ए. रामचन्‍द्रन ने विभिन्न स्रोतों से गणित की समस्याओं को एकत्रित करके उनके सेट बनाए हैं। यहाँ दी गई समस्‍या ऐसे ही एक सेट से ली गई है।

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चुनौती यह है कि दो 3-अंकीय संख्‍याओं को जोड़ने पर 4-अंकों का योग प्राप्‍त हो। इस पूरे जोड़ में 0 से 9 तक के सभी दस अंकों का उपयोग केवल एक बार होना चाहिए।

साथ ही कोई भी 3-अंकीय संख्‍या या 4-अंकीय योग 0 से शुरू नहीं होना चाहिए।

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प्राथमिक कक्षाओं में इस प्रकार की खुली समस्याएँ (open-ended) बहुत आम नहीं हैं। यह देखा गया है कि वयस्कों को भी ऐसी समस्‍याओं के सही हल तक पहुँचने में कुछ समय लगता है। जब यह समस्या कक्षा-4 और 5 के विद्यार्थियों के एक समूह को अंक-कार्ड के साथ दी गई, तो अधिकांश बच्चों ने शुरुआत अनुमान लगाकर और अलग-अलग प्रयास करके की। हम इस समस्या को यहाँ कुछ ऐसी शिक्षण-शास्त्रीय रणनीतियों के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं, जो बच्‍चों में समस्‍या को व्‍यवस्थित और प्रभावी ढंग से हल करने की क्षमता विकसित करने में मदद कर सकती हैं।

इस समस्‍या को अंकों वाले छोटे-छोटे कार्ड या गत्ते के टुकड़ों की मदद से हल करना सबसे आसान होगा। यहाँ दिए गए टेम्पलेट का भी उपयोग किया जा सकता है। विद्यार्थी खाली स्‍थानों पर अलग-अलग अंक रखकर सही जोड़ बनाने का प्रयास कर सकते हैं।

समस्‍या को हल करने में मददगार रणनीतियाँ

  1. समस्या और उसकी शर्तों को स्पष्ट करना : सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि विद्यार्थी अच्‍छी तरह समझ लें कि उन्‍हें क्‍या करना है और समस्‍या में कौन-कौन-सी शर्तें दी गई हैं। विद्यार्थी अलग-अलग अंक लगाकर प्रयास और त्रुटि (trial and error) के माध्‍यम से उत्तर खोज सकते हैं। इस प्रक्रिया में उन्‍हें यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन-से उत्तर सही हो सकते हैं और कौन-सी सम्‍भावनाओं को हटाया जा सकता है।
  2. केवल एक सही उत्तर मिलने पर रुकें नहीं : समस्‍या का उद्देश्‍य केवल एक सही उत्तर खोजना नहीं है। यदि विद्यार्थी ऐसी कोई प्रक्रिया खोज लेते हैं जिससे एक से अधिक सही उत्तर मिल सकते हैं, तो इसका मतलब है वे गणित में पैटर्न और सामान्‍य नियमों को पहचानना सीख रहे हैं।
  3. सोचने के लिए समय और अवसर देना : ऐसी समस्याओं को हल करने के लिए विद्यार्थियों को एक पीरियड की बजाय दो-तीन दिन या उससे अधिक समय भी दिया जा सकता है। विद्यार्थी इन्‍हें अपने साथियों के साथ जोड़ी बनाकर या छोटे समूह में भी हल कर सकते हैं। इससे उन्‍हें बहस करने, अनुमान लगाने, गणितीय संवाद करने और तर्क-वितर्क करने के अवसर मिलते हैं।
  4. सभी सम्‍भावित उत्तरों की खोज करने को कहना : जब विद्यार्थी केवल एक उत्तर की बजाय सभी सम्‍भावित उत्तर खोजने का प्रयास करते हैं, तो उन्‍हें समस्या को अधिक गहराई से समझने का अवसर मिलता है। इससे इस गतिविधि से मिलने वाले सीखने के अवसर भी बढ़ जाते हैं।
  5. कम्‍प्यूटेशनल सोच का उपयोग करना : इसका अर्थ है समस्‍या को छोटे-छोटे भागों में बाँट सकते हैं; अंकों में दिखाई देने वाले पैटर्न की पहचान कर सकते हैं; एक व्यवस्थित तरीक़े से अलग-अलग सम्‍भावनाएँ जाँच सकते हैं; और ग़लतियों को पहचानकर उन्‍हें सुधार सकते हैं। ग़लतियों को पहचानने और सुधारने की इस प्रक्रिया को डिबगिंग (debugging) कहा जाता है।
  6. ऐसे प्रश्न पूछें जो बच्‍चों की सोच को आगे बढ़ाएँ : कभी-कभी विद्यार्थी किसी ऐसी स्थिति में पहुँच जाते हैं जहाँ उन्‍हें आगे क्‍या करना है, यह समझ नहीं आता। ऐसे समय में शिक्षक को सही उत्तर बताने की बजाय ऐसे प्रश्‍न पूछने चाहिए जो विद्यार्थियों को अपनी सोच पर दोबारा विचार करने और नई दिशा में सोचने में मदद करें। नीचे ऐसे ही कुछ प्रश्‍नों के सुझाव दिए गए हैं :
  • 0 कहाँ रखा जा सकता है?
  • दो 1-अंकीय संख्याओं का सबसे बड़ा सम्‍भावित योग कितना हो सकता है?
  • 4-अंकीय योग में हज़ार का अंक कौन-सा होना चाहिए?
  • दो 1-अंकीय संख्याओं को जोड़ने पर हासिल कब आता है?
  1. छोटे उदाहरणों के माध्‍यम से विद्यार्थियों की सोच को आगे बढ़ाएँ : उदाहरण के लिए, मान लें कि 3-अंकीय संख्‍याओं के सैकड़े के अंक 3 और 8 हैं, और योग के सैकड़े का अंक 2 है। क्या आप शेष खाली स्थानों को 0, 1, 4, 5, 6, 7, 9 से भर सकते हैं (ध्‍यान रहे कि किसी भी अंक का दोबारा उपयोग नहीं किया जा सकता है)?
  2. संख्याओं के जोड़ के क्रमविनिमय और साहचर्य के गुणों का उपयोग करके एक उत्तर से दूसरे उत्तर खोजने की कोशिश करना : उदाहरण के लिए, यदि 347 + 859 = 1206 है, तो क्‍या दोनों संख्‍याओं के कुछ अंकों की जगह आपस में बदलकर भी यही योग प्राप्‍त किया जा सकता है?

