दूषित नमूनों को पहचानना : बाइनरी अंकगणित पर आधारित एक कम्प्यूटेशनल चिन्तन गतिविधि

अनुवाद : कुमार गन्धर्व मिश्र | पुनरीक्षण : प्रतिका गुप्ता | कॉपी एडिटर : अनुज उपाध्याय

प्रस्तावना

कल्पना करें कि आप एक लैब तकनीशियन हैं और महामारी फैली हुई है। समस्या गम्भीर है और आपके पास संसाधन भी कम हैं। आपको यह पता लगाना है कि 15 नमूनों में से कौन-सा नमूना वायरस (विषाणु) से दूषित है। इसमें पेंच क्या है? आपके पास केवल चार परखनली (टेस्ट ट्यूब) हैं और आपको केवल इन चार परखनलियों का ही उपयोग करके किफ़ायती तरीक़े से ही ‘दूषित’ नमूने का पता लगाना है। क्‍या आप यह कर सकते हैं?

यह लेख एक परिकल्पित सिमुलेशन गतिविधि पर आधारित है, जहाँ आपको कुछ दी गई बोतलों में से दूषित बोतल (नमूना) का पता लगाना है। यह स्थिति दिलचस्प है क्योंकि कुल नमूनों की संख्या दूषित नमूनों का पता लगाने के लिए उपलब्ध परखनलियों की संख्या से अधिक है। यह सिमुलेशन, स्प्रेडशीट का उपयोग करके या काग़ज़-क़लम की मदद से किया जा सकता है। इस प्रकार का सिमुलेशन बाइनरी अंकगणित सीखने और दूषित नमूनों को पहचानने से सम्बन्धित विभिन्न स्थितियों का अन्वेषण करने का अवसर प्रदान करता है।

कक्षा में कम्प्यूटेशनल चिन्तन

‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ और ‘स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023’, कक्षा में कम्प्यूटेशनल चिन्तन कौशल पर ज़ोर देती है। इसे दैनिक जीवन में 21वीं सदी के प्रमुख कौशलों में से एक बताया गया है। सरल शब्दों में (देखें [2]), कम्प्यूटेशनल चिन्तन में, किसी समस्या को बताना; इस समस्या को हल करने के लिए आवश्यक महत्त्वपूर्ण जानकारियों को पहचानना; समस्या को छोटे और तार्किक चरणों में तोड़ना; इन चरणों का उपयोग करके एक ऐसी प्रक्रिया बनाना जो समस्या को हल करे; और इस प्रक्रिया का मूल्यांकन करना शामिल है। कम्प्यूटेशनल चिन्तन, समस्या को हल करने के लिए कलन-विधि आधारित चिन्तन, अमूर्तन, छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़ना, पैटर्न पहचान एवं सामान्यीकरण, मूल्यांकन और तर्क का उपयोग करता है।

कम्प्यूटेशनल चिन्तन एक कम्प्यूटर वैज्ञानिक के चिन्तन जैसा ही है। और जब कम्प्यूटर का ज़िक्र आता है, तो बाइनरी संख्या कैसे पीछे रह सकती हैं? कम्प्यूटर बाइनरी अंकों (बिट्स) के रूप में जानकारी संग्रहित करते हैं। बाइनरी निरूपण को समझने से हमें कम्प्यूटर के क्रियान्वयन को समझने में मदद मिल सकती है, क्योंकि बुनियादी स्तर पर कम्प्यूटर बाइनरी अंकों को चालू और बन्द करने के लिए एक मशीन की तरह है। कम्प्यूटेशनल चिन्तन के परिचय के रूप में बाइनरी संख्याओं को पढ़ाना विद्यार्थियों को कलन-विधि और किसी समस्या को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़ने से रूबरू कराता है। इस प्रक्रिया के दौरान वे बाइनरी संख्याओं की गणना करने और बाइनरी व दशमलव संख्याओं के बीच रूपान्तरण की समस्याओं को चरण-दर-चरण छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़ना सीखते हैं। यह अमूर्तन या कल्पना करने की क्षमता भी लाता है, क्योंकि इससे विद्यार्थी सीखते हैं कि मात्र दो अलग-अलग संकेतों (0 और 1) से किसी भी तरह की और सभी सूचनाओं को दर्शाया जा सकता है (देखें [2])।

