मॉण्टेसरी का तरीक़ा : चुनिन्दा सामग्रियों का परिचय और उन्हें फिर से कैसे बनाया जाए (भाग 2)

अनुवाद : हिमालय तहसीन | पुनरीक्षण : प्रतिका गुप्‍ता

आपने कभी सोचा है कि रोज़मर्रा की चीज़ें कैसे किसी बच्चे में छिपी सम्भावनाओं को सामने ला सकती हैं? मॉण्टेसरी का जादू अपने घर में लाने के लिए कम लागत वाले तरीक़े इस लेख में बताए गए हैं। साथ ही ऐसी पद्धति के फ़ायदे भी बताए गए हैं जो आज़ादी, रचनात्मकता और सीखने के प्रति ज़िन्दगी भर के प्यार को बढ़ावा देती है।

शीर्षक से स्पष्ट है कि मॉण्टेसरी सामग्रियों की दो-भाग की शृंखला में यह दूसरा लेख है। इस शृंखला में कुल छह मॉण्टेसरी सामग्रियों को शामिल किया गया है। ‘एट राइट एंगल्स’ नवम्‍बर, 2024 में प्रकाशित पहले भाग में सामग्री 1–4 यानी गुलाबी टावर, भूरे रंग की सीढ़ियाँ, लम्बी छड़ें और संख्या वाली छड़ें [1] शामिल थीं। इस लेख में घुंडी वाले बेलनाकार ब्लॉक (cylinder blocks) और बिना घुण्डी वाले बेलनाकार ब्‍लॉक (knobless cylinders) शामिल हैं।

मॉण्टेसरी पाठ्यचर्या में अध्ययन के पाँच प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं : व्यावहारिक जीवन, संवेदी, गणित, भाषा और संस्कृति। इनमें से हर क्षेत्र के लिए मॉण्टेसरी की सामग्रियों का एक सेट है, जो किसी ख़ास ज्ञान या कौशल के बारे में है। इस लेख में हम कुछ संवेदी सामग्रियों पर ग़ौर करेंगे, ख़ासतौर पर ऐसी सामग्रियाँ जो देखने पर फ़र्क़ को बताती हैं जैसे पतली, मोटी, लम्बी, छोटी। आप जैसे-जैसे पढ़ते जाएँगे, आपको एहसास होगा कि इन सामग्रियों में बहुत कुछ है − गणित, भाषा, विस्‍तार पर ध्यान और ऐसा बहुत कुछ जो आपस में गुँथा हुआ है! उम्मीद है कि इससे आपको यह आभास होगा कि इन सामग्रियों के साथ कक्षा में क्या किया जा सकता है और इनका इस्तेमाल करने पर किस तरह के नतीजों की उम्मीद की जा सकती है।

सामग्री-5 : बेलनाकार ब्लॉक

बेलनाकार ब्लॉक के 4 सेट हैं। हर सेट में 10 बेलनाकार ब्‍लॉक हैं। इन्हें एक खाँचेदार पटिए में रखा गया है। पटिए में हर ब्‍लॉक को रखने के लिए एक खाँचा है। एक सेट में, बेलनाकार ब्‍लॉक बड़े से छोटे के क्रम में रखे गए हैं (चित्र-1 नीचे का सेट)। दूसरे में उन्हें मोटे से पतले के क्रम में रखा गया है (चित्र-1 बायाँ सेट)। तीसरे में उन्हें मोटे और छोटे से पतले और लम्बे के क्रम में रखा गया है (चित्र-1 ऊपर का सेट)। चौथे सेट में उन्हें लम्बे से छोटे क्रम में रखा गया है (चित्र-1 दायाँ सेट)।

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चित्र-2 : ब्‍लॉक को घुण्डी से पकड़ना बच्चों को पेंसिल पकड़ने के लिए भी तैयार करता है।

इस्तेमाल कैसे करें : उपरोक्त क्रम में बच्चों को अलग-अलग बेलनाकार ब्‍लॉकों के सेट के बारे में एक-एक करके जानकारी दी जाती है। बच्चा पटिए को चटाई पर रखता है और सभी बेलनाकार ब्‍लॉकों को उनके खाँचों में से निकाल देता है। ब्‍लॉकों को बेतरतीब ढंग से बिखेर दिया जाता है। अब बच्चे से उन्हें वापस सही खाँचों में रखने को कहा जाता है। ध्यान दें कि बच्चा ब्‍लॉकों को ग़लत तरीक़े से रख दे या कुछ खाँचों को ख़ाली छोड़ दे तो यह गतिविधि वहीं ख़त्म नहीं हो जाती है। अगले सेट पर तभी बढ़ा जाए, जब बच्चा इस सेट के सभी ब्‍लॉकों को सही ढंग से रखने लगे। इसके लिए वह शुरुआत में कोशिश करेगा और ग़लतियाँ करेगा। यह एक उदाहरण है जो बताता है कि कैसे मॉण्टेसरी सामग्री ख़ुद-ब-ख़ुद सुधार करवाती है।

