फ़ाउंडेशनल स्‍टेज और आरम्भिक चरणों में डेटा प्रबन्धन सिखाने के लिए बड़ी किताबों का इस्तेमाल

अनुवाद : हिमालय तहसीन । पुनरीक्षण : सुशील जोशी । कॉपी एडिटर : शहनाज़

‘बड़ी किताबें’ और साथ-साथ पढ़ने के अनुभव

‘बड़ी किताबें’ सामान्य से बड़े आकार की कहानी की किताबें होती हैं। इनके पन्नों पर अक्सर बड़ी-बड़ी तस्वीरें होती हैं; शब्द कम होते हैं और बड़ी साइज़ में छपे होते हैं। ऐसी किताब को एक से ज़्यादा पढ़ने वाले एक साथ बड़े आराम से पढ़ सकते हैं। पिछले कुछ दशकों में, कक्षा में छोटे बच्चों को लेकर ‘साथ-साथ पढ़ने’ के अनुभवों के लिए बड़ी किताबों का इस्तेमाल बढ़ा है (Karges-Bone, 1992) (3)।

किताबों का इस्तेमाल
चित्र-1 : साथ-साथ पढ़ने का अनुभव।

शब्‍द चित्र -1

कल्पना करें — कक्षा 2 के कुछ बच्चे अपनी शिक्षिका के आस-पास इकट्ठे होकर शिक्षिका की गोद में खुली एक बड़ी किताब में झाँक रहे हैं। मुखपृष्ठ पर लिखा है ‘Dear Zoo’ (प्यारे चिड़ियाघर)। शिक्षिका रिनी बच्चों का ध्यान मुखपृष्ठ की ओर ले जाती हैं, जहाँ एक बड़े बक्से में बन्द बब्बर शेर कुछ-कुछ दिख रहा है। किताब के शीर्षक और चित्र पर कुछ देर बात करने के बाद रिनी पन्ना उठाकर पहले पेज पर आती हैं, और पढ़ती हैं, “मैंने चिड़ियाघर को लिखा था कि मुझे एक पालतू जानवर भेजें।” इस पृष्ठ के ज़्यादातर हिस्से पर बड़ा-सा बक्सा बना है, जिस पर लिखा है, ‘बहुत भारी!’

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चित्र-2 : रॉड कैम्पबैल की पुस्तक ‘Dear Zoo’ आपसी बातचीत और क्रिया करते हुए पढ़ने वाली किताब है। पन्ना उठाकर {lift-the-flap} पढ़ने वाली यह पुस्तक, बड़ी किताब के रूप में भी मिलती है।

बच्चे अन्दाज़ा लगाने की कोशिश करते हैं कि कौन-सा भारी जानवर पालतू पशु की तरह पाला जा सकता है। कुछ कहते हैं हाथी, तो कुछ हिप्पो! रिनी पन्ना पलटती हैं — ये तो हाथी है! वे आगे पढ़ती हैं, “उन्होंने मुझे एक… हाथी भेज दिया! वह बहुत-ही बड़ा था! मैंने उसे वापस भेज दिया।” रिनी ऐसे सवाल पूछती हैं जो बच्चों को सोचने का मौक़ा देते हैं— हम हाथी को कहाँ रखेंगे? वो क्या खाएगा? और कहानी आगे बढ़ती जाती है… इसके बाद के पन्नों की तस्वीरें कुछ और जानवरों का कुछ-कुछ हिस्सा दिखाती हैं — जिराफ़, बब्बर शेर, ऊँट, साँप, बन्दर, मेंढक, और आख़िरकार कुत्ते का पिल्ला! रिनी हर बार या तो ख़ुद पन्ना पलटती हैं या किसी बच्चे को पन्ना पलटने को कहती हैं। कुछ बच्चे पिल्ले को पालतू के तौर पर रखने को राज़ी नहीं हैं — बन्दर पालने में ज़्यादा मज़ा आएगा, है ना!

