आकार में आना!
मेरी मूल योजना इस प्रकार थी :
पाठ के उद्देश्य : यूनिट के आख़िर तक विद्यार्थियों को निम्नलिखित कार्य करने में सक्षम होना चाहिए :
- वृत्त और त्रिभुज, वर्ग या आयत के बीच अन्तर करना।
- त्रिभुज और आयत के बीच समानताएँ और अन्तर कर पाना।
- यह समझना कि विभिन्न आकृतियों को मिलाकर परिचित वस्तुओं की आकृतियाँ कैसे बनाई जा सकती हैं।
तदनुसार, दिन-वार गतिविधि योजना इस प्रकार थी :
दिन 1 : विभिन्न चयनित आकृतियों को ट्रेस करें और उन्हें काटें। फिर, नीचे दिए गए सवालों का इस्तेमाल करके, आकृतियों के कटआउट को 4 समूहों में बाँटें वृत्त, वर्ग, आयत और त्रिभुज :
- आकृतियों को ट्रेस करने पर हमें किस प्रकार की रेखाएँ दिखाई देती हैं?
- किन आकृतियों को ट्रेस करने पर सीधी/घुमावदार रेखाएँ बनती हैं?
- किन आकृतियों की भुजाएँ बराबर/ग़ैर-बराबर हैं?
- वृत्त, वर्ग, आयत या त्रिभुज से किस प्रकार भिन्न है?
- त्रिभुज, आयत के समान कैसे है? यह आयत से किस प्रकार भिन्न है?
आकृतियों के बारे में एक कविता करके इस सत्र को ख़त्म करें।
योजना के मुताबिक़ यह पाठ बहुत ही सुन्दर ढंग से चला और अगले दिन का ज़्यादातर हिस्सा भी, जिसकी योजना नीचे दी गई है।

दिन 2 : विद्यार्थियों को 5-5 के समूहों में बाँटें, और प्रत्येक समूह को कई किटों में से आकृतियों का एक रेंडम ढेर (कलेक्शन) दें, जैसे :
- रंगोमेट्री\(^1\) − एथिल विनाइल एसीटेट (EVA) से बनी 2D आकृतियों का एक ढेर, जो पानी में डुबाने पर बोर्ड पर चिपक जाती हैं − जोड़ो ज्ञान द्वारा विकसित।
- टेसेलेशन किट − समान भुजाओं वाले सम बहुभुजों (पंचभुज, षट्भुज आदि) का ढेर।
- आकार परिवार − 5 आकृतियों (वृत्त, अर्धवृत्त, वर्ग, आयत, समबाहु त्रिभुज − प्रत्येक अलग रंग में और प्रत्येक 5 आकारों में) का ढेर।
- कक्षा में पाई गईं बेतरतीब आकृतियाँ − इनमें से एक वलय (डोनट आकार की) थी।
समूहों को परिचित वस्तुओं की आकृतियाँ बनाने के लिए कहें और किट का इस्तेमाल करके वही आकृतियाँ काग़ज़ पर बनाने को कहें। फिर इन पर चर्चा करें :
- आपने नाव बनाने के लिए किन आकृतियों का इस्तेमाल किया?
- आपने उस आकृति का इस्तेमाल क्यों किया?
- आपके द्वारा चुनी गई आकृति और छोड़ी गई आकृति में क्या अन्तर है?
- चुनी आकृति क्यों ज़्यादा उपयुक्त है?
विद्यार्थियों की क्षमताओं के सन्दर्भ में समूह विविध थे। प्रत्येक समूह को पाँच आकृतियाँ बनानी थीं − कार, नाव, रॉकेट, केक और रोबोट।

