अनुमान लगाने की कला – भाग-1
यह लेख फर्मी विधि की पड़ताल करता है, जो बड़ी-से-बड़ी संख्याओं का अन्दाज़ा लगाने में अटकलों की न्यूनतम संख्या का इस्तेमाल करने का एक त्वरित और प्रभावी तरीक़ा है। इस पहले भाग में, हम कुछ उदाहरणों के साथ इस विधि का प्रदर्शन करेंगे। अन्त में आपके लिए चन्द पेचीदा फर्मी सवाल हल करने के लिए दिए गए हैं!
फर्मी विधि
एनरिको फर्मी (1901-1954) एक इतालवी भौतिक विज्ञानी थे जिन्होंने नाभिकीय भौतिकी और क्वांटम यांत्रिकी के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। धीमे न्यूट्रॉनों की वजह से होने वाली नाभिकीय अभिक्रियाओं पर उनके अभूतपूर्व शोध ने उन्हें 1938 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिलाया। नोबेल पुरस्कार पाने के तुरन्त बाद, वे मुसोलिनी के फासीवादी शासन से बचकर संयुक्त राज्य अमरीका चले गए थे। चार साल बाद, शिकागो में उन्होंने अपनी पहली निरन्तर/ नियंत्रित परमाणु प्रतिक्रिया का उत्पादन किया। इस खोज ने परमाणु बम व परमाणु विखण्डन रिएक्टरों के विकास का मार्ग प्रशस्त किया, जिससे परमाणु ऊर्जा व इसके सम्भावित अनुप्रयोगों के बारे में हमारी समझ में क्रान्तिकारी बदलाव आया।
फर्मी की बौद्धिक क्षमता उनकी वैज्ञानिक गतिविधियों से कहीं आगे जाती थी। उनके पास सीमित जानकारी के आधार पर सही अनुमान लगाने और जटिल समस्याओं को हल करने की अद्भुत क्षमता थी। समस्या-समाधान के लिए उनका अपरम्परागत दृष्टिकोण, जो अक्सर अन्तर्ज्ञान और सामान्य ज्ञान पर निर्भर करता था, ‘फर्मी विधि’ या ‘फर्मी अनुमान’ के नाम से जाना जाने लगा।
फर्मी अक्सर असामान्य सवाल बनाकर और उन्हें हल करके अपने दोस्तों और विद्यार्थियों का मनोरंजन किया करते थे। जैसे, “शिकागो में कितने पिआनो ट्यूनर हैं?” ‘फ़र्मी समस्या’ किसी ऐसी चीज़ का त्वरित अनुमान माँगती है जिसे सटीक रूप से मापना कठिन या असम्भव लगता है।
इन समस्याओं के हल के प्रति फर्मी का तरीक़ा होता था, सामान्य ज्ञान और मोटे-मोटे अनुमान के द्वारा उत्तर के क़रीब पहुँचना।
फर्मी समस्याएँ क्या हैं और उनका समाधान कैसे करें?
उदाहरण के लिए, आइए शिकागो शहर में पिआनो ट्यूनरों की संख्या निर्धारित करने की समस्या पर विचार करें। यह गुत्थी एक वर्ष में सेकंडों की संख्या का निर्धारण करने की एक अन्य अनुमान समस्या से किस प्रकार भिन्न है? इस बाद वाली समस्या को हल करने के लिए, हमें एक वर्ष में दिनों की संख्या, एक दिन में घण्टों की संख्या, एक घण्टे में मिनटों की संख्या और एक मिनट में सेकंडों की संख्या मालूम होनी चाहिए। इन सभी का एक निश्चित उत्तर है। हमें बस समय की इकाई को सेकंड प्रति वर्ष में बदलना होगा।


