शिक्षण मापन का
कई कारणों से मापन का पाठ्यचर्या में एक विशिष्ट स्थान होता है। मानव जीवन की रोजमर्रा की महत्त्वपूर्ण गतिविधि होने के कारण घर व अन्य जगहों पर अलग-अलग परिस्थितियों में बच्चों का मापन से स्वाभाविक तौर पर सामना होता है।
संसाधन खण्ड में शिक्षकों के लिए बहुत सारी उपयोगी सामग्री है, जैसे कि सरल और आसानी से की जा सकने वाली गतिविधियाँ, विचार, पोस्टर और वर्कशीट।
कई कारणों से मापन का पाठ्यचर्या में एक विशिष्ट स्थान होता है। मानव जीवन की रोजमर्रा की महत्त्वपूर्ण गतिविधि होने के कारण घर व अन्य जगहों पर अलग-अलग परिस्थितियों में बच्चों का मापन से स्वाभाविक तौर पर सामना होता है।
पेज 1 और 2 विद्यार्थियों के लिए वर्कशीट हैं, जबकि पेज 3 और 4 में सुगमकर्ता के लिए दिशानिर्देश हैं। इस बार हम डॉट शीटस् (या चौकोर जाली वाले काग़ज़) का उपयोग करके दिए गए परिमाप या दिए गए क्षेत्रफल के हिसाब से आकृतियों की पड़ताल करेंगे।
क्षेत्रफल और परिमाप मापन के वे रूप हैं जो आमतौर पर रोज़मर्रा की कई गतिविधियों में इस्तेमाल होते हैं। विशेष तौर पर क्षेत्रफल बहुत ही सहज तरीक़े से हमारे रोज़मर्रा के कार्यों में शामिल होता है। जैसे कि किसी बरतन को ढँकने के लिए किसी प्लेट का चयन करते समय, किसी मेज़ विशेष के लिए इस्तेमाल होने वाले मेज़पोश के रूप में, एक किताब पर कवर लगाने के लिए काग़ज़ की किसी शीट के रूप में आदि। विशिष्ट शब्दों को जाने बिना भी बच्चे आमतौर पर ऐसे निर्णय लेते हैं जिनमें क्षेत्रफल की समझ सहज रूप से निहित होती है। ऐसे में एक सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि हम किसी भी जगह की सटीक माप क्यों और किन परिस्थितियों में लेना चाहते हैं? वास्तविक जीवन में इनके इस्तेमाल के माध्यम से इस बात को बार-बार बताने की ज़रूरत है।
फैक्ट फैमिली 3 संख्याओं का समूह (a, b, c) है, जहाँ a + b = c
जनवरी, 2025 में एट राइट एंगल्स के दो सम्पादकों ने अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन के भोपाल और दमोह स्थित ज़िला संस्थानों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने उन स्कूलों में भी समय बिताया जिनसे फ़ाउण्डेशन के स्रोत व्यक्ति नियमित रूप से जुड़े हुए हैं। यह पुलआउट, उस यात्रा में शामिल रहीं पद्मप्रिया शिराली द्वारा किए गए अवलोकनों का विस्तार है।
इस अंक के विशेष खण्ड में, हमने गणित दिवस मनाने के कारण और तरीक़ों पर विचार किया है।
बहुत-से बच्चों के लिए इबारती सवाल किसी अवरोध की तरह होते हैं। इनमें वे बच्चे भी शामिल हैं जो संक्रियात्मक (संक्रियाओं का इस्तेमाल कर गणना करना) और प्रक्रियात्मक कौशलों में निपुण होते हैं। कई बच्चे संकेत शब्दों जैसे कुल मिलाकर, अन्तर, जोड़ इत्यादि की तलाश के आधार पर इबारती सवालों को हल करने का तरीक़ा विकसित कर लेते हैं। लेकिन इस तरीके का महत्त्व बहुत ही सीमित होता है। सवाल हल करने के लिए कौन-सी संक्रिया इस्तेमाल करनी है यह जानने के लिए ऐसे बच्चे आमतौर पर अनुमान का सहारा लेते हैं। इबारती सवालों से सामना होने पर ऐसे बच्चे गणित को लेकर और भी ज्यादा चिन्ता का अनुभव करते हैं। ऐसा क्यों है?
