असमान भिन्नों को जोड़ने की समझ बनाना

अनुवाद : रिधि अग्रवाल | पुनरीक्षण : कविता तिवारी

विद्यार्थियों की समझ जितनी अच्छी ख़ुद के दिए गए तर्कों से बनती है, उतनी अन्य किसी माध्यम से नहीं बनती। यही कारण है कि गणित की कक्षा में विद्यार्थियों को समय देना चाहिए और ध्यानपूर्वक सहज माहौल बनाना चाहिए ताकि वे स्वयं तर्क करने के लिए सक्षम बन सकें।

बच्चों के सामने यह सवाल था 4/3 + 5/2 = ?

नीचे दिया गया वर्णन उस कक्षा का है, जिसमें इस सवाल को उन विद्यार्थियों द्वारा हल किया गया जो यह तर्क या ज़रूरत समझ चुके थे कि भिन्नों को जोड़ना तब आसान होता है जब वह समान माप की हों, अर्थात उनका ‘हर’ समान हो। हालाँकि इसके लिए वह अभी तक किसी एक ख़ास विधि तक नहीं पहुँच पाए थे। यह वर्णन रूपेश गेसोटा द्वारा लिखा गया है। कुछ समय तक बतौर इंजीनियर काम करने के बाद वे स्कूल में गणित के अध्यापक बन गए। गणित-शिक्षण से जुड़े उनके प्रयोगों को जानने के लिए आप उनकी वेबसाइट www.supportmentor.weebly.com देख सकते हैं। इस वेबसाइट के उप-पेज ‘टीचरʼस ब्लॉग’ पर यह वर्णन सबसे पहले प्रकाशित हुआ था। कक्षा का विवरण रूपेश के शब्दों में है।

सवाल 4/3 + 5/2 को देखते हुए एक विद्यार्थी ने कहा कि ऊपर दी गई भिन्नों में प्रत्येक इकाई भिन्न, यानी कि 1/3 और 1/2, को चतुर्थांश (Quarter) में विभाजित कर देना चाहिए। सम्भवत:, इसका कारण यह है कि दोनों मात्राओं के चित्रवत निरूपण (जो बोर्ड पर किए गए थे) चतुर्थांश से बड़े लग रहे थे (चतुर्थांश और अर्धांश ऐसी भिन्न हैं जिनसे बच्चे ज़्यादा परिचित होते हैं)। इस सुझाव से सभी विद्यार्थी सहमत थे। इसलिए मैं बिना किसी हिचकिचाहट के आगे बढ़ गया। चित्र कुछ इस प्रकार का था :

Unlike-fractions fig 1
चित्र-1

यह देखकर विद्यार्थियों ने कहा कि हमारे पास कुल 14 चतुर्थांश हैं और साथ में 4 छोटे टुकड़े हैं। जब मैंने उनसे पूछा कि 14 चतुर्थांश में छोटे (हरे) टुकड़ों को कैसे जोड़ें, तो एक ने तर्क दिया कि—

यह पहली बार नहीं था जब मैंने किसी विद्यार्थी को यह विशिष्ट तर्क देते हुए देखा, यानी कि इस बचे हुए टुकड़े को एक-चौथाई का आधा समझने की ग़लती करते हुए देखा (क्या आप समझ पा रहे हैं कि क्यों इतने सारे विद्यार्थी इस तरह से देखते हैं या कहते हैं?)

मैंने पूरी कक्षा से इस दृष्टिकोण पर उनका विचार पूछा। और इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि एक विद्यार्थी को छोड़कर पूरी कक्षा इस बात से सहमत थी।

उस एक छात्रा ने कहा, “अगर दो छोटे हरे टुकड़ों को जोड़ने पर एक चतुर्थांश बनता है तो एक-तिहाई के दो टुकड़ों को जोड़ने पर तीन चतुर्थांश होना चाहिए। लेकिन यह सही नहीं है। इसलिए हरा टुकड़ा चतुर्थांश का आधा नहीं है।”

क्या यह एक ख़ूबसूरत तर्क नहीं है?