एक तरह से, बाद वाली समस्या को समस्या के कथन में ही दिए गए आँकड़ों के साथ तार्किक निगमन के द्वारा हल किया जा सकता है। दूसरी ओर, फर्मी समस्याएँ सामान्य गणितीय समस्याओं से स्पष्ट रूप से भिन्न होती हैं, क्योंकि फर्मी समस्या का उत्तर केवल तार्किक निगमन द्वारा सत्यापित नहीं किया जा सकता है और हमेशा अनुमानित ही होता है। शिकागो में पिआनो ट्यूनरों की एकदम सही संख्या जानने के लिए, हमें शहर के सभी पिआनो ट्यूनरों की कुल संख्या गिननी पड़ सकती है! अब हो सकता है कि सभी पिआनो ट्यूनर या तो टेलीफ़ोन निर्देशिका में सूचीबद्ध ना हों या गूगल से भी ना पाए जा सकें।
एक तरीक़ा है जिससे आप पता लगा सकते हैं कि शिकागो में कितने पिआनो ट्यूनर हैं :
- शुरुआत यह अनुमान लगाकर करें कि शिकागो में कितने लोग रहते हैं।
- अन्दाज़ा लगाएँ कि शिकागो में कितने घर हैं।
- अब पिआनो वाले घरों का अनुमान लगाएँ।
- अनुमान लगाएँ कि प्रत्येक घर में कितनी बार पिआनो ट्यून कराया जाता है।
- अनुमान लगाएँ कि एक पिआनो को ट्यून करने में कितना समय लगता है।
- अन्दाज़ा लगाइए कि एक पिआनो ट्यूनर एक सप्ताह में कितने घण्टे काम करता है।
अनुमान लगाते समय हम समस्या को छोटे-छोटे चरणों में तोड़ देते हैं, फिर प्रत्येक चरण में, हमें कुछ अनुमान लगाने होते हैं। चूँकि हमारा लक्ष्य सटीक आकलन नहीं बल्कि एक मोटा-मोटा अनुमान है, हमें बस यह सुनिश्चित करना है कि हमारा अनुमान सही परिमाण के भीतर है। हो सकता है प्रत्येक चरण में हमारा आकलन वास्तविकता से अधिक या कम हो। मसलन, पिआनो केवल घरों में नहीं बल्कि सार्वजनिक स्थानों और व्यावसायिक ठिकानों पर भी हो सकते हैं। हो सकता है कुछ पिआनो हमारी सोच से अधिक या कम बार ट्यून किए जाते हों। प्रायिकता का नियम कहता है कि यदि हम अपने अनुमान लगाते समय अलग-अलग दिशाओं (कम या अधिक की) में त्रुटियाँ करते हैं, तो वे एक-दूसरे को निरस्त कर देंगी और हमारा अन्तिम अनुमान सही उत्तर के क़रीब होगा।
शिकागो में मौजूद पिआनो ट्यूनरों की आबादी का अनुमान लगाने जैसी समस्या का इसी प्रकार का तरीक़ा निम्नलिखित TED-Ed वीडिओ में देखा जा सकता है।: A clever way to estimate enormous numbers – Michael Mitchell
कुछ फर्मी समस्याएँ और उन्हें सुलझाने की युक्तियाँ देखिए।
समस्या-1 : दुनिया में कितने गंजे लोग हैं?

एक समाधान : दुनिया में लगभग 8 अरब लोग हैं। उनमें से लगभग आधी महिलाएँ हैं, जो आमतौर पर गंजी नहीं होतीं। सो हमारे पास लगभग 4 अरब आदमी रह जाते हैं। गंजे होने वाले अधिकतर लोगों की उम्र 30 वर्ष से अधिक होती है। सो, हम 4 अरब पुरुषों को दो समूहों में बाँट सकते हैं — 2 अरब जो 30 या उससे कम उम्र के हैं और 2 अरब जो 30 से अधिक उम्र के हैं। वरिष्ठ समूह वह है जिसमें गंजे हैं। हम अनुमान लगा सकते हैं कि वरिष्ठ समूह के लगभग 10% पुरुष गंजे हैं। इसका मतलब, इस तर्क के अनुसार, दुनिया में लगभग 20 करोड़ गंजे हैं।
समस्या-2 : बेंगलूरु में साइकिल मरम्मत की कितनी दुकानें हैं?
