राष्ट्रीय गणित दिवस
स्कूलों में सार्थक आयोजनों की योजना
ऋषि वैली में अपने अध्यापन काल के दौरान मेरा श्री पी. के. श्रीनिवासन के मार्गदर्शन में मैथमेटिक्स एक्स्पोजिशन (मैथ एक्स्पो या गणित प्रदर्शनी) की अवधारणा से परिचय हुआ। इसके बाद मैंने कई वर्षों तक गणित विभाग के अन्य साथियों के साथ मिलकर इस परम्परा को आगे बढ़ाया।
मैथ एक्स्पो को लेकर मेरे मेंटर के विज़न का केन्द्रीय बिन्दु था ‘पाठ्यक्रम की सैर’। इसमें यह ध्यान रखा जाता था कि स्टॉल के लिए वही विषय चुने जाएँ, जो स्कूली गणित की प्रमुख अवधारणाओं पर आधारित हों। इन्हें उपयोग में लाई गई सामग्री, कार्ड्स, पोस्टर्स, मैथ गेम्स, पज़ल्स आदि द्वारा बनाया जाता था। इस प्रदर्शनी के दो मक़सद होते थे। स्टॉल पर आने वाले हर विद्यार्थी के लिए वहाँ प्रदर्शित मॉडल्स या तो उसे पहले की कक्षाओं में पढ़ी गईं अवधारणाओं को फिर से ताज़ा करने का मौक़ा दें और या फिर इस बात की झलक कि अगली उच्च कक्षाओं में उसका सामना किन अवधारणाओं से होगा। चूँकि वहाँ सारी अवधारणाएँ गेम्स या फिज़िकल एड के रूप में प्रस्तुत की जाती थीं, जिससे दर्शकों में दिलचस्पी बनी रहती थी। यह निश्चित ही विद्यार्थियों में गणित के प्रति सामान्य रुचि बढ़ाने का माध्यम तो बनता ही, साथ ही उन्हें इस विषय को लेकर चर्चा करने का अवसर भी मिलता था। इससे उनमें धीरे-धीरे गणित को लेकर आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी होती थी।
भारत में राष्ट्रीय गणित दिवस हर साल 22 दिसम्बर को महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के जन्म दिवस पर मनाया जाता है। अन्तर्राष्ट्रीय गणित दिवस 14 मार्च को मनाया जाता है। यह तारीख़ ‘पाई’ के शुरुआती तीन अंकों (3.14) का प्रतिनिधित्व करती है। दरअसल, वेस्टर्न कैलेंडर के प्रारूप में लिखने पर ये अंक 14 मार्च की तारीख़ बनाते हैं।
कई स्कूलों में गणित दिवस मनाया जाता है और इसमें तरह-तरह की रोचक गतिविधियाँ व प्रेरक प्रस्तुतियाँ शामिल की जाती हैं। ये गतिविधियाँ समय की कमी की वजह से आमतौर पर नियमित कक्षाओं में सम्भव नहीं हो पातीं हैं।
मैं यहाँ संक्षेप में ऐसे आयोजनों के संगठनात्मक पहलुओं पर बात करूँगी। ऐसे दिवस के लिए इस अंक (नवम्बर 2025) के पुलआउट में कुछ गतिविधियों के सुझाव दिए गए हैं। बेहतर होगा कि इन गतिविधियों में गणित की विभिन्न शाखाओं जैसे अंकगणित, ज्यामिति, सांख्यिकी, तर्कशास्त्र आदि का प्रतिनिधित्व रहे। यह याद रखें कि गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा आम लोगों के लिए भी सुगम होना चाहिए, ताकि अभिभावक और अन्य दर्शक भी भाग लेने के लिए प्रेरित हों। हमारा सिद्धान्त है, ‘गणित सभी के लिए!’ चूँकि स्टॉलों पर आने वाले दर्शक अलग-अलग पृष्ठभूमियों से होते हैं, इसलिए प्रस्तुतियाँ इतनी लचीली और सरल होनी चाहिए कि अधिक-से-अधिक लोग उन्हें सहज रूप से समझ सकें। साथ ही, प्रत्येक गतिविधि ऐसी हो कि उसे 5 से 10 मिनट के भीतर पूरा किया जा सके, ताकि सभी दर्शक आराम से हर स्टॉल का मज़ा ले सकें।
