भाग कलन विधि को सिखाने के ढंग पर कुछ विचार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी—2020) बुनियादी गणितीय कौशलों में सीखने के गम्भीर संकट को सामने रखती है। तमाम सरकारी और ग़ैर-सरकारी सर्वे भी यही बताते हैं। यह संकट इतना गम्भीर क्यों है? एक बार बुनियादी गणितीय कौशलों में पिछड़ने के बाद, वर्षों तक विद्यार्थियों के सीखने का प्रगति-पथ बढ़ता हुआ न होकर सपाट ही बना रहता है, और वे कभी भी उस स्तर तक नहीं पहुँच पाते हैं, जिस स्तर पर शिक्षण चल रहा होता है। यह कई विद्यार्थियों के लिए स्कूल नहीं जाने का या स्कूल को पूरी तरह छोड़ देने का बड़ा कारण बन जाता है।
भाग (division), गणित का ज़रूरी विषय है। बदक़िस्मती से प्राथमिक स्कूलों के ज़्यादातर बच्चे इसमें अक्सर ग़लतियाँ करते और इससे जूझते मिलते हैं। यह लेख मुख्य रूप से जिन बातों पर केन्द्रित है, वे हैं — भाग कलन विधि (division algorithm) का इस्तेमाल करते हुए विद्यार्थी किस तरह की ग़लतियाँ करते हैं, इन ग़लतियों के क्या सम्भावित कारण हैं और कौन-से शिक्षणशास्त्रीय तौर-तरीक़ों से इनका समाधान किया जा सकता है। साथ ही यह लेख इबारती सवालों (word problems) को हल करने के अलग-अलग सन्दर्भों में भागफल का आकलन करने, नतीजे का सत्यापन करने और भाग की अवधारणा को समझने के महत्त्व को प्रमुखता से प्रस्तुत करता है।
आइए, एक सवाल से शुरू करते हैं : यदि कोई विद्यार्थी भाग कलन विधि का इस्तेमाल करता है तो क्या वह जाँच सकता है कि भागफल सही है या नहीं? इसका जवाब है हाँ, वह भागफल के आकलन और सत्यापन से ऐसा कर सकता है। हालाँकि, हमारी अधिकतर कक्षाओं में पढ़ाने के दौरान आकलन और सत्यापन पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया जाता है।
गणित में आकलन सटीक जवाब को जाँचने के क्रम में किसी अनुमानित उत्तर का मोटा-मोटा परिकलन (calculation) करने की प्रक्रिया है। इसके लिए सोचने का ऊँचे दर्जे का कौशल चाहिए। भाग करना सिखाने का बहुत ज़रूरी हिस्सा भागफल का आकलन करना सिखाना है। इस कौशल का इस्तेमाल करके विद्यार्थी भाग के सवाल का अनुमानित जवाब पा सकते हैं। इससे वे यह भी जाँच सकते हैं कि उनका जवाब कितना सही है। भागफल का आकलन करने का एक तरीक़ा भाज्य (dividend) और भाजक (divisor) को उनकी क़रीबी संख्या से सन्निकटन करना है। आइए, 242 ÷ 22 के भाग के सवाल में भागफल के आकलन को समझते हैं। भाज्य 242 और भाजक 22 को उनकी सबसे क़रीबी दहाई (Tens) संख्या पर सन्निकटन करने पर हमें क्रमशः 240 और 20 की संख्याएँ मिलती हैं। ऐसे में, हम मन-ही-मन 240 ÷ 20 का परिकलन करेंगे, जो कि 24 ÷ 2 = 12 होगा। इस तरह, 242 को 22 से भाग देने पर भागफल का आकलन \(12^{1}\) होगा।