यहाँ इस बात पर भी ध्यान दें कि इस तरह की गतिविधियाँ बच्चे को पेंसिल पकड़ने और पेशीय कौशल (motor skills) को विकसित करने के लिए तैयार करने में मदद करती हैं। सामग्री को बनाने में इस तरह की छोटी-छोटी दिखने वाली बातों पर ध्यान दिया जाता है। (चित्र-2)

अतिरिक्त गतिविधियाँ

गतिविधि-1 : जब बच्चा आसानी से बेलनाकार ब्‍लॉकों को सही ढंग से रखने लगे, तो खाँचेदार पटिए हटा दिए जाते हैं और ब्‍लॉकों को चटाई पर बेतरतीब ढंग से रखा जाता है। अब बच्चे को उन्हें बढ़ते या घटते क्रम में जमाने के लिए कहा जाता है। यहाँ बच्चे के पास खाँचेदार पटिया नहीं है जिससे उसे ब्‍लॉकों की सही स्थिति में जमे होने का पता चल पाए। बच्चे को एक बार में एक सेट ही दिया जाता है।

गतिविधि-2 : दो पटियों के ब्‍लॉक सेट (उदाहरण के लिए, बड़े से छोटे और मोटे से पतले वाले) को अँग्रेज़ी के L–आकार में जमाया जाता है। दोनों सेट से सभी ब्‍लॉकों को निकालकर मिला दिया जाता है। अब बच्चे को उनमें से हर ब्‍लॉक को उसकी सही जगह पर रखने के लिए कहा जाता है। यह गतिविधि 3 सेटों के साथ दोहराई जाती है और आख़िरकार सभी 4 सेटों के साथ की जाती है। यह छह साल के बच्चों के लिए ज़्यादा मुनासिब होगी।

गतिविधि-3 : ब्‍लॉकों को एक ट्रे में रखकर दूसरे कमरे में रख दिया जाता है। किसी एक खाँचे में एक संकेतक रख दिया जाता है (कुछ न हो तो पेंसिल का इस्तेमाल किया जा सकता है)। विद्यार्थी को कहा जाता है कि जिस खाँचे में संकेतक रखा हुआ है, उस खाँचे में रखने के लिए सही ब्‍लॉक ट्रे में से चुनकर लाए। इस गतिविधि में ब्‍लॉक के आयाम देखकर उसकी पहचान करना, उस पहचान को याद रखना और ट्रे से सही ब्‍लॉक की पहचान करना शामिल है। अगर शुरुआत में बच्चे को कई बार कोशिश करनी पड़ती हो तो उन्हें ऐसा करने की इजाज़त दी जाती है।

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चित्र-3 : गतिविधि-3

सामग्री-6 : बिना घुण्डी के बेलनाकार ब्‍लॉक

बेलनाकार ब्‍लॉकों का एक बदला हुआ रूप बिना घुण्डी के ब्‍लॉक (या रंगीन ब्‍लॉक) हैं। ये पहले के ब्‍लॉकों के जैसे ही हैं, लेकिन इनको रखने के लिए खाँचे या पकड़ने के लिए घुण्डियाँ नहीं होती हैं। ये 4 रंगों में होते हैं — लाल (मोटे से पतले, एक जैसी ऊँचाई), पीले (बड़े से छोटे), हरे (छोटे और मोटे से लम्बे और पतले) और नीले (लम्बे से छोटे, एक जैसा व्यास); ये चित्र-4 में दिखाए गए हैं।

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चित्र-4

इनके साथ भी बेलनाकार ब्‍लॉकों के लिए बताई गई गतिविधियों जैसी ही गतिविधियाँ की जा सकती हैं। बेलनाकार ब्‍लॉकों के हर सेट का मिलान रंगीन गुटकों के साथ भी किया जा सकता है।