किताब पढ़ने के बाद, रिनी ने बड़ी किताब का इस्तेमाल कई अन्य गतिविधियों के लिए किया, जैसे — बच्चों से इस बारे में बात की कि वे कौन-से पालतू जानवर को अपने लिए रखना चाहेंगे; उन्हें जानवरों की और कहानियाँ सुनाईं; जानवरों के मुखौटे बनवाए और उनके रोल-प्ले करवाए; और बच्चों से चिड़ियाघर को चिट्ठी लिखवाई जिसमें उन्होंने अपने लिए एक पालतू जानवर पाने का अनुरोध किया।

जैसा कि ऊपर बताया गया है, रिनी बच्चों में साक्षरता के कौशल का विकास करने के लिए, उन्हें साथ-साथ पढ़ने के अनुभव देने के लिए अपने क्लासरूम में अक्सर बड़ी किताबों का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन आजकल वे कहानियों के ऐसे स्रोतों की तलाश भी कर रही हैं, जिनसे अन्य विषयों में उनका शिक्षण समृद्ध हो सके। एक रोज़ उन्हें कहानी की एक और किताब मिली — ‘What would you like to drink?’ इसे आनन्द जनार्दन ने लिखा है और चित्रांकन आयशा पंजाबी ने किया है (Janardhan, 2021) (2)। (यह हिन्‍दी में ‘आप क्‍या पिएँगे?’ नाम से उपलब्‍ध है। इसका हिन्‍दी अनुवाद डॉ. अमरदीप ने किया है।) यह कहानी तारा नाम की छोटी बच्ची के बारे में है। उसके घर पर जन्मदिन की पार्टी है, जिसमें 15 से ज़्यादा मेहमान आए हैं। वे सब क्या-क्या पीना चाहते हैं, यह याद रखने में तारा अपने दादाजी की मदद करती है। इस कहानी में किसी रोज़मर्रा की समस्या के सन्दर्भ में डेटा इकट्ठा करने और व्यवस्थित करने की अवधारणा निहित है। रिनी इस कहानी को पढ़ती हैं, और उन्हें अपनी गणित की कक्षा के लिए एक शानदार ख़्याल आता है!

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चित्र-3 : किताब ‘What would you like to drink?’, जिसे आनन्द जनार्दन ने लिखा है और चित्रांकन आयशा पंजाबी ने किया है (Janardhan, 2021) (2)। यह कहानी किसी रोज़मर्रा की समस्या के सन्दर्भ में डेटा का समूहीकरण करने और गिनती करने के बारे में बताती है।

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रिनी ने इस कहानी का प्रिंटआउट बड़े फ़ाँट में ए-3 आकार के काग़ज़ पर लिया, और इसका इस्तेमाल बड़ी किताब की तरह करना तय किया। वे इस बड़ी किताब को व्हाइटबोर्ड के स्टैण्ड पर लगाती हैं, और उसके अलग-अलग हिस्सों की ओर इशारे के लिए लकड़ी के रूलर का इस्तेमाल करती हैं। वे बड़ी किताब का इस्तेमाल करते हुए साथ-साथ पढ़ने का सत्र संचालित करती हैं, जिसमें वे बच्चों की गणितीय सोच को जगाने के लिए सवाल पूछती हैं। जब दादाजी हर पेय की मात्रा (गिलासों की संख्या) को लेकर उलझन में होते हैं, तो तारा उनकी मदद करती है। रिनी पूछती हैं, “आपको क्या लगता है कि तारा किस तरह से दादाजी की मदद करेगी?” कुछ बच्चों ने कहा, तारा बारी-बारी से हर पेय का नाम लेगी और मेहमानों से अपनी-अपनी पसन्द के पेय के लिए हाथ खड़ा करने को कहेगी। वह उठे हुए हाथों की गिनती करके अपने दादाजी को बता देगी। ” एक बच्चे ने कहा, “तारा मेहमानों से अपनी पसन्द के पेय के अनुसार कमरे के अलग-अलग कोनों में खड़ा होने को कहेगी।

