गणित उत्‍सव के रंग

celebration of math

त्योहारों का समय वह समय होता है, जब हम अपने परिवेश की हर सुन्‍दर चीज़ का उत्सव मनाते हैं। क्या आपने कभी ग़ौर किया है कि ऐसे समय में हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें कितना गणित छिपा होता है?

सम्पादक की ओर से...

प्रिय पाठको,

बस देखते-ही-देखते, 2025 तेज़ी से गुज़र गया और हम वर्ष के अन्तिम अंक पर आ पहुँचे हैं! एट राइट एंगल्स के लिए यह वर्ष सीखने का वर्ष रहा है – न केवल गणित का, बल्कि प्राथमिक विद्यालय गणित की शिक्षण-पद्धति में मौजूद कमियों और ज़रूरतों का भी। हमने गणित के साथ शिल्प, कला, प्रौद्योगिकी, हमारे पर्यावरण और हमारे रोज़मर्रा के जीवन के व्यवसायों तथा रूचियों के अन्‍तर्सम्‍बन्‍ध की जाँच की। नवम्‍बर, 2025 के अंक में हम गणित के उत्सव पर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं! हम इस बात से भली-भाँति अवगत हैं कि विद्यार्थियों और वयस्कों की एक बड़ी आबादी इस विचार का उपहास उड़ाती है। एक प्रसिद्ध उद्धरण है, ‘‘गणित के साथ मेरा प्‍यार और नफ़रत का रिश्‍ता है – मुझे इसे प्यार करने से नफ़रत है, लेकिन मुझे इससे नफ़रत करना पसन्‍द है।’’ एक उत्सव ऐसे दृष्टिकोण के बिल्कुल विपरीत लगता है; इसलिए हम यह पड़ताल करना चाहते थे कि हम एक सार्थक उत्सव कैसे मना सकते हैं जो समावेशी हो, विभिन्न क्षमताओं को पूरा करता हो और, सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि गणित के बारे में इस मानसिकता को बदलता हो।

त्योहार विविधता को बढ़ावा देते हैं, वे विभिन्न हितधारकों को संवाद में लाते हैं, वे रचनात्मकता बढ़ाते हैं, वे ‘विषय पर स्वामित्व’ के अवसर प्रदान करते हैं। संक्षेप में, वे कक्षा को बदल देते हैं – कम-से-कम एक दिन के लिए! हम स्थायी परिवर्तन लाने के लिए ऐसे अवसरों का लाभ कैसे उठा सकते हैं? क्या हम हर साल 22 दिसम्‍बर को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय गणित दिवस के उत्सव को आगामी शैक्षणिक वर्ष तक ले जा सकते हैं? तभी वे वास्तव में मनाने लायक होंगे। इस अंक के दो ‘विशेष’ लेख और ‘पुलआउट’ इस उत्सव के विभिन्न पहलुओं और विचारों को प्रस्तुत कर रहे हैं।

इस अंक का ‘कक्षा में’ खण्‍ड स्मृति स्मारक पाण्‍डा के विचारोत्तेजक लेख ‘‘पढ़ाते-पढ़ाते हम क्या छीन लेते हैं?‘’ के साथ शुरू होता है। हम सीखने में कमी लाए बिना कैसे सिखाएँ? जीनत रहमान की युवा माया की संख्याओं के साथ खोज और माया ने कैसे विभाज्यता के बारे में बचपन में कुछ छोटी-छोटी गणितीय खोजें की, इस पर आधारित कहानी विद्यार्थियों द्वारा किए जाने वाले शिक्षण के महत्त्व पर ज़ोर देती है। और करण सिंह जारी रखते हैं – ‘‘अपने अनुभव के माध्यम से क्षेत्रफल और परिमाप सिखाना। ’’ वे एक शिक्षक प्रशिक्षण सत्र का वर्णन करते हैं जिसमें शिक्षकों ने सीखा कि सूत्रों को बताए बिना प्रासंगिक उदाहरणों के माध्यम से अवधारणाओं का पता कैसे लगाएँ।

क्षमा चक्रवर्ती का लेख, “कैसे पता करूँ कि उन्होंने समझ लिया है?” शिक्षण पद्धतियों के कुछ अच्छे त्रुटि-सुधार उदाहरणों को समाहित करता है। हम उन त्रुटियों का पता कैसे लगा सकते हैं और उन्हें कैसे दूर कर सकते हैं जो विद्यार्थी के मन में अवधारणा-निर्माण की प्रक्रिया में आ जाती हैं? कक्षा में वास्तविक हस्तक्षेप पहलों के साथ इस लेख को आगे बढ़ाने के क्षमा के उदार प्रस्ताव पर उनसे ज़रूर सम्‍पर्क करें।

हम इस खण्‍ड का समापन स्वाती सरकार की रिपोर्ट और आकेफ़ा बसरी के फ़ैक्‍ट फ़ैमिली पर दिए गए पाठ के फॉलो-अप के साथ कर रहे हैं – जोड़ और घटाव के फ़ैक्‍ट संख्याओं के बीच सम्‍बन्‍ध कैसे बना सकते हैं? यह हमें ‘गणित का मज़ा’ खण्‍ड के लिए एक शानदार शुरुआत देता है। बहुत लम्‍बे समय के बाद एक वर्ग-संख्‍या पहेली दी जा रही है जो जोड़ फ़ैक्‍ट फ़ैमिली पर आधारित है। आर. मोहन वर्ग टाइल्स के साथ दिलचस्प खोजों का वर्णन करते हैं। हम पद्मप्रिया शिराली की एक गणितीय नाटक स्क्रिप्‍ट और उनके अनुभव के आधार पर यह निष्कर्ष निकालते हैं कि अच्‍छे नाटक गणित से दूर-दूर रहने वाले विद्यार्थियों को भी गणित की कक्षा के केन्द्रीय मंच पर खींच लाते हैं।

हम केरलिन क्रिस्‍टोफर की पहेली ‘संख्‍याओं में कला’ पर एट राइट एंगल्‍स के पाठकों को उनकी विभिन्‍न प्रतिक्रियाओं के लिए धन्‍यवाद देते हैं। इनमें से दो पाठकों की प्रतिक्रियाओं को इस अंक में शामिल किया गया है; दोनों पाठकों ने कई सुझाव भेजे हैं, लेकिन हमें जगह की कमी के कारण उनमें से कुछ को चुनना पड़ा।

एट राइट एंगल्स के जुलाई, 2025 अंक के ‘पुलआउट’ और कवर ने इस बात पर ध्यान केन्द्रित किया था कि बुनाई के पैटर्न स्कूल गणित से कैसे जुड़ सकते हैं। हमें ख़ुशी है कि एनसीईआरटी की कक्षा-5 की नई पाठ्यपुस्तक में भी इस विचार को शामिल किया गया है। हमें उम्मीद है कि शिक्षक बुनाई के माध्यम से गणित को कक्षा के जीवन में शामिल करने का आनन्‍द लेंगे।

जॉन वॉन न्यूमैन का प्रसिद्ध कथन है, ‘‘ गणित में, आप चीज़ों को समझते नहीं हैं। आप बस उनके आदी हो जाते हैं।’’ हम इसका उपयोग आपको यह आग्रह करने के लिए करना चाहते हैं कि आप गणित के उत्सव को सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीक़ा बनाएँ।

स्नेहा टाइटस
मुख्य सम्पादक, एट राइट एंगल्स
AtRightAngles.editor@apu.edu.in