हरेक आकृति के लिए उन्हें 5 मिनट का समय दिया गया। प्रत्येक समूह के लिए आकृतियों का क्रम मेरे द्वारा निर्धारित किया गया था ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी दो समूह एक ही आकृति पर एक साथ काम नहीं कर रहे हों। इन वस्तुओं को विद्यार्थियों की उनके बारे में जानकारी और बनाने में आसानी के आधार पर भी चुना गया था। इसका मक़सद यह दिखाना था कि हमारे आस-पास की वस्तुओं को अलग-अलग आकृतियों को एक साथ रखकर दर्शाया जा सकता है। जैसा कि अमूमन समूह कार्य में होता ही है इसमें भी अपेक्षित 25 मिनट से ज़्यादा वक्त लगा। उन्हें व्यवस्थित होने और एक साथ काम करने में समय लगा, कुछ समूहों को अधिक सामग्री चाहिए थी। उन्हें दूसरे समूहों को दी गई आकृतियों में भी दिलचस्पी थी, और प्रत्येक समूह ने बारी-बारी से हर आकृति को बनाया। हालाँकि, जब उन्होंने चित्र बनाना शुरू किया, तो वे पूरी तरह से उसमें रम गए। फिर, उन्होंने कक्षा की शुरुआत में दिए गए काग़ज़ पर वही आकृतियाँ बनाईं। कुछ ने हाथ से चित्र बनाए, जबकि कुछ ने असली आकृतियों को ट्रेस करके बनाया। वे कैसे बनाएँ, यह फ़ैसला उन पर छोड़ दिया गया।
मैंने देखा कि विद्यार्थियों की दूसरे समूहों द्वारा बनाई गई आकृतियों में गहरी रुचि थी। उन्होंने अपने विचारों को क्रियान्वित करने के लिए दूसरे समूहों के साथ आकृतियों का आदान-प्रदान किया। वे एक-दूसरे से प्रेरणा ले रहे थे और कक्षा की व्यवस्था को भंग किए बिना संसाधनों का आदान-प्रदान कर रहे थे। चूँकि हमारे पास समय कम था, इसलिए चर्चा अगले दिन के लिए मुल्तवी कर दी गई। इसका मतलब था कि मूल योजना को अलग रखना, जो इस प्रकार थी :
दिन 3 : टैनग्राम − दिए गए टैनग्राम सेट की आकृतियों का इस्तेमाल करके बढ़ती जटिलता वाली आकृतियाँ बनाएँ।
दिन 4-6 : आकृतियों के साथ अलग-अलग तरह की जाँच-पड़ताल और चर्चाएँ, उसके बाद सातवें दिन रचनात्मक आकलन के लिए पाठ्यपुस्तक अभ्यास।
तीसरे दिन की शुरुआत विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए चित्रों पर चर्चा से हुई। चूँकि इन आकृतियों में ऐसे कई बहुभुज और दूसरी आकृतियाँ शामिल थीं जो उनके लिए नई थीं, तो इससे सवालों की बाढ़ आ गई और इसने चर्चा को एक अलग दिशा में मोड़ दिया।
हम अलग-अलग चार-भुजाओं वाली आकृतियाँ ढूँढ़ने लगे। एक विद्यार्थी ने एक ऐसी आकृति खोजी जो आधे षट्भुज (षट्कोण) जैसी दिखती थी! क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि वह चार-भुजाओं वाली आकृति कौन-सी थी?

अब इस अवलोकन ने चर्चा को सममिति (symmetry) की ओर मोड़ दिया और यह दिखाने के लिए कि यह आकृति एक षट्भुज का आधा कैसे है, काग़ज़ मोड़ने का प्रयोग किया गया। हमने काग़ज़ का एक आयताकार टुकड़ा लिया और उसे क्षैतिज मध्य रेखा के साथ मोड़ा। फिर हमने मुड़े काग़ज़ को खोला और चारों कोनों को इस तरह मोड़ा कि वे क्रीज़ (सल − जहाँ से पेपर को मोड़ा गया था) को छुएँ। फिर, हमने क्रीज़ से काग़ज़ को मोड़ा, और वही आकृति प्राप्त हुई!

और फिर, विद्यार्थी खुद से इसे करने में लग गए! एक विद्यार्थी इस विचार पर अटक गया कि समद्विबाहु समलम्ब आधे षट्भुज की बजाय आधे अष्टभुज जैसा दिखता है। आप कैसे दिखा सकते हैं कि चित्र-5 में दिया गया चतुर्भुज दरअसल षट्भुज का आधा है?
“षट्भुज की सभी भुजाएँ (और कोण) बराबर होने चाहिए,” जैसी ग़लत धारणाएँ या भ्रम सामने आए और उन पर चर्चा की गई।
फिर, विद्यार्थियों ने काग़ज़ को विभिन्न तरह से मोड़ते हुए प्रयोग करना शुरू किया और जल्द ही एक अष्टभुज बना लिया। एक विद्यार्थी ने यह पता लगाया कि कैसे एक फ्लैप (तह) को खोलकर अष्टभुज को सप्तभुज में बदला जा सकता है।

जब एक बार किसी विद्यार्थी ने यह कर लिया, तो कई इसे दोहराने की कोशिश में लग गए। इन आकृतियों (सात भुजाओं और आठ भुजाओं वाली) के नाम जानने की उनकी उत्सुकता ने तयशुदा गतिविधि को जारी रखना नामुमकिन बना दिया। इसलिए, मैंने आठ के लिए ऑक्टा (अष्टक) शब्दावली का इस्तेमाल किया और उदाहरण बतौर ‘ऑक्टोपस’ शब्द को चर्चा में लाई। इस प्रकार, काग़ज़ मोड़ने की गतिविधि ने अपना अलग ही रूप धारण कर लिया, जिसकी शुरुआत और संचालन पूरी तरह से विद्यार्थियों ने किया! यहाँ इस गतिविधि से सम्बन्धित कुछ चित्र दिए गए हैं।




इन आकृतियों को देखकर, एक अन्य विद्यार्थी ने यूँ ही यह टिप्पणी कर दी कि षट्भुज थोड़ा-सा वृत्त जैसा दिखता है। और अन्य को लगा कि अष्टभुज के लिए भी यही बात सही है। जैसे-जैसे चर्चा आगे बढ़ी, बोर्ड विभिन्न बहुभुजों से भर गया।
जैसे-जैसे विद्यार्थियों की भागीदारी और उत्साह बढ़ता गया, सभी की सुने जाने की चाह बढ़ती गई − कोई सवाल पूछना चाहता था या कोई अपना अवलोकन साझा करना चाहता था। हरेक सवाल का जवाब देना नामुमकिन हो गया। वे उतावले हो रहे थे। इसलिए, मुझे रुकना पड़ा। मैंने उन्हें उनके सवाल लिखने के लिए कहा। लेकिन तब तक कक्षा ख़त्म हो चुकी थी। अब सवाल लिखकर लाना उनका होमवर्क बन गया। अनुमान लगाइए कि कक्षा-3 के इन विद्यार्थियों ने अपना होमवर्क कितनी ईमानदारी से किया होगा!

