दशमलव संख्याओं के भाग
भिन्न और दशमलव परस्पर सम्बन्धित दो ऐसी महत्त्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं जिनमें माध्यमिक स्कूल (कक्षा 6 से 8) के बच्चे काफ़ी कठिनाई का सामना करते हैं। एक तो इन अवधारणाओं की कल्पना करना मुश्किल होता है, और दूसरा, इन पर की जाने वाली अंकगणितीय संक्रियाएँ आमतौर पर काफ़ी अमूर्तता के साथ सिखाई जाती हैं जिसमें नियमों के इस्तेमाल पर अत्यधिक ज़ोर दिया जाता है। यहाँ, हम दशमलव संख्याओं के भाग पर चर्चा करेंगे और इस संक्रिया को अवधारणात्मक रूप से समझेंगे। साथ ही ठोस वस्तुओं (manipulatives) की मदद से देखेंगे कि इसका नियम कैसे पता चलता है।
दशमलव संख्याओं के भाग पर चर्चा करने से पहले हमें भाग की संक्रिया का मतलब समझने की ज़रूरत है। इसके दो अर्थ हैं, एक है बराबर बँटवारा (equal sharing)। इस अर्थ में 12 ÷ 3 का मतलब है 12 चीज़ें 3 समूहों में समान रूप से बाँटी गई हैं (यानी कि 3 समूहों में से प्रत्येक को कितनी चीज़ें मिलती हैं)। दूसरा अर्थ है, बराबर-बराबर समूह बनाना (मात्रा) यानी कि समान समूहीकरण (equal grouping)। इस अर्थ में 12 चीज़ों को इस तरह बाँटा जाए कि प्रत्येक को 3 चीज़ें मिलें (अर्थात, कितने समूहों को 3-3 चीज़ें मिलती हैं)।
दशमलव संख्याओं की मॉडलिंग के लिए गत्ते/काग़ज़ के बने द्विविमीय (2D) और त्रिविमीय (3D) दोनों ही मैनिप्यूलेटिव्स इस्तेमाल किए जा सकते हैं। चाहे जिसका भी इस्तेमाल करें, ज़रूरी यह है कि सभी निरूपणों और सवाल हल करने के दौरान एकरूपता बनी रहे।
| दशमलव संख्याओं के 3D मॉडल | पूर्ण, बड़ा घन या 1![]() | पूर्ण को 10 बराबर प्लेटों (plates) में बाँटा जा सकता है, जिनमें से प्रत्येक प्लेट पूर्ण का \(\frac{1}{10}\) या 0.1 है।![]() | आगे प्रत्येक प्लेट को 10 बराबर छड़ों (rods) में बाँटा जा सकता है, जिनमें से प्रत्येक छड़ पूर्ण का \(\frac{1}{100}\) या 0.01 है। | फिर प्रत्येक छड़ को 10 बराबर छोटे घनों में बाँटा जा सकता है, जिनमें से प्रत्येक घन पूर्ण का \(\frac{1}{1000}\) या 0.001 है। |
| दशमलव संख्याओं के 2D मॉडल | पूर्ण, एक फलक या 1![]() | पूर्ण को 10 बराबर लम्बी छड़ों में बाँटा जा सकता है, जिनमें से प्रत्येक पूर्ण का \(\frac{1}{10}\) या 0.1 है। | प्रत्येक पट्टी को आगे 10 बराबर छोटे वर्गों में बाँटा जा सकता है, जिनमें से प्रत्येक वर्ग पूर्ण का \(\frac{1}{100}\) या 0.01 है। |
इन मॉडल्स का इस्तेमाल करके दशमलव संख्याओं का निरूपण
3डी मॉडल इस्तेमाल करके 2.034![]() | 2डी मॉडल इस्तेमाल करके 3.54![]() |
3डी मॉडल इस्तेमाल करके 1.32![]() | 2डी मॉडल इस्तेमाल करके 1.32![]() |
हम ज़रूरत के हिसाब से 3डी या 2डी मॉडल का उपयोग करके दशमलव संख्याओं के भाग के सवाल हल करने का प्रयास करेंगे। आभासी मॉडल (virtual model) के लिए आप मैथीगॉन पॉलीपैड (https://mathigon.org/polypad) का इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि भौतिक मॉडल काग़ज़/गत्ते से बनाए जा सकते हैं। 2डी मॉडल को दशमलव बिन्दु के बाद 4 स्थानों यानी कि 0.0001 तक बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए सेंटीमीटर ग्राफ़ पेपर का उपयोग कर सकते हैं जिसमें 10 सेमी × 10 सेमी के एक वर्ग को पूर्ण माना जाएगा।
दशमलव संख्याओं के भाग के लिए ज़रूरी पूर्वज्ञान
- दशमलव की समझ, विशेषकर दशमलव संख्याओं को भिन्नों के रूप में व्यक्त करना
उदाहरण के लिए, \(0.25 = \frac{25}{100} = \frac{1}{4}\)
यदि एक फलक पूर्ण या 1 है, जिसमें 100 छोटे वर्ग हैं, तो उनमें से प्रत्येक 0.01 है (चित्र-1)। चित्र-1 तो 0.25 ऐसे 25 छोटे वर्ग हैं, यानी \(25 × 0.01\)। ऐसे 4, 0.25 मिलकर एक पूर्ण बनाते हैं, जैसा कि चित्र-2 में दर्शाया गया है। इसलिए 0.25 एक पूर्ण या फलक का \(\frac{1}{4}\) है।