एक समाधान : यह समस्या पिआनो ट्यूनर वाली समस्या के समान है। बेंगलूरु भारत का एक मेट्रो शहर है और एक सामान्य मेट्रो शहर की आबादी 1 करोड़ होगी। अब यदि एक घर में लगभग 4 लोग रहते हैं, तो शहर में 25 लाख घर होंगे। अगर हम मानें कि मोटेतौर पर दो घरों में से एक के पास साइकिल है, तो शहर में लगभग 12.5 लाख साइकिलें हैं। यह मानते हुए कि एक साइकिल को साल में एक बार मरम्मत की ज़रूरत पड़ती है, हर साल 12.5 लाख मरम्मतें होती होंगी, यानी हर महीने कोई 1,00,000 मरम्मतें। यह मानते हुए कि एक मरम्मत की दुकान प्रति माह 50 मरम्मत का काम सम्हाल सकती है, इस माँग को पूरा करने के लिए, हमें शहर में 2000 मरम्मत की दुकानों की आवश्यकता होगी। ध्यान दें कि हम निश्चित नहीं हो सकते कि साइकिल मरम्मत की दुकानों की संख्या 2000 है या 6000, लेकिन हम इतना तो जानते हैं कि उनकी तादाद हज़ारों में होनी चाहिए। अर्थात यह संख्या 200 या 20,000 तो नहीं हो सकती।
यहाँ विभिन्न क्षेत्रों से कुछ व्यावहारिक फर्मी समस्याएँ दी गई हैं :
- पर्यावरण नीति : “यदि हम प्लास्टिक की किराना थैलियों का उपयोग करना बन्द कर दें, तो हम कितना कम कचरा पैदा करेंगे?”
- शैक्षिक नीति : “यदि कोई राज्य कक्षा की अधिकतम साइज़ को 35 विद्यार्थियों तक सीमित करता है, तो स्कूल चलाने का सालाना ख़र्च कितना बढ़ जाएगा?”
- जन स्वास्थ्य : “एक गम्भीर क़िस्म के फ्लू का मौसम है और हमारे देश में हर किसी को स्वास्थ्य कार्यकर्ता से टीकाकरण की आवश्यकता है। हम कितनी तेज़ी से सभी को टीका लगवा सकते हैं?”
- व्यक्तिगत वित्त : “एक गृहिणी घरेलू खर्चों में मदद के लिए सुबह की टिफिन सेवा शुरू करना चाहती है। क्या उसे ऋण लेने की आवश्यकता है और क्या वह अपने दम पर व्यवसाय चला सकती है?”
ये उदाहरण फर्मी समस्याओं के विविध अनुप्रयोगों का विस्तार दर्शाते हैं, उन तमाम क्षेत्रों में उनकी उपयोगिता प्रदर्शित करते हैं जहाँ सटीक माप हमेशा सम्भव नहीं होते। कुछ और फर्मी समस्याओं की बानगी।
- इस पल दुनिया में कितने लोग अपने मोबाइल फ़ोन पर बात कर रहे हैं?
- यदि आपके ज़िले के सभी लोग अपना-अपना एक दिन का वेतन किसी अच्छे कार्य के लिए दान करें, तो कितना धन जुटाया जा सकता है?
- आपके राज्य में कितने किलोमीटर सड़कें/ नदियाँ हैं?
- एक सामान्य मोटरसाइकिल अपने जीवनकाल में कितना पेट्रोल ख़र्च करती है?
- एक तितली प्रति दिन कितनी दूर तक उड़ती है?
- आपके शहर में मच्छरों की वर्तमान जनसंख्या कितनी है?
- एक पेंसिल का औसत जीवनकाल कितना होता है?
- एक ट्यूबलाइट को पूरे सप्ताह/ माह/ वर्ष तक चालू रखने में कितना ख़र्च आता है?
- आप अपने जीवनकाल में कितने घण्टे टीवी देखेंगे?
- 10 लाख तक गिनने में कितना समय लगेगा? और एक करोड़ तक गिनने में?
- भारत में हर साल कितना दूध पैदा होता है?
- यह मानते हुए कि पूरे मार्ग पर एक अच्छी वाली ड्रॉइंग सतह बनाई जा सकती है, समूची भूमध्य रेखा पर लाइन खींचने में कितनी पेंसिलें लगेंगी?
- यदि आपने किसी समाचार पत्र में विज्ञापन प्रकाशित कराया है, तो कितने लोगों के द्वारा उसे देखने की सम्भावना होगी?
- आपके स्कूल में एक महीने में कितने भोजन की खपत होती है?
- औसत वैश्विक तापमान को एक डिग्री कम करने के लिए कितने पेड़ लगाने की आवश्यकता होगी? (यह मानते हुए कि ग्लोबल वॉर्मिंग उलटनीय है)
इसमें कोई सन्देह नहीं कि फर्मी समस्याओं को उठाना और हल करना मज़ेदार होता है, लेकिन क्या उनका प्रयोग कक्षा में भी किया जा सकता है? लेख के भाग-2 में इस प्रश्न की पड़ताल करेंगे।