सोच-विचार करने पर, हमें निम्नलिखित बातें समझ में आईं :
- हालाँकि कक्षा में शोरगुल था, लेकिन यह अपने निष्कर्षों/सवालों को साझा करने की अधिक उत्सुकता के कारण था। यानी, यह विद्यार्थियों की अपने अभ्यास/सीख में गहरी संलग्नता और सक्रिय भागीदारी की वजह से था। इसीलिए, यह ग़ैर-ज़रूरी भटकाव और ख़लल से बहुत अलग था। हमारे लिए सीख यह थी कि जहाँ शोरगुल को नियंत्रित करना ज़रूरी था, वहीं विद्यार्थियों को बहुत ज़्यादा शोर मचाने के लिए डाँटा भी नहीं जाना चाहिए।
- विद्यार्थियों को स्वतंत्रता देना मददगार साबित हुआ। जो कर सकते थे, उन्होंने हाथ से चित्र बनाए, और जिन्हें ज़रूरत थी, उन्होंने ट्रेस करके ज़्यादा सटीक आकृतियाँ बनाईं। और तीसरे दिन, उनकी रचनात्मकता, जिज्ञासा, अवलोकन और सवालों ने कक्षा की अगुवाई की।
- वे एक-दूसरे से सीखने में संकोच नहीं कर रहे थे और इस साझा सीख ने उन्हें तेज़ी से आगे बढ़ने में मदद की।
- उन्होंने यह पता लगाया कि मोड़कर एक आकृति को दूसरी आकृति में कैसे बदला जाए, जिससे उन्होंने खोज का मीठा स्वाद चखा।
- उनकी खोज और जिज्ञासा उन्हें उनकी कक्षा के स्तर से बहुत आगे ले गई।
- उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने अवलोकन व्यक्त किए और इस प्रकार शिक्षक उस पर आगे बढ़ सके। इससे भी महत्त्वपूर्ण बात, उनके भ्रम को दूर कर सके। इसीलिए, कई मायनों में, ये कक्षाएँ बाल-केन्द्रित थीं।
- दूसरे दिन की गतिविधि के लिए ज़्यादा समय रखकर योजना को बेहतर बनाया जा सकता है।
- अगर बहुत-से विद्यार्थी एक साथ बोलना चाहते हैं, तो शिक्षक को तुरन्त उन्हें लिखने के लिए प्रेरित करना चाहिए। यह ज़रूरी है कि शिक्षक उन्हें स्पष्ट बताएँ कि इस तरह, वे सभी के विचार जान सकते हैं और फिर उसके अनुसार जवाब दिए जा सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि लेखन उनके विचारों को शिक्षक तक पहुँचाने में कैसे मदद करता है, जो सीमित कक्षा समय में मौखिक रूप से व्यक्त करना मुमकिन नहीं है। आमतौर पर, जब विद्यार्थी किसी भी काम के पीछे का कारण समझ जाते हैं, तो वे कम विरोध करते हैं। ख़ासकर अगर कारण उनकी बात सुनी जाने की ज़रूरत से जुड़ा हो। प्रिपरेटरी स्टेज से ही उन्हें अपने विचार लिखने के लिए कहना एक अच्छा ख़्याल है। ऐसी आदतें बचपन में आसानी से विकसित की जा सकती हैं और बाद में इनके कई फ़ायदे होंगे। विद्यार्थियों को यह आदत डालने का एक अच्छा तरीक़ा है कि बोर्ड पर एक सूची बनाएँ, जिससे विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप से अपने सुझाव साझा करने और फिर सामूहिक रूप से सूची को सम्पादित करने का समय मिल सके।






अगर आप भी आकृतियों के साथ ऐसा ही मज़ा लेना चाहते हैं, तो आपके पास ऐसी वस्तुओं का संग्रह ज़रूर होना चाहिए जिनसे आकृतियाँ ट्रेस की जा सकें। ये आकृतियाँ काग़ज़ से भी बनाई जा सकती हैं। पंचभुज, षट्भुज (षट्कोण) आदि नामों से परिचित कराना ज़रूरी नहीं है। शुरुआत में आप पाँच भुजाओं वाली आकृतियाँ, छह भुजाओं वाली आकृतियाँ… भी कह सकते हैं। हमें उम्मीद है कि जल्द ही हम काग़ज़ मोड़ने की ऐसी ही गतिविधियों पर आधारित एक वर्कशीट आपसे साझा करेंगे।
\(^1\)एट राइट एंगल्स के जुलाई 2023 अंक में इसकी समीक्षा की गई है।