इन बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए, यह लेख एक ऐसी गतिविधि की चर्चा कर रहा है जिसमें नमूनों के एक बड़े समूह में से दो प्रकार के नमूने – पॉज़िटिव (positive) और नेगेटिव (negative) – को अलग-अलग करना है। इस गतिविधि के दौरान, शिक्षार्थी विभिन्न नमूनों को दर्शाने के लिए बाइनरी संख्याओं का उपयोग करके और समस्या को छोटे चरणों में तोड़कर कम्प्यूटेशनल चिन्तन करते हैं। वे परखनली में उभरे रंग पैटर्न के आधार पर प्रत्येक नमूने की वस्तु-स्थिति पहचानने के लिए तार्किक सोच का इस्तेमाल करते हैं। इस गतिविधि में एक्सेल (Excel) की स्प्रेडशीट के उपयोग के माध्यम से कम्प्यूटर पर काम करना भी शामिल है।

गतिविधि के बारे में

सरलता के लिए, मान लें कि हमारे पास एक रासायनिक संकेतक है जो नमूने का रंग बदलकर विषाणु से सन्दूषित होने या न होने का संकेत देता है। यदि नमूना लाल हो जाता है, तो यह दर्शाता है कि नमूना दूषित या विषाणु-युक्त है और हम इस परिणाम को ‘पॉज़िटिव’ कहते हैं। इसके विपरीत, यदि नमूना हरा हो जाता है तो यह दर्शाता है कि नमूना दूषित नहीं है, जिसे हम ‘नेगेटिव’ कहते हैं (ध्यान दें कि इस सन्दर्भ में, ‘नेगेटिव’ का अर्थ है कि नमूना सुरक्षित है और दूषित नहीं है)।

हम जानते हैं कि परखनलियों की संख्या, नमूनों की संख्या से कम है। इसलिए हमारा लक्ष्य नेगेटिव नमूनों को कुशलतापूर्वक छाँटना है। इससे पहले चरण में ही परीक्षण करने का बोझ काफ़ी कम हो जाता है। चूँकि सभी 15 नमूनों का एक साथ परीक्षण करने के लिए चार परखनली काफ़ी नहीं हैं, इसलिए इन नमूनों को इन चार परखनलियों में मिलाना ही पड़ेगा। चूँकि हमारे पास 15 नमूने और 4 परखनली हैं, इस स्थिति में हम बाइनरी अंकगणित का लाभ उठा सकते हैं। हम इन नमूनों को इस तरह से कोड (चिह्नित) कर सकते हैं जिससे हमें उन नमूनों की पहचान करने में मदद मिलती है जो सम्भवतः दूषित हों। नीचे दी गई तालिका-1 में, 15 तक की दाशमिक संख्याओं के बाइनरी समकक्ष दर्शाए गए हैं। बाइनरी कोडिंग प्रणाली का उपयोग करके नमूनों को इस प्रकार दर्शाया जा सकता है :

नमूनाबाइनरी निरूपणनमूनाबाइनरी निरूपण
\(1 = 2^0\)0001\(9 = 2^3 + 2^0\)1001
\(2 = 2^1\)0010\(10 = 2^3 + 2^1\)1010
\(3 = 2^1 + 2^0\)0011\(11 = 2^3 + 2^1 + 2^0\)1011
\(4 = 2^2\)0100\(12 = 2^3 + 2^2\)1100
\(5 = 2^2 + 2^0\)0101\(13 = 2^3 + 2^2 + 2^0\)1101
\(6 = 2^2 + 2^1\)0110\(14 = 2^3 + 2^2 + 2^1\)1110
\(7 = 2^2 + 2^1 + 2^0\)0111\(15 = 2^3 + 2^2 + 2^1 + 2^0\)1111
\(8 = 2^3\)1000
तालिका-1 : दाएँ से बाएँ पढ़ने पर, जहाँ 2 पर कोई घात नहीं है वहाँ 0 लिखा जाता है व जहाँ 2 पर घात है वहाँ 1 लिखा जाता है।