एक अन्य बच्चे का जवाब ज़रा अलग था, “रैस्टोरैण्ट में खाना परोसने वालों की तरह तारा एक-एक मेहमान से उनके पेय का ऑर्डर ले सकती है।” इतनी तरह के जवाब पाकर रिनी बहुत ख़ुश हैं! ये जवाब बताते हैं कि उनकी कक्षा के बहुत–से बच्चे डेटा प्रबन्धन की तकनीकों के औपचारिक परिचय के लिए तैयार हैं। फिर रिनी अगले दो पन्ने पलटती हैं। कहानी को आगे पढ़ने से पहले, वे बच्चों से कहती हैं कि तस्वीरों को देखकर बताएँ कि समस्या को हल करने का तारा का तरीक़ा क्या था। रिनी की मदद से बच्चे इस नतीजे की ओर बढ़ते हैं कि पहले तारा काग़ज़ पर टेबल के एक कॉलम में अलग-अलग पेय की सूची बनाती है, जैसे — चाय, कॉफ़ी, जूस, और दूध। फिर वह हर मेहमान से उनकी पसन्द पूछकर उन्हें टेबल के अगले कॉलम में भरती जाती है।

अब, कहानी को ख़त्म करके रिनी पूछती हैं, “तारा ने जो रास्ता निकाला, उसके बारे में आप लोग क्या सोचते हो? आप जो सुझा रहे थे, उससे यह कितना अलग है? आपके और तारा के तरीक़ों में क्या-क्या एक जैसा है? क्या आपको लगता है कि हम अपनी ज़िन्दगी में ऐसी ही जिन अन्य दिक़्क़तों का सामना करते हैं, उन्हें हल करने में यह तरीक़ा काम आ सकता है? ” बाद में, रिनी बच्चों से तालिका को देखकर, अलग-अलग पेय के बारे में मेहमानों की पसन्द पर अपनी राय बताने को भी कहती हैं। उदाहरण के लिए, यह अनुमान लगाना/आकलन करना कि कौन-सा पेय सबसे ज़्यादा पसन्द किया गया, कौन-सा सबसे कम माँगा गया, और दादाजी को इन पेय को बनाने में किन सामग्रियों की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होगी आदि।

रिनी अपनी कक्षा में जो फ़ॉलोअप गतिविधियाँ करती हैं, वे इस प्रकार हैं :

  • रिनी पूछती हैं, “अगर हम लोग कक्षा में पार्टी करें, तो आप लोग किस-किस तरह के पेय पीना पसन्द करेंगे?” बच्चों के जवाबों से छाछ, बेल का शर्बत, चाय और नीबू-पानी निकलकर आते हैं, जो कि ज़्यादातर स्थानीय रूप से भी पिए जाते हैं।
  • हर पेय की मात्रा (गिलासों की संख्या) तय करने के लिए रिनी पूछती हैं कि क्या बच्चे वैसी ही तालिका बनाना चाहेंगे, जैसी तारा ने अपने दादाजी की मदद करने के लिए बनाई थी। सबसे पहले रिनी चार पेय के नाम लिखती हैं। वे कौशल नाम के बच्चे को आगे बुलाकर तालिका भरने के लिए कहती हैं। कौशल उसी तरह हर बच्चे से उसकी पसन्द का पेय पूछकर तालिका में एक-एक करके निशान लगाता जाता है, जिस तरह कहानी की किताब में तारा ने किया था।
    इसके नतीजतन चार्ट-1 तैयार हुआ :
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चार्ट-1: रिनी की कक्षा के बच्चों की पेय पदार्थों की पसन्द को दर्ज करने वाली तालिका।
  • इसके बाद रिनी और बच्चे अपनी ख़ुद की बड़ी किताब बनाना तय करते हैं। वे सालगिरह की पार्टी की जगह कक्षा की पार्टी रखते हैं, और उसमें अपने पसन्दीदा पेय रखते हैं। तो कहानी शुरू होती है, “एक बार की बात है, राजस्थान के सिरोही ज़िले के पोसालिया क़स्बे में, चौथी कक्षा के 27 बच्चों ने एक पार्टी रखना तय किया…” रिनी बड़ी किताब को रीडिंग कॉर्नर में रख देती हैं और देखती हैं कि बच्चे किताब के पास जमा होते हैं और उसे छोटे-छोटे समूहों में पढ़ते हैं।
  • इस अनुभव के बाद, रिनी ने वादा किया कि आने वाले शनिवार को कक्षा पार्टी होगी, जहाँ सब मिलकर हर एक का पसन्दीदा पेय तैयार करेंगे और परोसेंगे!

