जोड़-घटा पर इबारती सवाल

अनुवाद : प्रियेश गुप्‍ता | पुनरीक्षण : प्रतिका गुप्‍ता | कॉपी एडिटर : अनुज उपाध्‍याय

इबारती सवाल वास्तव में क्या हैं? इनको हल करने में बच्चों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? क्या इबारती सवाल कई तरह के होते हैं? इन सवालों के जवाब पाने तथा और भी बहुत कुछ जानने के लिए यह लेख पढ़ें। लेख जोड़-घटा से जुड़े इबारती सवालों के बारे में गहराई से चर्चा करता है।

इबारती सवाल ऐसे गणितीय सवाल होते हैं जिन्हें आभासी-वास्तविक दुनिया की किसी स्थिति में पिरोकर किसी कथन या कहानी के माध्यम से वर्णित किया जाता है। यह उन ‘ख़ालिस सवालों’ से अलग होते हैं जो महज़ गणितीय प्रतीकों या समीकरणों के रूप में व्यक्त किए जाते हैं। इबारती सवालों में, अवधारणाओं, विचारों या मॉडलों का उपयोग वास्तविक दुनिया की घटनाओं को समझने के लिए किया जाता है। इबारती सवाल स्कूली गणित का एक अभिन्न हिस्सा हैं, ख़ासकर छोटी कक्षाओं के गणित का। इससे विद्यार्थी यह समझना शुरू करते हैं कि गणित महज़ प्रतीकों और अमूर्तताओं में ही नहीं होता है, बल्कि वास्तविक दुनिया के परिदृश्यों में भी होता है।

अच्छी तरह से तैयार किए गए इबारती सवाल विद्यार्थी को एक सार्थक वास्तविक दुनिया का सन्दर्भ दे सकते हैं। इबारती सवाल बच्चों के लिए उन समस्याओं को हल करने के लिए प्रेरित करने वाले होने चाहिए जिन्हें वे महत्त्वपूर्ण और उपयोगी मानते हैं। ऐसे इबारती सवाल जिनमें विद्यार्थी के उनके अपने जीवन से जुड़े कोई उपयुक्त सन्दर्भ न हों, वे विद्यार्थियों को इन्हें हल करने के लिए प्रेरित और आमंत्रित नहीं कर सकते। निश्चित रूप से, इबारती सवाल ऐसे सन्दर्भों/ स्थितियों का वर्णन कर सकते हैं जो लोगों/ बच्चों में मूल्य ला सकते हैं। इसके कुछ उदाहरण हैं — बच्चों द्वारा दीये बनाना और उन्हें बाज़ार में बेचना, बच्चों द्वारा अनाथालय की मदद के लिए पैसे इकट्ठा करना, लड़कियों द्वारा लैंगिक रूढ़िवादिता को तोड़ने के लिए खेती करना आदि स्थितियों में पिरोकर सवाल बनाना। बच्चों को अपने आस-पास देखने और अपने निकट परिवेश के आधार पर इबारती सवाल बनाने के लिए भी प्रेरित किया जा सकता है। यह लेख उन कठिनाइयों पर ध्यान दिलाता है जो विद्यार्थियों को इबारती सवालों को हल करते समय पेश आती हैं और इन कठिनाइयों को सम्बोधित करने के लिए शैक्षणिक रणनीतियाँ प्रस्तुत करता है।

इबारती सवालों के साथ बच्चों को पेश आने वाली कठिनाइयाँ

जैसा कि PISA (2003, पृष्ठ संख्या 24) में बताया गया है कि बच्चों की इबारती सवालों को हल करने की क्षमता गणितीय साक्षरता में उनकी क्षमता पर निर्भर करती है। गणितीय साक्षरता में गणितीय ज्ञान और कौशल का उचित उपयोग करने की क्षमता शामिल है। इसमें गणितीय अवधारणाओं को समझना, डेटा की व्याख्या करना, पैटर्न को पहचानना, गणितीय तर्क लागू करना और अंकगणितीय संक्रियाओं का उपयोग करना शामिल है।