नोट : यहाँ 242 ÷ 22 के उदाहरण का इस्तेमाल किया गया है। जब 242 को 240 और 22 को 20 में सन्निकटन किया जाता है, तो जो उत्तर मिलता है वह सही जवाब के काफ़ी क़रीब होता है। लेकिन, यह ज़रूरी नहीं है कि हर बार मामला ऐसा ही हो। मिसाल के तौर पर, 242 को 16 से भाग दें, तो 16 भी 20 पर सन्निकटित होता है। इससे अनुमानित उत्तर 12 मिलता है, जबकि 242 ÷ 16 तक़रीबन 15 के बराबर होता है। यहाँ महत्त्वपूर्ण यह है कि हम उस अनुमानित सीमा को पा सकते हैं, जिसके बीच सही उत्तर आता है। कृपया इसी अंक में ‘बहु-अंकीय विभाजकों’ (Multi-Digit Divisors) पर लेख को पढ़ें, जिसमें आकलन पर ज़्यादा विस्तार से चर्चा की गई है।
यह करने के लिए विद्यार्थी को संख्याओं का सन्निकटन करने के लिए, दहाई की घातों (powers) से भाग देने और पहाड़ों (Tables) में माहिर होना ज़रूरी है।
भाग का एक और महत्त्वपूर्ण पहलू ‘नतीजे का सत्यापन’ है। भाग सिखाते वक़्त हमें विद्यार्थियों से कहना चाहिए कि वे पता लगाएँ कि भाज्य, भाजक, भागफल और शेष के बीच क्या सम्बन्ध है। भाग के विभिन्न सवालों में इनके बीच सम्बन्ध पर ध्यान देकर इनके सम्बन्ध का पता लगाया जा सकता है। इस बानगी के आधार पर विद्यार्थी इनके सम्बन्ध को ऐसा पाएँगे— “भाज्य = भाजक x भागफल + शेष”। और इस तरह, वे इस सम्बन्ध का इस्तेमाल करके भागफल का सत्यापन करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। उदाहरण के लिए, 517 को 5 से भाग देने पर किसी विद्यार्थी को भागफल 13 और शेष 2 प्राप्त होता है तो वह विद्यार्थी भागफल का सत्यापन इस प्रकार कर सकता है —
भाजक x भागफल + शेष
= \(5 \times 13 + 2\)
= \(65 + 2 = 67\)
यह भागफल \(517\) के बराबर नहीं है। यह नतीजा विद्यार्थी को सतर्क कर देता है कि भागफल सही नहीं है।
भाग की अवधारणा को समझने की अहमियत : इबारती सवालों को हल करने में विद्यार्थियों के लिए चुनौती यह समझना है कि कौन-सी संख्या संक्रिया (number operation) का इस्तेमाल किया जाए। ज़्यादातर विद्यार्थी सवाल के भीतर के संकेत-शब्दों (cue words) से अन्दाज़ा लगाने की कोशिश करते हैं और उस शब्द से जुड़ी संक्रिया का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन यह ज़रूरी नहीं है कि वह शब्द उस संक्रिया को इंगित कर रहा हो और इस ओर भी इशारा कर रहा हो कि इसमें कौन-सी संख्याएँ शामिल हैं। आइए, इस बात को यहाँ दो उदाहरणों से समझते हैं।
उदाहरण 1 : यदि 40 केकों को समान रूप से 4 थैलों में रखा गया है, तो हर थैले में कितने केक होंगे?
उदाहरण 2 : राजेश 40 केक बनाता है और उन्हें 10-10 के डिब्बों में रखता है। उसे कितने डिब्बे चाहिए होंगे?