प्रत्येक बाइनरी कोड अपने 4 अंकों के अनुसार इन चार परखनलियों में नमूना डालने का एक अनूठा तरीक़ा भी दर्शाता है। मान लें कि ‘1’ परखनली में नमूना डालने को दर्शाता है और ‘0’ परखनली छोड़ने को दर्शाता है। माना कि चारों परखनली T1, T2, T3 और T4 के रूप में निरूपित की गई हैं। अब उदाहरण के लिए, नमूना संख्या 5 लें, जिसका बाइनरी कोड 0101 है। इस नमूने को परखनली T2 और T4 में डाला जा सकता है (क्योंकि 5 के बाइनरी कोड में ‘1’, दूसरे और चौथे स्थान पर आता है), जबकि नमूना संख्या 6 (0110) को T2 और T3 में डाला जा सकता है और ऐसे ही अन्य को भी। प्रत्येक नमूने को कम-से-कम एक परखनली और अधिक-से-अधिक 4 परखनलियों में डाला जा सकता है। उदाहरण के लिए, नमूना संख्या 1 को केवल एक परखनली में डाला जाएगा और नमूना संख्या 15 को चारों परखनलियों में डाला जाएगा। यदि किसी परखनली का नमूना हरे रंग का हो जाता है, तो इसका मतलब है कि इस परखनली में डाले गए सारे नमूने नेगेटिव हैं। दूसरी ओर, यदि कोई परखनली लाल हो जाती है तो इसका मतलब है इसमें डाले गए नमूनों में से सारे नहीं, पर कम-से-कम एक नमूना पॉज़िटिव है। तो एक प्रकार से, हरा रंग हमें उन सभी नमूनों को छाँटने में मदद करता है जो उस परखनली में डाले गए थे।

एक उदाहरण

आइए एक ऐसा मामला लें जहाँ दो परखनली में कम-से-कम एक पॉज़िटिव नमूना होने का संकेत मिलता है।

चित्र-1 : चारों परखनली के परिणाम

परीक्षण में परखनली T1 और T3 हरे रंग की हो जाती हैं, जबकि T2 और T4 लाल हो जाती हैं। ये परिणाम पक्के तौर पर T1 और T3 दोनों परखनली में रखे गए सभी नमूनों को नेगेटिव होने की पहचान करते हैं, बशर्ते कि इन नमूनों की बाइनरी संख्या में ‘1’ का स्थान हरे रंग की परखनली के अनुरूप हो। तालिका-1 को देखते हुए हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि :

  • T1 हरा है : मतलब, T1 में रखे गए वे सभी नमूने जिनके बाइनरी निरूपण में पहले स्थान पर ‘1’ आता है नेगेटिव हैं, विशेष रूप से नमूना क्रमांक 8 से लेकर 15 तक।
  • T3 हरा है : इसी प्रकार, T3 में रखे गए वे सभी नमूने जिनके बाइनरी निरूपण में तीसरे स्थान पर ‘1’ आता है, नेगेटिव हैं – यानी नमूना क्रमांक 2, 3, 6, 7, 10, 11, 14 और 15।

दूसरी ओर, T2 और T4 में रखे गए नमूनों के पॉज़िटिव होने की आशंका है। हालाँकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन परखनलियों में डाला गया प्रत्येक नमूना पॉज़िटिव है। या तो T2 में डाले गए सभी नमूने (4, 5, 6, 7, 12, 13, 14 और 15) पॉज़िटिव हो सकते हैं या कम से कम एक निश्चित रूप से पॉज़िटिव होगा। यही बात T4 (1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, 15) पर भी लागू होती है। हरे रंग की परखनली से प्राप्त निष्कर्षों से तुलना करते हुए, हम नेगेटिव नमूनों (2, 3, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13 14, 15) को अलग कर लेते हैं। इस तरह हम अगले चरण में प्रावधिक पॉज़िटिव नमूनों (यानी वे नमूने जिन्हें तब तक पॉज़िटिव माना जाता है जब तक कि वे नेगेटिव साबित न हो जाएँ) 1, 4, 5 के परीक्षण करने का कार्य काफ़ी हद तक घटा लेते हैं।

ध्यान देने योग्य कुछ बिन्दु परखनली के रंग संयोजन को इसके समान दिखने वाले बाइनरी कोड और सम्बन्धित दाशमिक संख्या से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। उदाहरण के लिए, चित्र-1 में पॉज़िटिव परिणाम के लिए परखनली का पैटर्न 0101 के रूप में दिखाई देता है, जो नमूना संख्या 5 के कोड से मेल खाता है, लेकिन नमूना क्रमांक 5 नेगेटिव हो सकता है। T2 और T4 न केवल नमूना क्रमांक 5 के कारण पॉज़िटिव परिणाम दिखा सकते हैं, बल्कि इन परखनलियों में डाले गए अन्य नमूनों के कारण भी पॉज़िटिव परिणाम दिखा सकते हैं। उदाहरण के लिए, T2 में एक पॉज़िटिव नमूना और T4 में एक पॉज़िटिव नमूना परखनली के सभी नमूनों को पॉज़िटिव बना सकता है, जबकि नमूना क्रमांक 5 नेगेटिव भी हो सकता है।

तार्किक रूप से सोचें और कारण बताएँ!

