हाल ही में, मैं और मेरे विद्यार्थी एनसीईआरटी की कक्षा-6 की गणित की नई पाठ्यपुस्तक गणित प्रकाश का अध्याय ‘अभाज्य समय’ पढ़ रहे थे। इस अध्याय में संख्याओं के विभिन्न समूहों (जैसे अभाज्य संख्याएँ, भाज्य संख्याएँ, सह-अभाज्य संख्याएँ आदि) की अवधारणाओं को समझाया गया है।

पाठ्यपुस्तक में दिए गए निर्देशों के अनुसार हमने सबसे पहले ‘इडली-वड़ा’ नामक खेल के ज़रिए गुणज पर काम किया। इसके बाद गुणनखण्ड को समझने के लिए हमने जम्प जैकपॉट संख्या रेखा गतिविधि का सहारा लिया। चूँकि विद्यार्थी कक्षा-5 में ही गुणज और गुणनखण्ड की अवधारणाओं के बारे में पढ़ चुके थे, इसलिए इन गतिविधियों के ज़रिए उन्हें इनका पुनरावलोकन और अभ्यास करने में मदद मिली। इसके बाद हमने अभाज्य संख्याओं का अध्ययन शुरू किया। इसके लिए 10×10 की संख्‍या तालिका का उपयोग करते हुए अध्याय में बताई गई ‘इराटोस्थेनीस की छलनी’ (Sieve of Eratosthenes) विधि से अभाज्य संख्याओं की पहचान की।

आकलन के लिए मैंने अपनी कक्षा में एक टेस्ट लिया। उसके परिणाम काफ़ी सन्तोषजनक रहे। इससे स्पष्ट हुआ कि विद्यार्थी अभाज्य संख्याओं की अवधारणा को बेहतर तरीक़े से समझ चुके थे। उन्होंने इस तरह के सवालों के जवाब बहुत अच्छी तरह से दिए —

  • 1 अभाज्य संख्या है या भाज्य अथवा दोनों में से कुछ भी नहीं? कारण सहित स्पष्ट करें।
  • रोहित कहता है, “सभी सम संख्याएँ भाज्य होती हैं।” यह कथन सही है या ग़लत? उदाहरण देकर अपने उत्तर की व्याख्या करें।

विद्यार्थियों द्वारा दिए गए उत्तरों के कुछ नमूने आगे दिए गए हैं —

चित्र-1
चित्र-2

सह-अभाज्य (Co-prime) संख्याओं की पड़ताल

अभाज्य संख्याओं की अवधारणा को समझने के बाद हम सह-अभाज्य संख्याओं की तरफ़ बढ़े। एनसीईआरटी सुझाती है कि विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक स्वयं पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए मैंने विद्यार्थियों से पृष्ठ संख्या 115 पढ़ने को कहा, जहाँ जम्प जैकपॉट खेल का संशोधित स्वरूप दिया गया है।

इस गतिविधि में दो संख्याओं पर ख़ज़ाना रखा गया है। जम्पी को यह ख़ज़ाना केवल तभी मिल सकता है, जब वह एक ही साइज़ का जम्‍प लगाकर दोनों संख्याओं तक पहुँच सके। हालाँकि ‘1 साइज़’ का जम्‍प लगाने की अनुमति नहीं है। विद्यार्थियों से पूछा गया था कि ग्रम्पी को ख़ज़ाना कहाँ रखना चाहिए, ताकि जम्पी अधिकतम किसी एक ख़ज़ाने तक ही पहुँच सके। दिए गए उदाहरण में ख़ज़ाने 12 एवं 36 के बजाय 4 एवं 9 पर रखे गए हैं, और यह मान लिया गया है कि ग्रम्पी इस तरह जीत जाएगा।

इस खेल के कुछ राउंड होने के बाद विद्यार्थियों को सह-अभाज्य संख्याओं की अवधारणा समझाई गई। इसके अनुसार, “वे दो संख्याएँ जिनका 1 के अलावा कोई भी उभयनिष्ठ गुणनखण्ड (common factor) नहीं होता, सह-अभाज्‍य होती हैं।” कई विद्यार्थियों ने ग्रम्पी की जीत की रणनीति को इस परिभाषा से तुरन्त जोड़ लिया, लेकिन कुछ अब भी इसे लेकर आश्वस्त नहीं थे।

अगले दिन हमने एक अलग तरह की गतिविधि पर काम किया। इसके लिए पाठ्यपुस्तक में ‘सह-अभाज्य कला’ शीर्षक के तहत कुछ दिशा-निर्देश दिए गए थे। यह गतिविधि स्टार प्रॉब्लम शीटों पर आधारित थी। इन शीटों में एक निश्चित संख्या वाले बिन्दुओं के साथ एक वृत्ताकार संख्या रेखा बनी होती है। गतिविधि शुरू करने से पहले मैंने विद्यार्थियों को और भी विस्तार से निम्नलिखित निर्देश दिए —