आने वाले दिनों में रिनी इस ग्रेड स्तर के लिए, पाठ्यचर्या की अपेक्षा के मुताबिक़, बच्चों के डेटा प्रबन्धन के कौशलों का और विकास करने के लिए पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी की गणित की पाठ्यपुस्तक, कक्षा 2, अध्याय 11: आँकड़ों के साथ कार्य) (एनसीईआरटी, 2023) (9) में दिए गए प्रसंगों का इस्तेमाल करती हैं। पहले, वे चित्रों को ध्यान से देखने और उनका वर्णन करके विभिन्न प्रसंगों को समझने में बच्चों की मदद करती हैं। इसके बाद, बच्चे दी गई श्रेणियों, जैसे पसन्दीदा रंग, फलों और वाहनों के प्रकार आदि के लिए डेटा को गिनते हैं और इकट्ठा करते हैं। वे जो पाते हैं, उसे तालिका के रूप में दर्ज करते हैं, और सरल चित्रलेखों [pictographs] में दर्शाते हैं और चित्रलेखों को देखते हुए अपने निष्कर्षों पर चर्चा करते हैं।

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चित्र-4 : स्रोत : एनसीईआरटी की गणित की पाठ्यपुस्तक, कक्षा 2, अध्याय 11: आँकड़ों के साथ कार्य, पृष्ठ 125-126 (एनसीईआरटी, 2023) (9)

इसके बाद, रिनी बच्चों को एक काम सौंपकर अपनी कक्षा में डेटा प्रबन्धन के विषय को समेटती हैं, जिसमें बच्चों ने पेय पदार्थों की जो तालिका पहले बनाई थी, उसका चित्रलेख उन्हें बनाना था। बच्चों ने जो चित्रलेख बनाया, वह नीचे दिया गया है। बच्चों ने इसे बड़ी किताब में जोड़ दिया।

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चार्ट-2 : चार्ट-1 के आधार पर, रिनी की कक्षा के बच्चों की पेय पदार्थों की पसन्द को दर्शाता चित्रलेख।

गणित सिखाने में बड़ी किताब का इस्तेमाल

रिनी का यह अनुभव गणित की किसी अवधारणा से बच्चों का परिचय कराने के लिए पढ़ने के अन्तरंग और सहभागी अनुभव का उदाहरण है। हालाँकि, आमतौर पर भाषा और साक्षरता के विकास के लिए तो ऐसे अनुभवों की अनुशंसा की जाती है\(^{1}\),

लेकिन छोटे बच्चों के लिए गणितीय अवधारणाओं को तुकान्त बाल कविताओं और कहानियों जैसे कथात्मक वर्णनों में पिरोने को लेकर स्वीकृति और अमल बढ़ रहा है (एनसीएफ़–एफ़एस 2022, पृष्ठ 141) (7)। ऐसे एकीकृत दृष्टिकोण जटिल गणितीय विकास की अवधारणात्मक समझ में मददगार होते हैं और उसे विस्तार देते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि जाने-पहचाने सन्दर्भों की वजह से बच्चे गणित को समझने के लिए अपने पूर्व-ज्ञान का इस्तेमाल कर पाते हैं। गणित और साहित्य को साथ मिलाने से नई शब्दावली गढ़ने के अवसर बनते हैं। इससे अमूर्त अवधारणाओं को एक-दूसरे से जोड़ा जा सकता है। साथ ही, यह भी दिखाने का मौक़ा मिलता है कि कैसे पूरी पाठ्यचर्या में गणित का इस्तेमाल किया जा सकता है (Koellner et al , 2009) (4)। हमने देखा कि रिनी के बच्चों ने तारा के दादाजी के लिए तरह-तरह के समाधान सुझाए। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि यह समस्या उनके जाने-पहचाने सन्दर्भों से जुड़ी थी, और वे उसको सुलझाने में पूरे मन से लग गए थे। यह पाया गया है कि छोटे बच्चों को मौक़ा दिया जाए तो वे अपने डेटा को प्रदर्शित करने के विविध तरीक़े अपनाते हैं — जैसे चित्रकारी/ख़ाके बनाना, सरल चित्रलेख और बार ग्राफ़ बनाना, स्टिकी नोट्स से ब्लॉक चार्ट बनाना इत्यादि (English, 2013) (5)। यहाँ, एक सामान्य-सी सरल कहानी के इस्तेमाल ने रिनी के बच्चों को ऐसा ही मौक़ा दे दिया।