जब हल करने के लिए कोई इबारती सवाल दिया जाता है, तो बच्चों को दी गई समस्या या स्थिति को समझना होता है और उसकी व्याख्या करनी होती है, फिर उसे ख़ालिस संख्याओं वाले सवाल में बदलना होता है और फिर उसे हल करना होता है। इस प्रकार, अंकगणितीय इबारती सवालों को हल करने के लिए दो अलग-अलग क्षमताओं की आवश्यकता होती है — पहली, भाषाई सवाल को गणितीय प्रतीकों में अनूदित करना; और दूसरी, अंकगणितीय संक्रियाओँ को लगाना, हल करना। विद्यार्थियों के सामने सबसे पहले क्या प्रस्तुत किया जाना चाहिए? ख़ालिस संख्याओं वाले सवाल या इबारती सवाल? (यह ‘मुर्गी पहले आई या अण्डा’ वाली स्थिति है।)

कई बच्चे जो ख़ालिस संख्याओं वाले सवाल हल करने में अच्छे होते हैं, वे इबारती सवालों को हल नहीं कर पाते हैं, यानी एक गणितीय व्यंजक या समीकरण दिए जाने पर वे इसे सरल बना सकते हैं और सही उत्तर पर पहुँच सकते हैं। लेकिन इबारती सवाल हल करने के मामले में क्या हो जाता है? यदि बच्चे समस्या को अपने दिन-प्रतिदिन के अनुभवों से नहीं जोड़ पाते हैं तो इबारती सवालों को पूछने का उद्देश्य छूट जाता है। फिर वे इसे गणित में एक और बाधा के रूप में देखेंगे। भाषा भी इबारती सवाल बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विद्यार्थियों को यह समझने के लिए जूझना पड़ता है कि सवाल का कथन क्या है, इसे सही तरीक़े से गणितीय भाषा में कैसे लिखा जाएगा और इसे हल करने के लिए किस गणितीय संक्रिया को लगाना होगा।

यह देखा गया है कि विद्यार्थियों को इबारती सवालों को आत्म-विश्वास से हल करने में मदद करने के प्रयास में ‘की-वर्ड’ पर अनुचित ज़ोर दिया जाता है, जैसे ‘अधिक’, ‘ले लिया’, ‘कुल’, ‘अन्तर’, ‘शेष’, ‘बचा’ आदि। इससे विद्यार्थी वास्तविक दुनिया की स्थिति की ग़लत व्याख्या करते हैं और सवाल को हल करने के लिए अनुचित संक्रिया लगाते हैं।

इसके अलावा, इबारत में ऐसे विवरण भी हो सकते हैं जो सवाल को हल करने के लिए आवश्यक न हों। बच्चों को अप्रासंगिक जानकारी पहचानना और उसे छोड़कर सवाल हल करना मुश्किल लगता है।

आइए एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं कि की-वर्ड पर अनुचित ज़ोर विद्यार्थियों को कैसे गुमराह कर सकता है।

सवाल-1सवाल-2
10 साल की एक लड़की हबीबा के पास 9 अमरूद हैं। 11 साल की कल्याणी के पास हबीबा से 5 अमरूद अधिक हैं। कल्याणी के पास कितने अमरूद हैं? 10 साल की एक लड़की हबीबा के पास 9 अमरूद हैं। हबीबा के पास 11 साल की कल्याणी से 5 अमरूद अधिक हैं। कल्याणी के पास कितने अमरूद हैं?
अतिरिक्त या अप्रासंगिक जानकारी — हबीबा 10 साल की है और कल्याणी 11 साल की है।
की-वर्ड — अधिक (विद्यार्थी को सिखाया गया है कि सवाल में यह की-वर्ड होने पर जोड़ना होता है)
सवाल का गणितीय व्यंजक : 9 + 5
संक्रिया : 9 + 5 = 14
जवाब : कल्याणी के पास 14 अमरूद हैं।
जाँच : हबीबा के पास 9 अमरूद हैं और कल्याणी के पास 5 अधिक हैं — 14, 9 से 5 अधिक।
सही : की-वर्ड रणनीति काम कर गई है।
हबीबा के पास कल्याणी से 5 अमरूद अधिक हैं — हबीबा के पास 9 और कल्याणी के पास 14 अमरूद।
त्रुटि : की-वर्ड रणनीति कारगर नहीं रही।