  • वृत्त पर बने बिन्दुओं की कुल संख्या को अपनी पहली संख्या मानें।
  • अब पहली संख्या से छोटी कोई भी दूसरी संख्या चुनें (इसे ‘m’ मान लेते हैं)।
  • पहली संख्या से शुरुआत करते हुए ‘m’ के बराबर समान दूरी के जम्‍प लगाकर वृत्त के चारों ओर बिन्दुओं को क्रमशः जोड़ते जाएँ।
  • इस प्रक्रिया को तब तक दोहराएँ जब तक कि
    केस-1 : बनने वाला पैटर्न किसी बिन्दु को छोड़े बग़ैर सभी बिन्दुओं को आपस में जोड़ न ले।
    केस-2 : सभी बिन्दुओं को जोड़ने से पहले ही पैटर्न बनना रुक जाए या ख़ुद को दोहराने लगे।
    निष्कर्ष : यदि केस-1 बनता है तो संख्याएँ सह-अभाज्य हैं। लेकिन यदि जम्‍प बीच में ही रुक जाएँ या किसी निश्चित क्रम में बार-बार दोहराने लगें (केस-2), तो इसका मतलब है कि वे दोनों संख्याएँ सह-अभाज्य नहीं हैं।

विद्यार्थी निर्देशों को समझ गए, और उन्होंने समूहों में काम करना शुरू कर दिया। उनके काम के कुछ नमूने आगे दिए गए हैं।

चित्र-3 : किए गए काम के कुछ नमूने

मगर मुझे जल्द ही इस बात का एहसास हो गया कि विद्यार्थी भले ही गतिविधि को कर पा रहे थे, लेकिन वे इसके पीछे के गणितीय तर्क से अवगत नहीं थे। अत: इस लेख के शेष भाग में एक ऐसा अन्वेषण कार्य तैयार किया गया है, जो इस गतिविधि के ज़रिए विद्यार्थियों की समझ को और परिपक्व करने में मदद करेगा।

स्टार प्रॉब्लम गतिविधि विद्यार्थियों को गति और पैटर्न के माध्यम से सह-अभाज्य संख्याओं की पड़ताल करने का अवसर देती है। इस पड़ताल को और गहन करने के लिए उनसे कहा गया कि वे बिन्दुओं की संख्या और जम्‍प साइज़ में बदलाव करने पर नज़र आने वाले परिवर्तनों को ध्यानपूर्वक दर्ज करें।

उदाहरण के लिए, 6 बिन्दुओं वाले एक वृत्त पर विचार करें। हम एक बिन्दु से शुरुआत करते हैं, और समान संख्या के चरणों में जम्‍प लगाते हैं। इस बार जम्‍प की दिशा दर्शाने के लिए तीरों का इस्तेमाल किया गया है। नीचे दिए गए चित्र दिखाते हैं कि अलग-अलग साइज़ में जम्‍प लगाने पर क्या स्थिति बनती है।

चित्र-4

यहाँ विद्यार्थी देख सकते हैं कि जम्‍प के कुछ साइज़ ऐसे हैं जिनसे चलते हुए सभी बिन्दुओं तक पहुँचा जा सकता है, जबकि कुछ मामलों में पथ सभी बिन्दुओं तक नहीं पहुँच पाता है, और ख़ुद को दोहराने लगता है।

इसके लिए एक अवलोकन शीट (तालिका-1) का उपयोग किया जा सकता है। उदाहरण के लिए इसकी कुछ शुरुआती पंक्तियाँ पहले से भरी हुई हैं।

अवलोकन शीट : वृत्त पर पैटर्नों का अन्वेषण

वृत्त पर बिन्दुओं की कोई एक संख्या चुनें। इसके बाद एक जम्‍प साइज़ चुनें, और हर बार उतनी ही दूरी का जम्‍प लगाते हुए बिन्दुओं को जोड़ते जाएँ। जम्‍प की दिशा को भी लिखें। इसके बाद अपने अवलोकनों को दर्ज करें।

वृत्त पर बिन्दुओं की संख्या जम्‍प का साइज़ क्या पैटर्न सभी बिन्दुओं तक पहुँचता है? जितने बिन्दुओं तक पहुँचा, उनकी संख्या जोड़े गए दो बिन्दुओं के बीच का अन्तर क्या यह तालिका की किसी अन्य आकृति से मिलती है?
6 1 हाँ 6 1 जम्‍प साइज़ 5 से वैसी ही आकृति बनती है, लेकिन विपरीत दिशा में।
2 नहीं 3 2 जम्‍प साइज़ साइज़ 4 से वैसी ही आकृति बनती है, लेकिन विपरीत दिशा में।
3 नहीं 2 3 कोई भी नहीं
7 1
2
3
8
तालिका-1