बच्चों के साहित्य के प्रकाशकों पर सरसरी नज़र डालने पर मालूम होता है कि बाज़ार में ऐसी कहानियों की किताबों की बाढ़ आ गई है जिनमें साफ़तौर पर गणितीय अवधारणाएँ पिरोई हुई हैं। आमतौर पर इन्हें ‘स्टैम’ बुक्स (STEM— Science–Technology–Engineering–Mathematics [विज्ञान–प्रौद्योगिकी–अभियांत्रिकी–गणित पुस्तकें]) कहा जाता है। शुरुआती सालों में, उनके कथानक में आमतौर पर पर्यावरणीय अध्ययन (EVS) और गणित से जुड़ी अवधारणाएँ पिरोई हुई होती थीं — जैसे कि पेड़-पौधे, स्वास्थ्य और स्वच्छता, पशु–पक्षी, गणितीय संक्रियाएँ, आकृतियाँ और वस्तुएँ, मापन, समय इत्यादि। भारत में बाल-साहित्य के लोकप्रिय प्रकाशकों की पुस्तकों के कुछ उदाहरण आगे दिए गए हैं।

अप्पुकुट्टन को कैसे तौलें?

एकलव्य
लेखक : इन्‍दु हरिकुमार
चित्रांकन : इन्‍दु हरिकुमार शामिल अवधारणाएँ : वज़न (मानक व अमानक इकाइयाँ)

How Do We
How Many

बोलो कितने

प्रथम बुक्स
लेखक : सुदेशना शोम घोष
चित्रांकन : शायन मुखर्जी
शामिल अवधारणाएँ : गिनती

जादुई बीज (Anno’s Magic Seed)

भारत ज्ञान विज्ञान समिति
लेखक : मित्सुमासा ऐनो
हिन्दी अनुवाद : अरविन्‍द गुप्ता
शामिल अवधारणाएँ : जोड़, गुणा तथा उच्‍च कक्षाओं में अंकगणित और ज्‍यामितीय की अवधारणाएँ

Anno Magic Seeds
Find The Half-Circles

Find The Half-Circles

नेशनल बुक ट्रस्ट
लेखक : बद्री नारायण
शामिल अवधारणाएँ : आकृतियाँ (अर्ध-वृत्त)

एक में दो (Two In One)

स्कोलास्टिक
लेखक : गुलज़ार चित्रांकन : अंजना गुहा ठाकुरता शामिल अवधारणाएँ : गिनती

एक में दो (Two In One)
When Will Amma

व्हेन विल अम्मा बी बैक

प्रथम बुक्स
लेखक : प्रतिभा स्वामीनाथन चित्रांकन : अलंकृता अमाया
शामिल अवधारणाएँ : मापन (समय)

Keshav’s Kolam

करडी टेल्स
लेखक : शोभा विश्वनाथ चित्रांकन : लीज़ा जॉन
शामिल अवधारणाएँ : पैटर्न, सममिति (Symmetry)

Keshav’s Kolam
Mina Makes A Dash

Mina Makes A Dash

प्रथम बुक्स
लेखक : अंजली अलप्पट चित्रांकन : योगी चन्‍द्रशेखरन
शामिल अवधारणाएँ : मापन (लम्बाई)

Gola Gola

प्रथम बुक्स
लेखक : अथैया अशोक कुमार चित्रांकन : अथैया अशोक कुमार
शामिल अवधारणाएँ : वेन डायग्राम

Gola Gola
The Animal Plot

The Animal Plot

प्रथम बुक्स
लेखक : लोकेश खोड़के चित्रांकन : लोकेश खोड़के
शामिल अवधारणाएँ : बार ग्राफ़