तालिका-1 : की-वर्ड पर ध्यान केन्द्रित करने के कारण होने वाली त्रुटियों का उदाहरण।

इस तरह, इबारती सवालों को हल करने का प्रयास करते समय विद्यार्थियों को पेश आने वाली प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं :

  1. सवाल में वर्णित सन्दर्भ से जुड़ाव बना पाना।
  2. इबारती सवाल को समझना, ख़ासकर तब जब अपरिचित शब्दावली इस्तेमाल की गई हो या वाक्य संरचना जटिल हो।
  3. सही अंकगणितीय संक्रिया का चयन।
  4. की-वर्ड पर अनावश्यक ज़ोर।
  5. अनावश्यक या अतिरिक्त जानकारी पहचानने में असमर्थता और उपयोगी जानकारी को पहचानकर या निकालकर इस्तेमाल करने में असमर्थता।
  6. गणितीय व्यंजक और समीकरण बनाने में कठिनाई।
  7. अंकगणितीय संक्रिया सही ढंग से लगाकर हल करने में कठिनाई।

विद्यार्थियों को इबारती सवाल आत्म-विश्वास के साथ हल करने में मदद करने के लिए शिक्षक को उन्हें हर सवाल को अलग तरीक़े से हल करना सिखाना चाहिए। लेकिन सबसे पहले, शिक्षक को गणितीय व्यंजकों और समीकरणों को बनाने के महत्त्व के बारे में समझना चाहिए। इसके अलावा, उन्हें विभिन्न प्रकार के इबारती सवालों के बारे में पता होना चाहिए जिनका सामना बच्चा इस स्तर पर कर सकता है।

व्यंजक और समीकरण

गणितीय समीकरण और व्यंजक सवाल की इबारत और उसके हल के बीच का एक चरण है।

गणितीय व्यंजक संख्याओं, चर और संक्रियाओं का संयोजन होता है जो कुछ गणितीय मान दर्शाता है।

उदाहरण के लिए : \(3 + 2\) (संख्याएँ और जोड़ की संक्रिया) \(3x + 5\) (संख्याएँ, चर और जोड़ व गुणा की संक्रियाएँ)

गणितीय समीकरण एक कथन है जो दो विभिन्न व्यंजकों के बराबर होने को दर्शाता है।
उदाहरण के लिए: \(4\ + \) ___ = ___ \(+\ 6\) (व्यंजक \(4\ +\) के बराबर है। \(+\ 6\)) \(3x + 2 = 11\) (व्यंजक \(3x + 2\) के बराबर है। \(11\))

प्रत्येक जोड़ या घटा के व्यंजक को दो समीकरणों में बदला जा सकता है। उदाहरण के लिए :

  1. व्यंजक \(27 + 54\), को समीकरण \(27 + 54\) \(= 81\) में बदला जा सकता है जिसे निम्न दो तरीक़ों से देखा जा सकता है :
    1. \(27\ + \) ___ \( = 81\) और
    2. ___ \( +\ 54 = 81\)
  2. \(81 – 54\), इस व्यंजक को समीकरण \(81 – 54\) \(= 27\) में बदला जा सकता है और इसे निम्न दो तरीक़ों से देखा जा सकता है :
    1. \(81\ – \) ___ \(= 27\) और
    2. ___ \( -\ 54 = 27\)