रंगीन ब्‍लॉकों से मीनार बनाई जा सकती हैं क्योंकि इनमें घुण्डियाँ नहीं होती हैं (इसे बच्चे ख़ुद भी देखकर समझ लेंगे!)। यह बच्चों के लिए ध्यान, धैर्य और सन्तुलन की समझ बढ़ाने का बढ़िया अभ्यास है। चित्र-5 में रंगीन ब्‍लॉकों के दो सेट दिखाए गए हैं। इनमें हरे वाले ब्‍लॉक मोटे और छोटे तथा पतले और लम्बे के क्रम में हैं और पीले वाले ब्‍लॉक बड़े से छोटे के क्रम में। इन्हें बारी-बारी से रखा जाना चाहिए। ऐसा करने से हरे-पीले ब्‍लॉक के एक जोड़े पर अगला जोड़ा रखने के लिए आधार मिलेगा।

चित्र-5
चित्र-5

अगर हम किसी भी बेलनाकार ब्‍लॉक के आयामों को बदलते हैं तो ठीक चार सम्भावनाएँ बनती हैं :

  1. समान ऊँचाई, बदलती मोटाई (व्यास) – लाल
  2. समान मोटाई (व्यास), बदलती ऊँचाई – नीला
  3. ऊँचाई और मोटाई (व्यास) दोनों में बढ़ोतरी – पीला
  4. ऊँचाई में बढ़ोतरी और मोटाई में कमी – हरा

यह ताज्जुब की बात है कि बरसों पहले डॉ. मारिया मॉण्टेसरी के ज़हन में इन सभी सम्भावनाओं की यह पूरी व्याख्या कैसे आई होगी। इस तरह से समग्र रूप में देखने पर किसी शिक्षार्थी में ऐसी ग़लत धारणाएँ नहीं बन पाती हैं, कि जो बड़ा है वह मोटा होता है या जो आकार में छोटा है वह लम्बाई में भी छोटा होता है या जो पतला है वह छोटा होता है!

पिछले लेख की तरह, हम आपके लिए इन मॉण्टेसरी सामग्रियों को बनाने के ऐसे कम लागत के तरीक़े के बारे में भी बता रहे हैं, जिनमें सटीकता या गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता है। चित्र-6 देखें।

चित्र-6
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इसमें बिना घुण्डी का बेलनाकार ब्‍लॉक बनाने के आसान चरण बताए गए हैं। इसमें लगने वाली सामग्री तथा अन्‍य विवरणों के लिए अन्‍त में दिए गए सन्दर्भ [2] के लिंक पर जाएँ। उस लिंक पर बेलनाकार ब्‍लॉक के ऐसे खोखे भी दिए गए हैं, जिन्हें आप A3 शीट पर प्रिंट करके फ़ौरन ही काम में ले सकते हैं!

मॉण्टेसरी सामग्री (ख़रीदी गई या बनाई गई) को बच्चे के सीखने के माहौल में शामिल करके हम ऐसा शैक्षिक नज़रिया अपना रहे हैं जो स्‍वाबलम्‍बन या आज़ादी, ख़ुद करके खोजने और हर बच्चे के क़ुदरती विकास को सम्मान देने को आगे रखता है।

मॉण्टेसरी शिक्षा न सिर्फ़ संज्ञानात्मक विकास को बढ़ावा देती है बल्कि समस्या-समाधान करने, ज़िम्मेदारी लेने और आत्मविश्वास जैसे महत्त्वपूर्ण जीवन कौशलों को भी बढ़ावा देती है। ख़ुद से बनाई जाने वाली सामग्रियों की ख़ूबसूरती यह है कि वे मॉण्टेसरी शिक्षा के दर्शन को ज़्यादा सुलभ बनाती हैं, जिससे शिक्षक, परिवार और अध्यापक (educator) गुणवत्ता या मक़सद से समझौता किए बिना अपनी ज़रूरतों के मुताबिक़ शिक्षण के उपकरण बना सकते हैं। इन सामग्रियों को अपने घर या कक्षा का हिस्सा बनाकर हम जिज्ञासु, आत्मविश्वासी और क़ाबिल बच्चों की पीढ़ी को विकसित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण क़दम उठाते हैं।

हमारी गुज़ारिश है कि आप इन्हें आज़माएँ और अपने अनुभव हमारे साथ साझा करें। अपनी बनाई सामग्रियों की तस्वीरें हमें भेजें और हमें बताएँ कि आपके विद्यार्थियों के साथ कक्षा में आपका अनुभव कैसा रहा! आप हमें atrightangles.editor@apu.edu.in पर लिख सकते हैं।

आभार : इस लेख को सुश्री सुधा राव, पारिजात मॉण्टेसरी, बेंगलूरु और स्वाती सरकार, अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी, बेंगलूरु के सुझावों को ध्‍यान में रखते हुए लिखा गया है।

  1. Montessori Materials Part 1 https://bit.ly/3PHeZy9
  2. How to make the cylinders https://bit.ly/3PHf3hn

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