दिशा-निर्देश

एट राइट एंगल्स प्रारम्भिक गणित और गणितीय शिक्षा से सम्बन्धित मुद्दों पर पूर्णत: केन्द्रित पत्रिका है। इसलिए लेखों का प्रयास होना चाहिए कि वे गणित के आम मिथकों, धारणाओं और भ्रान्तियों से परे हों।

लेखों के लिए दिशा-निर्देश

विषय एवं थीम के लिए सुझाव

  • स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा, 2023 (NCF-SE 2023) में उल्लेखित विषय और थीम को विस्तारपूर्वक समझा सकें और दर्शा सकें।
  • ख़ासकर NCF-SE 2023 में चर्चित चुनौतियों को सम्बोधित करते हों।
  • गणितीय इतिहास या गणितीय सोच के इतिहास का प्रमाणित विवरण हों।
  • विद्यार्थियों को रिवीजन और अभ्यास में तल्लीन रखने के लिए नवाचारी वर्कशीट या तरीक़ों को शामिल कर सकें।
  • बच्चों के सन्दर्भ में प्रासंगिक, गणित का रोज़मर्रा जीवन में उपयोग का वर्णन कर सकें।
  • अन्तःविषय गतिविधियों और परियोजनाओं (प्रोजेक्ट) का वर्णन कर सकें।
  • पाठ्यक्रम से जुड़ी पहेलियों और खेलों की समीक्षा कर सकें।
  • ऑनलाइन रिसोर्स सहित प्रासंगिक सामग्री के चयन पर मार्गदर्शन कर सकें।
  • टीचिंग लर्निंग मटेरियल (टीएलएम) की समीक्षा कर सकें या गणित की कक्षा में स्थानीय सन्दर्भ और स्थानीय टीएलएम का उपयोग कैसे करें इसके बारे में बता सकें।
  • बुनियादी संख्या ज्ञान के साथ-साथ गणनात्मक सोच के लिए शैक्षणिक रणनीतियाँ विकसित कर सकें।
  • विभिन्‍न शैक्षणिक पद्धतियों को लागू करने में शिक्षकों की सहायता कर सकें।
  • विद्यार्थियों में अवधारणात्मक समझ की खाई को पाटने में सहायता करने के लिए सामग्री प्रदान कर सकें।
  • आकलन में आने वाली परेशानियों का समाधान कर सकें।
  • गणित सीखने के दौरान होने वाली ग़लतफ़हमियों को पहचानने और समझने के लिए उपाय सुझा सकें।
  • समस्याओं की सूची, उनके हल पर चर्चा एवं समस्या–समाधान की रणनीतियों सहित दे सकें, जो कि सामान्यतौर पर पाठयपुस्तकों में नहीं मिलती।
  • बड़े लेखों के अलावा हम छोटे लेखों का भी स्वागत करते हैं जिनमें विविध तरह की रोचक सामग्री शामिल हो। जैसे किसी किताब या गणित के सॉफ्टवेयर की समीक्षा या गणितीय थीम पर आधारित यूट्यूब की कोई क्लिप। ‘प्रूफ़ विदाउट वर्ड्स’ (‘proofs without words’), गणितीय अन्तर्विरोध (mathematical paradoxes), ‘असिद्धीकरण’ (‘false proofs’) पर आधारित लेख हो सकते हैं। गणितीय विषयों पर आधारित कविता, कार्टून या तस्वीरों (photographs) जैसी रचनात्मक अभिव्यक्तियों को शामिल करते लेख हो सकते हैं। आप किसी गणितज्ञ से जुड़े क़िस्से या ‘हस्तशिल्प में गणित, फ़िल्मों में गणित’ जैसे रोचक विषयों पर भी लेख भेज सकते हैं।