उदाहरण 1 में क्रिया विशेषण ‘समान रूप से’ इस ओर इंगित करता है कि प्रश्न को हल करने के लिए भाग की ज़रूरत है, जबकि उदाहरण 2 के प्रश्न में ऐसा कोई संकेत-शब्द नहीं दिया गया है, तो विद्यार्थी को प्रश्न का हल करने के लिए इसमें बताई गई स्थिति को समझना पड़ेगा। इसलिए, भाग की अवधारणा के विभिन्न सन्दर्भों को समझने की आवश्यकता है और बतौर शिक्षक, भाग के बारे में पढ़ाते समय हमें इनमें से कुछ सन्दर्भों के बारे में बच्चों के साथ चर्चा करने की ज़रूरत है।
प्राथमिक कक्षाओं में भाग सिखाने के लिए जिन दो सन्दर्भों का इस्तेमाल किया जाता है, वे ‘समान सहभाजन’ (equal sharing) और ‘समान समूहन’ (equal grouping) से जुड़े हुए हैं।
समान सहभाजन : इस सन्दर्भ में हमें मालूम करना होता है कि जब किसी दी गई तादाद को कई समान हिस्सों में बाँटा जाता है तो हर हिस्से में उस तादाद की कितनी मात्रा होती है। उदाहरण के लिए, एक टोकरी में 6 आम हैं और इन्हें 3 विद्यार्थियों में बाँटना है। हर विद्यार्थी को कितने आम मिलेंगे? इस सन्दर्भ की समझ बनाने का सबसे आसान तरीक़ा यह है कि एक बार में हर विद्यार्थी को एक-एक आम देते हुए तब तक आम बाँटे जाएँ, जब तक कि सभी आम समान रूप से न बँट जाएँ।
समान समूहन: इस सन्दर्भ में हमें यह मालूम करना होता है कि किसी दी गई तादाद में से किसी तय माप के कितने हिस्से प्राप्त किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि एक टोकरी में 6 आम हैं और हम 2-2 आमों के पैकेट बना रहे हैं, तो हम कितने पैकेट बनाएँगे? यह सवाल 6 आमों में से 2-2 आमों के समूहों का पता लगाने के बारे में है। बार-बार घटाते हुए, इसका पता लगाया जा सकता है।
भाग कलन विधि को अमल में लाते समय होने वाली ग़लतियाँ : मैंने पाया है कि विद्यार्थी भाग कलन विधि में ग़लतियाँ इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें भाग, घटाना, गुणा और स्थानीय मान की अवधारणाओं की ठीक से समझ नहीं होती है। हम पाते हैं कि अगर भागफल में ‘शून्य’ को छोड़ दिया जाए तो 416 ÷ 4 के भाग का उत्तर 14 आता है; लेकिन जैसा कि पहले बताया गया है, हम यह सत्यापित कर सकते हैं कि 416 ÷ 4 का उत्तर 14 नहीं हो सकता है। इसकी जाँच इस तथ्य से होती है कि \(14 x 4 = 56\) होता है, जो भाज्य 416 के बराबर नहीं है (देखें चित्र-2A)। या फिर विद्यार्थी यह आकलन कर सकते हैं कि भागफल 14 नहीं हो सकता है क्योंकि जब हम 400 ÷ 4 का भाग करते हैं तो भागफल 100 आता है, यानी इस सवाल में भागफल 100 से ज़्यादा ही होना चाहिए।
मैंने कक्षा 4 के विद्यार्थियों को पूर्णांकों का भाग करने के लिए कुछ सवाल दिए। मैंने दो बिन्दुओं पर विद्यार्थियों के जवाबों का विश्लेषण किया — बच्चे क्या जानते हैं, और उन्हें क्या समझने की ज़रूरत है। आइए, बच्चों के कुछ जवाबों पर ग़ौर करते हैं।