बच्चों का ऐसा साहित्य शिक्षकों के लिए बेहतरीन संसाधन साबित हो सकता है। इसे वे अपनी गणित की कक्षा में तरह-तरह से शामिल कर सकते हैं। इसके साथ ही, शिक्षक ग़ैर-स्टैम [non-STEM] बाल–साहित्य में गणितीय विचारों को जोड़ते हुए बच्चों के साथ काम करने की सम्भावना भी तलाश सकते हैं। उदाहरण के लिए, शिक्षक अपनी कल्पनाशक्ति का इस्तेमाल करके, पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनी-सुनाई जा रही कहानियों, जैसे— ‘जैक एण्ड द बीनस्टॉक’ या ‘द मंकी एण्ड द कैपसैलर {टोपीवाला और बन्दर}’, को गणित के नज़रिए से अपना सकते हैं। वे इनके ज़रिए गिनती, जोड़ना, घटाना, मापन, तुलना जैसी विभिन्न अवधारणाएँ सिखा सकते हैं। एनसीईआरटी की गणित की नई पाठ्यपुस्तकों में भी गणितीय कहानियाँ बनाने के काफ़ी प्रसंग हैं। कहानियों का इस्तेमाल बच्चों को समस्या समाधान के कौशल विकसित करने का सहज अवसर भी देता है, जो गणित की कक्षा में शिक्षण का एक महत्त्वपूर्ण लक्ष्य भी है (एनसीएफ़-एसई 2023, पृष्ठ 269 (8)।

डेटा प्रबन्धन

बुनियादी चरण में, संख्या और उसके सम्बन्ध, गणित की बुनियादी संक्रियाएँ, आकृतियाँ और स्थानगत समझ, पैटर्न, और मापन के साथ ही डेटा प्रबन्धन गणित के अधिगम का प्रमुख घटक या क्षेत्र है। आज की दुनिया में, हर ओर से बड़ी तादाद में डेटा की लगातार बरसात हो रही है। ऐसे में, जीवन के लगभग हर क्षेत्र में बार ग्राफ़, पाई चार्ट [pie graph] इत्यादि जानकारियों के आदान-प्रदान के आम तरीक़े बन गए हैं। अतः डेटा प्रबन्धन की अच्छी समझ होना बच्चों की गणितीय शिक्षा का महत्त्वपूर्ण घटक है (Shirali, 2016) (10)। ‘बुनियादी चरण के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा’ (एनसीएफ़–एफ़एस 2022) में डेटा प्रबन्धन को ‘डेटा का संग्रह करने के बारे में समझना, उसे एकत्र करना और उसका विश्लेषण करना’ के रूप में परिभाषित किया गया है (एनसीएफ़–एफ़एस 2022, पृष्ठ 121) (7)। इस रूपरेखा के अनुसार, बुनियादी चरण में डेटा के प्रबन्धन के तहत दी गई चीज़ों को समूहों में छाँटना, वर्गीकृत करना और उन्हें गिनना शामिल है (एनसीएफ़–एफ़एस 2022, पृष्ठ 333) (7)।

स्कूल से इतर वास्तविक जीवन के सन्दर्भों में, बच्चे स्वाभाविक रूप से चीज़ों का समूहीकरण और गिनती करते हैं, जैसे कि अपने खिलौनों से खेलते वक़्त, खाने की मेज़ लगाते और समेटते हुए। वे जब पहली बार स्कूल के औपचारिक दायरे में दाख़िल होते हैं, तो उनके ये अनुभव विस्तार पाते हैं — हाज़िरी का समय, अपने लिए खेल का चुनाव करना, किसी प्रतियोगिता में शामिल होना या उसे देखना ऐसे ही कुछ अवसर हैं।

जब बच्चे शुरुआती बाल्यावस्था में वास्तविक अनुभवों के ज़रिए छाँटने और वर्गीकरण करने के कौशल विकसित करते हैं, तब उन्हें चित्रलेख और ब्लॉक चार्ट का इस्तेमाल करके इस डेटा को प्रदर्शित करना सिखाने में मदद की जानी चाहिए। ऐसे अनुभव बच्चों को अपने आस-पास अलग-अलग पैटर्न पर ध्यान देने और ऐसे कौशल विकसित करने में मददगार होते हैं, जिन्हें वे स्कूली शिक्षा के आगे के चरणों में डेटा प्रबन्धन के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, आरम्भिक चरण में, डेटा का संग्रह, उसे व्यवस्थित करना और उसे दर्शाना, तुलनात्मक रूप से अधिक अमूर्त रूप ले लेता है — जैसे कि टैली चिह्न [tally marks], ग्राफ़ बार, पाई चार्ट बनाना। इसके साथ ही, इस चरण में ऐसे प्रस्तुतिकरणों को पढ़ने, उनके अर्थ को समझने तथा उनसे नतीजे निकालने की क्षमता का विकास होता है (Shirali, 2016) (10)।

