पद्मप्रिया शिराली वैली स्कूल (बेंगलूरु) और ऋषि वैली (आन्ध्र प्रदेश) स्थित कम्युनि टी मैथ सेंटर का हिस्सा हैं, जहाँ वे 1983 से काम कर रही हैं। वे गणित, कम्प्यूटर एप्लीकेशन, भूगोल, अर्थशास्त्र, पर्यावरण अध्ययन और तेलूगु जैसे विभिन्न विषय पढ़ाती रही हैं। 1990 के दशक में, उन्होंने दिवंगत श्री पी. के . श्रीनिवासन के साथ मिलकर काम किया । वह उस टीम का हिस्सा थीं जिसने ऋषि वैली रूरल सेंटर के ‘स्कूल इन ए बॉक्स’ नाम से मशहूर बहु-कक्षा प्रारम्भिक शिक्षा कार्यक्रम को तैयार किया । वह वर्तमान में एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक विकास समूह का हिस्सा हैं।
पद्मप्रिया शिराली
padmapriya.shirali@gmail.comलेखक की ओर से
गिनती से परिचय
बच्चों में संख्याओं की समझ स्वाभाविक रूप से तब शुरू होती है जब वे अपने आस-पास की दुनिया को टटोलते हैं — यहाँ तक कि शैशवावस्था में भी। वस्तुओं के साथ बार-बार होने वाली अन्तःक्रियाओं और अपने परिवेश में इस्तेमाल होने वाली भाषा के माध्यम से वे धीरे-धीरे संख्या सम्बन्धी प्रारम्भिक अवधारणाओं का निर्माण करते हैं।
शिक्षण सोचने-विचारने के कौशलों का
व्यवहारिक रूप से देखें तो हर मानवीय गतिविधि में सोचने-विचारने के कौशलों का इस्तेमाल निहित होता है। तो फिर सोचने-विचारने के कौशल क्या हैं? ये वे महत्त्वपूर्ण मानसिक प्रक्रियाएँ हैं जो हम करते हैं चीजों का वर्गीकरण करना, गुणधर्मों का अवलोकन करना, जानकारी का संकेतीकरण करना, तुलना करना, निर्णय लेना, निष्कर्ष निकालना और समस्याएँ हल करना। सोचने-विचारने के कौशलों को सोचने-विचारने के कैनवास के बुनियादी अंग के रूप में देखा जा सकता है। सोचने-विचारने के इन कौशलों को मोटेतौर पर दो वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है निम्न कोटि सोच-विचार कौशल और उच्च कोटि सोच-विचार कौशल ।
शिक्षण ज्यामिति भाग–दो
ज्यामिति शिक्षण यदि सही तरीके से किया जाए तो कई मायनों में इसमें देखने व अवलोकन करने की कला सीखने की बहुत ज्यादा सम्भावना होती है। यदि आप केवल एक सादे चौकोर कागज को अलग-अलग तरीकों से मोड़कर खेल करते हैं या बिन्दुओं वाले एक कागज पर दिए बिन्दुओं को जोड़ना शुरू करते हैं तो भी आप ऐसा करने से उभरती विभिन्न आकृतियों को देखना शुरू करते हैं। व्यक्तिगत तौर पर मैंने हमेशा यह देखा है कि ऐसा करना काफी मजेदार और समृद्ध अनुभव होता है क्योंकि हर वह विद्यार्थी जिससे मैं मिली हूँ वह आकृतियों को अपने एक अलग ही तरीके से देखता और नोटिस करता है।
शिक्षण ज्यामिति भाग–एक
औपचारिक स्कूल में दाखिला लेने के पहले, परिवेश और पास-पड़ोस से पारस्परिक क्रियाओं के दौरान बच्चे का विभिन्न आकारों व आकृतियों (2-D और 3-D) से सामना होता है। उसे इस बात की समझ होती है कि हर चीज का एक आकार होता है। हर आकार की कुछ आसानी से पहचानी जाने वाली विशेषताएँ होती हैं जिन्हें देखा जा सकता है, पहचाना जा सकता है, नाम दिया जा सकता है, उनका वर्णन किया जा सकता है और उन्हें वर्गीकृत भी किया जा सकता है। इन आकारों के विभिन्न उदाहरणों से बच्चे का परिचय पहले से ही होता है।
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