्दृष्टि भी प्रदान करता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से, आप यह गहराई से समझ सकते हैं कि आकार एक-दूसरे से कैसे सम्बन्धित हैं और सीधी रेखाओं को वक्रीय बनाने के लिए कैसे संशोधित किया जा सकता है। यह तकनीक यह भी दर्शाती है कि काग़ज़ का उपयोग गणितीय गुणों जैसे सटीकता, अनुमान और रूपान्तरण को समझने के लिए कैसे किया जा सकता है।

इस हैंड्स-ऑन प्रक्रिया को करके आप न केवल ज्यामितीय आकृतियों की सुन्दरता के प्रति अधिक सराहनीय नज़रिया विकसित करते हैं, बल्कि प्रत्यक्ष रूप से यह भी अनुभव करते हैं कि ज्यामिति के नियम वास्तविक दुनिया में कैसे प्रकट हो सकते हैं।

शिक्षणशास्त्र में, इस प्रकार की काग़ज़ मोड़ने की गतिविधियों का उपयोग विद्यार्थियों को वृत्त, सममिति और निकटीकरण के बारे में सिखाने के लिए किया जा सकता है। दृश्य और करके देख सकने वाली शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थी सपाट, सीधी आकृतियों और वक्रित, वृत्ताकार रूपों के बीच के सम्बन्ध देख सकते हैं।

निष्कर्ष

हालाँकि काग़ज़ मोड़कर एक आदर्श गणितीय वृत्त नहीं बना सकते, लेकिन यह सरल साधनों और विधियों का उपयोग करके लगभग इस सुन्दर आकृति को बनाने का एक आकर्षक तरीक़ा प्रदान करता है। काग़ज़ मोड़ने की प्रक्रिया हमें सीधी रेखाओं और वक्रों के बीच के सम्बन्ध के बारे में सिखाती है और गणितीय सिद्धान्तों की अनुभवात्मक समझ प्रदान करती है। चाहे कलात्मक अभिव्यक्ति के लिए हो, शैक्षिक उद्देश्यों के लिए या व्यक्तिगत जिज्ञासा के लिए, काग़ज़ मोड़कर वृत्त बनाने की क्रिया ज्यामिति की एक अनूठी और पारितोषिक खोज प्रदान करती है।

  1. Learning outcome – Identify the centre, radius and diameter of a circle from Sims and NCF 2005.
  2. https://youtu.be/cSst1EW7LtY?si=X37BdCikTrRj6EwO

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