- दशमलव संख्याओं का गुणा, विशेषकर दशमलव संख्याओं और दस की घातों के गुणनफल, \(0.34\ \times\ 0.002 = \frac{34}{100}\ \times\ \frac{2}{1000} = \frac{34\ \times\ 2}{100 \times1000} = \frac{68}{100000} = 0.00068\)
- भिन्नों के भाग, विशेषकर यह समझ कि किसी भिन्न से भाग देना उस भिन्न के व्युत्क्रम से गुणा करने के समान होता है।
उदाहरण के लिए \(\frac{3}{4}\) ÷ \(\frac{2}{5} = \frac{3}{4} \times \frac{5}{2} \) (के व्युत्क्रम से गुणा करने पर \(\frac{2}{5} \)) = \(\frac{15}{8} = 1\frac{7}{8} \)
अब हम नीचे दी गई चार सम्भावित स्थितियों में दशमलव संख्याओं के भाग की पड़ताल करते हैं।
प्रकार/स्थितियाँ
- प्राकृत संख्या ÷ प्राकृत संख्या = दशमलव संख्या
- दशमलव संख्या ÷ प्राकृत संख्या = दशमलव संख्या
- प्राकृत संख्या ÷ दशमलव संख्या
- = प्राकृत संख्या
- = दशमलव संख्या
- दशमलव संख्या ÷ दशमलव संख्या
- = प्राकृत संख्या
- = दशमलव संख्या
अर्थात भाज्य व भाजक दोनों ही प्राकृत संख्याएँ हो सकती हैं या फिर दोनों ही दशमलव संख्याएँ भी हो सकती हैं। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे हम देखेंगे कि भाज्य की प्रकृति उतनी महत्त्वपूर्ण नहीं है, जितनी कि भाजक की है। (यही बात भिन्नों के विभाजन में भी देखी गई है।)
प्राकृत संख्या ÷ प्राकृत संख्या = दशमलव संख्या
इस स्थिति में भाज्य और भाजक दोनों ही पूर्ण संख्याएँ हैं।
यदि भाजक प्राकृत संख्या है तो इसे ऐसे समूहों की संख्या माना जा सकता है जिनके बीच भाज्य को बराबर-बराबर बाँटा जाना है, यानी यहाँ ‘बराबर बँटवारे’ वाले अर्थ का उपयोग किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, 12 ÷ 40 में 12 को 40 समूहों में समान रूप से बाँटा जाता है। देखते हैं कि 3डी मॉडल का उपयोग करके यह कैसे किया जा सकता है।
12 घनों को 40 द्वारा सीधे-सीधे तो नहीं बाँटा जा सकता। इसलिए हम प्रत्येक घन को 10 प्लेटों में बदल लेते हैं (चित्र-3)


∴ 12 ÷ 40 = 0.3 (चित्र-4)
यदि इसी भाग को हम 2डी मॉडल का इस्तेमाल करके हल करें तो 12 फलक 40 समूहों में सीधे-सीधे तो नहीं बाँटे जा सकते। इसलिए हम प्रत्येक फलक को 10 पट्टियों (चित्र-5) में बदल देते हैं।


दोनों ही मॉडल का उपयोग करने पर हमें समान भागफल मिलता है।
दशमलव संख्या ÷ प्राकृत संख्या = दशमलव संख्या
0.24 ÷ 5 का उदाहरण लेते हैं। चूँकि यहाँ भी भाजक एक प्राकृत संख्या है, हम भाग के ‘बराबर बँटवारे’ वाले अर्थ का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए, इस स्थिति में 0.24 को 5 समूहों के बीच बराबर-बराबर बाँटा जाना है।