मान लीजिए कि परीक्षण के परिणाम इस प्रकार आते हैं — T4 परखनली हरी है और T1, T2 और T3 लाल हैं।

अब आपका निष्कर्ष क्या होगा?

गतिविधि का संचालन कक्षा में

शिक्षक उपरोक्त बाइनरी-आधारित तर्क को कक्षा में कराई जाने वाली एक गतिविधि की एक शृंखला के रूप में बना सकते हैं।

  1. कक्षा में शिक्षक इस समस्या को प्रस्तुत करते हैं और एक उदाहरण के ज़रिए इस समस्या का समाधान दर्शा सकते हैं।
  2. विद्यार्थियों से नमूना संख्याओं के बाइनरी निरूपण को दर्शाने वाली निम्न तालिका भरने के लिए कहा जा सकता है और यह भी भरने को कहा जा सकता है कि इन 15 नमूनों में से कौन-सा नमूना इन चारों परखनलियों में डाला जा सकता है। (यहाँ नमूना संख्या 6 के लिए उदाहरण पेश किया गया है।)
नमूनाबाइनरी निरूपणपरखनली
T1T2T3T4
10001
20010
30011
40100
50101
60110
70111
81000
91001
101010
111011
121100
131101
141110
151111
तालिका-2
  1. विद्यार्थियों से पूछा जा सकता है कि परीक्षण परिणामों के कितने संयोजन सम्भव हैं।
  2. विद्यार्थियों के जोड़े में समूह बनाए जा सकते हैं। फिर उन्हें (लॉटरी द्वारा) कुछ विशेष परीक्षण परिणाम, जो रंगीन पट्टियों (दो अलग-अलग रंग जैसे, लाल और हरा) के रूप में होते हैं दिए जाएँ। उन्हें निर्देश दिया जा सकता है कि वे परखनली के रंग संयोजनों के आधार पर नेगेटिव नमूनों को छाँटने का प्रयास करें।
  3. शिक्षक एक नमूने के लिए समस्या समाधान बता सकते हैं। यदि दी गई रंग की पट्टी में T1 और T3 लाल रंग में हैं और T2 और T4 हरे रंग में हैं (जैसा कि चित्र-2 में है) तो शिक्षक समझा सकते हैं कि नेगेटिव नमूनों को कैसे छाँटा जाए और कैसे उन्हें विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई तालिका में रिकॉर्ड किया जाए।
चित्र-2
नमूनाबाइनरी निरूपणपरखनली
T1T2T3T4
10001
20010
30011
40100
50101
60110
70111
81000
91001
101010
111011
121100
131101
141110
151111
तालिका-3

इस मामले में, नेगेटिव नमूने 1, 3, 4, 5, 6, 7, 9, 11, 12, 13, 14 और 15 हैं। इसके पश्चात्, शिक्षक पॉज़िटिव नमूनों को पहचानने के बारे में समझाते हैं। इस मामले में, नमूने 2, 8 और 10 शेष रह गए हैं। इन नमूनों को क्रमशः I, II और III के रूप में फिर से नामांकित किया जा सकता है और केवल परखनली T1, T2 और T3 का उपयोग करके फिर से परीक्षण किया जा सकता है। विद्यार्थियों से यह भी कहा जा सकता है कि यदि इनमें से केवल एक नमूना दूषित है तो सम्भावित परिणाम बताएँ।

  1. विद्यार्थी जोड़े में काम करते हैं और अपने परिणाम रिकॉर्ड करते हैं। गतिविधि के बीच में, कोई भी दो समूह जिन्हें समान परीक्षण परिणाम मिलते हैं, वे अपने निष्कर्ष साझा कर सकते हैं। गतिविधि के अन्त में, शिक्षक यादृच्छिक (Randomly) रूप से विद्यार्थियों के कुछ जोड़े चुनते हैं और उन्हें सभी के साथ अपने निष्कर्ष साझा करने के लिए कह सकते हैं।
  2. विद्यार्थियों को आगे काम करने के लिए एक वर्कशीट प्रदान दी जा सकती है।

सुझाव :