18 ÷ 7 के भाग के प्रश्न का पहला जवाब (चित्र-1) बताता है कि विद्यार्थी को भाग की प्रक्रिया तो मालूम है, लेकिन उसकी पूरी समझ नहीं है। यहाँ विद्यार्थी को यह नहीं पता है कि कब सारे स्थानों का भाग पूरा होता है, और क्या भाग का एक और चरण करने की ज़रूरत है या नहीं। इसके साथ ही, भागफल में लिखा नतीजा दिखाता है कि विद्यार्थी को भाग के गुण की जानकारी नहीं है — कि पूर्णांकों के भाग में भागफल हमेशा भाज्य से कम होगा। उत्तर को सत्यापित करने के लिए आकलन का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
मैं 416 ÷ 4 के सवाल के दो जवाबों को यहाँ पेश कर रहा हूँ। पहला जवाब (चित्र-2A) दिखाता है कि विद्यार्थी ने एक बार में एक ही स्थान का भाग करने का तरीक़ा नहीं अपनाया है। जब 4 सौ का 4 से भाग दिया गया तो सैकड़े के स्थान पर भागफल 1 आया। लेकिन फिर, दहाई और इकाई के स्थानों को एक करते हुए 16 इकाई बना ली गई, जिसे 4 से भाग दिया गया, और इसका नतीजा भागफल में इकाई अंक में 4 आया। यहाँ विद्यार्थी से स्थानीय मान की प्रणाली के आधार पर भागफल नहीं लिखा गया। उसने 104 के बजाय इसे 14 मान लिया। दूसरे जवाब (चित्र-2B) के मामले में हम देखते हैं कि विद्यार्थी ने 4 को 0 से गुणा करने में ग़लती की है। बच्चे अक्सर ऐसी ग़लती करते हैं। ऐसा ज़्यादातर इसलिए होता है क्योंकि पहाड़े सिखाते वक़्त हम गुणा की शुरुआत 0 के बजाय 1 से करते हैं। बाद में, इस विद्यार्थी ने इकाई के स्थान पर 6 को छोड़ दिया, और यह मान लिया कि भाग पूरा हो गया है। इन दोनों ही मामलों में भागफल का आकलन विद्यार्थियों के लिए मददगार साबित होता।


अब 835 ÷ 8 का सवाल लेते हैं। पहले जवाब (चित्र-3A) में हम समझ सकते हैं कि बच्चे से यह ध्यान रखने में चूक हुई है कि 8 के बाद सिर्फ़ 3 दहाई होगी जिसमें 8 का भाग देना है; इसने भागफल में दहाई के स्थान पर 0 दिया होता। इसके बजाय विद्यार्थी ने 35 इकाई का 8 से भाग दे दिया। जबकि दूसरे जवाब (चित्र-3B) में बच्चा 35 इकाई में 8 का भाग देते समय सही भागफल को लिख पाया।
चित्र-4 में दिए गए दो जवाबों में अन्तर भागफल के सत्यापन की ज़रूरत का मज़बूत पक्ष पेश करता है। चित्र-4B सही प्रक्रिया और भागफल को दिखाता है, और बताता है कि बच्चे ने हर स्थान के चरण-दर-चरण भाग की पालना की है। चित्र-4A में जिस विद्यार्थी का जवाब दर्शाया गया है, उसे इस तरह से अपने भाग की जाँच करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है-
भाजक x भागफल + शेष
= \( 5 \times 61 + 2\)
= \(305 + 2 = 307\)
यह भागफल 3007 के बराबर नहीं है। इस नतीजे से विद्यार्थी को सतर्क हो जाना चाहिए कि भागफल सही नहीं है।