पहले चरण में 2 प्लेटों को 20 छड़ों में बदल दिया गया। फिर इन्हें 5 समूहों के बीच समान रूप से बाँटा गया तो प्रत्येक समूह को 4 छड़ें (0.04) मिलीं। 4 छड़ें बाक़ी रह गईं क्योंकि उन्हें 5 समूहों में बराबर-बराबर नहीं बाँटा जा सकता है (चित्र-7)।
दूसरे चरण में, 4 छड़ों को 40 छोटे घनों में बदल दिया गया। फिर इन्हें 5 समूहों के बीच समान रूप से बाँटा गया तो प्रत्येक समूह को 8 छोटे घन (0.008) मिलते हैं (चित्र-8)।

दोनों बार के वितरण को मिलाकर प्रत्येक समूह को 0.04 + 0.008 = 0.048 मिलता है, यानी कि 0.24 ÷ 5 = 0.048 (चित्र-9)।

वैकल्पिक तरीक़े से देखें, तो हम 0.24 यानी कि 2 प्लेटों और 4 छड़ों को 240 छोटे घनों (0.001) में बदल सकते हैं। फिर इन्हें 5 समूहों में समान रूप से बाँटा जाए तो प्रत्येक समूह को 48 छोटे घन यानी कि 0.048 मिलते हैं। तो दोनों ही तरीक़ों से 0.24 ÷ 5 = 0.048 होता है।
प्राकृत संख्या ÷ दशमलव संख्या = पूर्ण संख्या
अलबत्ता, यदि भाजक प्राकृत संख्या नहीं है, तो यह समूहों की संख्या जैसी किसी राशि का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। तो, जब भाजक दशमलव संख्या हो तब हम ‘बराबर बँटवारे’ वाले अर्थ का उपयोग नहीं कर सकते। इसलिए ऐसी स्थिति में भाग के ‘बराबर समूहीकरण’ (मात्रा) वाले अर्थ का उपयोग करना ज़्यादा उपयुक्त लगता है। ‘बराबर समूहीकरण’ की स्थिति में भाजक की संख्या वह राशि होती है जो प्रत्येक समूह को मिलती है और भागफल कुल समूहों की संख्या होती है।
तो 12 ÷ 0.3 के लिए प्रत्येक समूह को 0.3 या 3 प्लेटें (0.1) मिलती हैं। 12 घनों को 120 प्लेटों में तब्दील किया जा सकता है। चूँकि प्रत्येक समूह को 3 प्लेटें मिलती हैं, इसलिए 120 प्लेटों को 120 ÷ 3 = 40 समूहों (चित्र-10) में बाँटा जा सकता है। यदि भागफल पूर्ण संख्या हो तो यह अर्थ अच्छे-से काम करता है।

प्राकृत संख्या ÷ दशमलव संख्या = दशमलव संख्या
जब भागफल पूर्ण संख्या न हो तो भाग का यह अर्थ पर्याप्त नहीं होता। उदाहरण के लिए, 11 ÷ 0.4 जैसे किसी सवाल के लिए यह अर्थ मददगार नहीं होता।
यहाँ 11 घनों को 110 प्लेटों में बदला जा सकता है। यदि हम 110 प्लेटों को कुछ समूहों में इस तरह बाँटते हैं कि प्रत्येक समूह को 4 प्लेटें मिलती हैं, यानी कि 110 ÷ 4 (चित्र-11)

तब 108 (110 में से) प्लेटें 27 समूहों के बीच समान रूप से बाँटी जा सकती हैं। लेकिन 2 प्लेटें, यानी कि 0.2, बच जाती हैं व इन्हें और बाँटा नहीं जा सकता क्योंकि यह बहुत ही छोटी (0.2 < 0.4) हैं। इसलिए ऐसी स्थिति में मैनिप्यूलेटिव्स का इस्तेमाल करने में ‘बराबर समूहीकरण’ वाले अर्थ का कोई मतलब नहीं रह जाता है।
दशमलव संख्या ÷ दशमलव संख्या = प्राकृत संख्या
अब हम 0.42 ÷ 0.14 का उदाहरण लेते हैं। 0.42 (4 प्लेटों और 2 छड़ों) को कुछ समूहों में इस तरह बाँटा गया है कि प्रत्येक समूह को 0.14 (1 प्लेट और 4 छड़ें) मिलती हैं। अब 4 प्लेटों और 2 छड़ों को 3 प्लेटों और 12 छड़ों में बदला जा सकता है। इसलिए इन्हें 3 समूहों में बाँटा जा सकता है, जिनमें से प्रत्येक को 1 प्लेट और 4 छड़ें यानी 0.14 मिलता है (चित्र- 12)।
∴ 0.42 ÷ 0.14 = 3
इस स्थिति में, ‘बराबर समूहीकरण’ वाला अर्थ उपयोगी है क्योंकि भागफल प्राकृत संख्या है।