विद्यार्थी समूहों का निर्माण
स्टॉल पर कौन-सा विषय प्रस्तुत किया जाना है, इसका निर्धारण चार विद्यार्थियों का एक समूह कर सकता है। ये समूह कक्षा-वार बनाए जा सकते हैं, ताकि स्कूल का हर विद्यार्थी किसी-न-किसी समूह का हिस्सा रहे। प्रत्येक समूह से दो विद्यार्थी एक निर्धारित समय तक अपने चयनित विषय का प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान बाक़ी दो विद्यार्थी अन्य स्टॉलों का अवलोकन कर सकेंगे। उसके बाद वे स्टॉल पर रहेंगे और पहले वाले दोनों विद्यार्थी अन्य स्टॉलों का अवलोकन करेंगे। इस व्यवस्था से हर विद्यार्थी को सभी स्टॉलों का अवलोकन करने का अवसर मिल सकेगा।
ऐसे आयोजन के लिए विद्यार्थियो को किस तरह की तैयारी करनी चाहिए?
विद्यार्थी अपने स्टॉल पर जिस विषय या समस्या को प्रस्तुत करने जा रहे हैं, उस पर उन्हें गहराई से कार्य करना चाहिए। उनके पास इसके एक-या-एक से अधिक समाधान होने चाहिए। उन्हें पहले से ही अनुमान लगाकर रखना चाहिए कि दर्शक किस प्रकार की प्रतिक्रियाएँ दे सकते हैं, वे किस तरह के सवाल पूछ सकते हैं इसलिए उनके विभिन्न तरह के सवालों के जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए। ज़रूरत पड़ने पर अपने समाधान को स्पष्ट रूप से समझा सकें, इसकी भी पूरी तैयारी होनी चाहिए। इसके लिए पहले से ही थोड़े अभ्यास की ज़रूरत होगी। विषय या समस्या, जिसका निर्धारण शिक्षक या विद्यार्थी स्वयं कर सकते हैं, के लिए सम्भावित मानदण्ड इस प्रकार हैं : जिसे 5 से 10 मिनट के भीतर हल किया जा सके; इसमें इतने स्तर हों कि गणित की अलग-अलग क्षमताओं और ज्ञान रखने वाला कोई भी दर्शक उसके समाधान का प्रयास कर सके; जो कक्षा में पढ़ाए गए विषय का ही विस्तार हो इत्यादि।
स्टॉलों का लेआउट
स्टॉल लगाने के लिए स्कूल का खेल मैदान (अगर आउटडोर करना चाहें) या असेंबली हॉल (अगर इनडोर करना चाहें) जैसी बड़ी जगहों का चयन करना अच्छा होता है। 4 से 5 स्टॉल को मिलाकर एक छोटा-सा क्लस्टर बनाया जा सकता है। ऐसे ही कई क्लस्टर एक-दूसरे से थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लगाए जा सकते हैं। इससे आपसी चर्चा और उत्साह की वजह से होने वाला शोर नियंत्रण में रहता है। प्रत्येक क्लस्टर में अलग-अलग तरह की गतिविधियों के स्टॉल रखना बेहतर होता है। जैसे एक क्लस्टर में संख्या आधारित गतिविधियों, ज्यामिति, अनुमान लगाने वाले खेल और दृश्य/ पैटर्न आधारित गणित के अलग-अलग मिश्रित स्टॉल रखे जा सकते हैं। एक जैसी गतिविधियों वाले सभी स्टॉल एक ही जगह रखने से बचें, अगर ऐसा होगा तो उनमें दोहराव होने की सम्भावना बढ़ जाएगी। इस वजह से हो सकता है कि किसी-किसी को वह पूरा क्लस्टर उबाऊ लगे और कहीं पर बहुत ज़्यादा भीड़ हो सकती है।