चित्र-5 में, 6359 ÷ 4 के भाग में बच्चे से शायद इसलिए ग़लती हुई है क्योंकि उसने अंकों को उनके सही स्थान पर नहीं लिखा है, यानी इकाई के नीचे इकाई, दहाई के नीचे दहाई आदि। अंकों को अपनी सही जगह पर नहीं रखने के कारण विद्यार्थी दहाई के स्थान पर मौजूद 5 को लिखने से चूक गया होगा। चार या अधिक अंकों वाली संख्याओं के भाग में आमतौर पर इस प्रकार की ग़लतियाँ देखने को मिलती हैं। इससे पता चलता है कि बड़ी संख्याओं के भाग का काम शुरू करने से पहले, यह आकलन करने पर ज़ोर दिया जाना चाहिए कि इससे किस तरह का जवाब मिल सकता है। अपेक्षित उत्तर का आकलन करके ही कलन विधि की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
ऊपर दिए गए जवाबों से हम इस नतीजे पर पहुँच सकते हैं कि बच्चे जो बुनियादी ग़लतियाँ करते हैं वे इस प्रकार हैं—
- स्थानीय मान की ठीक से समझ न होना।
- यह स्पष्ट न होना कि शून्य से गुणा करने पर क्या होता है? कुछ विद्यार्थी ऐसा मानते हैं कि \(4\) × \(0\) = \(1\) या \(4\) होता है।
- यह नहीं समझ पाना कि सभी स्थानों का भाग हो चुका है या नहीं। भाग कलन विधि में, एक बार में एक स्थान का भाग करना अच्छा रहता है। इसमें महारत होने के बाद आप दो स्थानों को मिलाकर भी भाग दे सकते हैं, लेकिन भागफल लिखते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
- भाग के प्रश्न के उत्तर को जाँचने के लिए आकलन के कौशल का इस्तेमाल नहीं करना।
यह समझना महत्त्वपूर्ण है कि भाग की कलन विधि सिखाते वक़्त विद्यार्थियों के साथ कैसे काम किया जाए, जिससे कि वे इस प्रक्रिया की अवधारणा को समझ पाएँ और उनसे कम-से-कम ग़लतियाँ हों।
शिक्षण के तरीक़े में, हम शुरुआत में ठोस वस्तुओं को लेते हैं और फिर उन्हें भाग कलन विधि के प्रतीकात्मक स्वरूपों से जोड़ते हैं। भाग कलन विधि की अवधारणा और प्रक्रिया को समझाने में काम आ सकने वाली शिक्षण अधिगम सामग्रियों (टीएलएम) में से एक डींस ब्लॉक (Dienes blocks) है। इसके ज़रिए विद्यार्थी पूरी प्रक्रिया को अपने सामने साकार होते देख सकते हैं और कलन विधि को इस तरह समझ सकते हैं कि जिसके बाद वे कितने भी अंकों वाली संख्या की भाग कलन विधि को कर सकते हैं। यहाँ शिक्षक को चाहिए कि वह पूरे समूह के साथ चर्चा के बाद विद्यार्थियों को विभिन्न सवालों के लिए टीएलएम के साथ काम करवाएँ।
आइए, ‘452 ÷ 4 = ?’ के उस उदाहरण को देखें, जिसका इस्तेमाल मैंने अपनी शिक्षण पद्धति को बतलाने के लिए किया था। हमारी शुरुआती चर्चा में, विद्यार्थियों का आकलन होता है कि इस प्रश्न का उत्तर 100 से कुछ ज़्यादा होगा। शिक्षक उनसे डींस ब्लॉक का इस्तेमाल करते हुए 452 को दिखाने के लिए कहते हैं।

इसके बाद, सैकड़ा, दहाई और इकाई के ब्लॉकों के ज़रिए ज़मीन पर स्थानीय मान का चार्ट बनाया जाता है, जिसमें विद्यार्थी उपयुक्त डींस ब्लॉक रखते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान अवधारणात्मक समझ को जाँचने के लिए कुछ सवाल पूछे जाते हैं, जो इस प्रकार हैं—
- 452 में कितने सैकड़ा, दहाई और इकाई हैं?
- क्या हम 12 = ____ इकाई लिख सकते हैं?
- क्या हम 52 = 4 दहाई + 12 इकाई लिख सकते हैं?