दशमलव संख्या ÷ दशमलव संख्या = दशमलव संख्या
अब हम 0.42 ÷ 1.4 पर विचार करते हैं। देखें कि मैनिप्यूलेटिव्स का इस्तेमाल करके इसे हल करने की कोशिश में हमें किन दिक़्क़तों का सामना करना पड़ सकता है। इस स्थिति के लिए हम 3डी मॉडल की बजाय 2डी मॉडल का उपयोग करते हैं।

ज़ाहिर है कि बाँटी जाने वाली राशि, यानी कि भाज्य 0.42, प्रत्येक समूह को मिलने वाली राशि, यानी कि भाजक 1.4 से छोटी है। इसलिए मैनिप्यूलेटिव्स का इस्तेमाल करके इस भाग को समझने के लिए ‘बराबर समूहीकरण’ वाले अर्थ का उपयोग करना असम्भव है।
अब हम 2.03 ÷ 0.5 पर विचार करते हैं। इस स्थिति में भाज्य (2.03) भाजक (0.5) से बड़ा है। लेकिन फिर भी भाग अधूरा रहता है (चित्र-14), क्योंकि 0.03 को और बाँटा नहीं जा सकता। इसका कारण यह है कि यह बहुत छोटा (0.03 <> 1.4) है। तो एक बार फिर ‘बराबर समूहीकरण’ वाला अर्थ काम नहीं करता।