इबारती सवालों के प्रकार

बनाए गए सभी प्रकार के इबारती सवालों का एक पैटर्न होता है। कारपेंटर व उनके साथियों (1983) ने जोड़ और घटा की संक्रियाओं के लिए चार प्रकार के इबारती सवाल बताए हैं। ये चार प्रकार हैं : मिलाना/ जोड़ना, तुलना करना, बदलना/ बदलाव और बराबर बनाना। पी नेशर, जे. जी. ग्रीनो और एम. एस. रिले, (1982) ने अपने काम में मिलाना, तुलना करना और बदलना को 14 उपश्रेणियों में वर्गीकृत किया। इस वर्गीकरण के आधार पर, निम्नलिखित तालिकाएँ तैयार की गई हैं।

सवाल-1 : सीता के पास 5 आम हैं और रहीम के पास 3 आम हैं। उनके पास कुल कितने आम हैं?
सवाल-2 : सीता के पास 5 आम हैं। सीता और रहीम के पास कुल 8 आम हैं। रहीम के पास कितने आम हैं?
प्रस्तावित रणनीति : मॉडलिंग का उपयोग करके प्रत्येक के पास आम की संख्या दर्शाएँ और फिर विद्यार्थियों से समस्या कथन तैयार करने के लिए कहें।
श्रेणी : मिलाना-1
सामान्य विवरण : अन्तिम समूह (पूर्ण) के बारे में सवाल
श्रेणी : मिलाना-2
सामान्य विवरण : एक उपसमूह (हिस्से) के बारे में सवाल
उदाहरण : सीता के पास 5 आम हैं और रहीम के पास 3 आम हैं। उनके पास कुल कितने आम हैं? उदाहरण : सीता के पास 5 आम हैं। सीता और रहीम के पास कुल 8 आम हैं। रहीम के पास कितने आम हैं?
निरूपण
सीता
टेबल-आम

रहीम
टेबल-आम
निरूपण
सीता
टेबल-आम

सीता और रहीम
टेबल-रहीमंदसीता-आम
कथन तैयार करना :
चर्चा के लिए प्रश्न : हमें क्या पता लगाना है?
उत्तर : आमों की कुल संख्या।
कथन तैयार करना :
चर्चा के लिए प्रश्न : हमें क्या पता लगाना है?
उत्तर : रहीम के पास कितने आम हैं।
व्यंजक : 5 + 3समीकरण : ___ + 5 = 8 या 8 – 5 =___
उत्तर : सीता और रहीम के पास कुल 8 आम हैं।उत्तर : रहीम के पास 3 आम हैं।
जाँच : कथन के साथ पुष्टि करके उत्तर की जाँच करें।
तालिका-2 : मिलाना वाले सवालों के उदाहरण और हल के लिए सुझाई गई शैक्षणिक रणनीतियाँ।
सवाल-3 : रुद्र के पास ₹10 हैं और उसे अपने माता-पिता से आने वाले त्योहार के लिए ₹20 और मिले। अब उसके पास कुल कितने रुपए हैं?
सवाल-4 : रुद्र के पास ₹10 हैं। उसके माता-पिता ने उसे आगामी त्योहार के लिए कुछ रुपए दिए। अब उसके पास ₹30 हैं। उसके माता-पिता ने उसे कितने रुपए दिए?
सुझाई गई रणनीति : रोल प्ले के माध्यम से लेन-देन दिखाएँ और फिर विद्यार्थियों से कथन बनाने के लिए कहें।
श्रेणी : बदलाव-1
सामान्य विवरण : इज़ाफ़ा, अन्तिम (पूर्ण) समूह के बारे में सवाल
श्रेणी : बदलाव-2
सामान्य विवरण : इज़ाफ़ा, उपसमूह (हिस्से) के बारे में सवाल
उदाहरण : रुद्र के पास ₹10 हैं। और उसे अपने माता-पिता से आने वाले त्योहार के लिए ₹20 और मिले। अब उसके पास कुल कितने रुपए हैं? उदाहरण : रुद्र के पास ₹10 हैं। उसके माता-पिता ने उसे आगामी त्योहार के लिए कुछ रुपए दिए। अब उसके पास ₹30 हैं। उसके माता-पिता ने उसे कितने रुपए दिए?
रोल प्ले के माध्यम से निरूपण
रुद्र
सवाल-1