गणित पैटर्न्स का अध्ययन है। आमतौर पर यह अध्ययन सं ख्याओंया ज्यामिति के विषय से जड़ा होता है लेकिन कई चीज़ों व स्थानों में भी पैटर्न का अध्ययन किया जाता है। पैटर्न्स ख़बूसरत होते हैं और हमारा ध्यानखींचते हैं। हम इन्हें अपने आस-पास बनने वाली इमारतों, कपड़ों या अन्य चीज़ों में ढूँढ़ लेते हैं।
अधिकतर बच्चे किसी किराना या सब्ज़ी की दकान पर ख़रीददारी करते वक़्त रुपए-पैसों का उपयोग देखते हैं। हालाँकि पूरे देश में और अलग–अलग प्रकार के लेन-दन में डिजिटल भगतान (पेमेंट) का उपयोग बढ़ा है, फिर भी मुद्रा (सिक्के और नोट) कई तरह के भगतानोे के लिए उपयोग की जाती है, जैसेकि घरेल सहायकों, जूता साइकिल आदि सधुारने वालों को दनेे में, फ़ुटपाथ से की गई ख़रीददारी में, वेंडिं ग मशीनों से समान लेने आदि द्वारा दी जाने वाली सेवाओ में । इसके अलावा, बहुत-से बजु रु्ग अभी भी रुपए-पैसे में लेन-दन करने में ही अधिक सहज महसस करते हैं |
पीछे दिए गए पोस्टर के मुताबिक पतं गें 11 प्रकार (समचर्तुभर्तुजु के अलावा) की होती हैं।
यह पोस्टर आपके विद्यार्थियों को पं तग के इन 11 प्रकारों से दोस्ती करने में मदद करेगा । विद्यार्थियों को इसका अध्ययन करने और K1, K2… K11 में से प्रत्येक पतं ग के गणुों को खोजने के लिए समय दें। कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु नीचे दिए गए हैं। चर्चा के दौरान विद्यार्थी निश्चित रूप से इन या अन्य बिन्दुओ्दु के बारे में बताएँगे, अगर वे नहीं बताते हैं, तो अपने विवेक के अनसार इन्हें साझा करें।
अभी तक पलआउट सेक्शन की सामग्री अधिकां शतः विषय आधारित और गणितीय गतिविधियों तथा शिक्षण पद्धति पर केन्द्रित रही है। यह पलआउट गणित को विज्ञान की अवधारणाओ के साथ एकीकृत करने का एक प्रयास है ताकि जीने के जवाबदेह तरीक़े विकसित किए जा सकें। यहाँ चना गया विषय – तापमान – उच्च प्राथमिक, कक्षा-6 के लिए उपयक्त है। इसका उद्शदे्य है तापमान की अवधारणा और इसे प्रभावित करने वाले कारकों को समझना, तापमान मापने के तरीक़ों पर चर्चा करना और प्रयोग करना तथा हमारे दैनिक जीवन से तापमान के सम्बन्ध पर ग़ौर करना ।
हम कब यह कह सकते हैं कि किसी विद्यार्थी ने किसी अमक अु वधारणा में अच्छी-ख़ासी महारत हासिल कर ली है? यह ज़रूरी नहीं है कि किसी याद की हुई प्रक्रिया या अभ्यास की गई कलन विधि को दोहराना प्रवीण होने का सं के त हो । हमें ऐसी स्थितियों और सन्दर्भों में किसी अवधारणा को लाग करने की क्षमता को पहचानना होता है जहाँ वह अवधारणा अप्रत्यक्ष रूप से अन्तर्निहित हो ।
हम ऐसे लेखों का स्वागत करते हैं जो गणित के सीखने के अनुभव को बढ़ाते हैं, विशेषकर 6-14 वर्ष की आयु वर्ग के विद्यार्थियों के लिए।
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