ध्यान दें कि इसका मतलब यह नहीं है कि मैनिप्यूलेटिव्स का इस्तेमाल करना प्रभावी नहीं है। उदाहरण के लिए, 0.000042 ÷ 0.000014 को मैनिप्यूलेटिव्स से दर्शाया नहीं जा सकता, लेकिन यदि हम यह कल्पना करें कि छोटे टुकड़े 0.00001 और 0.000001 का प्रतिनिधित्व करते हैं तो ‘बराबर समूहीकरण’ से इसे समझाया जा सकता है। हमें यह स्पष्टता तभी आई जब हमने इसकी पड़ताल की।
तो जब भी भाजक प्राकृत संख्या हो, तब भाग को समझने के लिए ‘बराबर बँटवारे’ का उपयोग किया जा सकता है। इसी तरह जब भागफल प्राकृत संख्या हो तो ‘बराबर समूहीकरण’ उस भाग को समझने में मदद करता है। लेकिन यदि भाजक और भागफल दोनों ही प्राकृत संख्या ना हों तो ऐसे भाग को हम किस तरह समझें? ख़ासतौर पर निम्नलिखित दो स्थितियों, जिन्हें ऊपर दर्शाया गया है, में ऐसा होता है:
- प्राकृत संख्या ÷ दशमलव संख्या = दशमलव संख्या
- दशमलव संख्या ÷ दशमलव संख्या = दशमलव संख्या
एक सम्भावना यह है कि इन्हें समझने के लिए ‘भिन्नों के भाग’ का इस्तेमाल किया जाए, क्योंकि दशमलव संख्याओं को भिन्नों में बदला जा सकता है और चॉकलेट प्लेट मॉडल* भिन्नों (और प्राकृत संख्याओं) के भाग की सभी सम्भावित स्थितियों को पर्याप्त रूप से प्रदर्शित करता है।
चॉकलेट प्लेट मॉडल : \(p\) ÷ \(q\) के लिए, मान लें कि \(p\) चॉकलेट हैं जिन्हें \(q\) प्लेटों में बाँटा जाना है। भागफल एक प्लेट में चॉकलेट की संख्या है। \(p\) और \(q\) दोनों कोई भी प्राकृत संख्या या भिन्न संख्या यानी कि इकाई भिन्न, उचित भिन्न या विषम भिन्न भी हो सकती हैं।
अब हम उन स्थितियों पर विचार करते हैं जहाँ भाग के दोनों अर्थ काम नहीं आए,
- \(11\) ÷ \(0.4\),
- \(0.42\) ÷ \(1.4\) और
- \(2.03\) ÷ \(0.5\).
- \(11\) ÷ \(0.4 = 11\) ÷ \(\frac{4}{10} = 11 \times \frac{10}{4} = \frac{11 \times 10}{4} = 110\) ÷ \(4\)
ध्यान दें कि ‘बराबर समूहीकरण’ का इस्तेमाल करके भी हम इसी जवाब पर पहुँचे थे, लेकिन चूँकि वहाँ भागफल समूहों की संख्या को दर्शाता था, इसलिए उसका पूर्ण संख्या होना ज़रूरी था। लेकिन यहाँ पर ऐसी कोई पाबन्दी नहीं है क्योंकि यहाँ हम भाग के उस अर्थ का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। अब हम \(110\) ÷ \(4\) के लिए ‘बराबर बँटवारे’ वाले अर्थ का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं।
इस पर भी ध्यान दें कि \(110\) ÷ \(4 = (11 × 10)\) ÷ \((0.4 × 10)\), यानी कि भाज्य और भाजक दोनों को ही 10 से गुणा किया जाता है ताकि दशमलव बिन्दुओं को खिसकाया जा सके और भाजक को प्राकृत संख्या बनाया जा सके।
- \(0.42\) ÷ \(1.4 = \frac{42}{100}\) ÷ \(\frac{14}{10} = \frac{42}{100} \times \frac{10}{14} = \frac{42}{140} = 4.2\) ÷ \(14\)
ध्यान दें कि यदि हम केवल भाजक को भिन्न में बदलते हैं, तब भी हमें यही जवाब मिलता है, क्योंकि
\(0.42\) ÷\( \frac{14}{10} = 0.42 \times \frac{10}{14} = \frac{0.42 \times 10}{140} = 4.2\) ÷\(14 = (0.42 \times 10)\) ÷ \((1.4 \times 10)\)
दोनों ही स्थितियों में हमने फिर से भाज्य व भाजक दोनों को 10 की समान घात से गुणा किया। ऐसा इसलिए किया ताकि उनके दशमलव बिन्दुओं को खिसकाया जा सके। इस तरह खिसकाने से भाजक प्राकृत संख्या बन जाता है।
- \(2.03\) ÷ \(0.5 = 2.03\) ÷\( \frac{5}{10} = 2.03 \times \frac{10}{5} = \frac{2.03 \times 10}{5} = 20.3\) ÷ \(5\) \(= (2.03 \times 10)\)÷\((0.5 \times 10),\)इसका मतलब है कि एक बार फिर दशमलव बिन्दुओं को खिसकाने और भाजक को प्राकृत संख्या बनाने के लिए भाज्य व भाजक दोनों को समान संख्या से गुणा किया जाता है।
यही वह प्रक्रिया जो सामान्यत: की जाती है, लेकिन बिना किसी व्याख्या के।
तो, दशमलव संख्याओं वाले भाजकों के सभी प्रकार के भागों के लिए काम करने वाली एक सामान्य प्रक्रिया के लिए यह करना अधिक अर्थपूर्ण होता है : (i) भाजक को ऐसे भिन्न में बदलें, जिसका हर 10 की कोई घात हो, और (ii) फिर भिन्न से भाग दें। जब हम इस ‘भिन्न द्वारा भाग’ को ‘भिन्न के व्युत्क्रम से गुणा’ में बदलते हैं तो भाज्य में 10 की घात का गुणा हो जाता है। 10 की यह घात दशमलव वाले भाजक का हर होती है। और यह गुणनफल नया भाज्य होता है। नया भाजक मूल दशमलव वाले भाजक का अंश होता है, जो कि एक प्राकृत संख्या होती है।
दशमलव भाजक \((DD)\) = प्राकृत संख्या/10 की उपयुक्त घात = \(N/10^m\)
मूल भाज्य \((OD) \div DD = OD \div N/10^m\) = \((OD × 10^m) \div N\)
उदाहरण के लिए: \(3.006 \div 0.15\) , पर विचार करते हैं। यहाँ \(DD = 0.15 = \text{15/100}\) \(N = 15\) और \(m = 2\), जबकि \(OD = 3.006.\) तो, \(3.06 \div 0.15 = 3.006 \div\) \(15/10^2 = (3.006 × 102) \div 15 = 300.6 \div 15.\)
ध्यान दें कि केवल भाजक को प्राकृत संख्या बनाना पर्याप्त है, फिर हम ‘बराबर बँटवारे’ का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि भाज्य दशमलव संख्या है या नहीं।
इस पूरी चर्चा में हमने आवर्ती दशमलव (Recurring decimals) संख्याओं को जान-बूझकर शामिल नहीं किया है क्योंकि वर्तमान पाठ्यक्रम में ये उच्च माध्यमिक कक्षाओं तक नहीं पढ़ाई जाती हैं। इसलिए हमें लगा कि यहाँ आवर्ती दशमलव संख्याएँ प्रासंगिक नहीं हैं। हालाँकि यदि भाज्यफल आवर्ती दशमलव संख्या हो, तो भी प्रक्रिया यही रहती है।