माता-पिता
सवाल-2
रोल प्ले के माध्यम से निरूपण
रुद्र = 10
सवाल-3

माता-पिता = ?
सवाल-4

कुल = 30
सवाल-5
कथन बनाना :
चर्चा के लिए प्रश्न : क्या पता लगाना है?
उत्तर : रुद्र के पास त्योहार के लिए कुल कितने रुपए हैं?
कथन बनाना :
चर्चा के लिए प्रश्न : क्या पता लगाना है?
उत्तर : रुद्र को उसके माता-पिता से कितने रुपए मिले?
व्यंजक : 10 + 20समीकरण : 10 + ___ = 30 या 30 – 10 = ___
उत्तर : रुद्र के पास त्योहार में में ख़र्च करने के लिए ₹30 हैं।उत्तर : रुद्र के माता-पिता ने उसे ₹20 दिए।
जाँच : कथन के साथ पुष्टि करके उत्तर की जाँच करें।
तालिका-3 : परिर्वतन के सवालों के उदाहरण और हल के लिए सुझाई गई शैक्षणिक रणनीतियाँ।
परिवर्तन-3इज़ाफ़ा, प्रारम्भिक समूह के बारे में सवालरुद्र के पास कुछ रुपए हैं। उसके माता-पिता ने उसे आगामी त्योहार के लिए ₹20 दिए थे। अब उसके पास ₹30 हैं। शुरुआत में उसके पास कितने पैसे थे?
परिवर्तन-4घटाव, अन्तिम समूह के बारे में सवालरुद्र के पास ₹30 हैं। उसने एक खिलौना ख़रीदने में ₹20 खर्च किए। अब उसके पास कितने रुपए हैं?
परिवर्तन-5घटाव, परिवर्तन के बारे में सवालरुद्र के पास ₹30 हैं। उसने एक खिलौना ख़रीदने में कुछ पैसे ख़र्च किए। अब उसके पास ₹10 हैं। खिलौने की क़ीमत क्या है?
परिवर्तन-6घटाव, प्रारम्भिक समूह के बारे में सवालरुद्र के पास कुछ रुपए हैं। उसने ₹20 में एक खिलौना ख़रीदा। अब उसके पास ₹10 हैं। शुरुआत में उसके पास कितने रुपए थे?
तालिका-4 : बदलाव के सवाल के अन्य प्रकार एवं उनके उदाहरण।
शीर्षकसामान्य विवरणइबारती सवाल
तुलना-1‘अधिक’ का उल्लेख, अन्तर समूह के बारे में सवालहबीबा के पास 9 अमरूद हैं और कल्याणी के पास 5 अमरूद हैं। किसके पास अधिक अमरूद हैं और कितने अधिक हैं?
तुलना-2‘अधिक’ का उल्लेख, जिससे तुलना की जा रही है उस (तुलना) समूह के बारे में सवालहबीबा के पास 9 अमरूद हैं और उसके पास कल्याणी से 4 अमरूद अधिक हैं। कल्याणी के पास कितने अमरूद हैं?
तुलना-3‘अधिक’ का उल्लेख, जिसकी तुलना की जा रही है उस समूह के बारे में सवालकल्याणी के पास 5 अमरूद हैं और हबीबा के पास कल्याणी से 4 अमरूद अधिक हैं। हबीबा के पास कितने अमरूद हैं?
तुलना-4‘कम’ का उल्लेख, अन्तर समूह के बारे में सवालहबीबा के पास 9 अमरूद हैं और कल्याणी के पास 5 अमरूद हैं। किसके पास कम अमरूद हैं और कितने कम हैं?
तुलना-5‘कम’ का उल्लेख, जिससे तुलना की जा रही है उस (तुलना) समूह के बारे में सवालकल्याणी के पास हबीबा से 4 अमरूद कम हैं। हबीबा के पास 9 अमरूद हैं। कल्याणी के पास कितने अमरूद हैं?
तुलना-6‘कम’ का उल्लेख, जिसकी तुलना की जा रही है उस समूह के बारे में सवालकल्याणी के पास 5 अमरूद हैं और उसके पास हबीबा से 4 अमरूद कम हैं। हबीबा के पास कितने अमरूद हैं?
तालिका-5 : तुलना के सवालों के प्रकार एवं उनके उदाहरण।