मैंने देखा कि सभी विद्यार्थियों को यह बात समझ में नहीं आई थी। इसलिए एक चित्र बनाया गया। इसमें एक पूर्ण को पहले तीन बराबर हिस्सों में बाँटा गया और उसमें से एक-तिहाई को मिटा दिया गया। इस दृश्य ने तुरन्त ही उन्हें दो-तिहाई और तीन-चौथाई के अन्तर को देखने में सक्षम बनाया।

Unlike-fractions fig 2
चित्र-2

तो अब समस्या यह थी कि इस छोटे टुकड़े का माप और नाम क्या है?

बिना ज़्यादा समय लेते हुए एक विद्यार्थी चिल्लाया— तो फिर तीन हरे टुकड़े एक चतुर्थांश बन जाएँगे!

यहाँ मेरा यह स्वीकारना ज़रूरी है कि जब पहली बार मैंने यह दावा सुना तो मुझे लगा कि यह सिर्फ़ एक यादृच्छिक अनुमान है जो किसी दूसरे तर्क के आते ही रद्द कर दिया जाएगा। मैंने इस पर ध्यान नहीं दिया और इस दावे की जाँच भी नहीं की, शायद इसका कारण वह स्वर जिसमें इसे प्रस्तुत किया गया और इसकी प्रकृति (कि दो अगर सही नहीं है, तो तीन होगा फिर) भी थी।

हालाँकि मुझे ख़ुशी है कि कुछ विद्यार्थियों ने इस बात को गम्भीरता से लिया और वह इस दावे से सिर्फ़ सहमत ही नहीं हुए, बल्कि इस चित्र की मदद से इसे सिद्ध भी किया।

Unlike-fractions fig 3
चित्र – 3

क्या यह बहुत ख़ूबसूरत बात नहीं है? 🙂

आख़िर में, मेरे थोड़ा और टटोलने पर उन्होंने इस हरे टुकड़े का नाम भी बता दिया।

तो अब हम यह जानते थे कि तीन एक-तिहाई टुकड़े चार एक-चौथाई (चतुर्थांश) टुकड़ों के बराबर हैं और बचे हुए एक-तिहाई टुकड़े में भी एक चतुर्थांश है, तो अब एक ही हरा टुकड़ा बचा है।

इस पर एक विद्यार्थी ने सुझाव दिया— तो चलो अब हम हर एक चतुर्थांश को इस हरे टुकड़े के रूप में दर्शाएँ क्योंकि हमें पता है कि 3 हरे टुकड़े मिलकर एक चतुर्थांश बनाते हैं।

मैंने विद्यार्थियों की स्वीकृति के लिए कक्षा की ओर देखा। कुछ विद्यार्थियों को एक बार फिर से समझाने की ज़रूरत पड़ी और जल्द ही सभी विद्यार्थी समान स्तर पर आ गए।

अन्त में उन्होंने दिए गए सवाल 4/3 + 5/2 को इस रूप में परिवर्तित किया

4 एक-तिहाई + 5 अर्धांश —> 16 बारहांश + 30 बारहांश = 46 बारहांश

आपने ध्यान दिया होगा कि विद्यार्थियों ने ‘समान हर’ लाने के लिए ‘अंश’ और ‘हर’ को एक ही संख्या से गुणा नहीं किया। न तो उन्होंने लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) लिया, और न ही उन्होंने तिर्यक गुणा किया।

तो, आपकी क्या राय है इस विधि के बारे में?

पुनश्च : यह सभी विद्यार्थी वंचित वर्ग से हैं तथा मराठी माध्यम के नगरपालिका स्कूलों में पढ़ते हैं। अगर आप इस गणित संवर्धन कार्यक्रम के बारे में और जानना चाहते हैं या फिर मदद करना चाहते हैं, तो वेबसाइट पर जाएँ।

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