विभिन्न क्लस्टर्स के बीच खाली जगह में कुछ गेम्स भी रखे जा सकते हैं। इसका फ़ायदा यह होगा कि अगर कुछ लोगों को स्टॉल्स की भीड़ के छँटने का इन्तज़ार करना पड़े, तो वे वहाँ गेम्स खेलकर समय बिता सकते हैं।

ऐसे आयोजन की योजना में गणितीय अनुमानों की भी अहमियत होती है। जैसे कितने लोग आएँगे, हर स्टॉल पर लोग कितनी देर तक रुकेंगे और दर्शक किस क्रम में आगे बढ़ेंगे आदि का अनुमान लगाना। वरिष्ठ विद्यार्थियों के लिए यह एक उपयोगी अभ्यास होगा कि वे दर्शकों की आवा-जाही के लिए ऐसा रूट प्लान तैयार करें, जिससे लोग एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आसानी से पहुँच सकें और किसी भी स्थान पर अनावश्यक भीड़ न हो। साथ ही, योजना में सुरक्षा से जुड़े पहलुओं जैसे आपात स्थिति में भीड़ को तेज़ी से बाहर निकालने की व्यवस्था को भी शामिल किया जाना चाहिए।
दिन भर के कार्यक्रमों की रूपरेखा
स्कूल में दिन की शुरुआत आमतौर पर असेंबली से होती है, जहाँ सभी छात्र-छात्राएँ और शिक्षक संगीत, समाचार व अन्य जानकारी साझा करने के लिए एकत्र होते हैं। गणित दिवस के अवसर पर यह असेंबली इस दिन से जुड़े रोचक तथ्यों या किसी महान गणितज्ञ के कार्यों पर केन्द्रित हो सकती है। विद्यार्थी किसी गणितज्ञ के जीवन से जुड़ी दिलचस्प घटनाओं या गणित आधारित कहानियों पर छोटी नाट्य प्रस्तुति दे सकते हैं। इसके लिए स्क्रिप्ट लिखने या रिसर्च करने से बच्चों में कई तरह की एक-दूसरे से जुड़ी क्षमताओं का विकास होता है। विद्यार्थी गणित के क्षेत्र में हाल ही में हुई खोजों या अनसुलझी पहेलियों के बारे में भी चर्चा कर सकते हैं। वे तेज़ी से गणना करने की ट्रिक्स बता सकते हैं या इस बारे में बात कर सकते हैं कि गणित को लेकर उनकी क्या सोच है, इस विषय से जुड़ी किन चीज़ों में उनकी दिलचस्पी है या आगे भी इस विषय को क्यों पढ़ना चाहेंगे। इसके अलावा, सममिति, त्रिआयामी आकृतियों के एनिमेशन, पैटर्न, इल्युज़न्स आदि को समझाने वाली कुछ वीडियो क्लिपिंग्स भी प्रदर्शित की जा सकती हैं।
गणित दिवस जैसे कार्यक्रमों में प्रस्तुतकर्ता या संचालनकर्ता की भूमिका निभाने वाले विद्यार्थी जब बाद में अपनी कक्षाओं में जाते हैं, तो वे ज़िम्मेदारी निभाने के एक विशेष आत्मविश्वास से भरे होते हैं। उम्मीद कर सकते हैं कि इससे उन्हें यह महसूस होगा कि गणित सीखने की प्रक्रिया में वे सिर्फ़ दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार हैं।
सम्पादक की टिप्पणी
इन सुझावों से गणित दिवस को सार्थक और सुव्यवस्थित तरीक़े से मनाने की एक रूपरेखा मिलती है। यह कार्यक्रम गणित विषय में कम रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को भी अपनी तरफ़ आकर्षित करने की क्षमता रखता है। सम्भावित गतिविधियों, खाली जगह में खेले जाने वाले गेम्स और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विस्तृत विवरण इस अंक के पुलआउट में दिया गया है।