गतिविधि से जुड़ाव बनाने के लिए विद्यार्थी ख़ुद अपने जोड़े/ समूह बना सकते हैं और सभी 16 सम्भावित परीक्षण परिणामों को काग़ज़ की रंगीन पट्टी का इस्तेमाल कर रंग पैटर्न के रूप में बना सकते हैं (जैसा कि चित्र-3 में दिखाया गया है) और उन्हें एक कटोरे में डाल सकते हैं। प्रत्येक जोड़ा कटोरे से एक काग़ज़ की रंगीन पट्टी निकाल सकता है और निर्धारित गतिविधि कर सकता है। यह गतिविधि समस्या को छोटे चरणों में तोड़कर और नेगेटिव नमूनों और सम्भावित पॉज़िटिव नमूनों का पता लगाने के लिए तर्क का उपयोग करके कम्प्यूटेशनल चिन्तन के पहलुओं को सुदृढ़ करती है।

स्वयं प्रयास करें :

मान लीजिए T1, T2, T3 हरे हो जाते हैं और T4 लाल हो जाता है (चित्र-3)।

चित्र-3

नेगेटिव नमूनों और सम्भावित पॉज़िटिव नमूनों का पता लगाने के लिए आप कैसे आगे बढ़ेंगे?

आइए मन्थन करें!

  1. मान लीजिए कि नमूना संख्या 15 दूषित है। आपको क्या लगता है क्या परिणाम आएँगे? परखनलियों के रंग क्या होंगे, बताएँ।
  2. यदि नमूना संख्या 15 दूषित है, तो आप इसे कैसे पहचानेंगे?
  3. यदि आपके पास पाँच परखनली हैं, तो आप कितने नमूनों का परीक्षण कर सकते हैं? छह परखनली हों तो क्या विचार है?
  4. 1000 नमूनों का परीक्षण करने के लिए कितनी परखनलियों की आवश्यकता होगी? क्यों?
  5. निम्नलिखित स्थितियों में, प्रावधिक रूप से पॉज़िटिव नमूनों (वे नमूने जिन्हें तब तक पॉज़िटिव माना जाता है जब तक कि वे नेगेटिव साबित न हो जाएँ) की संख्या बतलाएँ।
हरे रंग वाली परखनली की संख्यालाल रंग वाली परखनली की संख्याप्रावधिक रूप से पॉज़िटिव नमूनों की संख्या
04?
13?
22?
31?
40?
तालिका-4

सिमुलेशन का उपयोग करके तर्क कार्य को गतिविधि में बदलना

इस गतिविधि को एक्सेल स्प्रेडशीट का उपयोग करके विद्यार्थियों के लिए सिमुलेशन गतिविधि में बदला जा सकता है।

आइए, एक्सेल और रैंडम फ़ंक्शन जेनरेटर के माध्यम से परखनली के विभिन्न रंग क्रमचय का पता लगाएँ :

  1. एक एक्सेल फ़ाइल स्प्रेडशीट खोलें और किसी भी सेल को चुनें।
Detecting poisoned-fig-5
चित्र-5
  1. सेल पर ‘=CHOOSE (RANDBETWEEN (1,2), “positive”, “negative”)’ फ़ंक्शन लगाएँ। सेल को सिलेक्ट करके इसे उसी पंक्ति के चार सेल तक बढ़ा लें। इन चारों सेल में ‘positive’ और ‘negative’ शब्द लिखे दिखाई देंगे। (चित्र-6) इन चार सेल को चार परखनली मान लें।
Detecting poisoned-fig6
चित्र-6
Detecting poisoned-fig7
चित्र-7
  1. इन सेल को छोड़कर कोई अन्य सेल चुनें। इस सेल में कोई भी अक्षर या संख्या लिखें और ‘Enter’ बटन दबाएँ। आप देखेंगे कि चारों सेल में शब्द बदल जाते हैं। किसी भी अन्य सेल में कोई भी संख्या दर्ज करके इस प्रक्रिया को दोहराएँ; फिर से, आप देखेंगे कि इन चार सेल में ‘positive’ और ‘negative’ शब्द अलग-अलग हैं।
Detecting poisoned-fig8
चित्र-8
  1. अब चार सेल (परखनली) चुनें और ‘conditional formatting’ का उपयोग करके पॉज़िटिव और नेगेटिव शब्द विशिष्ट के लिए सेल को क्रमश: हरा रंग और लाल रंग से दर्शाएँ।
Detecting poisoned-fig9
चित्र-9
Detecting poisoned-fig10
चित्र-10
  1. ‘positive’ और ‘negative’ शब्दों के फ़ॉन्ट साइज़ को जितना सम्भव हो उतना छोटा करें; जैसे कि साइड 1, ताकि परखनली सेल पर केवल रंग दिखाई दें और शब्द अदृश्य हो जाएँ।
Detecting poisoned-fig11
चित्र-11
  1. किसी अन्य सेल का चयन करें और कोई भी संख्या लिखें और ‘Enter’ दबाएँ। ऐसा करने से परखनली सेल का रंग बदल जाता है। ऐसा करने से आप परखनली सेल में रंग के विभिन्न क्रमचय प्राप्त कर सकते हैं। सम्भावित क्रमचय के कुछ उदाहरण :
Detecting poisoned-fig12
चित्र-12
  1. लाल सेल को उनमें डाले गए (अभी के लिए) पॉज़िटिव/ दूषित नमूनों के संकेतक के रूप में और हरे सेल को उनमें डाले गए नेगेटिव नमूनों के संकेतक के रूप में मानें। इस तरह कुल 24 यानी 16 रंगीन क्रमचय बनाए जा सकते हैं। इन 16 क्रमचयों में से एक क्रमचय चारों परखनलियों की रिक्तता दर्शाता है, यानी सभी परखनलियों को ख़ाली छोड़ देना। इसलिए, हमें इस स्थिति पर विचार करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि बाक़ी 15 स्थितियों पर ही ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है।
  2. स्प्रेडशीट का उपयोग करके तालिका बनाएँ, जिसमें 15 नमूनों और चारों परखनलियों के बीच सम्बन्ध दर्शाया गया हो।
नमूनाबाइनरी निरूपणपरखनली
T1T2T3T4
100010001
200100010
300110011
401000100
501010101
601100110
701110111
810001000
910011001
1010101010
1110111011
1211001100
1311011101
1411101110
1511111111
चित्र-13