कुछ और उदाहरण देने के बाद विद्यार्थी निम्नलिखित प्रश्नों पर चर्चा कर सकते हैं :

  1. 6 बिन्दुओं वाले वृत्त में अलग-अलग जम्‍प के साइज़ के लिए :
    • कौन-से जम्‍प साइज़ों में आप प्रत्येक बिन्दु तक पहुँच पाए?
    • संख्या 6 और ऐसी ही अन्य संख्याओं के बीच क्या सम्बन्ध है?
    • किन जम्‍प साइज़ों के कारण रास्ता एक ही सर्किट को बार-बार दोहराने लगता है?
    • संख्या 6 और इन संख्याओं के बीच क्या सम्बन्ध है?
  2. तुलना करें :
    • 6 बिन्दुओं वाला वृत्त जिसमें जम्‍प साइज़ 1 है।
    • 6 बिन्दुओं वाला वृत्त जिसमें जम्‍प साइज़ 5 है।
  3. बताएँ कि इनमें क्या समानता है? इनमें क्या अन्तर है?
  4. निम्नलिखित स्थितियों में आपने कौन-से पैटर्न देखे :
    • 5 बिन्दुओं वाला वृत्त
    • 7 बिन्दुओं वाला वृत्त
    • 8 बिन्दुओं वाला वृत्त
    • 9 बिन्दुओं वाला वृत्त
  5. जब पथ सभी बिन्दुओं तक नहीं पहुँचता है, तब :
    • इस प्रक्रिया में आपस में जोड़े गए किन्हीं भी दो बिन्दुओं के बीच की सबसे छोटी दूरी (या अन्तर) क्या है?
    • अब अलग-अलग बिन्दुओं से शुरुआत करके देखें। इस स्थिति में बिन्दुओं के कितने अलग-अलग समूह बनते हैं?
  6. जब जम्‍प साइज़ जोड़े गए किन्हीं भी दो बिन्दुओं के बीच के सबसे छोटे अन्तर के बराबर हो :
    • जब हमारे पास 6 बिन्दु हों तो किन-किन जम्‍प साइज़ों में ऐसा होता है?
    • जब हमारे पास 8, 10 या 12 बिन्दु हों तो वे अलग-अलग कौन-से जम्‍प साइज़ हैं जिनके लिए ऐसा होता है?
    • जब हमारे पास 24 बिन्दु हों तो क्या आप उन जम्‍प साइज़ों का अनुमान लगा सकते हैं जिनके लिए ऐसा होगा?
  7. वास्तव में पैटर्न बनाने से पहले क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि यदि बिन्दुओं की संख्या 10, 11 या 12 हो तो अलग-अलग जम्‍प साइज़ के लिए क्या स्थिति बनेगी?

इस गतिविधि के बाद मैंने विद्यार्थियों की एक जोड़ी को चुना, जिन्होंने 15 बिन्दुओं और 2 के जम्‍प साइज़ों पर काम किया था। उन्हें इस बात का पूरा यक़ीन था कि 15 और 2 सह-अभाज्य संख्याएँ हैं, क्योंकि सभी बिन्दु आपस में जुड़ चुके थे। लेकिन जब उनसे यह समझाने के लिए कहा गया कि ऐसा क्यों है, तो वे चुप रहे। तब मैंने अवलोकन दर्ज करने के दूसरे दौर के माध्यम से उनके विचारों को दिशा दी। इस बार उन्होंने बिन्दुओं पर संख्याएँ लिखीं। जम्‍प अन्तिम बिन्दु से शुरू हुआ (जिस पर लिखी संख्या, वृत्त पर बने बिन्दुओं की कुल संख्या के बराबर थी)। उन्होंने अपने अवलोकनों को तालिका-2 में दर्ज किया।

वृत्त पर बिन्दुओं की संख्या जम्‍प साइज़ जोड़े गए बिन्दुओं की संख्या और उनके बीच का अन्‍तर उन बिन्दुओं की संख्या, जिन्हें जोड़ा न जा सका अवलोकन
15 3 3, 6, 9, 12, 15

