प्रिय पाठको,
पेश है साल 2025 का पहला अंक! हालाँकि अब यह इतना भी नया नहीं रह गया, साल के तीन महीने बीत चुके हैं। हम एक तिमाही का सफ़र तय कर चुके हैं। पुराने अंक से अब तक एक जाड़े के मौसम का फ़ासला भी तय हो चुका है। नवम्बर, 2024 और मार्च, 2025 के अंकों के अन्तराल में पद्मप्रिया शिराली और मैंने कुछ दिन कर्नाटक के चामराजनगर ज़िले और मध्य प्रदेश के भोपाल व दमोह ज़िलों के ऐसे कुछ स्कूलों में बिताए जो अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन के सम्पर्क में हैं। एक बार फिर से कक्षाओं में जाना और शिक्षकों व विद्यार्थियों के साथ हमारे संवाद आनन्ददाई और विचारोत्तेजक रहे। हम ढेर सारे विचारों और बच्चों व उनके शिक्षकों की ऊर्जा व उत्साह की बुनियाद पर आगे बढ़ने का संकल्प लिए वापस लौटे। सम्पादक रुद्रेश और सन्दीप दिवाकर ने हमारी इन यात्राओं का संयोजन किया था। यह देखकर हमें बहुत प्रोत्साहन मिला कि शिक्षकों और विद्यार्थियों ने किस तरह कक्षा में फ़ाउण्डेशन की उपस्थिति को हाथों-हाथ लिया। हमने देखा कि हमारे रिसोर्स पर्सन फ़ील्ड से कितनी गहराई से जुड़े हैं। हम आगे भी ऐसी यात्राएँ करना चाहेंगे। आपको एट राइट एंगल्स के इस अंक में और आगे आने वाले अंकों में ख़ूब सारे सवालों के ख़ूब सारे जवाब, लेखों के लिए अलग-अलग विचार और ग़लत धारणाओं को दूर करने के लिए सुझाव देखने को मिलेंगे।
मार्च, 2024 के अंक में हमने कक्षा-1 और 2 की गणित की नई पाठ्यपुस्तकों की विशेषताओं पर चर्चा की थी। इस अंक की शुरुआत हमने इस पर एक नज़र डालते हुए की है कि इन पाठ्यपुस्तकों को पूरे देश की कक्षाओं में कैसे लिया गया है और उपयोग किया गया है। इसने शिक्षणशास्त्र को किस तरह प्रभावित किया है? इनकी विषयवस्तु बच्चों को सिखाने में कितनी आसान रही है? स्वागत योग्य बदलाव कौन-से हैं? कौन-सी बातें छूट रही हैं? शिक्षक सोनिया कुण्डू द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी के साथ क्षमा चक्रवर्ती ने इस लेख को शिक्षकों के साथ हुए कई संवादों, कक्षा की रिपोर्टों और कर्नाटक से उत्तराखण्ड तक विभिन्न राज्यों में बड़ी मेहनत से किए गए सर्वेक्षण के फ़ीडबैक की बुनियाद पर लिखा है।
‘कक्षा में’ खण्ड में हम आपके लिए कक्षाओं से कई झलकियाँ लेकर आए हैं। राहुल सिंह राठौर और जागृति मेहरा द्वारा तैयार की गई पाठ-योजनाएँ और मार्गदर्शित चर्चाएँ वृत्तों और पैटर्न की गहरी अवधारणात्मक समझ बनाने की ओर ले जाती हैं। शेख़ मोहम्मद ज़ाहिद ऐसे गहरे सवाल गढ़ने की अपनी समझ को साझा करते हैं जो किसी विद्यार्थी की समझ और ग़लत समझ दोनों पर ध्यान देते हैं। इसके कई उदाहरण भी दिए गए हैं और साथ में इस बारे में कुछ दिशा-निर्देश भी हैं कि दूसरे विषयों में इन्हें कैसे सम्बोधित करना है। क्षमा मॉण्टेसरी सामग्री, उनकी विशेषताओं और सीखने के उद्देश्यों पर अपने लेखों की शृंखला की आख़िरी प्रस्तुति कर रही हैं। इसमें मैथ स्पेस की लिंक दी गई है जहाँ हम यह सीख सकते हैं कि इन वस्तुओं के कम लागत वाले रूप कैसे बनाए जा सकते हैं।
संख्या पहिया और एक संशोधित UNO खेल! ‘गणित का मज़ा’ लेने के लिए आपको और क्या चाहिए! इन्हें पढ़ने और इनके साथ प्रयोग करने का आनन्द उठाइए। अगर आप इनके ऐसे रूप विकसित कर सकें जो खेल, अवलोकन, चर्चा और दस्तावेज़ीकरण के द्वारा और अधिक सीखने की ओर ले जाते हों, तो हमें इनकी तस्वीरें और विचार ज़रूर भेजें।
गणितीय दृष्टि से बच्चों की काल्पनिक कहानियाँ के बारे में मनीषा गोयल एक जापानी लेखक (ऐनो) की एक शृंखला का वर्णन कर रही हैं। इसे गणितीय विषयवस्तु के लिए टटोला जा सकता है। वे यह भी विस्तार से बता रही हैं कि उन्होंने अपनी कक्षाओं में यह कैसे किया था। ‘समीक्षा’ में ऐसे कई और विचार साझा किए गए हैं। मैं चाहूँगी कि आप इस कहानी को ऑनलाइन ज़रूर पढ़ें। इसके चित्र इतने समृद्ध हैं और उनमें से हर एक गिनती, स्थानीय मान, गणितीय संक्रियाएँ, बजट बनाने, नियोजन व कई और उपयोगी जीवन कौशलों को समझने में आपके विद्यार्थियों की मदद कर सकते हैं!
हम इस बार ऐसी वस्तुओं की एक तुलनात्मक समीक्षा भी कर रहे हैं जिन्हें संख्या ज्ञान शिक्षण के लिए उपयोग किया जाता है। इनकी विशेषताओं का उपयोग कब और कैसे करना है, इन सब बातों को मैथ स्पेस द्वारा व्यवस्थित ढंग से सूचीबद्ध किया गया है।
इस बार का पुलआउट चामराजनगर की रिसोर्स पर्सन सौम्या एन. से प्रेरित है। उन्होंने बच्चों को बीजगणित से परिचित कराने की योजनाओं के बारे में पद्मप्रिया से पूछा था। हम आशा करते हैं कि आपको उनके सवालों से लाभ मिलेगा। हम चाहते हैं कि आप सब भी अपने सवाल/ अनुरोध हमारे साथ साझा करें।
आपके फ़ीडबैक, सवालों, विचारों को AtRightAngles.editor@apu.edu.in पर भेजें। हमें आपकी बातें सुनना अच्छा लगेगा।
हार्दिक शुभकामनाएँ,
स्नेहा टाइटस
मुख्य सम्पादक, एट राइट एंगल्स
हम ऐसे लेखों का स्वागत करते हैं जो गणित के सीखने के अनुभव को बढ़ाते हैं, विशेषकर 6-14 वर्ष की आयु वर्ग के विद्यार्थियों के लिए।
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