लेख atrightangles.editor@apu.edu.in पर भेजें।

लेखों को स्वीकार करने की नीति

एट राइट एंगल्स प्रारम्भिक गणित और गणितीय शिक्षा से सम्बन्धित मुद्दों पर पूर्णत: केन्द्रित पत्रिका है। इसलिए लेखों का प्रयास होना चाहिए कि वे गणित के आम मिथकों, धारणाओं और भ्रान्तियों से परे हों।

पत्रिका में कहीं और से नक़ल या चोरी करके भेजे गए लेखों के लिए बिल्कुल भी जगह नहीं है। लेखक द्वारा लेख को प्रकाशन के लिए भेजे जाने पर माना जाता है कि लेखक यह घोषित करता है कि यह मौलिक है और प्रकाशन के लिए इस पर किसी भी तरह का कानूनी प्रतिबन्ध नहीं है (जैसे किसी अन्य का कॉपीराइट स्वामित्व)। लेख में जहाँ भी उपयुक्त हो वहाँ प्रासंगिक सन्दर्भ और स्रोतों का उल्लेख किया जाना चाहिए।

एट राइट एंगल्स पत्रिका अन्य भारतीय भाषाओं में भी अनूदित होती है। इसलिए, अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी को पत्रिका में प्रकाशित सभी लेखों का अन्य भाषाओं में अनुवाद और प्रसार करने का अधिकार होगा।

यदि भेजा जा रहा लेख पहले कहीं और प्रकाशित हो चुका है, तो लेखक से अनुरोध है कि वे पत्रिका में पुन: प्रकाशन के लिए पिछले प्रकाशक से अनुमति प्राप्त करें और लेख के अन्‍त में ‘लेखक की टिप्पणी’ (Author’s Note) के रूप में इसका उल्लेख करें। यह भी अपेक्षित है कि लेखक हमारे रिकॉर्ड के लिए उस अनुमति पत्र की एक प्रति हमें भेजें। इसी तरह, यदि लेखक अपना लेख किसी अन्य स्थान पर पुन: प्रकाशित करने के लिए भेज रहे हैं, तो उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे सुनिश्चित करें कि उसमें एट राइट एंगल्स को उचित श्रेय (credit) दिया गया है।

एट राइट एंगल्स में विविध तरह के लेखों का स्वागत है। ऐसे लेख जो गुणवत्ता की दृष्टि से अच्‍छे हैं लेकिन इस पत्रिका में प्रकाशन के लिए उपयुक्त नहीं हैं, उनका उपयोग लेखक की सहमति से यूनिवर्सिटी की अन्य पत्रिकाओं में किया जा सकता है।

अगर आप एट राइट एंगल्‍स के लिए लिख रहे हैं तो कृपया इन दिशा-निर्देशों पर ध्‍यान दें :