अन्‍तर 3
1, 2, 4, 5, 7, 8,
10, 11, 13, 14

आपस में जुड़े हुए सभी बिन्दु 3 के गुणज हैं।

15 भी 3 का एक गुणज है।

इनके बीच का अन्‍तर 3 है, जो संख्या 3 और 15 का एक उभयनिष्ठ गुणनखण्ड है।

15 6 6, 12, 3, 9, 15

अन्‍तर 3
1, 2, 4, 5, 7, 8,
10, 11, 13, 14

आपस में जुड़े हुए सभी बिन्दु 3 के गुणज हैं।

6 और 15, दोनों 3 के गुणज हैं।

15 2 2, 4, 6, 8, 10, 12, 14, 1, 3,
5, 7, 9, 11, 13, 15

अन्‍तर 1

सभी बिन्दु आपस में जुड़ गए हैं।

15 और 2 के बीच एकमात्र उभयनिष्ठ गुणनखण्ड 1 है।

1 का अन्तर ही एकमात्र उभयनिष्ठ गुणनखण्ड देता है।

15 और 2 सह-अभाज्य हैं।

तालिका-2

इसके बाद विद्यार्थियों को समझ में आने लगा कि बिन्दुओं के बीच का अन्‍तर ही उन दोनों संख्याओं के उभयनिष्ठ गुणनखण्ड को दर्शाता है। जब दो संख्याओं का कोई भी उभयनिष्ठ गुणनखण्ड नहीं होता, तब प्रत्येक बिन्दु इस शृंखला का हिस्सा बन जाता है। ऐसी दोनों संख्याएँ सह-अभाज्य होंगी।

अपने अवलोकनों के आधार पर

वाक्य पूरे करें :

  • कोई पथ प्रत्येक बिन्दु तक तब पहुँचता है, जब ___________।
  • जुड़े हुए बिन्दुओं के बीच का सबसे छोटा अन्‍तर ___________ के बारे में जानकारी देता है।
  • जिन बिन्दुओं तक पहुँचा जाता है, उनकी संख्या ____________ पर निर्भर करती है।
  • अतिरिक्त प्रश्न : यदि जम्‍प साइज़ को बदलकर कुल बिन्दुओं की संख्या में से जम्‍प साइज़ घटा दिया जाए तो ___________।
  • किसी पैटर्न में बिन्दुओं के बीच का सबसे छोटा अन्तर जम्‍प साइज़ के बराबर तभी और केवल तभी होता है, जब _________।

गतिविधि में इस विस्तार से विद्यार्थी सिर्फ़ पैटर्न बनाने तक सीमित नहीं रह जाते हैं, बल्कि उनमें निहित गणितीय सम्बन्धों को भी समझ पाते हैं। पूरे किए गए वाक्यों से विद्यार्थियों को अवलोकन करने और अनुमान लगाने में मदद मिलेगी।

  • कोई पथ प्रत्येक बिन्दु तक तब पहुँचता है, जब बिन्दुओं की संख्या और जम्‍प साइज़ को दर्शाने वाली संख्या का कोई भी उभयनिष्ठ गुणनखण्ड न हो।
  • जुड़े हुए बिन्दुओं के बीच का सबसे छोटा अन्‍तर इन दोनों संख्याओं के किसी उभयनिष्ठ गुणनखण्ड के बारे में जानकारी देता है।
  • जिन बिन्दुओं तक पहुँचा जाता है, उनकी संख्या बिन्दुओं की संख्या और जम्‍प साइज़ को दर्शाने वाली संख्या के उभयनिष्ठ गुणनखण्डों पर निर्भर करती है।
  • अतिरिक्त प्रश्न : यदि जम्‍प साइज़ को बदलकर कुल बिन्दुओं की संख्या में से जम्‍प साइज़ घटा दिया जाए तो जिन बिन्दुओं तक पहुँचा जाता है, वे वही रहते हैं लेकिन दिशा उलट जाती है।
  • किसी पैटर्न में बिन्दुओं के बीच का सबसे छोटा अन्‍तर जम्‍प साइज़ के बराबर तभी और केवल तभी होता है, जब जम्‍प साइज़ बिन्दुओं की संख्या का एक गुणनखण्ड हो। अतः दो संख्याओं का महत्तम समापवर्तक (HCF) उन्हीं में से एक संख्या के बराबर केवल तभी होता है, जब उन दोनों में से छोटी संख्या दूसरी संख्या का एक गुणनखण्ड हो।

केवल किसी निश्चित कलात्मक गतिविधि के आधार पर संख्याओं के जोड़ों को सह-अभाज्य या ग़ैर सह-अभाज्य के रूप में परिभाषित करने के बजाय इस प्रकार की अन्वेषणात्मक गतिविधियों के माध्यम से गुणनखण्ड, महत्तम समापवर्तक और सह-अभाज्य संख्याओं की समझ की मज़बूत नींव रखना अधिक बेहतर होगा। इससे विद्यार्थियों को अवलोकन करने, उन्हें दर्ज करने, निष्कर्ष निकालने, और आगे चलकर उन्हें सिद्ध करने में भी मदद मिलेगी।

आभार :

लेखक महत्त्वपूर्ण सुझाव देने के लिए अजयकुमार के., स्वाती सरकार और क्षमा चक्रवर्ती के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।

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