डेटा प्रबन्धन के बारे में बच्चों की समझ में कमियाँ

जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, और बुनियादी चरण से आरम्भिक चरण और उससे आगे बढ़ते हैं, वैसे-वैसे उन्हें गणित के साथ ज़्यादा अमूर्त रूपों में काम करना पड़ता है। अफ़सोस की बात है कि आरम्भिक गणित में डेटा का प्रबन्धन उपेक्षित क्षेत्र है। अगर शुरुआती सालों में बच्चों ने ठोस रूपों में जानकारियों को छाँटने और उनका वर्गीकरण करने का अभ्यास नहीं किया है, तो उनके लिए तालिका, चार्ट और ग्राफ़ के रूप में अमूर्त डेटा के साथ काम करना ज़्यादा मुश्किल हो जाता है। जैसे हो सकता है कि ऐसा कोई बच्चा, कक्षा 4 का विद्यार्थी होने के बावजूद यहाँ दिए गए चार्ट 3 के चित्रलेखों को देखकर निम्नलिखित बातों को समझने में मुश्किलों का सामना करे —

  • चित्रलेख का हर हिस्सा किसका प्रतिनिधित्व करता है (जैसे प्रत्येक हरा त्रिकोण 3 बच्चों का प्रतिनिधित्व करता है), चार्ट का शीर्षक, और डेटा के बारे में अन्य लेबल।
  • कि इस चार्ट को देखकर, हर काम में लगे बच्चों की संख्या, और बच्चों की कुल संख्या की गणना की जा सकती है।
  • यह कि ‘ज़्यादा’, ‘कम’ और ‘किसी के बराबर’ को इस चार्ट के ज़रिए जाना जा सकता है। उदाहरणस्वरूप, सबसे ज़्यादा बच्चे कौन-सा काम कर रहे हैं?
  • कि ये सारी जानकारी इस एक चार्ट में ही दिखाई जा सकती है।
  • कि ये सारी जानकारी उनकी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से जुड़ी हुई है, और वे ख़ुद भी अपने आस-पास से इस तरह का डेटा इकट्ठा कर सकते हैं और इस प्रकार दिखा सकते हैं।
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चार्ट–3 : नाटक के लिए किसी कक्षा के बच्चों द्वारा किए जा रहे अलग-अलग कामों को दर्शाता चित्रलेख।

स्रोत : एनसीईआरटी की गणित की पाठ्यपुस्तक; कक्षा 4, अध्याय 14: स्मार्ट चार्ट, हिन्दी पृष्ठ 167, (एनसीईआरटी, 2007/2024)।

जैसे-जैसे बच्चे ऊँची कक्षाओं में जाते हैं, डेटा ज़्यादा जटिल तरीक़ों से पेश किया जाने लगता है। डेटा को टैली मार्क्स (मिलान चिह्नों), बार ग्राफ़, पाई चार्ट आदि का उपयोग करके प्रस्तुत किया जाता है। बच्चे मिलान चिह्नों का पाँच के समुच्चयों में ग़लत तरह से समूह बना सकते हैं, वे पैमाने के इस्तेमाल में अस्पष्टता के कारण ग्राफ़ की ग़लत व्याख्या कर सकते हैं, या भिन्नों को समझने में मुश्किल की वजह से पाई चार्ट की ग़लत व्याख्या कर सकते हैं।