इन्‍हें भी पढ़ सकते हैं

जेनी पेनांट का लेख, Developing Excellence in Problem Solving with Young Learners [1], समस्या-समाधान के विभिन्न चरणों के बारे में बात करता है, जिसमें ‘शुरुआत करना’, ‘समस्या पर काम करना’, ‘गहराई से समझना’, और ‘चिन्‍तन करना’ शामिल हैं। एक अन्य लेख [2] में, डेलोच और ब्राउन (1987) द्वारा किए गए अवलोकनों में ट्रेन ट्रैक सर्किट बनाने के लिए चार से सात साल के बच्चों द्वारा अपनाई गई तीन समस्या-समाधान रणनीतियों का वर्णन किया गया था :

  • बल प्रयोग : टुकड़ों को ठोक-पीटकर फिट करने की कोशिश करना।
  • स्थानीय सुधार : केवल एक हिस्से को ठीक करने पर अकसर कोई दूसरी समस्या पैदा हो जाती है।
  • विघटन : सब कुछ पूरी तरह से तोड़कर फिर से शुरुआत करना।
  • समग्र समीक्षा : कई सम्‍बन्‍धों या एक साथ किए जाने वाले समायोजनों पर विचार करना, उदाहरण के लिए, बीच में जोड़कर या उलटकर मरम्मत करना।

यह सोचना दिलचस्प है कि इन रणनीतियों का उपयोग इस लेख में दी गई समस्या (काग़ज़-और-क़लम वाली समस्याओं) को हल करने के लिए भी किया जा सकता है। इस मामले में ‘बल प्रयोग’ का अर्थ होगा कि बिना किसी योजना के अलग-अलग अंकों को अलग-अलग खानों में रखना और उम्‍मीद करना कि किसी-न-किसी प्रयास में सही उत्तर मिल जाएगा। ‘स्थानीय सुधार’ का अर्थ है कि पूरे समाधान को देखने की बजाय केवल एक छोटी ग़लती को ठीक करने की कोशिश करना। लेकिन एक जगह सुधार करने से दूसरी जगह नई समस्‍या पैदा हो सकती है। ‘विघटन’ का अर्थ है बार-बार नए सिरे से शुरुआत करना। लेकिन इसमें उन्‍हें अपने पिछले प्रयासों से मिली सीख का उपयोग करना चाहिए। ‘समग्र समीक्षा’ का अर्थ है कि विद्यार्थी केवल एक जगह की ग़लती सुधारने की बजाय यह देखें कि अलग-अलग अंक और स्‍थान एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं। वे एक साथ कई बदलाव करके समाधान खोजने की कोशिश कर सकते हैं। इस समस्या में भी विद्यार्थियों को अलग-अलग तरीक़ों से प्रयास करने का अवसर देना उपयोगी है। धीरे-धीरे वे केवल अनुमान और बार-बार प्रयास करने की बजाय योजना बनाकर, पैटर्न पहचानकर और व्यवस्थित तरीक़े से समस्या हल करना सीख सकते हैं। इस गतिविधि का मुख्‍य उद्देश्य केवल सही उत्तर प्राप्‍त करना नहीं है। महत्त्वपूर्ण यह है कि विद्यार्थी समस्या को अलग-अलग तरीक़ों से देखने, अपने विचारों को आजमाने, ग़लतियों से सीखने और समाधान खोजने की प्रक्रिया का आनन्‍द लें।

इस समस्या को हल करते समय आपके विद्यार्थियों ने क्‍या किया और उनके विचारों की प्रक्रिया क्‍या रही, इसका विवरण देने वाली आपकी प्रतिक्रियाओं की हमें प्रतीक्षा रहेगी। अपनी प्रतिक्रिया AtRightAngles.editor@apu.edu.in पर भेजें। इसी सन्‍दर्भ में एक नया लेख जल्द ही आ रहा है, जिसमें कुछ नए तरीक़े/विचार और पूरा समाधान दिया जाएगा!

आभार

स्वाती सरकार, मोहन आर. और स्नेहा टाइटस ने इस लेख में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

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