अब हम चित्र-13 में दिखाए गए तर्क का ही उपयोग करेंगे।

निष्कर्ष

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, विद्यार्थी नेगेटिव और पॉज़िटिव नमूनों की पहचान के लिए प्रक्रिया को छोटे-छोटे चरणों में तोड़ने के लिए तर्क और चिन्तन का उपयोग करते हैं। इस प्रकार विद्यार्थी जब प्रत्येक नमूनों को बाइनरी कोड दे रहे होते हैं तब वे बाइनरी अंकगणित के साथ जुड़ते हैं, परखनलियों में पैटर्न तलाशते हैं और किसी नमूने को नेगेटिव या प्रावधानिक रूप से पॉज़िटिव कहने के अपने निर्णय का मूल्यांकन करते हैं। इस गतिविधि में कम्प्यूटेशनल चिन्तन का सार यही है, जहाँ शिक्षक विद्यार्थी को तर्क के साथ-साथ समस्या को छोटे चरणों में विघटित करने और बाइनरी संख्याओं के साथ खेलते हुए हल करने के लिए अपनी कलन-विधि (एल्गोरिदम) को बनाने का अवसर प्रदान करते हैं।

टिप्पणी : बाइनरी अंकगणित के माध्यम से कोविड-पॉज़िटिव/ कोविड-संक्रमित नमूनों का परीक्षण करने के लिए इसी प्रकार का तरीक़ा कादरी (2020) द्वारा सुझाया गया था, लेकिन इसमें नमूनों के मिश्रण के अनुपात की अवधारणा का उपयोग किया गया है।

आभार : लेखक समीक्षकों के बहुमूल्य सुझावों के लिए उनके आभारी हैं।

  1. CS Unplugged. (n.d.). Retrieved from Computational thinking: https://www.csunplugged.org/en/ computational-thinking/
  2. CS Unplugged. (n.d.). Retrieved from Binary numbers: https://www.csunplugged.org/en/topics/binary-numbers/whats-it-all-about/
  3. Houston, K. (2016, December 15). Can you solve the poison wine challenge? Retrieved from PBS Infinite Series: https://www.youtube.com/watch?v=N3qmN6pYhi0
  4. Kadri, Usama. “The Maths Logic that could help test more people for Coronavirus.” The Conversation, April 9, 2020. https://theconversation.com/the-maths-logic-that-could-help-test-morepeople-for-coronavirus-134287
  5. Ministry of Education. (2020, July 29). National Education Policy 2020. Retrieved February 29, 2024, from Ministry of Education: https://www.education.gov.in/sites/upload_files/mhrd/files/NEP_ Final_English_0.pdf
  6. National Council of Educational Research and Training. (2023). National curriculum framework for school education 2023. Retrieved from National Council of Educational Research and Training: https://www.ncert.nic.in/pdf/NCFSE-2023-August_2023.pdf

और लेख