पद्मप्रिया शिराली

padmapriya.shirali@gmail.com
पद्मप्रिया शिराली

पद्मप्रिया शिराली वैली स्कूल (बेंगलूरु) और ऋषि वैली (आन्ध्र प्रदेश) स्थित कम्युनि टी मैथ सेंटर का हिस्सा हैं, जहाँ वे 1983 से काम कर रही हैं। वे गणित, कम्प्यूटर एप्लीकेशन, भूगोल, अर्थशास्त्र, पर्यावरण अध्ययन और तेलूगु जैसे विभिन्न विषय पढ़ाती रही हैं। 1990 के दशक में, उन्होंने दिवंगत श्री पी. के . श्रीनिवासन के साथ मिलकर काम किया । वह उस टीम का हिस्सा थीं जिसने ऋषि वैली रूरल सेंटर के ‘स्कूल इन ए बॉक्स’ नाम से मशहूर बहु-कक्षा प्रारम्भिक शिक्षा कार्यक्रम को तैयार किया । वह वर्तमान में एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक विकास समूह का हिस्सा हैं।

लेखक की ओर से

शिक्षण आँकड़ों के प्रबन्‍धन का
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शिक्षण आँकड़ों के प्रबन्‍धन का

प्राथमिक स्‍कूल में गणित के अन्‍तर्गत पढ़ाए जाने वाले सभी प्रसं ग (topic) बच्‍चों की अपनी दनिु या को समझने की ज़रूरत से उत्‍पन्‍न होते हैं। इस समझ को बनाने व बढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान बच्‍चों का सामना विविध प्रकार के सं ख्‍यात्‍मक आँकड़ों (डेटा) से होता है।

05 सितम्बर 2016
पढ़ाना गुणा : एक व्‍यावहारिक दृष्टिकोण
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पढ़ाना गुणा : एक व्‍यावहारिक दृष्टिकोण

यहाँ गुणा को लेकर कुछ सवाल हैं क्या बच्चे गुणा के टेबिल याद रखते हैं? गुणा दर्शाने के लिए आसान और सुविधाजनक तरीका क्या है? क्या गुणा करने की प्रक्रिया भर पढ़ाना पर्याप्त है? जब हम इन सवालों पर विचार करेंगे तो पाएँगे कि ज्ञान के निमार्ण की आवश्यकता क्यों है। अगर हम देखना चाहते हैं कि बच्चे इस बात को समझें कि तथ्य किस तरह से प्राप्त किए जाते हैं, प्रक्रियाएँ कैसे बनती हैं और अवधारणाएँ कैसे सामने आती हैं तो हमारा तरीका समझदारी भरा होगा।

05 अक्टूबर 2014
पढ़ाना भाग : एक व्‍यावहारिक दृष्टिकोण
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पढ़ाना भाग : एक व्‍यावहारिक दृष्टिकोण

यह काफी जानी-मानी बात है कि आमतौर पर जोड़ व गुणा की तुलना में भाग व घटाना सीखना बच्चों के लिए कहीं ज्यादा मुश्किल होता है। खासकर भाग के मामले में बच्चों को उन स्थितियों को पहचानने जिनमें भाग करने की जरूरत हो और भाग के सवालों को हल करने की लम्बी विधि में शामिल जटिल औपचारिक प्रक्रिया को समझने में कठिनाई होती है। साथ ही भाग की प्रक्रिया में भागफल में स्थान धारक के रूप में प्रयुक्त होने वाले शून्य की भूमिका भी होती है। इन तीन मुख्य कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को चाहिए कि भाग की अवधारणा को पढ़ाते समय इसका ध्यान रखें और धीरे-धीरे आगे बढ़ें।

पढ़ाना घटाना : एक व्‍यावहारिक दृष्टिकोण
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पढ़ाना घटाना : एक व्‍यावहारिक दृष्टिकोण

देश भर में किए गए ज्यादातर मूल्यांकन इस बात की ओर इशारा करते हैं कि अधिकांश बच्चों के लिए घटाने की संक्रिया सीखना पहली रुकावट होती है और इसके फलस्वरूप बाद में भाग सीखने में भी मुश्किलें होती हैं। गौर से देखने पर हमें पता चलता है कि अकसर दो अंकों वाली व बड़ी संख्याओं को घटाने में बच्चों को ज्यादा कठिनाई होती है। इन कठिनाइयों के प्रमुख रूप से तीन कारण होते हैंः (1) स्थानीय मान की गलत समझ, (ii) घटाने की व्यवस्थित प्रक्रिया के पीछे के मूल कारण को समझने में कमी, (iii) जोड़ व घटाने के तथ्यों के बीच के सम्बन्ध को न देख पाना।

04 अक्टूबर 2013
संख्‍या संक्रियाएँ : जोड़ : एक व्‍यावहारिक दृष्टिकोण
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संख्‍या संक्रियाएँ : जोड़ : एक व्‍यावहारिक दृष्टिकोण

2×2 रोन्टीमीटर आकार के वर्गों का 5×5 का एक मेट्रिक्स बोर्ड बनाएँ। दोनों अक्षों में 8 से 10 तक की संख्याओं को बिना किती क्रम के लिख दे जैसा कि दिखाया गया है। 2×2 सेन्टीमीटर के 25 चौकोर कार्ड बनाएँ। इन कार्यों पर संख्याओं के जोड़ लिखें।

स्थानीय मान
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स्थानीय मान

स्थानीय मान प्रणाली का शिक्षण संख्याओं को पढ़ाने के सन्दर्भ में होता है। साथ ही स्थानीय मान गिनती सीखने, गिनती सीखने में मदद के लिए चीजों के समूह बनाने, संख्या वियोजन, संख्या नामों के पैटर्न, संख्याओं को अंकों में लिखना सीखने, क्रमानुगत स्थानों के बीच के सम्बन्धों के पैटर्न को सीखने और संख्याओं की उचित समझ विकसित करने से भी काफी करीब से जुड़ा है। बच्चों में संख्या प्रणाली की सही समझ व संख्याओं की सुगमता तमौ विकसित होती है जब ऊपर लिखे सभी क्षेत्रों के निर्माण में पर्याप्त ध्यान रखा जाए।

05 अप्रैल 2013