इसके बाद, शिक्षक भाग कलन विधि की अवधारणा पर चर्चा करने के लिए समान सह-भाजन की अवधारणा का इस्तेमाल करते हैं। समान सह-भाजन की प्रक्रिया को दिखाने के लिए शिक्षक चार वृत्त बनाते हैं, और प्रश्न के प्रतीकात्मक स्वरूप को भी लिखते हैं और उन्हें इस प्रक्रिया से जोड़ते हैं।

चरण 1: पहले, 4 सैकड़े को 4 से भाग करिए। यानी, 4 सैकड़े को 4 समूहों में बाँटिए। हम पाते हैं कि हर समूह में 1 सैकड़ा है, जिसका मतलब हुआ कि भागफल 1 है और शेष शून्य है। इस प्रक्रिया को समझाते हुए हम साथ-साथ ही प्रतीकात्मक स्वरूप को भी लिखते जाते हैं।

चरण 2: अब हम दूसरे स्थान की ओर बढ़ते हैं, यानी कि दहाई का स्थान (चित्र-8 देखें)। यहाँ 5 दहाई हैं, और हमें इन्हें 4 से भाग करना है (यानी, 4 समूहों में बाँटना है)। सभी ब्लॉकों को देखने पर, हम इस नतीजे पर पहुँचते हैं कि हमारे पास हर समूह में 1 दहाई है। तो हम भागफल में दहाई के स्थान पर 1 लिखते हैं और शेष 1 दहाई रहती है।

चरण 3: यहाँ, शेष दहाई को 4 समूहों में बाँटा नहीं जा सकता है लेकिन उसको इकाई में बदला जा सकता है। तो, वहाँ पहले से मौजूद 2 इकाई में 10 दहाई को जोड़ने पर हमें 12 इकाई मिलती हैं।

चरण 4: अब हम 12 इकाई को 4 समूहों में बाँटेंगे। हमें हर समूह में 3 इकाई मिलेगी; यानी भागफल में इकाई के स्थान पर 3 है और शेष कुछ भी नहीं है।
इस तरह, जब हम 452 का 4 से भाग करते हैं तो हमें 1 सैकड़ा, 1 दहाई और 3 इकाई मिलते हैं; यानी, 452 ÷ 4 = 113
इसे भाग कलन विधि में प्रदर्शित करते हुए हम भाग करने, गुणा करने, घटाने के चरणों को दोहराएँ और अगले स्थान को तब तक नीचे लाते रहें जब तक कि सभी स्थान का भाग नहीं हो जाता।

शिक्षक 452 ÷ 4 की प्रक्रिया और इसके प्रतीकात्मक स्वरूप पर चर्चा के बाद, विद्यार्थियों को समूहों में डींस ब्लॉक \(^2\) के साथ काम करते हुए कुछ और सवाल हल करने के लिए दे सकते हैं, जैसे कि 204 ÷ 2, 320 ÷ 4 इत्यादि।
नोट : इस अंक में समीक्षा खण्ड में वर्णित एफ़एलयू (फ़्लैट्स, लॉन्ग्स, यूनिट्स) को बहुत कम लागत में बनाकर विद्यार्थियों में बाँटा जा सकता है।
शिक्षक ध्यान दें कि बच्चे क्या प्रक्रिया अपना रहे हैं, और जिन समूहों को ज़रूरत हो उन्हें मदद करें। इसका अगला क़दम यह हो सकता है कि शिक्षक ऐसे सवाल दें जिनमें शेष शून्य नहीं हो। फिर, ऐसे सवाल दें जिनमें तीन अंकों की संख्या का दो अंकों की संख्या से भाग देना हो। शुरुआती चरण में, बच्चों को चौकोर ग्रिड पेपर दें ताकि वे संख्या को स्थानीय मान के मुताबिक़ लिख सकें, और भाग कलन विधि को ढंग से कर पाएँ।

मुझे लगता है कि इस तरह से हम विद्यार्थियों में भाग को सीखने के मामले में काफ़ी सुधार ला सकते हैं। इसका नतीजा यह होगा कि अधिकतर विद्यार्थी पूर्णांकों का भाग अवधारणात्मक स्पष्टता और प्रक्रियागत रवानी के साथ आसानी से कर पाएँगे।