साहित्य में एक चौथा प्रकार, यानी बराबर करने के सवालों, का भी उल्लेख किया गया है। बदलाव और तुलना के सवालों को बराबर करना के सवालों में बदला जा सकता है। उदाहरण के लिए, ऊपर दिए गए बदलाव-2 के सवाल : रुद्र के पास ₹10 हैं। उसके माता-पिता ने उसे आने वाले त्योहार के लिए कुछ रुपए दिए। अब उसके पास ₹30 हैं। उसके माता-पिता ने उसे कितने रुपए दिए? इस सवाल को इस तरह बदला जा सकता है : रुद्र को आने वाले त्योहार के लिए खिलौना ख़रीदने के लिए ₹30 चाहिए। उसके पास ₹10 हैं। उसे अपने माता-पिता से कितने रुपए चाहिए होंगे?

इसी तरह से, ऊपर दिए गए तुलना-1 के उदाहरण : हबीबा के पास 9 अमरूद हैं और कल्याणी के पास 5 अमरूद हैं। किसके पास अधिक अमरूद हैं और कितने अधिक अमरूद हैं? इसे इस प्रकार से लिखा जा सकता है : कल्याणी के पास 5 अमरूद हैं। हबीबा के पास 9 अमरूद हैं। कल्याणी को अपने अमरूद की संख्या हबीबा के अमरूद के बराबर करने के लिए कितने और अमरूद चाहिए होंगे?

दोनों सवालों में व्यंजक इस तरह बनता है :
दी गई मात्रा + __ को दी गई दूसरी मात्रा के बराबर रखा जाता है।

हालाँकि इबारती सवालों की विभिन्न श्रेणियों के बारे में विद्यार्थियों को समझने की ज़रूरत नहीं है लेकिन निश्चित रूप से इन श्रेणियों के बारे में जानने से शिक्षक को मदद मिलती है। सबसे पहले, श्रेणियों के बारे में जानने से शिक्षक अभ्यास के लिए कई सवाल बना सकते हैं। दूसरा, विद्यार्थियों को हल करने के लिए दो श्रेणियों के दो सवाल देकर वे निरूपण के माध्यम से विद्यार्थियों को दो सवालों के बीच के अन्तर से परिचित करवा सकते हैं। इस तरह सवाल का कथन समझना, व्यंजक बनाना और सवाल हल करना के चरण बच्चे के लिए बहुत अधिक सार्थक हो जाते हैं। अन्त में, उन श्रेणियों की पहचान करना जिनमें विद्यार्थियों को कठिनाई होती है और साथ ही उन शब्दावलियों की पहचान करना जिसे विद्यार्थी समझ नहीं पाते हैं, रचनात्मक मूल्यांकन में मदद करता है जिससे शिक्षक को विद्यार्थियों के लिए इन कठिनाई से उबरने के लिए काम/ सत्र तैयार बनाने में मदद मिलती है।

इबारती सवाल को हल करने के चरणों को संक्षेप में कहें तो विद्यार्थियों को इबारती सवाल हल करने में सक्षम करने के लिए शिक्षक को विद्यार्थियों को सिखाना चाहिए :