सारांश

डेटा प्रबन्धन के बारे में ग़लतफहमियों के कारण लगभग वैसे ही हैं जैसे कि अन्य गणितीय अवधारणाओं के मामले में हैं — पाठ्यपुस्तकों में विषयवस्तु को किस क्रम में रखा गया है और किस तरह से पेश किया गया है; इसके साथ ही शिक्षकों की शिक्षणशास्त्रीय कमियाँ हैं जिनकी वजह से बच्चों को वास्तविक और अर्थपूर्ण स्थितियों में डेटा का संग्रह करने, छाँटने और दर्शाने का व्यावहारिक अनुभव ज़्यादा नहीं मिल पाता है। बाल-साहित्य का उपयोग क्लासरूम में गणितीय अवधारणाओं को विकसित करने और अमल में लाने के लिए ऐसे अर्थपूर्ण प्रसंग उपलब्ध करवाने में मददगार हो सकता है, जो बच्चों के लिए मायने रखते हों। ख़ासतौर पर बड़ी किताबों की बात करें तो, ये नन्हें शिक्षार्थियों के साथ काम के लिए उनके विकास के अनुरूप उपयुक्त साधन हैं— उनके बड़े और देखने में आकर्षक पन्ने डेटा प्रबन्धन की अवधारणाओं को प्रभावी रूप से दर्शाते हैं, और सीखने की प्रक्रिया को आपसी बातचीत और क्रियाओं के साथ सुगम बनाते हैं। जब शिक्षक मौजूदा कहानी की किताबों से बड़ी किताबें बनाते हैं, या बच्चों से बातचीत करते हुए और कहानियों पर उनके साथ मिलकर बड़ी किताबें बनाते हैं, तो इससे शिक्षण के लिहाज़ से समृद्ध और प्रासंगिक सन्दर्भ निकलकर आते हैं। ऐसे सन्दर्भ गणित के शिक्षण तक ही सीमित नहीं होते हैं, बल्कि भाषा और अन्य विषयों, जैसे ‘हमारे आस–पास की दुनिया’ (पर्यावरण अध्ययन) {The World Around Us (EVS)}, के लिए भी हमें ज़रूरी सन्दर्भ मिलते हैं। बच्चे भी अपने फुरसत के समय में बड़ी किताबों को बार-बार पढ़ना पसन्द करते हैं, जो पढ़ने में उनकी दिलचस्पी बढ़ाने और उन्हें उत्कट पाठक बनाने के उद्देश्य को पूरा करता है (कार्गस–बोन, 1992) (3)।

उदाहरण के लिए, बच्चों में कहानियों के लिए रुचि विकसित करना, छपी हुई सामग्री से परिचय बढ़ाना, पढ़ने के तरह-तरह के तरीक़े सामने रखना, शब्द–भण्डार को बढ़ाना, और पढ़ने के शुरुआती कौशलों का विकास करना, जिनमें शब्दों की पहचान और ध्वनियों व अक्षरों में रिश्ते बनाना शामिल हैं।

    1. Didi’s Knowledge (English), written by Rachita Udaykumar, illustrated by Kaveri Gopalakrishnan, published by Pratham Books (© Pratham Books, 2015) under a CC BY 4.0 license on StoryWeaver. Read, create and translate stories for free on www.storyweaver.org.in
    2. Janardhan, A. (2021). What would you like to drink? https://storyweaver.org.in/. https://storyweaver. org.in/en/stem-literacy-programme/stories/371579-what-would-you-like-to-drink?language=en
    3. Karges-Bone, L. (1992). Bring on the Big Books. The Reading Teacher, 45(9), 743–744. http://www.jstor.org/stable/20200981
    4. Koellner, K., Wallace, F. H., & Swackhamer, L. (2009). Integrating Literature to Support Mathematics Learning in Middle School. Middle School Journal, 41(2), 30–39. https://dohttps://www.tandfonline.com/doi/abs/10.1080/00940771.2009.11461710i.org/10.1080/00940771 .2009.11461710
    5. English, L. D. (2013). Surviving an Avalanche of Data. Teaching Children Mathematics, 19(6), 364–372. https://doi.org/10.5951/teacchilmath.19.6.0364
    6. National Council for Educational Research and Training (NCERT). (2007/2024). Math magic (Class 4). https://ncert.nic.in/textbook.php?demh1=0-14
    7. National Council for Educational Research and Training (NCERT). (2022). Foundational Stage National Curriculum Framework. https://ncert.nic.in/pdf/NCF_for_Foundational_Stage_20_ October_2022.pdf
    8. National Council for Educational Research and Training (NCERT). (2023). School Education National Curriculum Framework. https://ncert.nic.in/pdf/NCFSE-2023-August_2023.pdf
    9. National Council for Educational Research and Training (NCERT). (2023). Joyful mathematics (Class 2). https://ncert.nic.in/textbook.php?bejm1=0-11
    10. Shirali, P. (2016) Teaching data handling. At Right Angles, 5(3). pp. 1-16. ISSN 2582-1873 https://publications.azimpremjiuniversity.edu.in/3142/1/data%20handling.pdf

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