  1. रोचक परिचय : शुरुआत से ही पाठक का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से पठनीय और रोचक शैली में लिखें। लेख के पहले पैराग्राफ़ से ही स्पष्ट हो जाना चाहिए कि लेख किस विषय के बारे में है। उदाहरण के तौर पर, शुरुआती पैराग्राफ़ एक अप्रत्याशित निष्कर्ष हो सकता है, एक चुनौती हो सकती है, एक मज़ेदार सवाल के साथ चित्र हो सकता है या एक प्रासंगिक क़िस्सा हो सकता है। ख़ासतौर से ये आगे पढ़ते जाने की रुचि पैदा करने वाला होना चाहिए।
  2. लुभावना शीर्षक : लेख का शीर्षक एक उपयुक्त और लुभावने वाक्यांश से दिया जाए, जिसमें लेख की भावना और सत्व झलके।
  3. शैली : ‘प्रमेय-प्रमाण’ (theorem-proof) प्रारूप से बचें। इसके बजाय, प्रमाणों को लेख में अनौपचारिक तरीक़े से शामिल करें। वास्तव में, यह बताने का प्रयास करें कि उस प्रमाण तक कैसे पहुँचा जा सकता है या उसकी खोज कैसे की जा सकती है।
  4. सन्तुलन : लम्बी-लम्बी गणनाओं को दर्शाने से बचें। बहुत अधिक विवरण देने और छिपी हुई (अ-उल्लेखित) गणनाओं पर निर्भर चरण को छोड़कर अगले चरण पर चले जाने, के बीच सन्तुलन बनाकर रखें।
  5. सुलभ भाषा : उन विशिष्ट शब्दावली और संकेत शब्दों के उपयोग को टालें जिनसे सिर्फ़ विशेषज्ञ ही परिचित होते हैं। यदि तकनीकी शब्दों का उपयोग ज़रूरी हो तो उन्हें परिभाषित कर दें।
  6. चित्रों का प्रयोग : जहाँ सम्भव हो वहाँ ऐसे रेखाचित्र या फ़ोटो दें जिनमें गणितीय विचार का सार हो। यदि कोई चित्र या रेखाचित्र गणित की किसी अवधारणा को स्पष्ट करते हों तो उन्हें अवश्‍य रखें।
  7. संक्षिप्त सन्दर्भ : संक्षिप्त अनुशंसाओं के साथ सन्दर्भों (reference) की एक संक्षिप्त सूची दें।
  8. अभ्यास और सवाल : लेख की शुरुआत या अन्त में विचार करने के लिए कुछ सवाल और कुछ अभ्यास उपलब्ध कराएँ।
  9. उद्धरण प्रारूप (Citation Format) : लेख के अन्त में, स्रोतों और सन्दर्भों को जिस क्रम में वे आएँ हैं उस ही क्रम में उन्हें उद्धृत (cite) करें। फ़ुटनोट से बचें। यदि फ़ुटनोट की आवश्यकता है, तो उनका क्रम डालकर अलग से लिखें।
  10. संक्षिप्ताक्षर और परिवर्णी शब्द (Abbreviations and Acronyms) : लेख में जब पहली बार किसी शब्द का लघु रूप (यानी संक्षिप्ताक्षर) और कई शब्दों के शुरुआती अक्षर का प्रचलित लघु रूप (यानी परिवर्णी) आए तब वहीं उनका अर्थ बता दें। ऐसे सभी शब्दों की एक शब्दावली बनाकर उसे लेख के अन्त में प्रस्तुत करें।
  11. दृश्य तत्वों (Visual elements) का नामांकन : लेख में शामिल सभी चित्रों, फोटो और आकृतियों (figures) को नामांकित करें और उन पर संख्या डालें। उन्हें स्पष्ट निर्देशों के साथ ई-मेल में अलग से संलग्न करें। (कृपया ध्यान दें : फोटो या स्कैन की गई छवियों का रिज़ॉल्यूशन कम-से-कम 300 dpi होना चाहिए)।
  12. चित्रों का विवरण स्पष्टता से दें : तस्वीरों, चित्रों, डायग्राम्स और तालिकाओं का उल्लेख उनके उचित क्रमांक से करें। ‘यहाँ’, ‘वहाँ’, ‘दाईं ओर’, ‘बाईं ओर’, ‘ऊपर’, ‘नीचे’ इस तरह से उल्‍लेख करने से परहेज़ करें।
  13. लेखक का परिचय : लेखक अपनी हाई रिज्योलूशन फ़ोटो भी भेजें। साथ ही, अपने बारे में संक्षिप्त में (जो 50 शब्दों से ज़्यादा का नहीं हो) जानकारी भेजें, जो पाठकों को आपके अनुभव व विशेष योग्यता वाले कार्यक्षेत्र के बारे में बताती हो।
  14. ब्रिटिश वर्तनी (Spellings) : ब्रिटिश वर्तनी का पालन करें। जैसे organise लिखें न कि organize; colour लिखें न कि color, neighbour लिखें न कि neighbor आदि।
  15. लेख भेजने का प्रारूप : लेखों को MS Word या Latex में लिखकर ही भेजें।