  1. इबारती सवाल को समग्र तौर पर पढ़ें और समझें। (की-वर्ड पर ज़ोर देने से बचें)। विद्यार्थी को इस बारे में बहुत स्पष्ट होना चाहिए कि सवाल क्या है और क्या पता करने की आवश्यकता है। सवाल के कथन लिखने से विद्यार्थियों को ऐसा करने में मदद मिल सकती है।
  2. एक आरेख या एक मॉडल बनाएँ जो सवाल में प्रस्तुत की गई स्थिति को दर्शा सके। शिक्षकों द्वारा इबारती सवाल को हल करने के लिए रेखाचित्र या ऐसे ही कोई तरीक़े का उपयोग करके बनाए गए एक प्रभावी मॉडल का उपयोग और प्रदर्शन करने की आवश्यकता है। रोल प्ले भी विद्यार्थियों को सवाल को समझने में मदद कर सकता है।
  3. सवाल को हल करने के लिए उससे आवश्यक जानकारियाँ निकाल लें।
  4. इबारती सवाल में ऐसी भी जानकारी दी गई हो सकती है जो सवाल को हल करने के लिए ज़रूरी नहीं है। विद्यार्थियों को इसे पहचानने और इसे छोड़ देने में सक्षम होना चाहिए।
  5. कथन को गणितीय समीकरणों या व्यंजक में बदलें। जब विद्यार्थी समझ जाते हैं कि क्या दिया गया है और क्या ज्ञात करना है, तो वे इसे आसानी से हल करने में सक्षम होते हैं।
  6. समस्या को हल करने के लिए अंकगणितीय संक्रिया का उपयोग करें।

निष्कर्ष

विद्यार्थियों को इबारती सवालों को हल करने में सक्षम बनाने के लिए शिक्षक को स्‍पष्‍ट रूप से एक ऐसा मॉडल बनाने की आवश्यकता है कि इबारती सवाल को समग्र रूप से कैसे समझा जाए, कोई प्रभावी मॉडल या आरेख कैसे चुना जाए, संख्या को मात्रात्‍मक रूप से कैसे समझा जाए, इबारती सवालों के प्रकार की पहचान कैसे की जाए, स्थिति या सवाल को गणितीय व्यंजक या समीकरण में कैसे बदला जाए और संक्रिया कैसे की जाएँ।

वास्तविक दुनिया की स्थिति में सभी संक्रियाओं को प्रस्तुत करना और फिर उन्हें यह पता लगाने में मदद करना कि उन्हें कैसे हल किया जाए महत्त्वपूर्ण है, ताकि उन्हें समझ और प्रक्रिया दोनों मिल सके। बच्चों में स्कूल आने के पहले से ही जोड़ और घटाव की सहज समझ होती है, भले ही वे इसे स्पष्ट रूप से नहीं व्यक्त न कर पाएँ लेकिन वे पहले से ही अपने दिन-प्रतिदिन के खेल और गतिविधियों में जोड़ना और घटाना का अनुभव कर चुके होते हैं। इबारती सवालों के माध्यम से गणित में विद्यार्थियों के परिचित सन्दर्भ लाना महत्त्वपूर्ण है ताकि उन्हें यह समझने में मदद मिल सके कि गणित कोई अलग दुनिया नहीं है, बल्कि प्रतीकों, संकेतन और प्रक्रियाओं के साथ इसी दुनिया का विस्तार है।

  1. Nesher, P., Greeno, J. G., & Riley, M. S. (1982). The development of semantic categories for addition and subtraction. Educational studies in mathematics, 13(4), 373-394.
  2. Carpenter, T. P., Hiebert, J., & Moser, J. M. (1983). The effect of instruction on children’s solutions of addition and subtraction word problems. Educational Studies in Mathematics, 14(1), 55-72.
  3. Menon, U. (2007). Word Problems and activities – Designing the curriculum. In Proceedings of the conference epiSTEME (Vol. 2).

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